गुरुवार, 22 जनवरी 2026

 बिहार विधान सभा चुनाव नतीजों पर बिहार की 

त्रैमासिक पत्रिका ‘‘न्यूज हाट’’ का संग्रहणीय अंक

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सुरेंद्र किशोर

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गत बिहार विधान सभा चुनाव के नतीजों को लेकर बिहार की त्रैमासिक पत्रिका ‘‘न्यूज हाट’’ने अपने ताजा अंक में विस्तार से जानकारियां दी हैं।

इसलिए मेरे निजी संदर्भालय के लिए यह अंक (अक्तूबर-दिसंबर 2025)संग्रहणीय है।

  लोक सभा-विधान सभा चुनावों के नतीजों से संबंधित खबरों का भी मेरे यहां दस्तावेजीकरण होता रहता है।न्यूज हाट ने मेरा काम थोड़ा आसान कर दिया है।

सन 2025 के बिहार विधान सभा चुनाव पर कोई पत्रिका विशेषांक निकाले और उसमें प्रशांत किशोर की अलग से चर्चा न हो ,ऐसा कैसे हो सकता है ! प्रशंात किशोर पर प्रकाशित लेख का शीर्षक एकदम सटीक है--

‘फुस्स’ हो गये प्रशांत किशोर’

इस अंक में मेरा जो लेख छपा है,वह जेपी आंदोलन पर है।

खासकर 18 मार्च 1974 की ऐतिहासिक घटनाओं का विवरण है।संवाददाता के रूप में मैंने उस दिन यानी 18 मार्च 1974 को पटना के विभिन्न घटनास्थलों का दौरा किया था।

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21 जनवरी 26

  



बुधवार, 7 जनवरी 2026

 पत्रकार अमलेंदु भाई को

 भाव-भीनी श्रद्धांजलि

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सुरेंद्र किशोर

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अपने समय के जाने-माने पत्रकार अमलेंदु नारायण सिन्हा का

कल पटना स्थित उनके आवास पर निधन हो गया।

मेरी श्रद्धांजलि।

खुश मिजाज और प्रभावशाली व्यक्तित्व के धनी अमलेंदु भाई ने सन 

1973 में चर्चित राजेश्वरी हत्या कांड की खबर ब्रेक की थी।तब वे दैनिक 

‘सर्चलाइट’ में काम कर रहे थे।कमिश्नर स्तर के एक आई.ए.एस.अफसर की वह पत्नी थीं।उनकी रहस्यमय ढंग से हत्या कर दी गयी थी।

उस आरोप में अफसर एन.नागमणि जेल भी गये थे।पर, बाद में वे 

अदालत से दोषमुक्त करार दे दिए गए।

संवाददाता के रूप में अमलेंदु भाई के साथ मैं अक्सर प्रेस कांफे्रंसेज में शामिल हुआ करता था।

उनकी रपटें पढ़ता था।उस जमाने में अक्सर जूनियर पत्रकार अपने सिनियर से

कुछ -कुछ सीखा करते थे।जाहिर है अमलेंदु जी मुझसे वरीय थे।

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7 जनवरी 26

 


