मंगलवार, 19 अगस्त 2025

 शेषन की उपलब्धि और ज्ञानेश के कत्र्तव्य !

आयोग के प्रति राजनीतिक दलों के रुख

--तब और अब !

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सुरेंद्र किशोर

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मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन ने सन 1994 में कहा था कि ‘‘भारत का लोकतंत्र धन,अपराध और भ्रष्टाचारों के स्तम्भों पर खड़ा है।’’

सवाल है कि पिछले चार दशकों में इस मामले में कितना फर्क आया है ?

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यदि वे आज मुख्य चुनाव आयुक्त होते तो इन स्तम्भों में चैथा स्तम्भ भी जोड़ देते --

‘‘घुसपैठियों का वोट बैंक’’ वाला स्तम्भ।

   खैर, शेषन ने जो कुछ कहा था,उस ‘‘स्थिति’’ में 1994 से आज तक कितना फर्क आया है ?

इस सवाल का जवाब कोई पूर्वाग्रह रहित भारतीय नागरिक ही ठीक- ठीक दे सकता है।

मैं सिर्फ शेषन के कुछ कदमों और उनकी उक्तियों की यहां याद दिलाऊंगा।

अब यह तय करना भी पूर्वाग्रह रहित भारतीयों का ही काम है कि मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सही कर रहे हैं या गलत।

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  टी.एन.शेषण ने कहा था कि ‘‘जब तक मतदाता पहचान पत्र नहीं बनेगा,तब तक मैं अगला कोई चुनाव नहीं कराऊंगा।’’

बिहार विधान सभा का 1995 का चुनाव सिर पर था।

मुख्य मंत्री लालू प्रसाद को लगा था कि हमें चुनाव में हराने के लिए शेषन यह षंड्यंत्र रच रहा है।मुख्य मंत्री ने कह दिया कि मतदाता पहचान पत्र बनाने के लिए हमारे पास पैसे नहीं हैं।पर शेषन की जिद के आगे उन्हें झुकना पड़ा।

शेषन ने कहा था कि पैसा नहीं है तो प्रजातंत्र बंद करो।

इस संबंध में इंडिया टूडे ने मुख्य मंत्री लालू प्रसाद से बातचीत की थी।मुख्य मंत्री ने कहा कि ‘‘कुछ नहीं।बात साफ है।यह प्रधान मंत्री नरसिंह राव ,भाजपा और शेषन की तिकड़मबाजी का नतीजा है।ब्राह्मणवादी शक्तियों को यह साफ लगने लगा कि हम दो -तिहाई बहुमत से जीत कर आनेवाले हैं तो उन्होंने एक षड्यंत्र रचा ,तिकड़मबाजी का।’’(इंडिया टूडे--15 मार्च 1995)

मतदाता पहचान पत्र के साथ जब चुनाव हुआ तो लालू प्रसाद की पार्टी को पूर्ण बहुमत मिल गया।

लालू प्रसाद ने स्वीकार किया था कि मतदाता पहचान पत्र के कारण हमारे मतदाताओं को बेहतर सुविधा मिली।

यही नहीं, टी.एन.शेषन पर हाजीपुर(वैैशाली ,बिहार )के जयप्रकाश क्रांतिकारी ने ‘शेषन चालीसा’ लिख डाला।

 उसकी कुछ पंक्तियां यहां उधृत हैं--

‘‘शेषन है अति गुन सागर।

जनतंत्र को करे उजागर ।।

आए शेषन लेकर डंडा।

हो गए होश सभी के ठंडा।।

शेषन है अति बजरंगी।

मतदाता के असली संगी।।

अब चुनाव में मजा आएगा।

भ्रष्ट नेता चने चबाएगा।।

जय जय हे शेषन महानामा।

कृपा करो जनतंत्र बचाना।।

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टी.एन.शेषन ने एक बार कहा था -‘‘मैं रीढ़विहीन नहीं हूं।’’ 

एक पत्रकार ने जब शेषन से पूछा कि क्या आपको इस्तीफा देने की नौबत आ सकती है,शेषन ने कहा--जो ऐसा सोचते हैं,वे विक्रम हैं और मैं वेताल।

