एक निवेदन
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पुस्तक के लिए लेख मांगिए तो उसके छपने
पर काॅपी भी भेज दिया कीजिए
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सुरेंद्र किशोर
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मशहूर समाजवादी नेता रामानंद तिवारी पर एक पुस्तक छपी।उसके लिए मुझसे लेख मांगा गया।पता चला कि उस पुस्तक में मेरा लेख छपा भी।पर,मुझे पुस्तक आज तक नहीं मिली।
चूंकि बढ़ती उम्र के कारण मेरा घर से निकलना बहुत ही कम हो गया है,मेरे पास करने के लिए काम भी बहुत है,इसलिए मैंने खुद दौड़-धूप करके उस पुस्तक को नहीं खोजा।
क्या पुस्तक केे संपादक का यह कत्र्तव्य नहीं था कि उसकी एक प्रति लेखक तक वे भिजवा देते ?
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मान्यवर अली अनवर ने ‘‘बिहार की चैथी दुनिया’’ नाम से एक पुस्तक तैयार की।
वह पुस्तक 25 पत्रकारों के लेखन पर केंद्रित है।
उस पुस्तक के लिए मुझसे भी लेख मांगा गया था।मैंने भेजा भी था।
पर वह पुस्तक भी मुझे नहीं मिली।मेरा लेख उसमें शामिल है या नहीं,यह भी नहीं मालूम।यह शंका मुझे इसलिए हुई क्योंकि उस पुस्तक पर आधारित एक विवरण मशहूर पत्रकार सीटू तिवारी ने सोशल मीडिया के लिए लिखा।सुश्री तिवारी ने उस लेख में कुछ पत्रकारों के नाम भी दिए।पर,मेरा नाम नहीं दिया तो मुझे शक हुआ कि शायद उस पुस्तक में मेरा लेख शामिल न हो।
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खैर,आगे से मैं ऐसे मामले में सावधान रहूंगा ताकि मुझे बाद में
कोई अफसोस न हो।
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5 नवंबर 26
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