अगली बार के लिए उम्मीदवार न बनाये जाने के
बावजूद हरिवंश जी की जुबान पर नीतीश कुमार
के लिए अब भी प्रशंसा के ही शब्द आपको मिलेंगे।
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मौजूदा राजनीति में यह विरल है।
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सुरेंद्र किशोर
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राज्य सभा या विधान परिषद के टिकट से वंचित हो जाने या अगली बार फिर से नामांकित न होने पर अधिकतर नेताओं को दलीय सुप्रीमो के खिलाफ कटु शब्दों का इस्तेमाल करते और दल से नाता तोड़ते हुए दशकों से मैंने अनेक उदाहरण देखे-सुने हंै।
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चूंकि हरिवंश जी का मित्र होने का मुझे गौरव हासिल है,इसलिए मैं कुछ वैसी बातें भी जानता हूं जो सार्वजनिक नहीं हैं।
हरिवंश जी इस बात से काफी एहसानमंद रहे हैं कि नीतीश जी ने उन्हें बिन मांगे दो -दो बार राज्य सभा का सदस्य बनवाया।
हां, सन 2022 में हरिवंश जी काफी धर्म संकट में थे जब नीतीश जी राजग छोड़कर कांग्रेसनीत गठबंधन मेें शामिल हो गये थे।धर्म संकट यह था कि खुद हरिवंश जी को राज्य सभा के उप सभापति पद को छोड़ देना चाहिए या नहीं।
संभवतः राजनीतिक दूर दृष्टि वाले उनके किसी मित्र ने हरिवंश जी को बताया होगा कि खुद नीतीश जी कांग्रेस गठबंधन में अधिक दिनों तक नहीं टिकेंगे।इसलिए आपको उप सभापति का पद छोड़ने की जरूरत नहीं है।
वही हुआ भी।
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कुछ संस्कारी लोग किसी का उपकार कभी नहीं भूलते।किंतु आज का यह जमाना ऐसा है कि मत पूछिए।
एक नमूना पेश है--
बिहार के भोजपुर इलाके के एक पूर्व एम.पी.से पूछा गया कि आप इस बार चुनाव कैसे हार गये ?
उनका जवाब था--
एक बड़े गांव के प्रभावशाली परिवार के चार बेरोजगार लड़कों को मैंने बारी -बारी से नौकरी दिलवाई।जब पांचवंे को नहीं दिलवाई तो वह परिवार मेरे खिलाफ हो गया और पूरे गांव का वोट हमारे विरोधी को दिलवा दिया।
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3 अप्रैल 26
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