दरअसल जब शेषन ने कहा कि मतदाता पहचान पत्र बने बिना मैं लोक सभा या विधान सभा के चुनाव नहीं होने दूंगा,उस पर प्रधान मंत्री से लेकर लगभग सारे दल शेषन पर खासे नाराज हो गये।किंतु पूर्व विधायक अश्विनी शर्मा ने कहा कि ‘‘फर्जी वोटिंग कराने वाले ही पहचान पत्र का विरोध कर रहे हैं।क्योंकि चुनावों में 95 प्रतिशत मतदान केंद्रों पर बोगस मतदान होता है। सिर्फ 20-25 प्रतिशत मतदाता ही मतदान केंद्रों पर जाते हैं।’’

उन दिनों एक कहावत चली थी--‘‘राज नेता सिर्फ दो लोगों से डरते हैं--‘‘एक भगवान और दूसरे शेषन से।’’

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चुनावी कदाचार भारत को बोस्निया बना देगा

  ---टी.एन.शेषन

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शेषन को काबू में लाने के लिए केंद्र सरकार ने एक सदस्यीय चुनाव आयोग को तीन सदस्यीय बना दिया था।

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सिस्टम से उनकी लड़ाई के संदर्भ में शेषन ने कहा था कि कानून का शासन मेरा एकमात्र धर्म है।

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शेषन के खिलाफ और पक्ष में कई  बातें तब सुनी गई थीं।

1.-प्रधान  मंत्री राजीव गांधी की कार के साथ 10 मील तक पैदल दौड़े थे शेषन।तब वे कैबिनेट सचिव थे।

2.-एक दफा संवाददाताओं से बातचीत करते हुए शेषन ने कहा कि ‘‘मैं अमिताभ बच्चन की तरह चर्चित हूं।’’

3.-पूर्व चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने कहा कि शेषन ने आयोग को सशक्त बनाया।(--प्रभात खबर, 12 नवंबर 2019)

4.-मुख्य चुनाव सुनील अरोड़ा ने कहा था कि टी.एन.शेषन हमारी प्रेरणा के स्रोत हैं।

5.-जब राज्य सभा में चुने जाने के लिए वित्त मंत्री मनमोहन सिह ने असम के दिसपुर विधान सभा क्षेत्र के मतदाता के रूप में अपना नाम दर्ज करवाया तो शंेषन ने उस पर जांच बैठा दी।कहा कि वे तो सामान्यतः दिल्ली में रहते हैं न कि असम में।

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19 अगस्त 25


 कहीं देर न हो जाये !!

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इस देश के लोकतंत्र,अखंडता और संविधान के पक्षधरों और 

इसके गैर पक्षधरों को जितनी जल्द पहचान लीजिएगा,उतना 

अधिक आप सुरक्षित रहिएगा।

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सुरेंद्र किशोर

इस देश के कौन- कौन राजनीतिक दल और नेता प्रतिबंधित पाॅपुलर फ्रंट आॅफ इंडिया और बांग्ला देशी-रोहिग्या घुसपैठियों के विरोधी है ?

किन -किन दलों ने इन दो तत्वों के खिलाफ बयान दिए हैं ?

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किन- किन दलों ने पी.एफ.आई. और घुसपैठ की 

समस्याओं पर चुप्पी साध रखी है ?

या,कौन -कौन दल इनका घुमा-फिरा कर समर्थन और बचाव करते रहते  हैं ?

या,उनसे सांठगांठ रखते हैं ?आपके लिए यह जान लेना कठिन नहीं है।

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चूंकि इस देश में आने वाला समय काफी कठिन संघर्षों वाला होने वाला है,इसलिए देश के हितचिंतकों और वोट बैंक के हित चिंतकों को अभी से पहचान लें।

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बांग्ला देशी-रोहिग्या घुसपैठ

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करोड़ों की संख्या में वे इस देश में आ चुके हैं।आज भी आ रहे हैं।

इससे इस देश में आबादी का अनुपात तेजी से बदल रहा है।

इस्लामिक प्रवचन कर्ता डा.जाकिर नाइक को आप यू. ट्यूब पर यह कहते सुन सकते हें कि भारत में हिन्दुओं की आबादी अब कुल आबादी का सिर्फ 60 प्रतिशत ही रह गई है।

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पी.एफ.आई.

