शनिवार, 1 नवंबर 2025

 मतदाताओं के प्रति राजद-कांग्रेस 

के बदले हुए रुख

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सुरेंद्र किशोर

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तब 

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राजद जब सत्ता में था तो उसके शीर्ष नेता कहा करते थे--

‘‘विकास से वोट नहीं मिलते।सामाजिक समीकरण से वोट मिलते हैं।’’

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और अब 

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अब राजद के नेता मतदाताओं से विकास-कल्याण

के वायदों की झरी लगा रहे हैं।

क्योंकि अब सिर्फ सामाजिक समीकरण से सत्ता नहीं मिल रही है।अब तो ‘‘वाई.श्रेणी’’ के अनेक नौजवान भी टी.वी.चैनलों पर यह कहते अब सुने जा रहे हैं कि हमें भी शिक्षा -विकास चाहिए। अब लाठी घुमावन से काम नहीं चलेगा।

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तब 

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कांग्रेस के नेतृत्व ने आजादी के बाद से ही वोट बैंक की राजनीति शुरू कर दी थी।उससे ताकत पाकर सवर्णवाद जमकर चलाया।

काग्रेस को जब तक पूर्ण बहुमत मिलता रहा,न तो किसी गैर सवर्ण को प्रधान मंत्री बनाया और न ही बिहार में किसी गैर सवर्ण को मुख्य मंत्री बनाया।

यहां तक कि जवाहर लाल नेहरू चाहते थे कि राष्ट्रपति,प्रधान मंत्री और उप राष्ट्रपति तीनों प्रमुख पदों पर एक ही जाति के नेता बैठें।

खुद प्रधान मंत्री थे ही।उप राष्ट्रपति के पद के लिए 

डा.राधाकृष्णन का नाम तय था।

नेहरू ने सी.राज गोपालाचारी को राष्ट्रपति बनाने की जिद्द कर दी जबकि राजा जी ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन का सख्त विरोध किया था।

कांग्रेस पार्टी की बैठक में नेहरू ने कह दिया कि यदि राजा जी को राष्ट्रपति नहीं बनाया जाएगा तो मैं प्रधान मंत्री पद से इस्तीफा दे दूंगा।पर उनकी यह धमकी भी काम नहीं आई।सरदार पटेल की जिद्द थी कि राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद बनें।और वह काम होकर रहा।  

यहां तक कि 1990 में राजीव गांधी ने मणि शंकर अय्यर की सलाह पर मंडल आरक्षण का विरोध कर दिया।जबकि, आरक्षण संविधान सम्मत था।

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एक अति के बाद कांग्रेस अब 

दूसरी अति की ओर

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अब किसी ‘‘अदृश्य शक्ति’’ के उकसावे पर कांग्रेस ने अपनी

रणनीति बनाई है--रणनीति यह है कि हिन्दुओं को बांटकर पिछड़ों का तुष्टिकरण करो।हिन्दू सांप्रदायिकताका खतरा दिखाओ।

उधर मुसलमानों के बीच के जातिवाद की चर्चा तक मत करो

अन्यथा मुसलमान मतदाताओं में फूूट पड़ जाएगी।‘‘जेहादी हिंसा’’और गजवा ए हिन्द शब्दों को जुबान पर भी मत लाओ।

मुसलमानों की एकता और हिन्दुओ में फूट का लाभ कांग्रेस को तेलांगना -कर्नाटका जैसे राज्यों में गत चुनाव में मिला भी।

कांग्रेस चाहती है कि पसमांदा,अजलाफ,अरजाल या अशरफ शब्दों का उच्चारण तक नहीं हो।

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क्या बिहार के मतदातागण राजद -कांग्रेस के इस बदले हुए रुख-रवैए  को विश्वसनीय मानकर उन्हें वोट देंगे ?पता नहीं।

आगे-आगे देखिए होता है क्या ?

यह भी एक राजनीतिक प्रयोग ही है।

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1 नवंबर 25

 


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