मंगलवार, 15 सितंबर 2026

 सामान्य नागरिक संहिता 

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बताशे के लिए मंदिर तोड़ने की कोशिश जारी

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मुगल काल की पुनरावृति को रोकने की 

चेष्टा  है समान नागरिक संहिता यानी यू.सी.सी.

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सुरेंद्र किशोर

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 21 प्रदेशों में यू.सी.सी.लागू करके औरंगजेब शैली की मुगल सत्ता की यहां पुनरावृति को रोकने की कोशिश कर रहे हैं।

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दरअसल मुगल काल की वापसी की आशंका को रोकने के लिए भारत में

यथाशीघ्र सामान्य नागरिक संहिता लागू करना अत्यंत अनिवार्य हो गया है।पर, मुझे नहीं मालूम कि आज महाराणा प्रताप-छत्रपति शिवाजी अंततः मजबूत पडं़ेगे या मान सिंह--जयचंद !

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 वोट लोलुप नेता इस बात को नजरअंदाज कर रहे हैं कि भारतीय  संविधान के अनुच्छेद-44 में सामान्य नागरिक संहिता का प्रावधान है।इस संविधान को संघियों-भाजपाइयों ने नहीं बनाया है,बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों ने बनाया है जिनमें कांगे्रेसियों का बहुमत था।क्या वे भी साम्प्रदायिक थे ?

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पर,आज के जो वोट लोलुप तथाकथित सेक्युलर नेता यू.सी.सी.का विरोध कर रहे हैं, वे दरअसल बताशे के लिए मंदिर तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, वे जाने-अनजाने जेहादियों की मनोकामना पूरी करने में मददगार बन रहे हैं।

ऐसे में आम गैर मुस्लिम जनता को यह चुनना है कि वे महाराणा प्रताप -छत्रपति शिवाजी बनेंगे या मान सिंह-जयचंद का अनुसरण करेंगे ?

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डा.जाकिर नाइक कहते हैं कि भारत में अब हिन्दुओं की आबादी सिर्फ 60 प्रतिशत रह गई है।(विश्वास न हो तो यूट्यूब खोल कर देख लीजिए।)

डा.नाइक ने एक बार कहा था कि हम केरल से ‘‘अपना काम’’ शुरू करेंगे।केरलम में आज वही सब हो रहा है।केरलम से आ रही खबरों पर खुले दिमाग से गौर करिए।

डा.नाइक मलेशिया में है।(बोफोर्स दलाल क्वोत्रोचि भी भाग कर मलेशिया ही गया था।)

यह संयोग नहीं कि राहुल-प्रियंका मलेशिया के प्रधान मंत्री से दिल्ली में मिले।

   मौलाना रशीदी कहते हैं कि मुसलमानों की आबादी भारत में अब 40 प्रतिशत हो चुकी है।

 सरकारी आंकड़ा बताता है कि भारत में हिन्दुओं की जनसंख्या की वृद्धि दर 16 दशमलव 8 प्रतिशत है जबकि मुसलमानों की आबादी की वृद्धि दर 24 दशमलव 6 प्रतिशत।(क्योंकि मुसलमानों को चार वीबियों और अनगिनत बच्चों की इस देश में छूट मिली हुई है।जबकि हिन्दू सिर्फ एक ही शादी कर सकते हैं।)

यह इसलिए संभव है क्योंकि मुसलमानों के लिए अलग कानून हैं।(ब्रिटेन सहित यूरोप के कई देश भी ऐसी ही समस्या से जूझ रहे हैं।)

जेहादी लोग अब जल्दीबाजी में हैं।वे भारत सहित पूरी दुनिया पर कब्जा चाहते हैं।

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आबादी बढ़ाने के अलावा,लव जेहाद,जबरन या लोभ देकर धर्म परिवर्तन या हिन्दू बच्चों के अपहरण व घुसपैठ की घटनाओं की खबरें आती रहती हैं।

