रविवार, 3 मार्च 2024

 श्रीराम ने बालि को छिपकर मारा था।

इसके बावजूद वे

मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए।

यानी,व्यापक जनहित में थोड़े से भटकाव की अनुमति है।

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जो राजनीतिक दल व नेतागण भारत के संविधान व कानून की रक्षा की सबसे अधिक जरूरत बताते रहते हैं,वे अपने पंथिक और व्यक्तिगत स्वार्थों के लिए संविधान व कानूनों को बदलते-बदलवाते रहे हैं।

 


गुरुवार, 8 फ़रवरी 2024

 चाणक्य-मेगस्थनीज संवाद

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‘इतिहास का प्रसंग है।

मेगस्थनीज चाणक्य से मिलने आए।

देखा काम में व्यस्त हैं।

वहां जल रहा दीपक बुझाते हैं।

दूसरा जलाते हैं,

फिर मेगस्थनीज से संवाद करते हैं।

मेगस्थनीज की जिज्ञासा है,एक दीपक बुझा कर,

दूसरा क्यों जलाया आपने ?

चाणक्य का सहज जवाब था,

अब तक महामंत्री की हैसियत से राष्ट्र का काम कर रहा था।

अब चाणक्य की हैयित से आपसे बात कर रहा हूं।

उस दीपक में राष्ट्र का तेल है।

निजी कार्य के लिए राष्ट्रीय संपत्ति का उपयोग घोर अपराध है।

यह है इस देश की तासीर।

इसे बचाने के लिए सभी दलों में आम सहमति बने।’

-- हरिवंश,राज्य सभा के उप सभापति

दैनिक भास्कर

6 फरवरी 2014

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अब समकालीन तासीर की कुछ झलकें देखिए।

इंडी गठबंधन की पहली बैठक पटना में हुई थी।

उसमें शामिल होने के लिए इस गरीब देश के अमीर नेतागण आठ चार्टर्ड विमानों में सवार होकर विभिन्न हिस्सों से पटना पहुंचे थे।

जिस देश के 80 करोड़ लोगों को फ्री अनाज देना पड़ रहा है,उस देश में ऐेसे-ऐसे नेता हैं।

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दूसरी झलक

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1985 में तत्कालीन प्रधान मंत्री राजीव गांधी ने कहा था कि 

हम दिल्ली से सौ पैसे भेजते हैं,पर गांवों तक उसमें से सिर्फ 15 पैसे ही पहुंचते हैैं।

ये सौ पैसे एक दिन में तो घिस कर तो 15 पैसे नहीं बने होंगे।

ये जवाहरलाल नेहरू,लालबहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी के शासनकाल में घिसते चले गये।

मोदी सरकार श्वेत पत्र जारी कर रही है।

राजीव गांधी ने तो अपनी मां और नाना की सरकारों पर श्वेत पत्र 1985 में ही जारी कर दिया था।

वैसे लालबहादुर शास्त्री पर कोई शक नहीं करता।

शायद इसीलिए रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हुई।

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अब सन 1963 का हाल जानिए।  

सन 1963 में ही तत्कालीन कांग्रेस  अध्यक्ष डी.संजीवैया को  इन्दौर के अपने भाषण में यह कहना पड़ा  कि ‘वे कांग्रेसी जो 1947 में भिखारी थे, वे आज करोड़पति बन बैठे।

 कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा था कि ‘झोपड़ियों का स्थान शाही महलों ने और कैदखानों का स्थान कारखानों ने ले लिया है।’

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सुरेंद्र किशोर

8 फरवरी 24






बुधवार, 7 फ़रवरी 2024

 कहते हैं

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विफल साहित्यकार, आलोचक बन जाता है।

आलोचक के रूप में कोई सफल होता है तो कोई विफल !

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विफल प्रेमी, कवि बन जाता है।

कवि के रूप में कोई सफल होता है तो कोई विफल !!

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विफल नेता, पत्रकार बन जाता है।

पत्रकार के रूप में कोई सफल होता है तो कोई विफल !!!

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सुरेंद्र किशोर 

7 फरवरी 24 

 


 मनरेगा को किसानों से जोड़िए

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सुरेंद्र किशोर

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मनमोहन सिंह केे कार्यकाल में तत्कालीन कृषि मंत्री शरद पवार ने

प्रधान मंत्री को यह सलाह दी थी कि मनरेगा को किसानों से जोड़ दीजिए।

क्योंकि मनेरगा की सुविधा के कारण किसानों को मजदूर मिलने में कठिनाई हो रही है।

पवार की मंाग थी कि इस योजना के तहत कार्यरत मजदूरों को आधी मजदूरी सरकार दे और बाकी आधी किसान भुगतान करंे।

उन्होंने यह भी सलाह दी थी कि कम से कम बुवाई और कटाई के समय मनरेगा को स्थगित रखा जाना चाहिए।

