पद्म सम्मान लेने मैं राष्ट्रपति भवन इसलिए नहीं गया
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सुरेंद्र किशोर
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कई लोग यह सवाल पूछते रहे हैं कि मैं पद्म सम्मान लेने राष्ट्रपति भवन मैं क्यों नहीं गया था ?
वह अकारण नहीं था।उसका कारण मैं आपको पहली बार बताता हूं।
पद्म सम्मान की स्थापना के बाद पहली बार सन 2024 में बिहार में कार्यरत किसी बिहारी पत्रकार को,यानी मुझे यह सम्मान मिला-वह भी बिन मांगे।
मेेरी इसकी न तो कभी इच्छा रही और न ही मैंने इसके लिए किसी से याचना की।
मैंने अपने परिवार की खुशी के लिए इसे स्वीकार भी कर लिया।
मुझे मिला यह सम्मान बिहार की पत्रकारिता का भी सम्मान था।
एक ऐसे व्यक्ति को मिला जो अपने परिवार का पहला मैट्रिकुलेट हैं।किसान परिवार से आता है।गांव में पला-बढ़ा।घर में राम चरित मानस-आल्हा उदल पर पुस्तक के अलावा पढ़ने के लिए भी कोई पुस्तक उपलब्ध नहीं थी।
,न्यूज सेंस भी यही कहता है कि बिहार की मुख्य धारा की पत्रकारिता की ओर से मुझसे पूछा जाता कि यह उपलब्धि आपने कैसे हासिल की ?
मैं कुछ बताता ताकि पत्रकारिता की अगली पीढ़ी को प्रेरणा मिले और उन्हें भी कभी पद्म सम्मान मिले।
पर, देखा कि मुख्य धारा की पत्रकारिता की इस बात में कोई रूचि नहीं थी यानी न्यूज सेंस पर ‘‘भावना’’ हावी हो गयी थी।
कुछ उल्टी-सीधी बातें भी सुनीं।इसलिए मैंने सोचा कि राष्ट्रपति भवन जाकर किसी की ‘‘भावना’’ को और अधिक आहत क्यों करूं ?
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