उसके साथ ही भारत में प्रतिबंधित जेहादी संगठन पाॅपुलर फं्रट आॅफ इंडिया ने घोषणा कर रखी है कि वह सन 2047 तक हथियारों के बल पर भारत को मुस्लिम देश बना देगा।इसके लिए वह हथियार जुटा रहा है।

पी.एफ.आई.के राजनीतिक संगठन एस.डी.पी.आई.से कांग्रेस का ठोस

गठबंधन है।इनकी बनवाई हुई केरलम में मिलीजुली सरकार है।

हाल में केरलम से एक वीडियो आया है जिसमें जेहादी मुस्लिमों की भीड़ नारा लगा रही है--हिन्दुओं को मार कर मंदिरों के पास टांग देंगे।

उधर ब्रिटेन में सड़कों पर निकल मुस्लिमों की भीड़ नारा लगाती  है--‘‘ईसाइयों,ब्रिटेन छोड़ो।’’घर तर के बड़ तर, आउर बड़ तर के घर तर ? 

केरलम सहित भारत के जिन- जिन हिस्सों में मुस्लिमों की आबादी बढ़ रही है,वहां से गैर मुसलमानों को या तो भगाया जा रहा है या उनका जबरन धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है।या हत्या कर दी जा रही है।

असदुद्दीन कहते हैं--जब मोदी पहाड़ पर चले जाएंगे,योगी मठ में चले जाएंगे तो तुम्हें (यानी हिन्दुओं को )कौन बचाएगा ?

उनका छोटा भाई कह चुका है--15 मिनट के लिए पुलिस हटा लो तो दिखा देंगे कि तुम कितने हो और हम कितने हैं। 

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ऐसे में मोदी सरकार और उसके गृह मंत्री अमित शाह गैर मुसलमानों के खास कर हिन्दुओं के रक्षक के रूप में सामने आए हैं।मोदी-शाह को मालूम है कि 

‘‘अब नहीं तो कभी नहीं।बाद में काफी देर हो चुकी होगी !!’’

यू.सी.सी.लागू करने में देर करने पर भारत में देर-सबेर वैसा ही शासन कायम हो जाएगा जैसा पाक और बांग्ला देश में है।तब वे भी नहीं बचेंगे जो आज जयचंद और मान सिंह की भूमिका में हैं।पाक में न तो जोगेंद्र मंडल रह सके थे न मशहूर कम्युनिस्ट सज्जाद जहीर।जोगेंद्र मंडल ने पूर्वी पाकिस्तान से जिन दलितों को भारत आने से रोक लिया था,उन्हें पहले पाक व बाद में बंाग्ला देश के जेहादियों ने जबरन धर्म परिवर्तन करा कर या मार -मार कर समाप्त कर दिया।जोगेंद्र मंडल और सज्जाद जहीर भी जान बचा कर पाक से भारत आ गये थे।

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पाकिस्तान में सन 1947 में हिन्दुओं की जनसंख्या 14 प्रतिशत थी जो अब 1 दशमलव 61 प्रतिशत है।

1947 में बांग्ला देश में हिन्दुओं की जनसंख्या 28 प्रतिशत थी जो आज 7 दशमलव 9 प्रतिशत रह गई है।

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यदि भारत में कांग्रेस नीत सरकार फिर से आ गई तो इस देश को पाकिस्तान बनने से कोई रोक नहीं सकता।

भुट्टो का नारा था--हम भारत को हजार घाव देंगे।

1947 में जिन्ना वादियों का नारा था-‘‘हंस के लिया पाकिस्तान,लड़ के लेंगे हिन्दुस्तान।’’

3 करोड़ मुसलमानों को बंटवारे के समय भारत में ही रोक कर नेहरू ने एक और पाक बनाने का रास्ता साफ कर दिया था।

संघ प्रमुख मोहन भागवत को बयान आया है--‘‘यू.जी.सी.सिर्फ प्रस्ताव है,न कानून बना, न बनेगा।’’

पर,यू.जी.सी.के विरोध के नाम पर बांकी पुर विधान सभा के लोगों ने एक सी.ए.ए.-एन.आर.आर.विरोधी प्रशांत किशोर को चुनाव जितवा दिया।

  क्या आप समझते हैं कि सी.ए.ए.-एन.आर.सी.विरोध का निहितार्थ क्या है ?