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इस हथियारबंद प्रतिबंधित इस्लामिक संगठन पी.एफ.आई. ने यह घोषणा कर रखी है कि हम हथियारों के बल पर सन 2047 तक भारत को इस्लामिक देश बना देंगे।यह संगठन हथियारबंद कातिलों के दस्ते तैयार कर रहा है।

बांग्ला देशी -रोहिंग्या घुसपैठियों की संख्या जितनी अधिक बढ़ेगी

पी.एफ.आई.का काम उतना ही आसान होगा।भारत सरकार का काम उतना ही कठिन होगा।

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यह आरोप लगाया जा रहा है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का विरोध इसीलिए हो रहा है ताकि घुसपैठियों के नाम इस देश की मतदाता  सूची से चुनाव आयोग निकाल बाहर न कर सके।

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पश्चिम बंगाल में यह समस्या और भी गंभीर है।

वहां तो ममता बनर्जी घुसपैठियों के पक्ष में चट्टान की तरह खड़ी हैं।

वहां भी मतदाता पुनरीक्षण का काम होने वाला है।

वहां राष्ट्रपति शासन लगाये बिना चुनाव आयोग यह काम कर पाएगा या नहीं,यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

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17 अगस्त 25


 


रविवार, 10 अगस्त 2025

 हार का असली कारण पहचान तो ले कांग्रेस !

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अपने निधन के कुछ ही समय पहले मधु लिमये ने 

‘द हिन्दू’ में लेख लिख कर यह भोली उम्मीद पाली 

थी कि कांग्रेस ही देश को बचा सकती है।

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सुरेंद्र किशोर

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सत्ता पलट के तत्काल बाद बांग्ला देश में अगस्त , 2024 में हुई व्यापक सांप्रदायिक हिंसा और महिला उत्पीड़न 

का असर भारत के बहुसंख्यक मतदाताओं के वैसे हिस्से पर  

भी पड़ रहा है जो पहले भाजपा के वोटर नहीं थे।

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गत साल बांग्ला देश में जेहादियों के हाथों हिन्दू महिला-पुरुष की भीषण प्रताड़नाओं के दृश्य टी.वी.चैनलों पर देखने के बाद भारत के मतदाताओं के 

एक और हिस्से का मूड बदल गया लगता है।

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इसीलिए सन 2024 के लोक सभा चुनाव और बाद के कुछ विधान सभाओं के चुनावों के रिजल्ट में साफ फर्क दिखाई पड़ा--सिर्फ झारखंड को छोड़कर।यहां तक कि उप चुनावों पर भी बांग्ला देश का  असर रहा।

5 अगस्त, 2024 को बांग्ला देश में तख्ता पलट हुआ । वहां के जेहादी लोग  हिन्दुओं खास कर उनकी महिलाओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसक व पशुवत हो उठे।

जैसा मध्य युग में जेहादियों ने भारत में अत्याचार किए और जो कुछ सन 1990 में कश्मीर में हुआ,वही सब कुछ बांग्ला देश में हुआ और रुक रुककर अब भी हो रहा है।अब तो भारत के कुछ हिस्सों से भी ऐसी बर्बरताएं हो रही हैं जहां आबादी का अनुपात बदल गया है।

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आप पूछेंगे कि धर्म के नाम पर ऐसा अत्याचार तो सदियों से हो रहा है।अब अंतर क्या आया  है ?

अंतर यह हुआ कि बांग्ला देश में सन 2024 में हिन्दुओं के साथ हुए अमानवीय कुकृत्यों को भारत के लोगों ने खासकर हिन्दुओं ने अपने टी.वी.चैनलों पर अपनी आंखों से देखा।

  नब्बे के दशक में जो कुछ कश्मीर में हुआ था,उसके दृश्य तो लोगों ने टी.वी.चैनलों पर सजीव नहीं देखे थे। मध्य युग में हुए जेहादी अत्याचारों की कहानियों से संबंधित इतिहास को कांग्रेस सरकार ने इस तरह पेश किया ताकि मुगल शासक 

अधिक क्रूर न लगें।

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यहां तक कि नवंबर, 2024 में बिहार में  जिन चार विधान सभा सीटों पर उप चुनाव हुए,उन सभी चार सीटों पर राजग की जीत हुई।

