प्रखर श्रीवास्तव की पुस्तक ‘‘हे राम’’ के बारे में
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हमें किसी नेता,दल और विचारधारा को खुले
मन-मिजाज से देखना -पढ़ना चाहिए।
सारे तथ्य हमारे सामने हों तो हमें कोई फैसला करने में
सुविधा होती है।
क्योंकि न तो कोई व्यक्ति पूर्ण है और न कोई संस्था
या विचारधारा-- न मैं, न आप और न वह।
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मेरी धारणा यह बनी है कि अपवादों को छोड़कर हमारे अधिकतर
इतिहासकारों ने जितना जाहिर किया है,उससे अधिक छिपाया है।
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1--पहले मैं कहा करता था कि इस देश के नेताओं
के चाल,चरित्र और चिंतन को बाहर-भीतर से जानना हो तो एम.ओ.मथाई(जवाहरलाल नेहरू के निजी सचिव)की दोनों किताबें पढ़िए।
2--बिहार के नेताओं को,जो स्वतंत्रता सेनानी भी थे, जानना हो तो अय्यर कमीशन की रपट पढ़िए।
3.--अब मैं एक और किताब उसमें जोड़ता हूं।
नई पीढ़ी को चाहिए कि वह प्रखर श्रीवास्तव की हाल में आई पुस्तक
‘हे राम’ जरूर पढ़े।
प्रखर श्रीवास्तव ने अद्भुत किताब लिखी है।पुस्तक हो तो ऐसी !
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----सुरेंद्र किशोर
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1 मार्च 26