रविवार, 22 फ़रवरी 2026

   मैं भारतीय पहले, पत्रकार बाद में 

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सुरेंद्र किशोर

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मैं पत्रकार हूं।

लेखक हूं।

किसान भी हूं।

गृहस्थ हूं।

पर,सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मैं इस देश का

नागरिक हूं।

एक नागरिक के रूप में मैं चाहता हूं कि यह देश 

लोकतांत्रिक बना रहे।पर दूसरी ओर देश-विदेश की हिंसक-अंिहंसक शक्तियां इसे इस्लामिक देश बनाने के लिए जी-जान से लगी हुई हैं।

कुछ लोग वोट के लिए और अन्य लोग ‘गजवा ए हिन्द’ के लिए

अपनी- अपनी शैली में प्रयत्नशील हैं।

कई जगह दोनों तत्व जाने-अनजाने एक दूसरे के मददगार

 बन रहे हैं।

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मध्य युग की वापसी की कोशिश को रोकने का मेरा प्रयास है।भले यह

गिलहरी प्रयास है,पर जारी रहेगा।

ताकि, मेरे वंशज को भी सनातन धर्म-संस्कृति का शांतिपूर्वक पालन करने की अनंत काल तक सुविधा उपलब्ध रहे।

इस क्रम में बाकी बातें मेरे लिए कोई महत्वहीन हैं।

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इसी बात को ध्यान में रखते हुए कोई व्यक्ति मेरे लेख या पोस्ट को पढ़े।

मुझसे जो बिलकुल सहमत नहीं हैं,उन्हें मेरा फेसबुक फें्रड बने रहने का कोई औचित्य नहीं है।

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 22 फरवरी 26


 कितने दूरदर्शी थे अटल जी !

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वाजपेयी जी यह जानते थे कि भारत की एक पार्टी 

को बर्बाद करने की क्षमता किस व्यक्ति में है !

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सुरेंद्र किशोर

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   प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जान गए थे कि अमेरिका में गिरफ्तार इसी व्यक्ति में अपनी ही पार्टी को नष्ट करने की पूरी क्षमता है।

वह क्षमता अकेली मेरी पार्टी में नहीं है।भाजपा को परोक्ष मदद चाहिए होगी !

  इसलिए उस व्यक्ति को तब के प्रधान मंत्री वाजपेयी ने अमरीकी सरकार पर अपने प्रभाव का उपयोग करके साफ रिहा करवा दिया।यानी गिरफ्तारी से संबंधित कागज-पत्र भी गायब करवा दिया।हालांकि वहां के अखबार में गिरफ्तारी की यह खबर छपी थी।

अटल जी का पूर्वानुमान सही साबित हो रहा है।

यहां अपनी पार्टी को बर्बाद करने का वह काम वे तेजी से कर रहे हैं।

सन 2015 में डा.सुब्रह्मण्यम स्वामी ने सार्वजनिक रूप से उस ‘‘क्षमतावान’’ व्यक्ति का नाम भी बताया था।

डा.स्वामी का वह बयान,जिसमंे नाम छपा था, 20 जून 2015 के दैनिक भास्कर में छपा था।

उस अखबार की कटिंग मेरे पास है।

पर,मैं नाम नहीं बताऊंगा।

अब आप कल्पना कीजिए कितने दूरदर्शी 

थे अटल जी !!!

अटल जी की मदद से व्यक्ति रिहा नहीं हुआ होता तो उसे अमेरिका के कानून के अनुसार वहां 25 साल की सजा हो गई होती।

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22 फरवरी 26


 देश के बड़े पत्रकार और चिंतक दिलीप मंडल के अनुसार,

‘‘संसद की कार्यवाही में दर्ज है और कोई भी इसे चेक कर सकता है कि इंदिरा गांधी सरकार में कानून और वक्फ मंत्री रहे मोहम्मद यूनुस सलीम ने राज्य सभा में गर्व के साथ विस्तार से बताया था--‘‘हां, न्यायप्रिय बादशाह औरंगजेब ने काशी में विश्वनाथ मंदिर को तोड़ा था।’’

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इतिहासकार इरफान हबीब ने भी कहा है कि ‘‘औरंगजेब ने काशी और मथुरा में मंदिरों को ध्वस्त कर दिया था।’’

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पर,इसके बावजूद मुस्लिम वोटलोलुप राजनीतिक दल,मुस्लिम धार्मिक नेता,वामपंथी इतिहासकार और पथ भटके पत्रकार-बुद्धिजीवी  इन मामलों में लगातार झूठ क्यों बोलते हैं ?

