इसलिए विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण
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क्योंकि लाखों बांग्ला देशी-रोहिंग्या घुसपैठियों के
बिहार में भी अवैध ढंग से मतदाता बन जाने की खबर
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सुरेंद्र किशोर
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देशभक्त सरकार देश भर में फैले करोड़ों अवैध बांग्ला देशियों-रोंिहंग्याओं की पहचान करके उन्हें इस देश से निकाल बाहर करने का व्यापक अभियान चला रही है।
सुप्रीम कोर्ट के वरीय वकील अश्विनी उपाध्याय के अनुसार इस देश में करीब आठ करोड़ घुसपैठिए अवैध ढंग से रह रहे हैं।उनके लिए यहीं के भ्रष्ट सरकारी कर्मी जाली कागजात बनवा देते हैं।उन्हें घुसपैठ कराने के काम में देश-विदेश के जेहादी तत्व सक्रिय हैं।विदेशी फंड आ रहा है।
आरोप है कि उन्हें सर्वाधिक मदद पश्चिम बंगाल सरकार से मिलती है।
ऐसा तो नहीं होगा कि घुसपैठिए अन्य राज्यों में मौजूद हैं किंतु बिहार में नहीं हंै।यहां भी पैसे लेकर उनके लिए मतदाता पहचान पत्र तैयार कर देना कोई मुश्किल काम नहीं रहा है।खबर है कि यह बड़े पैमाने पर हुआ है यहां भी।
चूंकि बिहार में जल्द ही विधान सभा चुनाव होने वाला है,इसलिए चुनाव आयोग का यह कत्र्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करे कि घुसपैठ करके आए और गलत ढंग से मतदाता बने लोग चुनाव में किसी क्षेत्र में निर्णायक भूमिका न निभा पाएं।
इसीलिए तो हो रहा है यह विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण।
यदि इस पुनरीक्षण अभियान के तहत किसी वाजिब मतदाता का नाम सूची से हटाया जाता है तो पीड़ित व्यक्ति या उसका प्रतिनिधि कोर्ट में जा ही सकता है।
गलत ढंग से नाम काटने का जो दोषी हो उसे सख्त सजा मिले।
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पुरानी है घुसपैठ की समस्या
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14 जुलाई, 2004 को गृह राज्य मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने संसद को बताया था कि पश्चिम बंगाल में घुसपैठियों की संख्या 57 लाख है।
अब एक अनुमान लगाइए।हाल के दशकों में पश्चिम बंगाल के कई जिले हिन्दू बहुल से मुस्लिम बहुल बन चुके हैं।वहां से हिन्दुओं को भगाया जा रहा है।मुर्शिदाबाद जिले से पलायन का उदाहरण ताजा है।बंगाल में समस्या बहुत गंभीर है।पर मीडिया डर के मारे वैसी खबरें नहीं दे रहा है।बिहार में भी घुसपैठ पर लिखने वालों को नब्बे के दशक में एक मंत्री ने सरेआम धमकाया था।
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नब्बे के दशक की बात है।
लोक सभा का चुनाव हो रहा था।
मैं पूर्वोत्तर बिहार के एक लोक सभा चुनाव क्षेत्र में वहां के प्रभावशाली उम्मीदवार के साथ क्षेत्र-भ्रमण कर रहा था।
मैं प्रेस संवादाता था।
पैदल चलते-चलते हम एक ऐसी जगह हम पहुंचे जहां दूर -दूर तक खेतों में बड़ी संख्या में झोपड़ियां थीं।
वे ताजी फूस की हाल में ही बनी थीं।
(बाद में पता चला कि उन झोपड़ियों में सैकड़ों बांग्ला देशी घुसपैठिए अवैध तरीके से बसाए गये थे।)
उस उम्मीदवार ने ही उन्हें वहां बसाने में मदद की थी।
उन्हें नाजायज तरीके से मतदाता भी बनवा दिया गया था।
उम्मीदवार के दल की ही तब केंद्र में सरकार थी।
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वह उम्मीदवार बारी -बारी से हर झोपड़ी के सामने जाता।नये बने मतदाता गण झोपड़ी से बाहर निकलते।उम्मीदवार जी उनसे सिर्फ एक ही बात कहते--
‘‘चिंता मत करना,यहां से तुम्हें कोई नहीं उजाड़ेगा।’’
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अब आप कल्पना कर लीजिए कि पूर्वोत्तर बिहार में अब तक कितनी बड़ी संख्या में बांग्ला देशी और रोहिंग्या घुसपैठिए अपनी जड़ें जमा चुके होंगे।
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ममता बनर्जी ने 4 अगस्त, 2005 को लोक सभा में यह आरोप लगाया कि वाम मोर्चा सरकार ने 40 लाख बांग्ला देशी मुस्लिम घुसपैठियों को अवैध ढंग से पश्चिम बंगाल में मतदाता बना दिया है।वे बांग्ला देश में भी मतदाता हैं।
ममता ने सदन में इस पर चर्चा की मांग की।बांग्ला देश और पश्चिम बंगाल की मतदाता सूचियां स्पीकर को सौंप दी।उनमें समान नाम दोनों सूचियों में थे।
जब अधिक बोलने की इजाजत नहीं मिली तो ममता ने लोक सभा की सदस्यता से सदन में ही इस्तीफा दे देने की घोषणा कर दी।
उससे पहले इस समस्या पर ममता सदन में ही रो पड़ी थीं।
पर ममता जब उन्हीं घुसपैठियों के बल पर सत्ता में हैं तो वह कहती हैं कि यदि उन्हें निकाला जाएगा तो खून की नदी बहेगी।गत 2022 में ममता बनर्जी ने घुसपैठियों से कहा कि जल्द मतदाता सूची में नाम दर्ज करा लो अन्यथा डिटंेशन सेंटर में जाना पड़ेगा।
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घुसपैठ की समस्या पर विचार करने के लिए संबंधित राज्यों के मुख्य मंत्रियों की नई दिल्ली में 28 सितंबर 1992 को उच्चस्तरीय बैठक हुई थी।
गृह मंत्री एस.बी.चव्हाण ने बैठक बुलाई थी।
उसमें पश्चिम बंगाल के मुख्य मंत्री ज्योति बसु ,असम के मुख्य मंत्री हितेश्वर सैकिया,बिहार के मुख्य मंत्री लालू प्रसाद,शामिल थे।अन्य दो राज्यों के भी मुख्य मंत्री थे।यह बैठक घुसपैठ से पीड़ित राज्यों की थी।
उस बैठक में यह निर्णय हुआ कि सीमावर्ती जिलों के निवासियों को परिचय पत्र सरकार देगी।घुसपैठ को बैठक में गंभीर समस्या माना गया।उसके हल के लिए ठोस कदम उठाने का निर्णय हुआ।लालू प्रसाद ने मांग की कि अवैध घुसपैठ रोकने के लिए कारगर उपाय किये जायें और घुसपैठियों को भारत में संपत्ति खरीदने से रोका जाये।
जाहिर है कि वोट बैंक के दबाव में इस बैठक के फैसले पर बाद में अमल नहीं हुआ।समस्या बढ़ती गई।
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और अंत में
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अब आज की पीढ़ी को यह तय करना है कि घुसपैठ को जारी रखा जाए या बंद किया जाये ?
यदि घुसपैठ समर्थक राजनीतिक तत्व मजबूत होंगे तो भारत को भी मुस्लिम बहुल देश में बन जाने मंे अधिक समय अब नहीं लगेगा।आजादी के बाद दो सौ जिले मुस्लिम बहुल बन चुके हैं।मुस्लिम देश बन जाने पर उन लोगों को उनकी अगली पीढ़ियां माफ नहीं करेंगी जो आज वोट के लिए घुसपैठियों का बचाव कर रहे हैं।या जो वैसे राजनीतिक तत्वों को ताकत पहुंचा रहे हैं।
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28 जून 20 25