पर,सरकार ने उनकी सलाह नहीं मानी।

बाद के वर्षों में एक सर्वेक्षण नतीजा सामने आया था।

वह यह कि विकल्प मिले तो इस देश के 62 प्रतिशत किसान किसानी छोड़ देंगे।

क्योंकि खेती में पूंजी निवेश करने लायक पैसे किसानों के पास नहीं हैं।

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आम किसान कृषि 

कानून के पक्षधर

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करीब चार साल पहले केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानून लाये थे।

पर, सन 2021 में उन्हें वापस करना पड़ा।

सरजमीन की जानकारी रखने वालों के अनुसार वे कानून अच्छे थे।

पर,दबाव में वापस करना पड़ा।

उस कानून के कारण खेती में पूंजी निवेश बढ़ता।

उससे किसानों की आय बढ़ती और देश को भी लाभ होता।

 सारण जिले के एक किसान के अनुसार प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी 

की अन्न योजना ने मजदूर-उपलब्धता के मामले में किसानों की स्थिति को और चिंताजनक बना दिया है। 

अब मजदूर मिलने में और भी दिक्कत हो रही है।

नतीजतन अनेक किसान अपनी जमीन ठेके पर लगा रहे हैं।

अगले लोक सभा चुनाव के बाद मोदी सरकार को चाहिए कि वह 

उन कृषि कानूनों को फिर से लाये।

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आज के प्रभात खबर में प्रकाशित मेरे काॅलम ‘यदाकदा’ से

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शनिवार, 3 फ़रवरी 2024

 लोस टिकट के उम्मीदवारों से भाजपा इस बार लिखित आश्वासन ले ले कि ‘‘मुझे सांसद फंड नहीं चाहिए।’’

सांसद फंड की समाप्ति मोदी-नीत सरकार ही कर सकती है।

चाहें तो अन्य दल भी ले सकते हैं।पर,अन्य दलों के लिए यह काम मुश्किल है।

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सुरेंद्र किशोर

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अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार चाहते हुए भी यह काम नहीं कर सकी थी।

पी.एम.मनमोहन सिंह भी चाहते हुए इस फंड को खत्म नहीं कर सके।सांसद फंड के दुरुपयोग के कारण कुछ सांसद भी दुखी रहते हंै।

क्योंकि उनकी छवि पर इसका विपरीत असर पड़ रहा है।

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शासन के निचले स्तर पर भ्रष्टाचार को 

संस्थागत रूप प्रदान कर देने में सासंद फंड का बड़ा हाथ है।

अत्यंत थोड़े से अपवादों को छोड़कर खबर मिल रही है कि 

इस फंड का व्यापक दुरुपयोग हो

रहा है।

इस दुरुपयोग से कुछ सांसद भी चिंतित हैं।हालांकि

उनकी संख्या काफी कम है।

इस फंड के कारण सांसदों की नैतिक धाक कम हुई है।

इसका कुप्रभाव सामान्य प्रशासन पर भी पड़ रहा है।

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मोदी सरकार की जांच एजेंसियां उन बड़े -बड़े नेताओं तथा अन्य लोगों के खिलाफ जांच कर रही हैं और मुकदमे चला रही हैं जिनके खिलाफ जनता के अरबों -अरब रुपए लूटने के आरोप हैंे।

इससे अधिसंख्य आबादी खुश है।इसका चुनाव पर राजग के पक्ष में सकारात्मक असर पड़ेगा।

यानी, ऊपर से सफाई की प्रक्रिया तेज है।खबर है कि वह और भी तेज होने वाली है।

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पर,नीचे से भी सफाई जरूरी है।

अन्यथा पेड़ की डालियां तो कटंेगी,पर वृक्ष का तना बना रहेगा।

नतीजतन फिर डालियां उग आएंगी।

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नरेंद्र मोदी की भाजपा लोक सभा के टिकट के उम्मीदवारों से टिकट देने से पहले ही यह लिखवा ले कि मुझे सांसद फंड नहीं चाहिए।अभी तो सारे सांसद ऐसा लिख कर दे देंगे।

क्योंकि टिकट अधिक महत्वपूर्ण है।

सामान्य दिनों में यह काम नहीं हो सकता।

खबर है कि प्रधान मंत्री मोदी चाहते हुए भी यह काम नहीं कर पा रहे हंै।

 2024 के चुनाव के बाद गठित मोदी सरकार पहला निर्णय यही करे कि अब सांसद फंड की व्यवस्था समाप्त की जा रही है।

निचले स्तर पर प्रशासन से भ्रष्टाचार कम करने में उस निर्णय से भारी मदद मिलेगी।

निचले स्तर पर सफाई यानी जनता को राहत।

क्या यह खबर सही है कि अपवादों को छोड़कर सरकारी दफ्तरों में

नजराना-शुकराना-हड़काना के बिना जनता का कोई काम नहीं हो रहा है ?