मंगलवार, 6 जनवरी 2026

मत चूको चैहान ! ------------ मुख्य मंत्री नीतीश कुमार की हरी झंडी के बाद ‘सम्राट-विजय’ को चाहिए कि वे अपराध-भ्रष्टाचार विरोधी अपने अभियान को और तेज, और सघन कर दें। -------------- सुरेंद्र किशोर ---------- इतिहास ने आप लोगों को जो मौका दिया है,उसे किसी बाहरी-भीतरी दबाव में आकर गंवा देने से न तो बिहार की जनता को फायदा है और न ही आपके राजनीतिक करियर को। ------------------------ बिहार के उप मुख्य मंत्री द्वय सम्राट चैधरी और विजय कुमार सिन्हा के क्रमशः अपराध-अतिक्रमण विरोधी और भ्रष्टाचार विरोधी अभूतपूर्व अभियानों से राज्य की शांतिप्रिय जनता इन दिनों गद्गद् है।उसे बेहतरी की उम्मीद बंधी है। इसे स्थायी खुशी में बदलने का भार इन दो युवा और उत्साही नेताओं पर है। इतिहास ने इन्हें सुनहरा मौका दिया है।अवसर उपलब्ध है तो आप मौके पर चैका लगाइए। इस बीच मुख्य मंत्री नीतीश कुमार ने कल कह ही दिया कि ‘‘सम्राट बहुत अच्छा काम कर रहे हैं और आगे बहुत दूर तक जाएंगे।’’ अब क्या चाहिए -------------- हांके भीम बढ़े चैगुना !! -------------- हनुमान की तरह अपनी ताकत पहचानिए।जनता साथ है तो सत्ता की ताकत के सामने कोई अन्य ताकत कारगर नहीं हो पाएगी। जो कर रहे हैं , उस ऐतिहासिक काम में चैगुना जोर लगा दीजिए। इतिहास में अपना नाम स्थायी तौर पर दर्ज करा दीजिए। आम लोगों को तो काम से मतलब है।उन्हें अपराध-भ्रष्टाचार-अतिक्रमण से राहत से मतलब है। अपनी मौजूदा पीड़ा दूर होने से मतलब है।अपवादों को छोड़कर वे जातपात नहीं देखते यदि नेता अच्छा काम कर रहा हो। -------------- इस देश में मौका मिलने पर चैका लगाने वाले नेताआंे में खुद नीतीश कुमार भी शामिल हैं। उन्होंने बिहार को बदल दिया। निहितस्वार्थ के चंगुल में फंसे बिना नीतीश ने राज्य का लगभग कायापलट कर दिया। उस काम को और बेहतर करने के लिए जरूरी है कि सड़कों पर से अतिक्रमण हटे। सरकारी आॅफिसेज में जारी भीषण भ्रष्टाचार दूर हो और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त खूंखार अपराधी भी यह महसूस करें कि जो काम योगी आदित्य नाथ यू.पी.में कर सकते हैं,वही काम बिहार का एक ‘‘सम्राट’’ भी करके लोगों का ‘‘हृृदय सम्राट’’ बन सकता है। बाबा तो यू.पी.में हृदय सम्राट बन ही चुके हंै। वहां के आम लोग खुश हैं।यहां तक कि मुस्लिम महिलाएं भी टी.वी.चैनलों पर कहती हैं कि बाबा के राज में हम अब रात-बिरात सड़कों पर निकल सकती हैं। आम लोग कहने लगे हैं कि अगला प्रधान मंत्री योगी को ही बनना चाहिए। ---------------- वी.पी.सिंह बाद में प्रधान मंत्री बने थे।पर जनता ने उन्हें पहले ही प्रधान मंत्री मान लिया था। क्योंकि वी.पी.ने भ्रष्टाचार के खिलाफ समझौता विहीन अभियान चला दिया था। नरेंद्र मोदी जब मुख्य मंत्री थे तभी उनके अच्छे कामों के कारण देश के अनेक लोग उन्हें पी.एम.पद पर देखना चाहते थे। राम जेठमलानी ने रजत शर्मा से बातचीत में तभी कहा था कि मैं देश में जहां भी जाता हूं लोग पूछते हैं--‘‘मोदी को प्रधान मंत्री कब बना रहे हो ?’’ --------------- जनसत्ता के संवाददाता के रूप में मैंने इस बात को जानने के लिए बिहार में व्यापक सर्वे करवाया था कि अगला मुख्य मंत्री आप किसको बनाना चाहते हैं ? तब के बिहार के मुख्य मंत्री भागवत झा आजाद के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान से लगभग 75 प्रतिशत जनता दोबारा आजाद जी को ही सी.एम.बनाना चाहती थी। क्योंकि आजाद जी ने कांग्रेस के निहितस्वार्थियों के कड़े विरोध को ठुकरा कर अपना सुधार अभियान जारी रखा था।आजाद ने ताकतवर सहकारी माफियाओं के होश ठिकाने लगा दिए थे। यदि कांग्रेस हाईकमान ने,जिसने कभी ईमानदार नेता को बरदाश्त नहीं किया ,आजाद जी को मुख्य मंत्री पद से हटाया नहीं होता तो बिहार के अगले मुख्य मंत्री भी दोबारा आजाद जी ही होते,ऐसा मुझे तब सर्वे से लग गया था। ---------- जैसा कि आम तौर से होता रहा है,मौजूदा बिहार राजग के कुछ नेता,कार्यकर्ता या कुछ निहितस्वार्थी लोग ईष्र्या वश या स्वार्थवश विजय-सम्राट की जोड़ी के इन अच्छे कामों के विरोधी होंगे। पर इस जोड़ी को भी जनहित में यह चाहिए कि वे आंतरिक विरोध को दबा दें या नजरअंदाज कर दें। उसके दबाव में नहीं आएं। तभी सम्राट चैधरी और विजय कुमार सिन्हा राज्य का पूरा भला कर पाएंगे जैसा कि वे करना चाहते हैं।ध्यान रहे, कोई काम अधूरा न रहे। सांप को घायल करके नहीं छोड़ा जाता। ------------------ 5 जनवरी 26