निहितार्थ बहुत खतरनाक है।

यह पी.एफ.आई.एजेंडा था शाहीन बाग धरने (2019)में परिलक्षित हुआ।वहां दंगा करवाया गया--53 लोगों की जान गई थीं।

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भारत के कई बड़े- बड़े सेक्युलर नेताओं ने भारत को लूट कर विदेशों में घर-दुकान-माॅल आदि खरीद लिये हैं।वे वहां जाकर बस जाएंगे।पर आम गैर मुस्लिम आबादी खासकर हिन्दुओं का क्या हाल होगा ?

आज बंटोगे तो कल कटोगे !!!कहीं भागने की जगह भी नहीं मिलेगी।

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     15 सितंबर 26


रविवार, 13 सितंबर 2026

 मेरा रोज का नाश्ता है आर्गेनिक सत्तू

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बचपन में हम हलवाहे के भोजन के लिए 

खेत में सत्तू लेकर जाते थे।

रोज सत्तू खाकर भी हलवाले हट्््ठे-कट्ठे रहते थे।

पर,तब का सत्तू मिलावट रहित होता था।

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सुरेंद्र किशोर

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हर दिन की तरह आज भी मैंने नाश्ते में मिलावट रहित आर्गेनिक सत्तू खाया और अखबार पढ़ने बैठा।

दैनिक हिदुस्तान की एक खबर पर नजर टिक गई--

‘‘ब्रिक्स सम्मेलन में बिहार का सत्तू और मखाना परोसा गया।’’

मुख्य मंत्री सम्राट चैधरी ने धन्यवाद देते हुए लिखा कि प्रधान मंत्री ने 

लोकल टू ग्लोबल के संकल्प को साकार किया है।

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मेरी एक ही आशंका है--जब सत्तू बड़े पैमाने पर विदेश जाने लगेगा तो उस पर मिलावट खोरों की राक्षसी प्रवृति हावी न हो जाए !

यदि वैसा हुआ तो 

इस देश की उल्टे बदनामी होगी।

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मुझे शुद्ध सत्तू का स्वाद अच्छी तरह याद है जो अपने गांव में मैंने पचास-साठ के दशकों में खाया था।

  इन दिनों मैं यहां जो सत्तू मंगवाता हूं,वह उसी ओरिजनल स्वाद का है।यह मेरा रोज का नश्ता है--हां,उसमें कुछ मूंगफली-किशमिश मिला देता हूं।

महंगा पड़ता है यानी 350 रुपए प्रति किलोग्राम।पर,स्वास्थ्य के लिए सही है।

  सत्तू की कंपनी का नाम मत पूछिएगा अन्यथा मुझे उसका प्रचारक मान लिया जाएगा।हां,जिन्हें इतना अधिक महंगा सत्तू फिर भी खाना है,वे मुझसे फोन पर पूछ सकते हैं।

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12 सितंबर 26

 

    

 


 मुख्य मंत्री सम्राट चैधरी से एक

 छोटी मुलाकात में बड़ी बातें

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सुरेंद्र किशोर

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कुछ समय पहले एक सामाजिक समारोह में मुख्य मंत्री सम्राट चैधरी 

जी से मुलाकात हुई थी।

उन्होंने मुझसे कहा था--‘‘किसी दिन हम लोग साथ चाय पिएं।’’

उनके आमंत्रण की शालीन शैली मुझे पसंद आई।

वह प्रतीक्षित मुलाकात कल अणे मार्ग स्थित उनके आवास में हुई।

मेरे साथ मशहूर पत्रकार कन्हैया भेलाड़ी भी थे।या यूं कहिए कि मैं कन्हैया जी के साथ था।