 उनके झूठ बोलने के कारण ही हिन्दू वोट भाजपा कीे ओर जाता रहा है।

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सन 2002 में गोधरा में जेहादियों ने 59 कार सेवकों को जिन्दा जला दिया था।कितने तथाकथित सेक्युलर व भाजपा विरोधी दलों ने उस मानव दहन कांड की सार्वजनिक तौर पर निन्दा की ?

आज भी कितने वैसे लोग बंगाल में प्रस्तावित बाबरी मस्जिद का विरोध कर रहे हैं ?

इसके बावजूद कोई चाहेगा कि भाजपा न बढ़े तो हिन्दू बहुल देश में यह कैसे हो सकता है ?

जबकि भारत के भीतर भी तरह तरह के ‘जेहादी हिंसा’ में इन दिनों बड़ी संख्या में देशी-विदेशी मुस्लिम लगे हुए हैं।ऐसे जेहादियों के खिलाफ कितने भाजपा विरोधी नेताओं के बयान आते हैं ?

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बुधवार, 18 फ़रवरी 2026

 पहले से कुछ हिन्दी अखबार पटना के पास के जेपी गंगा पथ को मरीन ड्राइव लिखते रहे हैं।

अब तो पटना के अंग्रेजी अखबार भी जेपी गंगा पथ को मरीन ड्राइव लिखने लगे हैं।

क्या बिहार सरकार ने जेपी गंगा पथ का नाम बदल कर मरीन ड्राइव कर दिया है ?

क्योंकि मैं यह बात नहीं मान सकता कि अंग्रेजी के पत्रकारों को भी अंग्रेजी मरीन शब्द का हिन्दी अर्थ नहीं मालूम।

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अब क्या पटना के बिस्कोमान टावर का नाम हम अखबार में किसी दिन एफिल टावर पढंेगे ?

 एफिल टावर पेरिस में है।मरीन ड्राइव बंबई में है--जाहिर है समुद्र किनारे।


मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026

    20 लाख किताबों वाली निजी लाइ्रब्रेरी के मालिक 

   को इस साल का पद्म श्री सम्मान

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बेंगलुरु से प्रभाकर मणि तिवारी की एक बहुत ही अच्छी,प्रेरणादायक खबर 

दैनिक भास्कर में छपी है।

खबर के शीर्षक और उप शीर्षक से ही पूरी कहानी आप जान जाएंगे।

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उपलब्धि - कर्नाटका के एन.के.गौड़ा को अनूठे काम के लिए 

(सन 2026 का ) पद्म श्री सम्मान दिया जाएगा

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80 प्रतिशत वेतन किताबों पर खर्च कर बनाई देश की सबसे बड़ी 

निजी लाइब्रेरी 

घर में 20 लाख किताबें , फर्श पर सोते हैं।

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लाइब्रेरी में कुछ किताबें दो से तीन सौ साल पुरानी

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यहां पुराण,उपनिषदों और कुरान,दो से तीन सौ साल पुरानी इतिहास की किताबों के 

अलावा रामायण और महाभारत के तीन -तीन हजार संस्करण हंै---आदि आदि

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मेरे पास भी पटना में एक संपन्न निजी लाइब्रेरी है।

