बुधवार, 27 मई 2026

 



आर्थिक रूप से कमजोर पद्म अवार्डीज को मासिक मानदेय देने के बारे में

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गत फरवरी में प्रभारी मंत्री विजय चैधरी ने मानदेय देने का आश्वासन बिहार 

विधान परिषद में दिया था

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सुरेंद्र किशोर

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मुख्य मंत्री सम्राट चैधरी ने कल कहा  कि पद्म पुरस्कार पाने वालों ने अपने असाधारण योगदान से न केवल अपने क्षेत्र को गौरवान्वित किया ,बल्कि भारत की प्रतिभा,संस्कृति व सामथ्र्य को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाई।’’

  ‘‘भोजपुरी लोक संगीत की अमूल्य परम्परा को जीवंत रखने वाले भरत सिंह भारती,ख्यात कृषि वैज्ञाानिक स्व.डा.गोपाल जी त्रिवेदी तथा नृत्य गुरु स्व.विश्व बंधु जी को मिला सम्मान ,आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।’’

  ध्यान रहे कि ये तीन हस्तियां बिहार से रही हैं।

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इससे पहले गत 25 फरवरी, 26 को बिहार विधान परिषद में जदयू के नीरज कुमार ने पद्म अवार्डियों के लिए मासिक मानदेय देने का प्रावधान करने के लिए बिहार सरकार का ध्यानाकर्षित किया था।

ध्यानाकर्षण सूचना के जवाब में प्रभारी मंत्री विजय कुमार चैधरी ने सदन में  आश्वासन देते हुए कहा था कि ‘‘राज्य सरकार पद्म सम्मानित हस्तियों को मासिक मानदेय या आर्थिक सहायता देने पर विचार करेगी।’’

श्री चैधरी ने सदन में यह भी कहा कि उन पद्म आर्डियों ने बिहार का सम्मान बढ़ाया है तो राज्य सरकार भी उनके लिए यथायोग्य करेगी।

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याद रहे कि सन 2014 में सत्ता संभालने के बाद नरेंद्र मोदी सरकार ने आम तौर से प्रचार से दूर नेपथ्य में रह कर असाधारण काम करने वालों को भी जब पद्म सम्मान देना शुरू किया तो यह पता चलने लगा कि उनमें से कई अवार्डी  फटेहाल हैं और उनकी मासिक आय सरकार की न्यूनत्तम मजदूरी से भी कम है।

 पद्म सम्मानित व्यक्तियों को केंद्र सरकार कोई मासिक मानदेय नहीं देती।

किंतु उनकी फटेहाली को ध्यान में रखते हुए निम्न लिखित चार राज्य सरकारें मासिक मानदेय देती हैं--

1.-ओडिशा सरकार --30 हजार रुपए मासिक

2.-तेलांगना सरकार--25 हजार रुपए मासिक

(इसके अलावा 30 लाख रुपए एकमुश्त)

3.-हरियाणा सरकार--10 हजार रुपए मासिक

4.-छत्तीस गढ़ सरकार --10 हजार रुपए मासिक

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हिन्दुस्तान के रांची संस्करण में प्रकाशित समाचार के अनुसार ‘‘पद्म पुरस्कार विजेताओं को सम्मान राशि देगी झारखंड सरकार’’

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मोदी सरकार के सत्ता में आने से पहले आम तौर पर ऐसी हस्तियों को पद्म सम्मान दिए जाते थे जिन्हें गुजारे के लिए मानदेय की जरूरत नहीं पड़ती थी।

 2014 के बाद बिहार के जिन लोगों को पद्म अवार्ड मिले उनमें से कुछ को मैं व्यक्तिगत रूप से जानता हूं। कुछ ऐसे पद्मश्री अवार्डीज भी हैं जिनकी पक्की मासिक आय 5 हजार रुपए से भी कम है।ऐसे कई अन्य हस्तियां भी हो सकती हैं।इसलिए बिहार सरकार वैसे पद्म अवार्डीज को आर्थिक मदद करने पर विचार कर ही सकती है जो आयकर नहीं देते।

या फिर भारत सरकार ही इस दिशा में कोई कदम उठाये ताकि इस मामले में पूरे देश में समरुपता रहे।

क्योंकि यह जरूरी नहीं कि हर राज्य सरकार का इस मामले में दिल पसीजे ही।

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देश के कुछ विपन्न पद्म अवार्डीज की कहानियां--याद रहे कि पद्मश्री अवार्ड देश का चैथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।

कल्पना कीजिए जिसे आप इतना बड़ा सम्मान लायक समझते हैं,उनकी निजी आय न्यूनत्तम मजदूरी से भी कम हो !!

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ओड़िशा के ‘‘लोक कवि रत्न’’ हलधर नाग को सन 2016 में पद्म श्री अवार्ड लेने के लिए नई दिल्ली बुलाया गया तो लोक कवि ने केंद्र सरकार को लिख दिया--‘‘साहब,मेरे पास दिल्ली आने के लिए पैसे नहीं हैं। इसलिए अवार्ड को डाक से भिजवा दीजिए।’’

बाद में उनके जाने का प्रबंध हुआ और उन्होंने अवार्ड ग्रहण किया।

ऐसी घटना से द्रवित होकर ओड़िशा सरकार ने अपने राज्य के पद्म अवार्डियों को मासिक 30 हजार रुपए मानदेय देने का निर्णय किया। वह उन सब पद्म अवार्डियों को मिल रहा है जो ओड़िशा के निवासी हैं।

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सन 2022 में तेलांगना के पद्म सम्मानित  

दर्शनम मुगोलैया को जब वहां की राज्य सरकार ने हैदराबाद में मजदूरी करते पाया तो तेलांगना सरकार ने अपने राज्य के पद्म अवार्डियों के लिए मासिक 25 हजार रुपए मानदेय देना शुरू कर दिया।

साथ ही, उन्हें एकमुश्त 25 लाख रुपए भी दिये।

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इसी तरह हरियाणा और छत्तीस गढ़ की सरकारें अपने राज्य के साधनहीन पद्म आवार्डियों को मासिक मानदेय 10 हजार रुपए देती है।

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गत साल रांची से यह खबर आई कि 90 साल के पद्म श्री अवार्डी सिमोन उरांव पैरालिसिस अटैक के बाद बिस्तर पर हैं।उनके इलाज की उचित व्यवस्था नहीं हो पा रही है।बाद में उनका क्या हुआ,यह पता नही चल सका।

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इस बार जनवरी ,2026 में जिन लोगों को पद्म अवार्ड दिए जाने की घोषणा हुई,उनकी सूची वाली खबर के साथ प्रभात खबर ने सटीक हेडिंग लगाई थी 

‘‘गुमनाम चेहरे,असाधारण काम,सेवा से बनी पहचान।’’

इस सूची को भी सरसरी तौर पर देखने से लगता है कि संभव है इनमें भी कुछ मोगलैया,सिमोन उरांव और हलधर नाग हो सकते हैं।ऐसे लोगों की सुध कौन और कब लेगा ?यह पता लगाना केंद्र और राज्य सरकारों के लिए आसान होगा कि इनमें से कितने ऐसे अवार्डीज हैं जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं और जो आयकर नहीं देते।

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27 मई 26

 


  

 


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