      सम्राट जी से मेरी यह पहली बातचीत थी।मैं भी उन्हें समझना चाहता था।

इस संक्षिप्त मुलाकात में ही मुझे लग गया कि बिघ्न संतोषियों और राजनीतिक विरोधियों की धारणा के विपरीत नये मुख्य मंत्री को न सिर्फ राज्य की मूल समस्याओं की समझ हैं बल्कि उनके समाधान का रोड मैप भी उनके पास है जिस पर वे काम कर रहे हैं।

  मुलाकात के दौरान ही मैंने पाया मुख्य मंत्री ने सामने आई दो समस्याओं को न सिर्फ  उन्होंने तंुरत समझ लिया बल्कि उनका त्वरित समाधान भी कर दिया।

   बातचीत के दौरान सेटेलाइट टाउनशिप ,नये उद्योगों के लिए

जमीन की उपलब्धता और राज्य के कम से कम पांच बड़े अस्पतालों के कायापलट कोे लेकर मुख्य मंत्री ने सकारात्मक व उत्साह बर्धक बातें बताईं।

  इस तरह की कुछ अन्य बातंे भी हुईं।

 एक मुख्य मंत्री की बड़ी जिम्मेदारियों और अत्यंत व्यस्तताओं को ध्यान में रखते हुए हमने ही बातचीत को अधिक लंबा नहीं किया।

अगली किसी मुलाकात का वादा करके हमने उनसे विदा ली।

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और अंत में

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इस मुलाकात के दौरान मुख्य मंत्री जी ने इस छोटी सी बात का भी ध्यान रखा कि हमारा वाहन बाहर न रहकर अणे मार्ग के परिसर के भीतर रहे ताकि हमें वाहन तक पहुंचने के लिए पैदल न चलना पड़े।  

   

 


बुधवार, 9 सितंबर 2026

 आरक्षण सुधार बनाम आरक्षण बढ़ाओ आंदोलन

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ऐसे संवदेनशील मामलों को लेकर सड़कों पर उतरने 

के बदले इन्हें दोनों पक्ष सुप्रीम कोर्ट को सौंप देें

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सुरंेद्र किशोर

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क्योंकि सड़कों पर उतरने से सामाजिक तनाव बढ़ेगा तो उसका नुकसान 

1990 की तरह आरक्षण विरोधियों को ही अधिक होगा।

क्योंकि आरक्षण सुधार को भी आरक्षण समाप्ति की मांग 

के रूप में ही कुछ लोग पेश करेंगे।

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राजनीतिक कार्यपालिका या संसद इन मामलों में कुछ नहीं कर सकती।

पर,सुप्रीम कोर्ट को संविधान निर्माताओं ने अनुच्छेद-142 के तहत अपार शक्ति जरूर प्रदान कर दी है।यदि सुप्रीम कोर्ट चाहे तो न्याय हित में वह कुछ भी निर्णय कर सकता है।

 (सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर बनाने का आदेश इसी अनुच्छेद का प्रयोग करते हुए दिया था।)

यदि आरक्षण में सुधार करवाना चाहते हैं,उन्हें ऐसी सामाजिक बनावट वाली संसद का इंतजार करना पड़ेगा जो तत्संबंधी अनुच्छेद-340 में जरूरी संशोधन कर सके। 

देश की जो सामाजिक यानी जातीय बुनावट है,उसमें वैसी संसद बनना लगभग असंभव है।

  याद रहे कि अनुच्छेद-340 में सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े का प्रावधान है।आर्थिक दृष्टि से पिछड़ा वाक्यांश जोड़ने के लिए संविधान में संशोधन करना पड़ेगा।

 यह फिलहाल लगभग असंभव काम है।

आरक्षण विरोधी या सुधार पक्षी सड़कों पर आंदोलन जारी रखेंगे तो समाज में आपसी जातीय तनाव बढ़ेगा।उससे यह आशंका पैदा होगी कि अगली बार देश में एक ऐसी मिलीजुली सरकार बन जाएगी जिसमें सपा,राजद,तथा इस तरह के कट्टर आरक्षणपक्षियों व विवादास्पद दलों का दबदबा हो जाएगा।वे अपने साथ दूसरी ‘‘कमजोरियां’’ भी उस सरकार में लाएंगे जैसा कि उनका इतिहास रहा है।

फिर तो माना जाएगा कि सवर्णों ने 1990 के मंडल आरक्षण विरोधी अपने आंदोलन से कोई सबक नहीं सीखा।

 सन 1990 में यदि सवर्णों ने सड़कांे पर उतर कर मंडल आरक्षण का  विरोध नहीं किया होता तो लालू प्रसाद राजनीति में बलशाली नहीं बनते।लालू प्रसाद के मजबूत होने से सवर्णों को क्या लाभ मिला ?

कोई समझदार व्यक्ति नहीं चाहेगा राष्ट्रीय स्तर पर 1990 के बिहार की  पुनरावृति।

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दूसरी ओर, पिछड़ा वर्ग, आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 65 प्रतिशत करने की मांग कर रहा है।इस मांग को पूरा करना किसी सरकार के लिए संभव नहीं है।क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी केस में 50 प्रतिशत आरक्षण की अधिकत्तम सीमा तय कर दी है।

  हालांकि कुछ राज्य अपने जनसांख्यिकी आंकड़ों को आधार बना कर 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण दे रहे हैं।पर ऐसे कुछ अन्य राज्यों के ऐसे मामले अदालत मंे अब भी विचाराधीन हंै।

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इसलिए बेहतर यही होगा कि दोनों पक्ष- यानी आरक्षण सुधारपक्षी व आरक्षण बढ़ाओ पक्षी-व्यापक सामाजिक सद्भाव के हित में ऐसे मामलों को सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ दें।

वहां से जो निर्णय हो उसे, सब मानें।उससे तनाव पैदा नहीं होगा।

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और अंत में

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सन 1990 में जब पिछड़ों के लिए ‘मंडल आरक्षण’ की घोषणा हुई तो सवर्णों के बड़े हिस्से ने खास कर बिहार में उसका जोरदार विरोध किया।उस विरोध का दोगुनी ताकत से प्रतिकार भी हुआ।

उन दिनों मैं सवर्णों से यह कहा करता था-‘‘गज नहीं फाड़ोगे तो थान हारना पड़ेगा।इसलिए आरक्षण का विरोध मत करो।’’

(पूर्व कांग्रेस विधायक हरखू झा मेरी उस बात के गवाह हैं-वे अब भी यदाकदा कहते हैं कि सुरेंद्र जी आरक्षण  विरोधियांे को चेतावनी दे रहे थे।पर कोई सुनने वाला नहीं था।कोई व्यक्ति अब भी हरखू झा को फोन करके इस बात की पुष्टि कर सकते हैं।)वैसे मेरे परिवार के सदस्य भी तब मुझे पागल कहते थे।मैं उनकी नादानी पर हंसता था।  

लोग नहीं माने।नतीजतन मुख्य मंत्री लालू प्रसाद ने संपूर्ण पिछड़ों को जगा कर एकजुट कर दिया।वे राजनीति के महा बलवान बन गये-भले कुछ दिनों के लिए ही सही।

लालू प्रसाद अपनी ही गलतियों के कारण मौजूदा स्थिति को प्राप्त हुए हैं।यदि गलती नहीं करते तो वे अंततः पिछड़ों के मसीहा कहलाते।मैं तब उन्हें लिखकर चेता रहा था।उससे नाराज होकर मुझे नौकरी से निकलवा दिया उन्होंने।पर अब मेरे बारे में लालू जी कहते हैं--‘‘सुरेंदर किशोर संत है,फकीर है, 24 कैरेट का सोना है।’’पर अब पछताए होत का...।

