Friday, November 27, 2015

महागठबंधन के दलों में सौहार्द से अच्छे संकेत



 
       
चुनाव रिजल्ट के बाद लालू प्रसाद, नीतीश कुमार के गले मिले।उन्होंने मुख्य मंत्री की ललाट पर  टीका लगाया और सौहार्दपूर्ण माहौल में यह घोषणा की कि मैं राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय होऊंगा और नीतीश जी सरकार चलाएंगे।
  मीडिया की उपस्थिति में राजद सुप्रीमो ने कहा कि महा गठबंधन विचारों और कार्यक्रम पर आधारित है।
 यदि हममें कोई मतभेद हुआ तो जनता हमें माफ नहीं करेगी ।
  सरकार चलाने में जदयू और राजद के बीच आने वाली
अड़चनों की आशंकाओं के बीच लालू प्रसाद की उपर्युक्त बातें आश्वस्त करती हैं।
लोगबाग यही उम्मीद कर रहे हैं कि बड़े जनादेश के बाद  नीतीश सरकार पहले से भी अधिक उत्साह से काम करेगी ताकि राज्य की गरीबी कम हो ।सन् 2005 में सत्ता में आने के बाद नीतीश सरकार ने जो समावेशी विकास और सुशासन का रास्ता चुना था,उस पर उनकी सरकार और भी तेज गति से दौड़े।
   2013 में  नीतीश कुमार का भाजपा से अलगाव हुआ और राजद से दोस्ती हुई।लालू और नीतीश की भिन्न राजनीतिक और प्रशासनिक  शैलियों को लेकर अनेक लोगों के दिलो दिमाग में सरकार की स्थिरता को लेकर आशंकाएं  निराधार  भी नहीं हैं।पर यह अच्छा हुआ कि लालू प्रसाद और नीतीश कुमार ने साझा प्रेस कांफंे्रस में इस आशंका को निराधार बताया।
  इससे उन लोगों को फिलहाल राहत मिलेगी जिसने नीतीश सरकार से सुशासन और विकास की दिशा में नये रिकाॅर्ड कायम करने की उम्मीद लगाई है।
  मुख्य मंत्री नीतीश कुमार ने भी ठीक ही कहा कि बिहार को आगे बढ़ाने के लिए
लोगों के मन जो आशाएं हैं,उनसे मैं अवगत हूं।
 हम उनकी उम्मीद के अनुरुप काम करेंगे।याद रहे कि महा गठबंधन ने साझा कार्यक्रम भी तय किया है।साथ ही मुख्य मंत्री के सात निश्चय भी हैं।
  कुल मिलाकर चुनाव के तुरंत बाद का  माहौल तो सकारात्मक है।रिजल्ट के बाद
भाजपा के नेताओं की  महागठबंधन के नेताओं के साथ फोन पर बातचीत भी हुई है।
अब केंद्र सरकार से यह उम्मीद की जाती है कि वह बिहार के पिछड़ापन को देखते हुए बिना राजनीतिक भेदभाव के इस राज्य की विशेष मदद करे।
 पर कतिपय राजनीतिक प्रेक्षकों के अनुसार महागठबंधन में शामिल दलों के बीच
और सरकार में उसी तरह का सौहार्द लंबे समय तक बनाये रखना एक बड़ी चुनौती होगी जिस तरह की भावना आज शीर्ष नेताओं के बीच  मीडिया के सामने देखी गई।इस मामले में राजद,जदयू और कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की जिम्मेदारी बढ़ गयी है।
  यदि बिहार को बढ़ते रहना है तो यह जिम्मेदारी तो उठानी ही पड़ेगी।
@ 8 नवंबर 2015 @  

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