शेषन की उपलब्धि और ज्ञानेश के कत्र्तव्य !
आयोग के प्रति राजनीतिक दलों के रुख
--तब और अब !
-------------------------
सुरेंद्र किशोर
---------------
मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन ने सन 1994 में कहा था कि ‘‘भारत का लोकतंत्र धन,अपराध और भ्रष्टाचारों के स्तम्भों पर खड़ा है।’’
सवाल है कि पिछले चार दशकों में इस मामले में कितना फर्क आया है ?
---------------------
यदि वे आज मुख्य चुनाव आयुक्त होते तो इन स्तम्भों में चैथा स्तम्भ भी जोड़ देते --
‘‘घुसपैठियों का वोट बैंक’’ वाला स्तम्भ।
खैर, शेषन ने जो कुछ कहा था,उस ‘‘स्थिति’’ में 1994 से आज तक कितना फर्क आया है ?
इस सवाल का जवाब कोई पूर्वाग्रह रहित भारतीय नागरिक ही ठीक- ठीक दे सकता है।
मैं सिर्फ शेषन के कुछ कदमों और उनकी उक्तियों की यहां याद दिलाऊंगा।
अब यह तय करना भी पूर्वाग्रह रहित भारतीयों का ही काम है कि मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सही कर रहे हैं या गलत।
----------------
टी.एन.शेषण ने कहा था कि ‘‘जब तक मतदाता पहचान पत्र नहीं बनेगा,तब तक मैं अगला कोई चुनाव नहीं कराऊंगा।’’
बिहार विधान सभा का 1995 का चुनाव सिर पर था।
मुख्य मंत्री लालू प्रसाद को लगा था कि हमें चुनाव में हराने के लिए शेषन यह षंड्यंत्र रच रहा है।मुख्य मंत्री ने कह दिया कि मतदाता पहचान पत्र बनाने के लिए हमारे पास पैसे नहीं हैं।पर शेषन की जिद के आगे उन्हें झुकना पड़ा।
शेषन ने कहा था कि पैसा नहीं है तो प्रजातंत्र बंद करो।
इस संबंध में इंडिया टूडे ने मुख्य मंत्री लालू प्रसाद से बातचीत की थी।मुख्य मंत्री ने कहा कि ‘‘कुछ नहीं।बात साफ है।यह प्रधान मंत्री नरसिंह राव ,भाजपा और शेषन की तिकड़मबाजी का नतीजा है।ब्राह्मणवादी शक्तियों को यह साफ लगने लगा कि हम दो -तिहाई बहुमत से जीत कर आनेवाले हैं तो उन्होंने एक षड्यंत्र रचा ,तिकड़मबाजी का।’’(इंडिया टूडे--15 मार्च 1995)
मतदाता पहचान पत्र के साथ जब चुनाव हुआ तो लालू प्रसाद की पार्टी को पूर्ण बहुमत मिल गया।
लालू प्रसाद ने स्वीकार किया था कि मतदाता पहचान पत्र के कारण हमारे मतदाताओं को बेहतर सुविधा मिली।
यही नहीं, टी.एन.शेषन पर हाजीपुर(वैैशाली ,बिहार )के जयप्रकाश क्रांतिकारी ने ‘शेषन चालीसा’ लिख डाला।
उसकी कुछ पंक्तियां यहां उधृत हैं--
‘‘शेषन है अति गुन सागर।
जनतंत्र को करे उजागर ।।
आए शेषन लेकर डंडा।
हो गए होश सभी के ठंडा।।
शेषन है अति बजरंगी।
मतदाता के असली संगी।।
अब चुनाव में मजा आएगा।
भ्रष्ट नेता चने चबाएगा।।
जय जय हे शेषन महानामा।
कृपा करो जनतंत्र बचाना।।
-----------
टी.एन.शेषन ने एक बार कहा था -‘‘मैं रीढ़विहीन नहीं हूं।’’
एक पत्रकार ने जब शेषन से पूछा कि क्या आपको इस्तीफा देने की नौबत आ सकती है,शेषन ने कहा--जो ऐसा सोचते हैं,वे विक्रम हैं और मैं वेताल।
दरअसल जब शेषन ने कहा कि मतदाता पहचान पत्र बने बिना मैं लोक सभा या विधान सभा के चुनाव नहीं होने दूंगा,उस पर प्रधान मंत्री से लेकर लगभग सारे दल शेषन पर खासे नाराज हो गये।किंतु पूर्व विधायक अश्विनी शर्मा ने कहा कि ‘‘फर्जी वोटिंग कराने वाले ही पहचान पत्र का विरोध कर रहे हैं।क्योंकि चुनावों में 95 प्रतिशत मतदान केंद्रों पर बोगस मतदान होता है। सिर्फ 20-25 प्रतिशत मतदाता ही मतदान केंद्रों पर जाते हैं।’’
उन दिनों एक कहावत चली थी--‘‘राज नेता सिर्फ दो लोगों से डरते हैं--‘‘एक भगवान और दूसरे शेषन से।’’
-----------------
चुनावी कदाचार भारत को बोस्निया बना देगा
---टी.एन.शेषन
------------------
शेषन को काबू में लाने के लिए केंद्र सरकार ने एक सदस्यीय चुनाव आयोग को तीन सदस्यीय बना दिया था।
--------------------
सिस्टम से उनकी लड़ाई के संदर्भ में शेषन ने कहा था कि कानून का शासन मेरा एकमात्र धर्म है।
------------------------
शेषन के खिलाफ और पक्ष में कई बातें तब सुनी गई थीं।
1.-प्रधान मंत्री राजीव गांधी की कार के साथ 10 मील तक पैदल दौड़े थे शेषन।तब वे कैबिनेट सचिव थे।
2.-एक दफा संवाददाताओं से बातचीत करते हुए शेषन ने कहा कि ‘‘मैं अमिताभ बच्चन की तरह चर्चित हूं।’’
3.-पूर्व चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने कहा कि शेषन ने आयोग को सशक्त बनाया।(--प्रभात खबर, 12 नवंबर 2019)
4.-मुख्य चुनाव सुनील अरोड़ा ने कहा था कि टी.एन.शेषन हमारी प्रेरणा के स्रोत हैं।
5.-जब राज्य सभा में चुने जाने के लिए वित्त मंत्री मनमोहन सिह ने असम के दिसपुर विधान सभा क्षेत्र के मतदाता के रूप में अपना नाम दर्ज करवाया तो शंेषन ने उस पर जांच बैठा दी।कहा कि वे तो सामान्यतः दिल्ली में रहते हैं न कि असम में।
-------------------
19 अगस्त 25