आरक्षण समर्थन से ताकत पाए लालू प्रसाद ने 15 साल तक जैसा शासन चलाया,उससे अधिक नुकसान सवर्णों को ही हुआ।

पर,कुछ लोगों की आदत है कि वे अपनी पिछली गलतियों को दोहराते रहते हैं।आरक्षण समाप्ति या सुधार का आंदोलन उसी गलती का दोहराव है।पर कोई बात नहीं।सुप्रीम कोर्ट का रास्ता उपलब्ध है सबके लिए।

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9 सितंबर 26   


       


मंगलवार, 8 सितंबर 2026

 ‘माही’ नदी से ‘मरीन’ ड्राइव तक-

न सिर्फ नदी का नाम गलत ,बल्कि 

नदी किनारे की सड़क का नाम भी गलत !

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सुरेंद्र किशोर

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बिहार के सारण जिले की मही नदी के तटबंध इस बार टूटे तो

उस नदी का नाम अखबारों में खूब छपा।

पर,मही नदी नहीं, बल्कि माही नदी छपा।

यह अंग्रेजी का असर है।

(ध्यान रहे कि मही नदी मेरे पुश्तैनी गांव से होकर बहती है।

मेरे गांव की जमीन के नक्शे में मही नदी ही लिखा हुआ है।उसकी फोटो काॅपी प्रस्तुत है।)

इसी तरह जेपी गंगा पथ को हम अखबारों के जरिए मरीन ड्राइव जानने लगे हैं।यह गलत अंग्रेजी का असर है।

क्योंकि मरीन का अर्थ समुद्रीय होता है, नदी शब्द से इसका कोई संबंध नहीं।

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एक समय था जब मैं अन्य अनेक पत्र-पत्रिकाओं के साथ-साथ दैनिक नईदुनिया (इन्दौर)के लिए भी बिहार से लिखता था।

एक बार उसके यशस्वी संपादक राजेंद्र माथुर ने मुझे पत्र लिखा।

उन्होंने लिखा कि ‘‘आप बिहार के हर जिला और तहसील शहर के सही नाम लिख कर भेज दें।ज्यादा से ज्यादा चार सौ नाम होंगे।’’

मैंने भेज दिया था।(याद रहे कि नईदुनिया की एक गलती पर पाठकों के औसतन 13 पत्र संपादक को मिलते थे।इसलिए संपादक जागरूक रहते थे।मैं भूल रहा हूं--राजेंद्र यादव या नामवर सिंह--इन्हीं में से किसी ने इन्दौर के इस अखबार को देखकर कहा था कि देश का सबसे अच्छा हिन्दी अखबार इन्दौर से निकलता है।)  

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दरअसल अंग्रेजी न्यूज एजेंसियां जो समाचार नई दुनिया को भेजती थीं,उनमें मुंगेर,कहलगांव और पलामू आदि की अंग्रेजों द्वारा दी गई स्पेलिंग कुछ अजीब होती थीं।उसके देवनागरीकरण में नईदुनिया अक्सर गलती करता था।मैंने उस ओर माथुर साहब उर्फ रज्जू बाबू का ध्यान आकृष्ट किया तो उन्होंने मुझे एक महत्वपूर्ण काम दे दिया था।यह 1981 की बात है।तब मैं दैनिक ‘आज’ के पटना संस्करण में काम करता था।

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8 सितंबर 26



 सास याद रखें कि वे भी कभी बहू थीं।

साथ ही, अपनी दुलरुई बेटी को भी ध्यान में रखिए

जो कहीं पतोहू बन कर गई है।


 यदि 90 प्रतिशत गेहूं के आटे में 10 प्रतिशत उजले पत्थर को पीस कर 

मिला दिया जाए और उसकी रोटियां बनाकर रोज खाया जाए तो 

शरीर पर उन रोटियों का कैसा असर पड़ेगा ?

   --- सुरेंद्र किशोर

(इन दिनों इस तरह की भी मिलावट जारी है।) 

7 सितंबर 26