बुधवार, 8 जुलाई 2026

 दिल्ली दंगे (2020) का मुआवजा

दंगाई देंगे या सरकार देगी ?

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2020 के शाहीनबाग धरने में शामिल गैर भाजपा 

दलों के नेता गण देश से अब भी माफी मांगेंगे ?

धरने से उपजी उत्तेजना ने 53 लोगों की जानें ले ली

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मुस्लिम वोट के लिए वे नेतागण इस झूठ के प्रचारक बन गए थे 

 कि सी ए ए से भारतीय मुसलमानों की नागरिकता चली जाएगी।

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सुरेंद्र किशोर

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नागरिकता संशोधन कानून यानी सी.ए.ए. के तहत पात्र लोगों को नागरिकता 

तो अब दी जा रही है ,

पर इस क्रम में किसी की नागरिकता नहीं ली जा रही है।

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नागरिकता कानून का सख्त विरोध करके ऊर्जावान प्रशांत किशोर ने

शुरू होने से पहले ही अपने राजनीतिक करियर को अनिश्चितता में डाल दिया।

प्रशांत जी, अब तो देश में एन.आर.सी.भी जल्द ही लागू हो सकता है

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नरेंद्र मोदी सरकार ने पहले ही कह दिया था कि नागरिकता संशोधन कानून से,

जो 2019 में पारित हुआ, भारत के किसी वास्तविक मुस्लिम नागरिक की नागरिकता नहीं जाएगी।

सी.ए.ए. के तहत लोगों को नागरिकता महीनों से दी जा रही है।

किसी की नागरिकता नहीं ली जा रही है।इसके बावजूद सन 2020 में शाहीन बाग धरने में 

शामिल हुए गैर भाजपा नेताओं ने देश से माफी नहीं मांगी।

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शाहीन बाग में आयोजित लंबे धरने से उत्पन्न भारी सांप्रदायिक तनाव के माहौल के 

कारण दिल्ली में सन 2020 में भीषण दंगे हुए जिसमंे 53 मरे,300 घायल हुए।

संपत्ति का भारी नुकसान हुआ।

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 कोर्ट में अब भी यह विवाद चल रहा है कि दिल्ली दंगा पीड़ितों को मुआवजा सरकार देगी या दंगा कराने वाले देंगे।अन्य कई मामलों में कोर्ट तोे कई बार फैसला दे चुका है कि दंगा कराने वाले ही मुआवजा देंगे।

2024 के लोक सभा चुनाव से पहले केरल में पी.एफ.आई.ने दंगा किया।तब वहां सी.पी.एम.की सरकार थी।

वहां के हाईकोर्ट ने सी.पी.एम.सरकार को निदेश दिया कि वह दंगाइयों से मुआवजा वसूले।सरकार के समक्ष मजबूरी हो गई।जब वसूली होने लगी तो पी.एफ.आई.-एसडीपीआई ने सीपीएम का

साथ छोड़कर कांग्रेस का साथ पकड़ लिया।

नतीजतन लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस को केरल की अधिकतर सीटें मिल गईं ।

 अब तो राज्य सरकार भी कांग्रेस के ही हाथों में है।याद रहे कि केरल के अधिकतर मुस्लिम वोटर पी.एफ.आई -एसडीपी आई के साथ रहे हैं।

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याद रहे कि प्रतिबंधित जेहादी संगठन पी.एफ.आई.ने ही परदे के पीछे रह कर 

सन 2020 में दिल्ली के शाहीन बाग में 

लंबे समय तक धरना कार्यक्रम चलाया।

धरना सी.ए.ए.(नागरिकता संशोधन कानून ) के खिलाफ था।उनकी मांग थी कि 

इस देश में एन.आर.सी.भी नहीं लागू होना चाहिए।

याद रहे कि पाकिस्तान में भी एन.आर.सी.है,पर भारत के जेहादी चाहते हैं कि भारत में नहीं हो ताकि वे घुसपैठ करा कर आबादी का अनुपात बदल दें और देर-सबेर भारत पर इस्लामिक शासन कायम कर लें।

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अधिकतर राजग विरोधी दलों ने उस चर्चित शाहीन बाग धरने का सक्रिय समर्थन किया।

चूंकि नीतीश कुमार के दल ने उस संशोधन कानून का संसद में समर्थन किया था,इसलिए उसके विरोध में प्रशांत किशोर जदयू से अलग हो गए।

 तब वे जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष थे।

क्या प्रशांत किशोर को धरने का असली एजेंडा का पता नहीं था ?

