जैसे को तैसा !!
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सुरेंद्र किशोर
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अंग्रेज सन 1615 में याचक बन कर भारत आए थे।
तब भारत के बड़े हिस्से पर मुसलमानों का शासन था।
‘‘बांटो और राज करा’’े की रणनीति के तहत अंग्रेजों ने भारत पर कब्जा कर लिया था।
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कुछ समय पहले दुनिया के कई देशों से मुस्लिम शरणार्थी याचक बन कर ब्रिटेन गये थे।
अब ब्रिटेन की स्थिति यह बन गई है कि इस बात का अनुमान लगाया जा रहा है कि मुसलमानों का ब्रिटेन पर सन 2050 तक पूर्ण कब्जा हो जाएगा या उससे पहले ही !
ध्यान रहे कि मुसलमानों को ब्रिटेन के उस राजनीतिक दल का समर्थन हासिल है जो अभी सत्ता में है।
ब्रिटेन के मुसलमान सत्ताधारी दल को वोट देते हैं।प्रधान मंत्री स्टार्मर की पार्टी वहां बसे या अवैध ढंग से घुसे मुसलमानों को वही सब करने दे रही है जो काम खुद ब्रिटिशर्स ने कभी भारत में किया था।
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भारत की भी आज वैसी ही स्थिति बनती जा रही है।भारत में कई राजनीतिक दल ऐसे हैं जो करोड़ों घुसपैठियों तथा जेहादी मानसिकता वाले मुसलमानों को पाल -पोस रहे हैं,वोट के लिए।भारत के कुछ राजनीतिक दल तो सिर्फ मुस्लिम वोट के बल पर ही ताकतवर हैं।
नब्बे प्रतिशत भारतीय मुसलमान भारत के उन्हीं दलों को वोट देते हैं जो उनके मुख्य एजेंडा का घोषित या अघोषित रूप से समर्थन करते हैं।
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अब सवाल है कि भारत के उन राजनीतिक दलों को आप पहचानेंगे कैसे ?
मैं फार्मूला बताता हूं।
1.-भविष्य के खतरे से बचने के लिए उन राजनीतिक दलांे को
अभी से चिन्हित कर लीजिए जिन्होंने सन 2002 में हुए कार सेवक दहन कांड के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोला था।याद रहे कि जेहादियों ने 59 कार सेवाकों को टे्रन के डिब्बे में बाहर से पेट्रोल छिड़कर जिन्दा जला दिया था।
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2.-उन राजनीतिक दलों को पहचान लीजिए जो सांप्रदायिक दंगा होने पर हर बार एक ही पक्ष को दोषी ठहराते हंै।
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3.-जो राजनीतिक दल आपरेशन सिन्दूर के समय और
बाद में भी वैसे ही बयान देते रहे हैं जो बयान पाकिस्तान व भारत के जेहादी प्रवृति के मुसलमानों को अच्छा लगता है।
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4.-भारत में आजकल एक काफी मजबूत जेहादी संगठन पी.एफ.आई.(प्रतिबंधित)है।उससे जुड़ा राजनीतिक दल है एस.डी.पी.आई.।(उसका केरल के वायनाड लोस क्षेत्र में निर्णायक प्रभाव है।)
पी.एफ.आई.सन 2047 तक भारत को इस्लामिक देश बना देने के लिए कातिलों के हथियारबंद दस्ते तैयार कर रहा है।खबर है कि पी.एफ.आई.के इशारे पर ही इस देश के नब्बे प्रतिशत मुस्लिम किसी न किसी दल को आज वोट देते हैं।
(भाजपा सरकार ने यू.पी.के चर्चित रामपुर के मुस्लिम बहुल इलाके में सैकड़ों सरकारी घर बना कर मुसलमानों को बांटे।पर उसके बाद के चुनाव में वहां से एक भी वोट भाजपा को नहीं मिला।)
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5.-जो राजनीतिक दल बांग्ला देशी-रोहिंग्या घुसपैठियों का कभी विरोध नहीं करता,उससे अभी से सावधान हो जाइए।उन दलों के हाथों आपके बाल-बच्चों-वंशजों का जान,माल,भविष्य सुरक्षित नहीं है।
वैसे भारतीय राजनीतिक दलों को भी चिन्हित कर लीजिए जो सी.ए.ए. के विरोध में है।
जो एन.आर.सी.के विरोध में है।
जो वक्फ संशोधन कानून के विरोध में है।
जो सामान्य नागरिक संहिता के विरोध में है।
जो धारा -370 की वापसी के पक्ष में है।
आदि आदि
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और अंत में
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ब्रिटिश इतिहासकार सर जे.आर.सिली (1834-1895)ने लिखा है कि ब्रिटिशर्स ने भारत को कैसे जीता।
मशहूर किताब ‘द एक्सपेंसन आॅफ इंगलैंड’ के लेखक सिली की स्थापना थी कि
‘‘हमने (यानी अंग्रेजों ने) नहीं जीता,बल्कि खुद भारतीयों ने ही भारत को जीत कर हमारे प्लेट पर रख दिया।’’
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यदि सर सिली जिंदा होते तो लिखते कि ब्रिटेन में शरणार्थी बन कर आए मुसलमान ब्रिटेन
के एक वोटलोलुप राजनीतिक दल के सत्ता लोभ का फायदा उठा कर ब्रिटेन पर धीरे -धीरे कब्जा करते जा रहे थे।
(पिछली खबर के अनुसार लंदन सहित ब्रिटेन के सात नगर निकायों के मेयर पद पर अब मुसलमान हैं।
ताजा खबर पता नहीं क्या है ?
मशहूर पत्रकार शिवकांत अपने अगले किसी लेख में
बता सकते हैं।)
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भारत का हाल
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सुप्रीम कोर्ट के वरीय वकील अश्विनी उपाध्याय के अनुसार ‘‘भारत के 200 जिलों में अब हिन्दू अल्पसंख्यक हो चुके हैं।बांग्ला देशी-रोहिंग्या घुसपैठियों की संख्या अब यहां करीब 6 करोड़ है।’’
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मुर्शिदाबाद का पिछले दंगे में पी.एफ.आई.का हाथ बताया जा रहा है।कई राज्यों से दंगाई वहां पहुंचे थे।
डा.जाकिर नाइक को यह कहते हुए आप यूट्यूब पर सुन सकते हैं कि भारत में हिन्दुओं की आबादी अब सिर्फ 60 प्रतिशत रह गई है।
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7 जून 25
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