 चार में से तीन सीटों पर सन 2020 में राजद-माले उम्मीदवार विजयी हुए थे।

बिहार में राजद-माले से कोई सीट छीन लेना कोई मामूली बात नहीं मानी जाती ।

नवंबर, 2024 में जिन कुछ अन्य राज्यों में विधान सभाओं के उप चुनाव हुए,उनमें भी अपेक्षाकृत काफी अधिक सीटें राजग को मिलीं,यहां तक कि यू.पी.में भी राजग ने कमाल किया जबकि 2024 के लोक सभा चुनाव में यू.पी.में राजग की बुरी तरह हार हुई थी।

इस फर्क को समझिए।

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ए.के.एंटोनी की सलाह को 

नजरअंदाज करने का नुकसान 

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सन 2014 के लोक सभा चुनाव में भारी पराजय के बाद सोनिया गांधी ने एंटोनी से कहा था कि आप चुनाव में कांग्रेस की हार के कारणों  पर रपट बनाइए।

  एंटोनी ने रपट बनाई।

 सोनिया जी को दे दिया।

उसमें अन्य कारणों के साथ- साथ यह भी लिखा गया था कि ‘‘मतदाताओं को, हमारी पार्टी अल्पसंख्यक (मुसलमानों)की तरफ झुकी हुई लगी जिसका हमें नुकसान हुआ।’’

पर कांग्रेस हाईकमान ने एंटोनी की इस बात को नजरअंदाज कर दिया।

   न सिर्फ नजरअंदाज कर दिया,बल्कि इस बीच काग्रेस अल्पसंख्यकों के बीच के अतिवादियों के साथ पहले से अधिक घुलमिल गई है।इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि कांग्रेस कभी पी.एफ.आई.और एस.डी.पी.आई.की हिंसक गतिविधियों की निंदा नहीं करती।पी.एफ.आई. का घोषित लक्ष्य है--हथियारों के बल पर सन 2047 तक भारत को इस्लामिक देश बना देना है। 

    पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी पी.एफ.आई.की महिला शाखा के समारोह में शामिल होने के लिए 23 सितंबर, 2017 में कोझीकोड गए थे ।

  पी.एफ.आई.के राजनीतिक संगठन एस.डी.पी.आई.का पिछले के पिछले कर्नाटका विधान सभा चुनाव में कांग्रेस से तालमेल हुआ था ।


दूसरी ओर, राहुल गांधी लोक सभा में कहते हैं--जो लोग खुद को हिन्दू कहते हैं ,वे लोग चैबीसों घंटे हिंसा हिंसा हिंसा।नफरत नफरत नफरत करते हैं।

अब आप ही बताइए कि यह भाषण सुनकर कोई बहुसंख्यक समाज क्या सोचेगा ??

खबर है कि केरल के अधिकतर मुस्लिम वोट पी.एफ.आई.के प्रभाव में है।संकेत है कि वहां कांग्रेस अगला विधान सभा चुनाव आसानी से जीत कर सरकार बना सकती है।

कांग्रेस पूरी तरह मुस्लिम वोट पर निर्भर हो गयी है।देश भर में इसकी प्रतिक्रिया तो स्वाभाविक है, केरल में चाहे जो हो। 

सोशल मीडिया के विस्फोट के इस दौर में गांव- गांव तक लोगों को मालूम होता रहता है कि कौन दल क्या कर रहा है और कौन दल क्या नहीं कर रहा है।कौन दल देश और उनके हक में है और कौन दल हक में नहीं है।

इसलिए चुनाव आयोग पर हमला करने मात्र से कांग्रेस का कोई भला होने वाला नहीं है।

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10 अगस्त 25

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पुनश्चः

अपने निधन के कुछ ही समय पहले मधु लिमये ने ‘‘द हिन्दू’’ में लेख लिखकर कहा था कि सुधरी हुई कांग्रेस ही इस देश को बचा सकती है।

 उनका आशय यह था कि कांग्रेस देश भर में फैली है और सेक्युलर छवि वाली है।सांप्रदायिक एकता कायम रख पाएगी। कांग्रेस से ऐसी भोली उम्मीद मधु लिमये ने की थी।

पर परलोक में संभवतः वे पछता रहे होंगे कि 

 उन्होंने गलत उम्मीद की थी।



सोमवार, 4 अगस्त 2025

 मणिशंकर कांग्रेस के शुभ चिंतक हैं या कांग्रेस 

विरोधी राजनीतिक दलों के छिपे दोस्त ?!

