संदर्भ --निशांत कुमार पर नई जिम्मेदारी
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सुरेंद्र किशोर
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कहावत है --‘‘आॅनेस्टि इज द बेस्ट पाॅलिसी’’
यह नहीं कहा गया है कि ’’आॅनेस्टि इज द बेस्ट वच्र्यू (गुण)।’’
आॅनेस्टि अपने साथ व्यक्ति में स्वयंमेव बहुत से गुण ला देती है।
क्या हुआ जो निशांत कुमार को शासन का अनुभव नहीं है।
उनके पास कठोर ईमानदारी की विरल पूंजी जो है।
वही पूंजी उन्हें सफल बनाएगी।
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जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने कहा है कि ‘‘निशांत कुमार को राजनीतिक अनुभव नहीं।उन्हें दांवपेच नहीं आता।’’
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इंदिरा गांधी सन 1966 में जब प्रधान मंत्री बनी थीं तो प्रतिपक्ष ने उन्हें
‘‘गूंगी गुड़िया’’ कहा था।
उन्हंे तब इतना भी नहीं मालूम था कि यदि स्पीकर कुछ बोल रहे हों तो प्रधान मंत्री भी सदन नहीं छोड़ सकता।प्रधान मंत्री इंदिरा जी ने सदन छोड़ दिया था तो उन्हें स्पीकर से उन्हें माफी मांगनी पड़ी थी।यह 1966 की ही बात है।
पर,बाद में इंदिरा जी ने अपने ढंग से राजपाट चलाया ही।यदि इंदिरा जी में कठोर ईमानदारी होती तो वह और अधिक सफल होतीं।
किसी ने किसी संदर्भ में उनसे एक बार कहा था कि आपके पिता जी ईमानदार थे।
इंदिरा जी ने जवाब दिया--‘‘मेरे पिता जी संत थे।मैं पाॅलिटिशियन हूं।’’
दूसरी ओर, सब जानते हैं कि निशांत कुमार में यह खास व विरल गुण है --यानी अपने पिता की तरह ही ईमानदारी और शालीनता।
जिस व्यक्ति में इतनी ईमानदारी है कि पिता के दशकों तक शीर्ष सत्तासीन रहने के बावजूद इस पुत्र निशांत पर कोई छोटा दाग भी नहीं लगा,वह व्यक्ति जिस किसी पद पर कभी जाएगा,अपने आसपास ईमानदार लोगों को ही रखेगा।
उनकी और उन सबकी ईमानदारी ही निशांत को सफलता दिलाएगी।क्योंकि आॅनेस्टि इज द बेस्ट पाॅलिसी।
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मैं लंबे समय तक शीर्ष पर सत्तासीन रहे देश के किसी अन्य ऐसे नेता
को नहीं जानता जिस मामले में
‘‘सत्ताधारी पिता’’ भी ईमानदार हो और ‘‘नेता पुत्र’’ भी ईमानदार हो।
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8 अप्रैल 26
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