शुक्रवार, 6 मार्च 2026

  बिहार का सी.एम.कैसा हो  ???

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बिहार का सी.एम.कैसा हो ?

योगी आदित्य नाथ जैसा हो।

चाहे जिस किसी ‘सामाजिक समूह’ से आता हो !

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जिससे भी बात हो रही है,उसकी यही आवाज है।

दरअसल बिहार और यू.पी की समस्याएं 

लगभग समान रही हैं।भीषण और जटिल हैं।

जिन समस्याओं से योगी जूझ रहे हैं,बिहार के नये

 सी.एम. में भी उन समस्याओं से उसी तरह जूझने का यदि 

जज्बा हो तो नेपाल की सीमा पर बसे बिहार की 

रक्षा-सुरक्षा बेहतर ढंग से हो सकती है।

शांति रहेगी तो देश-विदेश से बिहार में और भी निवेश आएगा।

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6 मार्च 26  


गुरुवार, 5 मार्च 2026

 मुख्य मंत्री नीतीश कुमार को 

उनके जन्म दिन पर हार्दिक बधाई !

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सुरेंद्र किशोर

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सत्तर के दशक में नीतीश कुमार ने मुझसे कहा था कि

‘‘मैं एक दिन मुख्य मंत्री जरूर बनूंगा।

मुख्य मंत्री बनकर अच्छा काम करूंगा।’’

उस समय तक वे 1977 का अपना पहला विधान 

सभा चुनाव हार चुके थे।

मैं तब ‘आज’ अखबार में काम कर रहा था।

हमलोग कभी -कभी काॅफी हाउस में मिलते थे।

तब मैं उनके इस आत्म विश्वास पर कुछ अचम्भित और कुछ सशंकित था।

लगा था कि यह तो इनका बड़बोलापन है।

लेकिन नीतीश सही साबित हुए और मैं गलत।

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कहा तो था कि ‘‘अच्छा काम करूंगा’’, किंतु मुख्य मंत्री बन कर, कर दिए ‘‘बहुत सारे अच्छे काम।’’

(मैंने 1967 से अब तक बिहार के सारे मुख्य मंत्रियों को काम करते देखा है।इसलिए यह बात कहने की स्थिति में हूं।)

इसलिए भी नीतीश को डबल बधाई।

पर ,नीतीश कुमार का एक भटकाव भी रहा,हालांकि एक ही भटकाव।

प्रधान मंत्री बनने के लोभ में उन्होंने 

 राजग को दो बार छोड़ा।उन दिनों मुझसे पूछते तो मैं नीतीश जी को बताता कि कांग्र्रेस को सत्ता यदि मिलेगी भी तो वह आपको पी.एम.नहीं बनाएगी।वैसे तो मिलेगी नहीं क्योंकि देश अभी मोदी के साथ है।

आप तो किसी को ‘‘न तो बचाते हंै और न फंसाते हंै।’’

कांग्रेस को तो एक और मनमोहन सिंह चाहिए होगा।

  मेरे मित्र उदयकांत मिश्र ने नीतीश कुमार की जीवनी लिखी है।बहुत अच्छा लिखा है,उसमें सारी बातेें आ गई हैं।

 पर, एक खास कोण से नीतीश कुमार के बारे में अब भी लिखने की जरूरत है ताकि राजनीति में जो कुछ थोड़े से आदर्शवादी लोग मौजूद हैं या आना चाहते हैं, उन्हें प्रेरणा मिले।

वह कोण यह है कि इस ‘‘बीहड़’’ प्रदेश बिहार में ‘‘बहुत अच्छा काम’’ करने के सिलसिले में नीतीश कुमार को किन -किन परेशानियों-कठिनाइयों-बाधाओं-असुविधाओं आदि का सामना करना पड़ा और उन पर उन्होंने कैसे काबू पाया।क्या -क्या न कर पाने का अफसोस रहा ?

उस क्रम में कितनों की नाराजगी झेली।कितने खुश हुए।यदि नीतीश यह सब बातें बताना चाहंे तो ही।

 जाहिर हैं कि इस बारे में तभी कोई बात करना चाहेगा जब वह सब आॅफ द रिकाॅर्ड हो।वह भी तभी हो सकेगा जब शासकीय जिम्मेदारी के दौर मुक्ति पा ले। 

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नीतीश कुमार से मेरा परिचय उस समय से हैं जब वे पटना इंजीनियरिंग काॅलेज के प्रथम वर्ष के छात्र थे।तब मैं लेहियावादी पार्टी का एक सामान्य पर सिरियस कार्यकर्ता था।नीतीश जी पटना के मुसल्लहपुर हाट के जिस कृष्णा लाॅज में रहते थे,उनके कमरे के बगल वाले कमरे में मेरा छोटा भाई नागेंद्र रहता था ।वह पटना लाॅ कालेज में छात्र था।