लोगबाग नरेंद्र मोदी की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं।सांसद फंड की यदि समाप्ति हुई तो विधायक फंड की भी देर-सबेर हो जाएगी।

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31 जनवरी 24  

  


शुक्रवार, 2 फ़रवरी 2024

    पद्मश्री सम्मान पर राज्यपाल का व्यक्तिगत पत्र

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बिहार के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने 

व्यक्तिगत पत्र लिखकर पद्मश्री सम्मान पर मुझे बधाई दी है।

इससे पहले मुख्य मंत्री नीतीश कुमार ने समाचार पत्रों के माध्यम से ऐसे उन सभी सम्मानित व्यक्तियों को बधाई दी थी जो बिहार के हैं।राज्यपाल ने बिहार के अन्य सम्मानित व्यक्तियों को भी पत्र लिखे होंगे,ऐसी आशा है।

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महामहिम राज्यपाल ने लिखा है--

‘‘प्रिय श्री सुरेंद्र किशोर जी,

मुझे यह जानकर अति प्रसन्नता हुई कि भारत सरकार द्वारा भाषा,शिक्षा तथा पत्रकारिता के क्षेत्र में आपको पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

यह सभी बिहार वासियों का गौरव है।

   इस निमित मेरी और बिहार की जनता की ओर से आपको हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

  मैं आपके स्वस्थ ,दीर्घायु एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं।

   भवदीय,

राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर

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इसके लिए मैं महामहिम के प्रति अत्यंत आभारी हूं।

   ---सुरेंद्र किशोर

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2 फरवरी 24


बुधवार, 31 जनवरी 2024

 लोस टिकट के उम्मीदवारों से भाजपा इस बार लिखित आश्वासन ले ले कि ‘‘मुझे सांसद फंड नहीं चाहिए।’’

सांसद फंड की समाप्ति मोदी-नीत सरकार ही कर सकती है।

चाहें तो अन्य दल भी ले सकते हैं।पर,अन्य दलों के लिए यह काम मुश्किल है।

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सुरेंद्र किशोर

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अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार चाहते हुए भी यह काम नहीं कर सकी थी।

पी.एम.मनमोहन सिंह भी चाहते हुए इस फंड को खत्म नहीं कर सके।सांसद फंड के दुरुपयोग के कारण कुछ सांसद भी दुखी रहते हंै।

क्योंकि उनकी छवि पर इसका विपरीत असर पड़ रहा है।

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शासन के निचले स्तर पर भ्रष्टाचार को 

संस्थागत रूप प्रदान कर देने में सासंद फंड का बड़ा हाथ है।

अत्यंत थोड़े से अपवादों को छोड़कर खबर मिल रही है कि 

इस फंड का व्यापक दुरुपयोग हो

रहा है।

इस दुरुपयोग से कुछ सांसद भी चिंतित हैं।हालांकि

उनकी संख्या काफी कम है।

इस फंड के कारण सांसदों की नैतिक धाक कम हुई है।

इसका कुप्रभाव सामान्य प्रशासन पर भी पड़ रहा है।

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मोदी सरकार की जांच एजेंसियां उन बड़े -बड़े नेताओं तथा अन्य लोगों के खिलाफ जांच कर रही हैं और मुकदमे चला रही हैं जिनके खिलाफ जनता के अरबों -अरब रुपए लूटने के आरोप हैंे।

इससे अधिसंख्य आबादी खुश है।इसका चुनाव पर राजग के पक्ष में सकारात्मक असर पड़ेगा।

यानी, ऊपर से सफाई की प्रक्रिया तेज है।खबर है कि वह और भी तेज होने वाली है।

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पर,नीचे से भी सफाई जरूरी है।

अन्यथा पेड़ की डालियां तो कटंेगी,पर वृक्ष का तना बना रहेगा।

नतीजतन फिर डालियां उग आएंगी।

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नरेंद्र मोदी की भाजपा लोक सभा के टिकट के उम्मीदवारों से टिकट देने से पहले ही यह लिखवा ले कि मुझे सांसद फंड नहीं चाहिए।अभी तो सारे सांसद ऐसा लिख कर दे देंगे।

क्योंकि टिकट अधिक महत्वपूर्ण है।

सामान्य दिनों में यह काम नहीं हो सकता।

खबर है कि प्रधान मंत्री मोदी चाहते हुए भी यह काम नहीं कर पा रहे हंै।

 2024 के चुनाव के बाद गठित मोदी सरकार पहला निर्णय यही करे कि अब सांसद फंड की व्यवस्था समाप्त की जा रही है।

निचले स्तर पर प्रशासन से भ्रष्टाचार कम करने में उस निर्णय से भारी मदद मिलेगी।

निचले स्तर पर सफाई यानी जनता को राहत।

क्या यह खबर सही है कि अपवादों को छोड़कर सरकारी दफ्तरों में

नजराना-शुकराना-हड़काना के बिना जनता का कोई काम नहीं हो रहा है ?

लोगबाग नरेंद्र मोदी की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं।सांसद फंड की यदि समाप्ति हुई तो विधायक फंड की भी देर-सबेर हो जाएगी।

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31 जनवरी 24