पर एन.के गौड़ा के मुकाबले यह कुछ भी नहीं।

उनके पास तो बहुमूल्य हीरा है।

पर, मैं अपने अनुभवों के आधार पर यह कल्पना कर सकता हूं कि किसी संपन्न लाइब्रेरी 

का रख-रखाब कितना

 कठिन श्रम,एकाग्रता और साधन खोजता है।

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 मेरे निजी पुस्तकालय सह संदर्भालय में अब करीब तीन दर्जन आलमारियां हैं।पर,मेरी लाइब्रेरी अनमोल 

पुस्तक आधारित नहीं बल्कि साठ-सत्तर-अस्सी के दशकों के अब अप्राप्य पत्रिकाएं आधारित हैं।मेरे पास कुछ सौ अच्छी 

किताबों के अलावा ऐसे सैकड़ों विषयवार लिफाफे हैं जिनमें संबंधित विषयों की अखबारी कतरनें भरी पड़ी हैं।जिस विषय की 

कल्पना कीजिएगा ,उम्मीद है,उस विषय से संबंधित कटिंग यहां मिल जाएंगी।ऐसी कटिंग्स तैयार करने 

के लिए मैं दिल्ली और पटना के एक दर्जन अखबार खरीदता हूं।

यह सब अखबारी लेखन और अब पुस्तक लेखन में सहायक होते हैं।

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अपवादों को छोड़ दें तो मोदी सरकार इन दिनों एन.के.गौड़ा जैसे अनूठे काम करने

वालों को ही पद्म सम्मान से 

सम्मानित करती है।हां, अपवाद स्वरूप कुछ नेता भी राजनीतिक कारणों से पद्म सम्मान

पा रहे हैं। 

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यदि एन.के.गौड़ा साहब ओड़िशा के मूल निवासी होते तो उन्हें वहां की सरकार हर माह 

30 हजार रुपए मानदेय देती जिससे उन्हें 

अपने अनोखे लाइब्रेरी के रख-रखाव में सुविधा होती।वह सरकार तथा देश के तीन अन्य 

राज्य सरकारें अपने 

यहां के पद्म अवार्डियों को मासिक मानदेश देती है।

पर, याद रहे कि पदम् अवार्डीज को न तो भारत सरकार कोई मानदेय देती है और न ही चार राज्य सरकारों

 को छोड़ कर इस देश की कोई अन्य राज्य सरकार।

इसे विरोधाभास ही कहेंगे।मेरा मानना है कि या तो कोई सरकार मानदेय

 न दे या सारे राज्य सरकार दें।या, खुद केंद्र सरकार देना शुरू करे। 

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करीब दो दशक पहले प्रभाष जोशी और डा.नामवर सिंह मेरे पटना स्थित आवास पर आये थे।

मेरी लाइब्रेरी में तब सिर्फ 15 आलमारियां थीं।उनमें रखी सामग्री को देखकर प्रभाष जोशी ने कहा था 

कि ‘‘मेेरी जानकारी के अनुसार देश के किसी अन्य पत्रकार के पास इतनी संपन्न निजी लाइबे्ररी नहीं है।’’

डा.नामवर सिंह ने दिनमान (1965 से आखिरी अंक तक-बीच के कुछ अंक गायब हैं।)को देखकर कहा था-

‘‘सुरेंद्र जी,आपने तो हीरा संजो कर रखा है।’’

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अब तो आलमारियों की संख्या तीस हो चुकी है।बढ़ती ही जा रही हैं।

मेरे सामने समस्या है--मेरी निजी पक्की आय सिर्फ 1261 रुपए मासिक है--पीएफ.पेंशन।

बाकी अखबारों में लिखकर कमाता हूं।

गांव में खेती कराने जा रहा हूं।वहां से कुछ आय हो सकती है।

मेरी लाइब्रेरी को अपडेट करते जाने में समय,साधन और एकाग्रता की जरूरत रहती है।

मेरी उम्र भी बढ़ रही है।सहायक की जरूरत महसूस होती है।अपने लेखन के काम को भी 

जारी रखना है।वैसे मेरे बाद मेरे परिवार में एकाधिक सदस्य हंै जो इस लाइब्रेरी को ंसंभाल सकते हैं।

उनकी रूचि भी है और उनका पेशा भी इसके अनुकूल है।प्रतिभा भी है।

मेरी पहली पुस्तक की सफलता के बाद दूसरी किताब की तैयारी में लग गया हूं।

देखे आगे- आगे क्या होता है !

