आतंक के खिलाफ कठिन हो रही लड़ाई
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सुरेंद्र किशोर
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जेहादी घुसपैठियों की संख्या और अधिक बढ़ा देने के लिए ही देश भर में तथाकथित सेक्युलर दल कर रहे मतदाता गहन पुनरीक्षण का विरोध
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उधर पूरे भारत में इस्लामिक शासन कायम करने के लिए जेहादियों ने युद्ध शुरू कर दिया है।दिल्ली का फिदाइन बम विस्फोट उसका ताजा नमूना है।
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बिहार में कांग्रेस तथा अन्य तथाकथित सेक्युलर दलों ने चुनाव से ठीक पहले मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण के काम का जोरदार विरोध किया था।चुनाव में बिहार के सजग मतदाताओं ने उन दलों को सबक सिखा दिया।बिहार के मतदाताओं ने यह समझ लिया था कि राजग विरोधी दलों की असली मंशा क्या है।
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अब तथाकथित सेक्युलर दल 12 राज्यों में जारी मतदाता पुनरीक्षण का विरोध कर रहे हैं। जानकार लोग बता रहे हैं कि इन तथाकथित सेक्युलर दलों को लगता है कि यदि अवैध मतदाताओं के नाम हट गए तो उनका अगला चुनाव जीतना कठिन हो सकता है।उन 12 राज्यों में से अधिकतर राज्यों के मतदाताओं को अब यह समझ में आ रहा है कि
पुनरीक्षण के विरोध के पीछे मंशा क्या है ?
दूसरी ओर, चुनाव आयोग पुनरीक्षण पर अमादा है।क्योंकि यह उनका संवैधानिक दायित्व है।यदि कुछ राज्य सरकारें यह काम आयोग को नहीं करने देगी तो चुनाव समय पर नहीं भी हो सकते हंैं।फिर तो वहां राष्ट्रपति शासन लागू हो जाएगा।
वैसे शासन में पुनरीक्षण भी हो जाएगा और स्वच्छ मतदान भी हो जाएगा।
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लेकिन घुसपैठियों के समर्थक दलों का वहां भी चुनावी भविष्य अनिश्चित हो सकता है जैसा बिहार में हुआ है।साफ संकेत हैं कि बिहार में गैर राजग दलों का सत्ता में आने का सपना ,अब सपना ही रहेगा।क्योंकि अगले पांच साल में मोदी-नीतीश की सरकारें मिलकर बिहार को कुछ और चमका देगी।
यदि बिहार की कानून -व्यवस्था यू.पी.की कानून व्यवस्था जैसी ही बना दी गयी तो बिहार में उद्योग भी लगेंगे।अभी बिहार में कानून-व्यवस्था सही नहीं है।बिहार में आए दिन अपराधी पुलिस को मारते और दौड़ाते हैं।
उधर यू.पी.में अपराधी पुलिस से भागते हैं।इसलिए यू.पी.में नये -नये उद्योग खड़े हो रहे हैं।
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पाकिस्तान में जेहादी मानसिकता वाले सेनाध्यक्ष को बहुत अधिक अधिकार दे दिए गए हैं ताकि वह भारत में ‘‘गजवा ए हिन्द’’ के काम को आगे बढ़ा सके।
पर हमारे देश के कुछ वोट लोलुप राजनीतिक दल यह नहीं चाहते कि देसी-विदेशी जेहादियों का सफलतापूर्वक इस देश में मुकाबला करने के लिए भारत सरकार को अधिक अधिकार मिले।
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और अंत में
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जिस तरह बिहार में प्रतिपक्षी दलों ने कई कारणों से अपने राजनीतिक पैरों में कुल्हाड़ी मार ली है,उसी तरह राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिपक्ष अगले चुनाव में कमजोर होंगे,यह भी संकेत है।
इसलिए भारत सरकार और संसद इस बीच ऐसे -ऐसे कानून बनाए और तरह -तरह के प्रबंध करे ताकि जेहादियों,फिदाइनों और गजवा ए हिन्द के लश्करों का सफलतापूर्वक मुकाबला किया जा सके।संविधान के अनुच्छेद-30 की समाप्ति उस दिशा में पहला कदम हो सकता है,यदि मौजूदा संसद में संभव हो !
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19 नवंबर 25
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