राबड़ी देवी सरकार के दौर में बिहार की कामकाजी महिलाओं के हक में ऐतिहासिक फैसला हुआ था।ऐसा फैसला इटली की महिला प्रधान मंत्री भी नहीं कर पा रही हंै।
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सुरेंद्र किशोर
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मुख्य मंत्री राबड़ी देवी के शासन काल (1997--2005)में बिहार में महिलाओं के हित में एक ऐसा काम हुआ जो काम इटली में भी अब तक नहीं हो पाया है जबकि वहां की प्रधान मंत्री महिला हैं।यूरोप के स्पेन में ऐसी सुविधा है।
वह है सरकारी सेवा में कार्यरत महिलाओं के लिए हर माह पीरियड के दौरान दो दिनों की सवैतनिक छुट्टी देने का काम।
मेरी पत्नी तब सरकारी स्कूल में नौकरी कर रही थी।राबड़ी देवी के उस काम को वह अब भी सराहना के भाव से याद करती है।
अपने देश के कर्नाटका जैसे विकसित राज्य में यह काम पहली बार इसी साल अक्तूबर में संभव हो सका।
किंतु सिर्फ एक दिन की छुट्टी का फैसला हुआ।
यह फैसला करने से पहले वहां के मुख्य मंत्री को चाहिए था कि वे अपनी पत्नी से पूछ लेते कि वैसी छुट्टी एक दिन की होनी चाहिए या
दो दिनों की ?
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इस देश के अन्य किस राज्य में ऐसी छुट्टी महिला सरकारी कर्मियों को दी जाती है,यह जानकारी मेरे पास नहीं है।
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बिहार में महिला पेेंशन--1100 रुपए।
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इस चुनाव कवरेज के लिए राज्य के कोने -कोने में गए संवाददाताओं को पेंशन प्राप्त कर रही बुजुर्ग महिलाओं ने यही कहा--
‘‘मेरा बेटा तो मुझे निजी खर्च के लिए 5 रुपए भी नहीं देता।पर मोदी-नीतीश ने 11 सौ रुपए का प्रबंध कर दिया।मेरा बेटा तो मोदी -नीतीश है।’’
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और अंत में
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डा.राम मनोहर लोहिया कहा करते थे कि हर जाति -समुदाय की महिलाएं पिछड़ी और उपेक्षित होती हैं।इसलिए हमारे साठ प्रतिशत आरक्षण वाले फार्मूले में हर जाति-समुदाय की महिलाएं भी शामिल हैं।उनका नारा था--‘‘संसोपा ने बांधी गांठ,पिछड़े पावें सौ में साठ।’’
कर्पूरी सरकार ने 1978 के रिजर्वेशन में हर जाति-समुदाय की महिलाओं के लिए जगह बनाई थी।पर मंडल आरक्षण लागू करते समय लालू प्रसाद सरकार ने 1993 में अति पिछड़ा-महिला- आदि के कर्पूरी फार्मूले को समाप्त कर दिया।
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12 नवंबर 25
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