Friday, February 26, 2016

राजबल्लभ जैसों को टिकट देने से तोबा करेंगे दल !

 विधायक राजबल्लभ यादव के खिलाफ राजद का कदम सराहनीय है। पर, क्या यह दल भविष्य में ऐसे विवादास्पद नेताओं को टिकट देना बंद करेगा ? क्या अन्य दल भी विवादास्पद लोगों का अपने दल में प्रवेश रोकेंगे ?

यदि कभी ऐसा हुआ तो फिर लोकतंत्र को शर्मिंदा होना नहीं पड़ेगा। याद रहे कि बदल रहे राजद ने बलात्कार के आरोप के कारण राजबल्लभ को पार्टी से निलंबित कर दिया है। गत माह अपेक्षाकृत हल्के आरोप में जदयू ने अपने विधायक सरफराज आलम को दल से निलंबित किया था।

 राज्य के शांतिप्रिय लोग, राजनीतिक दलों से इसी तरह की उम्मीद करते हैं।

 राजद की ताजा कार्रवाई का विशेष महत्व है। क्योंकि 1990 से 2005 तक के कालखंड में गंभीर आरोपों के बावजूद लालू प्रसाद का दल आम तौर पर कार्रवाई नहीं करता था।

 1995 में राज बल्लभ यादव का टिकट इसलिए कट सका था क्योंकि अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले उसी दल के एक महत्वपूर्ण नेता ने राज बल्लभ के खिलाफ अभियान चला दिया था।

  लालू प्रसाद बदल रहे हैं, ताजा कार्रवाई उसका सबूत है। इस बदलाव की सराहना होनी चाहिए ताकि और अधिक बदलाव हो। अब लालू प्रसाद चाहते हैं कि कानून को अपना काम करने दिया जाना चाहिए। इसी कार्यशैली पर पहले से नीतीश सरकार काम करती रही है।

यह और बात है कि लालू प्रसाद की बदली हुई कार्यशैली को अपनाने में राजद के मंझले और छोटे दरजे के कुछ नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों को कठिनाई हो रही है। राज बल्लभ यादव प्रकरण इसका नमूना है। अच्छा होगा यदि ऐसे अन्य राजदाई इस बात को समय रहते समझ लें। उन्हें यह याद रखना चाहिए कि इस सरकार के नेता नीतीश कुमार को सत्ता से अधिक अपनी छवि प्यारी है।

   सब जानते हैं कि विवादास्पद नेता और आदतन अपराधी राजनीतिक कार्यकर्ता कौन-कौन हैं। क्या घटनाएं घट जाने के बाद ही ऐसे लोगों को दल से निष्कासित या निलंबित किया जाएगा ?

 लालू और नीतीश कुमार के साझे वोट बैंक की ताकत अब इतनी बढ़ चुकी है कि  उनके प्रभाव क्षेत्रों में शायद ही कोई स्थानीय क्षत्रप राजद-जदयू की इच्छा के खिलाफ चुनाव जीत पाएगा। यदि दस-पांच जीत भी जाएं तो उससे राजद-जदयू  पर कोई फर्क नहीं पड़ सकता है।

  अब यह स्थिति बन गयी है कि जदयू और राजद स्वच्छ छवि के राजनीतिक कार्यकर्ताओं और नेताओं को भी टिकट देकर चुनाव जितवा सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो सामान्य अपराधों पर काबू पाने में भी सरकार को सुविधा होगी। साथ ही, जंगलराज का आरोप लगाने वालों की बोलती बंद हो जाएगी। हां, राजनीतिक विरोधियों के पास एक काम जरूर बच जाएगा। गैंगवार में ‘शहीद’ हुए बाहुबलियों के शवोंं पर रोने का काम।

(15 फरवरी, 2016 के दैनिक भास्कर,पटना से साभार)


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