किसी ने ठीक ही कहा है--
‘‘दुश्मन बनाने के लिए जरूरी नहीं है कि किसी से लड़ाई
या गाली-गलौज ही की जाए।
बस तरक्की करते जाओ, ईष्र्या,द्वेष ,दुश्मनी का उपहार
मिलना शुरू हो जाएगा।’’
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