भारत सहित हर देश को यह अधिकार है कि वह
अपने यहां से अवैध घुसपैठयों को निकाल बाहर करे
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सुरेंद्र किशोर
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अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अवैध घुसपैठियों को चतावनी दे दी है कि
प्रदर्शनकारी नहीं मानेंगे तो हम उन्हें बुरी तरह मारेंगे।
इस उद्देश्य से ट्रम्प ने लाॅस एंजिलिस में सबसे खतरनाक कमांडो उतार दिया है।
ऐसा इसलिए संभव हो रहा है क्योंकि अमेरिका न तो भारत है और न ही यूरोप।
यूरोप के कई देशों के शांतिपिंय लोग शरणार्थियों-घुसपैठियों के प्रति नरमी दिखा कर अब पछता रहे हैं।
खास कर जेहादी घुसपैठियों ने यूरोप के इलाका-दर इलाके पर कब्जा करना शुरू कर दिया है।
उधर अमेरिका को यह सब मंजूर नहीं है।वह यूरोप से सबक ले रहा है।
भारत तो मुस्लिम वोट लोलुप राजनीतिक दलों के कारण धर्मशाला बना हुआ है।
करीब 8 करोड़ अवैध घुसपैठिए भारत में हैं।उन्हें निकालने की मोदी सरकार कोशिश कर रही है।
पर, यह कोशिश नाकाफी है।
पता नहीं, इस देश का क्या होगा ?
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पुनश्चः
भारत के जो लोग घुसपैठियों को निकाल बाहर करने के ट्रम्प के प्रयास का विरोध कर रहे हैं,वे दरअसल भारत को कचरा बना रहे 8 करोड़ घुसपैठियों को यहां बनाये रखना चाहते हैं।
सत्तर के दशक में पश्चिम बंगाल की वाम सरकार की पुलिस ने मरीचझांपी में शरण लिये बांग्ला देशी हिन्दुओं को तो गोलियों से मार डाला।पर मुस्लिम घुसपैठियों के नामों को बड़े पैमाने पर अपने यहां की मतदाता सूचियों में दर्ज करवा दिया ।
जब सांसद ममता बनर्जी अवैध घुसपैठियों की विरोधी थीं तो उन्होंने लोक सभा के स्पीकर को पश्चिम बंगाल की और बांग्ला देश की मतदाता सूचियां सौंपी थीं।कई मतदाताओं के नाम दोनों देशों की मतदाता सूचियों में थे।
पर,अब तो ममता बनर्जी अवैध मुस्लिम घुसपैठियों की सबसे बड़ी संरक्षक बन चुकी हैं।कहती हैं कि निकाला जाएगा तो खून की नदी बहेगी।
यही प्रवृति इस देश का दुर्भाग्य है।ऐसे ही दुर्भाग्य से ट्रम्प अमेरिका को बचाना चाहता है।यूरोप तो नहीं बच पा रहा है।आगे -आगे देखिए भारत का क्या होने वाला है !
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11 जून 25
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