कहीं से पटना आने पर मैं नागेंद्र के कमरे में रुकता था।तब देखा था कि लोहिया और लोहियावादी राजनीति में तब से ही नीतीश जी गहरी रूचि थी।

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नीतीश जी को इसलिए भी बधाई क्योंकि वे राजनीति व प्रशासन में ‘‘भ्रष्टाचार की आंधी’’ और ‘‘परिवारवाद के तूफान’’ के बीच भी अविचलित होकर इन दोनों बुराइयों से कोसों दूर रहे।यह विरल है। 

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आम तौर पर पत्रकार किसी नेता खासकर सत्ताधारी नेता को इस तरह बधाई नहीं देता।पर नीतीश कुमार ने बिहार के लिए विशेष काम किया और अपने राजनीतिक जीवन के प्रारंभिक वर्षों में आर्थिक परेशानियां उठाने के बावजूद राजनीति में वे डटे रहे,इसलिए भी बधाई।

सक्रिय राजनीति में तो मैं भी करीब दस साल (1967-76) तक  था।पर उन परेशानियों को मैं नहीं झेल सका।सक्रिय पूर्णकालिक राजनीति से पलायन कर गया। पत्रकारिता में आ पहुंचा।यहां कम से कम पहले ही दिन से दोनों शाम भोजन लायक पैसे का इंतजाम हो गया।राजनीति में तो वह भी सुविधा नहीं थी।कल्पना कर सकता हूं कि नीतीश जी ने अपने वैसे दिन कैसे काटे होेंगे !

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2 मार्च 26 

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फेसबुक वाॅल से


रविवार, 1 मार्च 2026

 प्रखर श्रीवास्तव की पुस्तक ‘‘हे राम’’ के बारे में 

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हमें किसी नेता,दल और विचारधारा को खुले 

मन-मिजाज से देखना -पढ़ना चाहिए।

सारे तथ्य हमारे सामने हों तो हमें कोई फैसला करने में 

सुविधा होती है।

क्योंकि न तो कोई व्यक्ति पूर्ण है और न कोई संस्था 

या विचारधारा-- न मैं, न आप और न वह।

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मेरी धारणा यह बनी है कि अपवादों को छोड़कर हमारे अधिकतर 

इतिहासकारों ने जितना जाहिर किया है,उससे अधिक छिपाया है।

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1--पहले मैं कहा करता था कि इस देश के नेताओं 

के चाल,चरित्र और चिंतन को बाहर-भीतर से जानना हो तो एम.ओ.मथाई(जवाहरलाल नेहरू के निजी सचिव)की दोनों किताबें पढ़िए।

2--बिहार के नेताओं को,जो स्वतंत्रता सेनानी भी थे, जानना हो तो अय्यर कमीशन की रपट पढ़िए।

3.--अब मैं एक और किताब उसमें जोड़ता हूं।

नई पीढ़ी को चाहिए कि वह प्रखर श्रीवास्तव की हाल में आई पुस्तक

 ‘हे राम’ जरूर पढ़े।

  प्रखर श्रीवास्तव ने अद्भुत किताब लिखी है।पुस्तक हो तो ऐसी !

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----सुरेंद्र किशोर

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1 मार्च 26

     


रविवार, 22 फ़रवरी 2026

   मैं भारतीय पहले, पत्रकार बाद में 

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सुरेंद्र किशोर

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मैं पत्रकार हूं।

लेखक हूं।

किसान भी हूं।

गृहस्थ हूं।

पर,सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मैं इस देश का

नागरिक हूं।

एक नागरिक के रूप में मैं चाहता हूं कि यह देश 

लोकतांत्रिक बना रहे।पर दूसरी ओर देश-विदेश की हिंसक-अंिहंसक शक्तियां इसे इस्लामिक देश बनाने के लिए जी-जान से लगी हुई हैं।

कुछ लोग वोट के लिए और अन्य लोग ‘गजवा ए हिन्द’ के लिए

अपनी- अपनी शैली में प्रयत्नशील हैं।

कई जगह दोनों तत्व जाने-अनजाने एक दूसरे के मददगार

 बन रहे हैं।

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मध्य युग की वापसी की कोशिश को रोकने का मेरा प्रयास है।भले यह

गिलहरी प्रयास है,पर जारी रहेगा।

ताकि, मेरे वंशज को भी सनातन धर्म-संस्कृति का शांतिपूर्वक पालन करने की अनंत काल तक सुविधा उपलब्ध रहे।

इस क्रम में बाकी बातें मेरे लिए कोई महत्वहीन हैं।

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इसी बात को ध्यान में रखते हुए कोई व्यक्ति मेरे लेख या पोस्ट को पढ़े।

मुझसे जो बिलकुल सहमत नहीं हैं,उन्हें मेरा फेसबुक फें्रड बने रहने का कोई औचित्य नहीं है।

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 22 फरवरी 26


 कितने दूरदर्शी थे अटल जी !

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वाजपेयी जी यह जानते थे कि भारत की एक पार्टी 

को बर्बाद करने की क्षमता किस व्यक्ति में है !

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सुरेंद्र किशोर

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   प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जान गए थे कि अमेरिका में गिरफ्तार इसी व्यक्ति में अपनी ही पार्टी को नष्ट करने की पूरी क्षमता है।

वह क्षमता अकेली मेरी पार्टी में नहीं है।भाजपा को परोक्ष मदद चाहिए होगी !

  इसलिए उस व्यक्ति को तब के प्रधान मंत्री वाजपेयी ने अमरीकी सरकार पर अपने प्रभाव का उपयोग करके साफ रिहा करवा दिया।यानी गिरफ्तारी से संबंधित कागज-पत्र भी गायब करवा दिया।हालांकि वहां के अखबार में गिरफ्तारी की यह खबर छपी थी।

अटल जी का पूर्वानुमान सही साबित हो रहा है।

यहां अपनी पार्टी को बर्बाद करने का वह काम वे तेजी से कर रहे हैं।

सन 2015 में डा.सुब्रह्मण्यम स्वामी ने सार्वजनिक रूप से उस ‘‘क्षमतावान’’ व्यक्ति का नाम भी बताया था।

डा.स्वामी का वह बयान,जिसमंे नाम छपा था, 20 जून 2015 के दैनिक भास्कर में छपा था।

उस अखबार की कटिंग मेरे पास है।

पर,मैं नाम नहीं बताऊंगा।

अब आप कल्पना कीजिए कितने दूरदर्शी 

थे अटल जी !!!

अटल जी की मदद से व्यक्ति रिहा नहीं हुआ होता तो उसे अमेरिका के कानून के अनुसार वहां 25 साल की सजा हो गई होती।

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22 फरवरी 26


 देश के बड़े पत्रकार और चिंतक दिलीप मंडल के अनुसार,

‘‘संसद की कार्यवाही में दर्ज है और कोई भी इसे चेक कर सकता है कि इंदिरा गांधी सरकार में कानून और वक्फ मंत्री रहे मोहम्मद यूनुस सलीम ने राज्य सभा में गर्व के साथ विस्तार से बताया था--‘‘हां, न्यायप्रिय बादशाह औरंगजेब ने काशी में विश्वनाथ मंदिर को तोड़ा था।’’

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इतिहासकार इरफान हबीब ने भी कहा है कि ‘‘औरंगजेब ने काशी और मथुरा में मंदिरों को ध्वस्त कर दिया था।’’

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पर,इसके बावजूद मुस्लिम वोटलोलुप राजनीतिक दल,मुस्लिम धार्मिक नेता,वामपंथी इतिहासकार और पथ भटके पत्रकार-बुद्धिजीवी  इन मामलों में लगातार झूठ क्यों बोलते हैं ?

 उनके झूठ बोलने के कारण ही हिन्दू वोट भाजपा कीे ओर जाता रहा है।

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सन 2002 में गोधरा में जेहादियों ने 59 कार सेवकों को जिन्दा जला दिया था।कितने तथाकथित सेक्युलर व भाजपा विरोधी दलों ने उस मानव दहन कांड की सार्वजनिक तौर पर निन्दा की ?

आज भी कितने वैसे लोग बंगाल में प्रस्तावित बाबरी मस्जिद का विरोध कर रहे हैं ?

इसके बावजूद कोई चाहेगा कि भाजपा न बढ़े तो हिन्दू बहुल देश में यह कैसे हो सकता है ?

जबकि भारत के भीतर भी तरह तरह के ‘जेहादी हिंसा’ में इन दिनों बड़ी संख्या में देशी-विदेशी मुस्लिम लगे हुए हैं।ऐसे जेहादियों के खिलाफ कितने भाजपा विरोधी नेताओं के बयान आते हैं ?

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बुधवार, 18 फ़रवरी 2026

 पहले से कुछ हिन्दी अखबार पटना के पास के जेपी गंगा पथ को मरीन ड्राइव लिखते रहे हैं।

अब तो पटना के अंग्रेजी अखबार भी जेपी गंगा पथ को मरीन ड्राइव लिखने लगे हैं।

क्या बिहार सरकार ने जेपी गंगा पथ का नाम बदल कर मरीन ड्राइव कर दिया है ?

क्योंकि मैं यह बात नहीं मान सकता कि अंग्रेजी के पत्रकारों को भी अंग्रेजी मरीन शब्द का हिन्दी अर्थ नहीं मालूम।

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अब क्या पटना के बिस्कोमान टावर का नाम हम अखबार में किसी दिन एफिल टावर पढंेगे ?

 एफिल टावर पेरिस में है।मरीन ड्राइव बंबई में है--जाहिर है समुद्र किनारे।