गुरुवार, 5 मार्च 2026

 मुख्य मंत्री नीतीश कुमार को 

उनके जन्म दिन पर हार्दिक बधाई !

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सुरेंद्र किशोर

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सत्तर के दशक में नीतीश कुमार ने मुझसे कहा था कि

‘‘मैं एक दिन मुख्य मंत्री जरूर बनूंगा।

मुख्य मंत्री बनकर अच्छा काम करूंगा।’’

उस समय तक वे 1977 का अपना पहला विधान 

सभा चुनाव हार चुके थे।

मैं तब ‘आज’ अखबार में काम कर रहा था।

हमलोग कभी -कभी काॅफी हाउस में मिलते थे।

तब मैं उनके इस आत्म विश्वास पर कुछ अचम्भित और कुछ सशंकित था।

लगा था कि यह तो इनका बड़बोलापन है।

लेकिन नीतीश सही साबित हुए और मैं गलत।

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कहा तो था कि ‘‘अच्छा काम करूंगा’’, किंतु मुख्य मंत्री बन कर, कर दिए ‘‘बहुत सारे अच्छे काम।’’

(मैंने 1967 से अब तक बिहार के सारे मुख्य मंत्रियों को काम करते देखा है।इसलिए यह बात कहने की स्थिति में हूं।)

इसलिए भी नीतीश को डबल बधाई।

पर ,नीतीश कुमार का एक भटकाव भी रहा,हालांकि एक ही भटकाव।

प्रधान मंत्री बनने के लोभ में उन्होंने 

 राजग को दो बार छोड़ा।उन दिनों मुझसे पूछते तो मैं नीतीश जी को बताता कि कांग्र्रेस को सत्ता यदि मिलेगी भी तो वह आपको पी.एम.नहीं बनाएगी।वैसे तो मिलेगी नहीं क्योंकि देश अभी मोदी के साथ है।

आप तो किसी को ‘‘न तो बचाते हंै और न फंसाते हंै।’’

कांग्रेस को तो एक और मनमोहन सिंह चाहिए होगा।

  मेरे मित्र उदयकांत मिश्र ने नीतीश कुमार की जीवनी लिखी है।बहुत अच्छा लिखा है,उसमें सारी बातेें आ गई हैं।

 पर, एक खास कोण से नीतीश कुमार के बारे में अब भी लिखने की जरूरत है ताकि राजनीति में जो कुछ थोड़े से आदर्शवादी लोग मौजूद हैं या आना चाहते हैं, उन्हें प्रेरणा मिले।

वह कोण यह है कि इस ‘‘बीहड़’’ प्रदेश बिहार में ‘‘बहुत अच्छा काम’’ करने के सिलसिले में नीतीश कुमार को किन -किन परेशानियों-कठिनाइयों-बाधाओं-असुविधाओं आदि का सामना करना पड़ा और उन पर उन्होंने कैसे काबू पाया।क्या -क्या न कर पाने का अफसोस रहा ?

उस क्रम में कितनों की नाराजगी झेली।कितने खुश हुए।यदि नीतीश यह सब बातें बताना चाहंे तो ही।

 जाहिर हैं कि इस बारे में तभी कोई बात करना चाहेगा जब वह सब आॅफ द रिकाॅर्ड हो।वह भी तभी हो सकेगा जब शासकीय जिम्मेदारी के दौर मुक्ति पा ले। 

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नीतीश कुमार से मेरा परिचय उस समय से हैं जब वे पटना इंजीनियरिंग काॅलेज के प्रथम वर्ष के छात्र थे।तब मैं लेहियावादी पार्टी का एक सामान्य पर सिरियस कार्यकर्ता था।नीतीश जी पटना के मुसल्लहपुर हाट के जिस कृष्णा लाॅज में रहते थे,उनके कमरे के बगल वाले कमरे में मेरा छोटा भाई नागेंद्र रहता था ।वह पटना लाॅ कालेज में छात्र था।

कहीं से पटना आने पर मैं नागेंद्र के कमरे में रुकता था।तब देखा था कि लोहिया और लोहियावादी राजनीति में तब से ही नीतीश जी गहरी रूचि थी।

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नीतीश जी को इसलिए भी बधाई क्योंकि वे राजनीति व प्रशासन में ‘‘भ्रष्टाचार की आंधी’’ और ‘‘परिवारवाद के तूफान’’ के बीच भी अविचलित होकर इन दोनों बुराइयों से कोसों दूर रहे।यह विरल है। 

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आम तौर पर पत्रकार किसी नेता खासकर सत्ताधारी नेता को इस तरह बधाई नहीं देता।पर नीतीश कुमार ने बिहार के लिए विशेष काम किया और अपने राजनीतिक जीवन के प्रारंभिक वर्षों में आर्थिक परेशानियां उठाने के बावजूद राजनीति में वे डटे रहे,इसलिए भी बधाई।

सक्रिय राजनीति में तो मैं भी करीब दस साल (1967-76) तक  था।पर उन परेशानियों को मैं नहीं झेल सका।सक्रिय पूर्णकालिक राजनीति से पलायन कर गया। पत्रकारिता में आ पहुंचा।यहां कम से कम पहले ही दिन से दोनों शाम भोजन लायक पैसे का इंतजाम हो गया।राजनीति में तो वह भी सुविधा नहीं थी।कल्पना कर सकता हूं कि नीतीश जी ने अपने वैसे दिन कैसे काटे होेंगे !

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2 मार्च 26 

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