आर्थिक संकट से जूझ रहे पद्मश्री अवार्डी
मोगलैया और सिमोन का ताजा हाल क्या है ?
---------------------
सुरेंद्र किशोर
--------------
इसी साल रांची से यह खबर आई थी कि ‘‘90 साल के पद्मश्री
अवार्डी सिमोन पैरालिसिस अटैक के बाद 2 साल से बिस्तर पर हैं।’’
उनका ताजा हाल क्या है ?
उन्हें इस बीच कहां -कहां से कैसी -कैसी मदद मिली ?
----------------------
गत साल मई में हैदराबाद से यह खबर आई थी कि गरीबी
की मार झेल रहे पद्मश्री अवार्डी मजदूर अब भी मजदूरी ही कर रहा है।
--------------------
हैदराबाद में बैठी राज्य सरकार ने उस मजदूर मोगलैया के लिए कुछ आर्थिक बंदोबस्त किया था।
पर, रांची वाले पद्म अवार्डी का क्या हुआ ?
----------------
यह अच्छी बात है कि मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में उन लोगों को सम्मानित करना शुरू किया है,जो आम तौर पर लीक से हट कर सिर झुका कर किसी प्रचार के बिना अपना काम कर रहे हैं।इस चयन मेें किसी अन्य ‘‘गुणों’’ का ध्यान नहीं रखा जा रहा है।
पर, मोदी सरकार को उन का ध्यान तो रखना ही चाहिए जिस किसी पद्म अवार्डी के समक्ष ‘‘रोज कमाओ रोज खाओ’’ वाली समस्या है।(याद रहे कि इन पंक्तियों के लेखक के सामने वैसी समस्या नहीं है।) तो सवाल है कि जब किसी गरीब पद्म अवार्डी का शरीर थक जाएगा तो उसका पद्म अवार्ड कौन सा काम आएगा ?
वह समाज में मजाक का वस्तु नहीं बन जाएगा ?
उसकी हालत हैदराबाद के दैनिक मजदूर दर्शनम् मोगलैया
या रांची के सिमोन की तरह नहीं हो जाएगी ?
कुछ लोग सवाल कर सकते हैं कि जिसे आप सम्मान पूर्ण ढंग से दो जून की रोटी नहीं दे सकते,भुखमरी के हालात में उसके लिए सर्वोच्च नागरिक सम्मान का कितना महत्व है ?(जबकि हमारे देश के पक्ष -विपक्ष के अनेक बड़े -बड़े और मझोले नेता तथा समाज के प्रभु वर्ग तक करोड़ों-अरबों में खेल रहे हैं।)
---------------
वैसे जो हो,पर मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद वैसी बड़ी हस्तियों को भी याद किया जिन्हें उन दलों ने ऐसा सम्मान नहीं दिया या फिर देने-दिलाने की कोई गंभीर कोशिश भी नहीं की, जिन दलों में उन हस्तियों ने अपना जीवन खपा दिया था।
कर्पूरी ठाकुर ,पी.वी.नरसिंह राव और चैधरी चैधरी सिंह इसके
ताजा उदाहरण हैं।इन्हें मोदी सरकार ने भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
सन 2019 में प्रणव मुखर्जी को भारत रत्न सम्मान मिल चुका है।
पद्म सम्मानों में भी ढूंढ़ने पर ऐसे उदाहरण आपको मिल जाएंगे जब मोदी काल में वैसे लोगों को भी ये सम्मान मिले हंै जो मोदी की पार्टी की नीतियों को मानने वाले नहीं थे।न ही किसी भाजपा नेता के लगुआ-भगुआ थे।
-------------
14 जून 25
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें