‘‘संतोषम परम सुखम’’
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‘‘समय से पहले और भाग्य से ज्यादा
कभी किसी को कुछ नहीं मिलता।’’
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मूुझे तो वह सब भी मिला जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
वह भी बिन मांगे और बिन चाहे।
मैंने सिर्फ काम किया,फल की कोई कामना नहीं की।न ही किसी से कोई याचना की।
मेरे साथ जो भी हुआ,उससे मेरा यह विश्वास पक्का हुआ कि ‘‘ईश्वर है’’जो न्यायप्रिय भी है। तभी तो यह सब मेरे साथ हुआ।
अतएव, आज मैं एक संतुष्ट व्यक्ति हूं।
---सुरेंद्र किशोर
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23 नवंबर 2025
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