अल्ला जाने क्या होगा आगे ??

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अंत में एन.के. गौड़ा साहब को सलाम !

प्रभाकर मणि तिवारी और दैनिक भास्कर को धन्यवाद जिन्होंने ऐसी बहुमूल्य जानकारी दी।

पद्म श्री चयन समिति को भी धन्यवाद जिसने गौड़ा के रूप में एक और मोती 

चुन लिया है।

पर यदि गौड़ा इच्छा प्रकट करें तो उनके लिए कुछ आर्थिक साधन का भी प्रबंध करंे केंद्र व राज्य सरकारें।

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1 फरवरी 26   


 


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गुरुवार, 22 जनवरी 2026

 बिहार विधान सभा चुनाव नतीजों पर बिहार की 

त्रैमासिक पत्रिका ‘‘न्यूज हाट’’ का संग्रहणीय अंक

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सुरेंद्र किशोर

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गत बिहार विधान सभा चुनाव के नतीजों को लेकर बिहार की त्रैमासिक पत्रिका ‘‘न्यूज हाट’’ने अपने ताजा अंक में विस्तार से जानकारियां दी हैं।

इसलिए मेरे निजी संदर्भालय के लिए यह अंक (अक्तूबर-दिसंबर 2025)संग्रहणीय है।

  लोक सभा-विधान सभा चुनावों के नतीजों से संबंधित खबरों का भी मेरे यहां दस्तावेजीकरण होता रहता है।न्यूज हाट ने मेरा काम थोड़ा आसान कर दिया है।

सन 2025 के बिहार विधान सभा चुनाव पर कोई पत्रिका विशेषांक निकाले और उसमें प्रशांत किशोर की अलग से चर्चा न हो ,ऐसा कैसे हो सकता है ! प्रशंात किशोर पर प्रकाशित लेख का शीर्षक एकदम सटीक है--

‘फुस्स’ हो गये प्रशांत किशोर’

इस अंक में मेरा जो लेख छपा है,वह जेपी आंदोलन पर है।

खासकर 18 मार्च 1974 की ऐतिहासिक घटनाओं का विवरण है।संवाददाता के रूप में मैंने उस दिन यानी 18 मार्च 1974 को पटना के विभिन्न घटनास्थलों का दौरा किया था।

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21 जनवरी 26

  



बुधवार, 7 जनवरी 2026

 पत्रकार अमलेंदु भाई को

 भाव-भीनी श्रद्धांजलि

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सुरेंद्र किशोर

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अपने समय के जाने-माने पत्रकार अमलेंदु नारायण सिन्हा का

कल पटना स्थित उनके आवास पर निधन हो गया।

मेरी श्रद्धांजलि।

खुश मिजाज और प्रभावशाली व्यक्तित्व के धनी अमलेंदु भाई ने सन 

1973 में चर्चित राजेश्वरी हत्या कांड की खबर ब्रेक की थी।तब वे दैनिक 

‘सर्चलाइट’ में काम कर रहे थे।कमिश्नर स्तर के एक आई.ए.एस.अफसर की वह पत्नी थीं।उनकी रहस्यमय ढंग से हत्या कर दी गयी थी।

उस आरोप में अफसर एन.नागमणि जेल भी गये थे।पर, बाद में वे 

अदालत से दोषमुक्त करार दे दिए गए।

संवाददाता के रूप में अमलेंदु भाई के साथ मैं अक्सर प्रेस कांफे्रंसेज में शामिल हुआ करता था।

उनकी रपटें पढ़ता था।उस जमाने में अक्सर जूनियर पत्रकार अपने सिनियर से

कुछ -कुछ सीखा करते थे।जाहिर है अमलेंदु जी मुझसे वरीय थे।

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7 जनवरी 26