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सुरेंद्र किशोर

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  एक 

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  अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सम्मेलन स्थल पर किसी पत्रकार ने मणि शंकर अय्यर से नरेंद्र  मोदी की बात छेड़ दी।

 अययर ने कहा कि नरेंद्र मोदी 21 वीं सदी में किसी भी कीमत पर प्रधान मंत्री नहीं बन सकते।

हां,वे चाय का वितरण करना चाहें तो ए.आईसी.सी.परिसर में मैं उसका इंतजाम करा दूंगा।

 ---17 जनवरी 2014


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दो 

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सन 2015 में पाकिस्तान जाकर वहां के एक टी.वी.चैनल पर बोलते हुए मणिशंकर अय्यर ने पाकिस्तानियों से अपील की कि 

‘‘पहले आपलोग मोदी को हटाइए।’’

उस पर सन 2017 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने आरोप लगाया कि मणि शंकर अय्यर ने मेरे लिए पाकिस्तानियों को ‘सुपारी’ दी थी।

मुझे हटाने के लिए वे कह आए।हटाने से उनका मतलब क्या था ?

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तीन

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सन 1990 में मंडल आरक्षण आया था।

राजीव गांधी ने अपने मित्र मणिशंकर अय्यर से कहा कि कार्य समिति में पेश करने के लिए एक प्रस्ताव तैयार कर दीजिए।

तब के ‘इंडिया टूडे’ के अनुसार राजीव जी के लिए तैयार नेहरूवादी मणिशंकर के प्रस्ताव में आरक्षण का पूर्ण विरोध था।

बैठक में सीताराम केसरी तथा कुछ अन्य बड़े नेताओं के विरोध के बाद उस प्रस्ताव में बीच -बीच का रास्ता निकाला गया।

फिर भी उस पर पिछड़ों को लगा कि कांग्रेस अब भी नेहरू जी की राह पर है जो आरक्षण के कट्टर विरोधी थे।

नतीजतन अधिकतर पिछड़े कांग्रेस से निराश हो गये और क्षेत्रीय दल मजबूत हो गये।उसके बाद कभी कांग्रेस को लोक सभा में अपना बहुमत नहीं मिला।

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चार

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मणिशंकर अय्यर ने कहा कि भगवान राम के महल में 10 हजार कमरे थे।

आप कैसे पुख्ता तौर पर कह सकते हैं कि राम उसमें से किस कमरे में पैदा हुए थे ?

----8 जनवरी 2019

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   पांच

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‘‘प्रधान मंत्री राजीव गांधी पहले व्यक्ति थे जिन्होंने बाबरी मस्जिद स्थित राम जन्मभूमि का ताला सन 1985 में खोलवा दिया था।

इसलिए राम मंदिर निर्माण का श्रेय किसी और को नहीं लेना चाहिए।’’

--  कमलनाथ, पूर्व मुख्य मंत्री, मध्य प्रदेश,

--टाइम्स नाऊ डिजिटल,

   6 अगस्त, 20

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‘‘ताला खोलवाने में राजीव गांधी का कोई हाथ नहीं था।

राजीव गांधी को  तो ताला खोले जाने की जानकारी भी नहीं थी।

दरअसल ताला खोल देने के एक स्थानीय अदालत के निर्णय

के आधे घंटे के भीतर ही छल कपट के तहत हाथ की सफाई दिखाते हुए कुछ लोगों ने ताला खोल दिया।’’

    ----- मणि शंकर अय्यर,

             द हिन्दू-6 अगस्त 20

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छह

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गुजरात विधान सभा चुनाव से ठीक पहले मणिशंकर अय्यर  ने नरेंद्र मोदी को ‘‘नीच आदमी’’ कह दिया।

इन दो शब्दों को भंजा कर भाजपा ने गुजरात में अपनी बिगड़ी चुनावी स्थिति सुधार ली।

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सात

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10 दिसंबर, 2013 को मणिशंकर अय्यर ने कह दिया था कि सन 2014 का लोक सभा चुनाव कांग्रेस हार सकती है।