बिहार के जागरूक लोगों को तो पहले ही मालूम हो गया था।

इसीलिए 2025 के बिहार विधान सभा चुनाव में प्रशांत किशोर को कोई चुनावी सफलता नहीं मिली।

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सी.ए.ए.के विरोध के पीछे की असली मंशा जान लीजिए।

दरअसल भारत में सक्रिय जो जेहादी लोग यहां के हिन्दू-मुस्लिम की आबादी का अनुपात बदल कर भारत पर देर-सबेर कब्जा कर लेना चाहते हैं।(डा.जाकिर नाइक को यह कहते हुए मैंने यूट्यूब पर सुना कि भारत में अब 80 प्रतिशत हिन्दू नहीं हैं।सिर्फ 60 प्रतिशत रह गए है।

दूसरे मौलाना बता रहे थे कि हमने 2014 से अब तक  भारत में 20 लाख हिन्दुओं का धर्म परिवर्तन कराया हैं।हालांकि इस तथ्य की अभी पुष्टि होनी बाकी है।)

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि ‘‘पड़ोस के मुस्लिम देशों में उत्पीड़न के शिकार वहां के  अलपसंख्यकों को आश्रय देने की भारत की नैतिक जिम्मेदारी के लिए सी.ए.ए. जरूरी है।’’

अमित शाह के अलावा आजादी के तत्काल बाद शीर्ष कांग्रेसी नेताओं ने भी उन उत्पीड़ितों को  भारत में शरण देने का आश्वासन दिया था।

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2019 में कानून बनने के बाद यही बात भारत में सक्रिय जेहादियों को खल गई।वे उबल पड़े।उन्होंने देखा कि कितनी मेहनत से हम घुसपैठ कराकर ,धर्म परिवर्तन करा कर ,धमका कर,पैसे खर्च करके और लव जेहाद आदि के जरिए हिदुओं की आबादी का अनुपात घटा रहे हैं।दूसरी ओर, करोड़ों बाहरी लोगों यानी पाक,अफगानिस्तान,बांग्ला देश से आए गैर मुस्लिमों को यहां का नागरिक बनाकर हमारे किए कराए को मोदी सरकार प्रभावहीन बना रही है।

भारत के वोट लोलुप राजनीतिक दल तब शाहीन बाग के धरनार्थियों के समर्थन में आ गये थे।

ऐसा करके उन लोगों ने देश की नहीं बल्कि अपने वोट बैंक की चिंता की।पर,ऐसी ही चिंताओ के कारण वे दुबले होते जा रहे हैं क्योंकि हिन्दू जग रहे हैं।पूर्व सांसद अदीब ने हाल में कहा कि सेक्युलर दल अब हमारा साथ नहीं दे रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि साथ देने पर उन्हें हिन्दू लोग वोट नहीं देंगे।जबकि हमारी मस्जिदं और मजारें बड़े पैमाने पर उजाड़ी जा रही हैं।अदीब साहब ने यह नहीं बताया कि जो मस्जिदें-मजारें उजाड़ी जा रही हैं ,वे वैध जमीन पर हैं या अवैध जमीन पर !  

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शाहीन बाग धरने से उत्पन्न तनाव के कारण सन 2020 में दिल्ली में जो दंगे हुए,उनमें जो क्षति हुई,उसका विवरण यहां पेश है---

सन 1984 के सिख विरोधी दंगे के बाद का यह सबसे बड़ा दंगा था।

1.--53 मरे

2.-300 घायल

3.--122 घर जला दिए गए  

4.--200 कारें जला दी गईं

5.-300 मोटर साइकिलों में आग लगा दी गईं

6.--2  स्कूलों को तहस -नहस कर दिया गया

7.--4 धार्मिक स्थलों को जला दिया गया 

8.--4 फैक्ट्रियों को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया गया।

9.--5 गोदामों को लूट लिया गया 

10--369 एफ.आई.आर.दर्ज की गई

11.--903 गिरफ्तार किए गए

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(स्त्रोत--इंडिया टूडे हिन्दी)  

इस केस के सिलसिले में उमर खालिद और सरजिल इमाम अब भी जेल में हंै।

सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें जमानत देने से मना कर दिया है।

इसी से अपराध की गंभीरता समझ लीजिए।वे लोग नार्थ-ईस्ट को मुख्य भारत से अलग कर देने का हौसला बांध रहे थे।

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