मनमोहन सिंह को 2009 में दुबारा प्रधान मंत्री नहीं बनाना चाहिए था।

हालांकि मणिशंकर ने प्रथम परिवार के खिलाफ एक शब्द भी  नहीं कहा जबकि मनमोहन सिंह अपने पूरे कार्यकाल में प्रथम परिवार की आज्ञा का ही पालन करते रहे।

जब शीर्ष नेता ही कह दे कि हम हार सकते हैं तो उसका तो और भी विपरीत असर उसके चुनावी भविष्य पर पड़ेगा।पड़ा भी। 

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आठ

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 मणि शंकर अय्यर और सलमान खुर्शीद ने अगस्त 2024 में ही यह कह दिया था कि जो कुछ बांग्ला देश में हुआ,वैसा भारत में भी हो सकता है।

   हाल में नागपुर में जो कुछ हुआ,वह बांग्लादेश की घटनाओं की ही झलक प्रस्तुत कर रहा था।

नागपुर में गृह युद्ध का माहौल बनाया गया था न कि किसी लोकतांत्रिक विरोध का।

नागपुर की ताजा घटना से बांग्लादेश का संबंध भी जुड़ा बताया जा रहा है।

बाकी बातें सलमान और अय्यर जांच एजेंसियों को बता सकते

हैं कि उनको कैसे पहले ही पता चल गया था ??

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अब मणि शंकर अय्सर का ताजा बयान पढ़िए

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‘‘मणिशंकर अय्यर ने पहलगाम आतंकी हमले पर मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि जिन 33 देशों में हमारे प्रतिनिधि मंडल भेजे गये थे,उन देशों में से किसी देश ने नहीं कहा कि पाकिस्तान जिम्मेदार है।

संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका ने भी पाकिस्तान को लेकर कुछ नहीं कहा।

हम ही है कि चिल्ला -चिल्ला कर कहते हैं कि पाकिस्तान जिम्मेदार है।

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 4 अगस्त 25



 



       


रविवार, 3 अगस्त 2025

 अपनी आंखों की सेहत के लिए स्क्रीन 

पर कम से कम समय दीजिए

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कतिपय सावधानियों के कारण 

मुझे अब तक मोतियाबिंद तक का भी 

आॅपरेशन नहीं कराना पड़ा है।इसलिए मुझे यह 

उपदेश देने का पूरा अधिकार है।

मेरी उम्र का आपको अंदाज होगा ही ।

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सुरेंद्र किशोर

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मूल सिद्धांत--कम से कम स्क्रीन टाइम !

क्योंकि मुझे अपनी आखें बहुत प्यारी हैं।

मैं कम्प्यूटर स्क्रीन पर तभी जाता हूं जब उस पर गए बिना मेरा काम नहीं चलता।

काम --यानी, रोजी-रोटी के लिए लेखन करने का काम।

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यदि कोई ऐसी सामग्री जो मेरे लेखन में मदद करेगी और वह स्क्रीन पर ही है यानी आॅनलाइन ही है तो मैं पहले उसका प्रिंट आउट निकालता हूं।

आप जानते ही हैं कि प्रिंट आउट निकालना कितना महंगा पड़ता है।पर आंखें तो अनमोल हैं।

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इन दिनों मुझे बड़ी मात्रा में दिन भर देश भर से कुछ न कुछ पठन सामग्री आती रहती है।उनके मैं सिर्फ हेडिंग पढ़ता हूं और उन्हें डिलीट कर देता हूं।यदि मेरे लेखन में काम आने लायक कोई चीज हो तो फिर उसका प्रिंट आउट ।

इसलिए जो लोग मुझे भेजते हैं ,वे यह न समझें कि मैं उसे पढ़ ही लूंगा।

क्योंकि मुझे अपनी आंखें प्यारी हैं।

अधिक स्क्रीन टाइम, यानी आंखों के कमजोर होते जाने के अधिक चांस !!!

अब आप ही फैसला करें ।मैं अपनी आंखें के साथ कैसा सलूक करूं ??

आप मुझे यह शुभ कामना दें कि आगे भी मुझे मोतियांिबंद तक का भी आॅपरेशन करना न पड़े।  

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2 अगस्त 25