 मत चूको चैहान !

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मुख्य मंत्री नीतीश कुमार की हरी झंडी के बाद ‘सम्राट-विजय’ 

को चाहिए कि वे अपराध-भ्रष्टाचार विरोधी अपने 

अभियान को और तेज, और सघन कर दें।

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सुरेंद्र किशोर

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इतिहास ने आप लोगों को जो मौका दिया है,उसे किसी बाहरी-भीतरी दबाव 

में आकर गंवा देने से न तो बिहार की जनता को फायदा है और न ही 

आपके राजनीतिक करियर को।

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बिहार के उप मुख्य मंत्री द्वय सम्राट चैधरी और विजय कुमार सिन्हा के

क्रमशः अपराध-अतिक्रमण विरोधी और भ्रष्टाचार विरोधी अभूतपूर्व अभियानों से

राज्य की शांतिप्रिय जनता इन दिनों गद्गद् है।उसे बेहतरी की उम्मीद बंधी है।

  इसे स्थायी खुशी में बदलने का भार इन दो युवा और उत्साही नेताओं पर है।

इतिहास ने इन्हें सुनहरा मौका दिया है।अवसर उपलब्ध है तो आप मौके पर चैका लगाइए।

इस बीच मुख्य मंत्री नीतीश कुमार ने कल कह ही दिया कि ‘‘सम्राट बहुत 

अच्छा काम कर रहे हैं और आगे बहुत दूर तक जाएंगे।’’

अब क्या चाहिए 

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हांके भीम बढ़े चैगुना !!

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हनुमान की तरह अपनी ताकत पहचानिए।जनता साथ है तो सत्ता की ताकत 

के सामने कोई अन्य ताकत कारगर नहीं हो पाएगी।

जो कर रहे हैं , उस ऐतिहासिक काम में चैगुना जोर लगा दीजिए।

इतिहास में अपना नाम स्थायी तौर पर दर्ज करा दीजिए।

आम लोगों को तो काम से मतलब है।उन्हें अपराध-भ्रष्टाचार-अतिक्रमण

 से राहत से मतलब है।

अपनी मौजूदा पीड़ा दूर होने से मतलब है।अपवादों को छोड़कर वे जातपात नहीं देखते

यदि नेता अच्छा काम कर रहा हो।

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इस देश में मौका मिलने पर चैका लगाने वाले नेताआंे में खुद नीतीश कुमार भी शामिल हैं।

उन्होंने बिहार को बदल दिया।

 निहितस्वार्थ के चंगुल में फंसे बिना नीतीश ने राज्य का लगभग कायापलट कर दिया।

उस काम को और बेहतर करने के लिए जरूरी है कि सड़कों पर से अतिक्रमण हटे।

सरकारी आॅफिसेज में जारी भीषण भ्रष्टाचार दूर हो 

और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त खूंखार अपराधी भी यह महसूस करें कि जो काम योगी आदित्य नाथ यू.पी.में कर सकते हैं,वही काम बिहार का एक ‘‘सम्राट’’ भी करके लोगों का ‘‘हृृदय सम्राट’’ बन सकता है।

बाबा तो यू.पी.में हृदय सम्राट बन ही चुके हंै।

   वहां के आम लोग खुश हैं।यहां तक कि मुस्लिम महिलाएं भी टी.वी.चैनलों पर कहती हैं कि बाबा के राज में हम अब रात-बिरात सड़कों पर निकल सकती हैं।

आम लोग कहने लगे हैं कि अगला प्रधान मंत्री योगी को ही बनना चाहिए।

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वी.पी.सिंह बाद में प्रधान मंत्री बने थे।पर जनता ने उन्हें पहले ही प्रधान मंत्री मान लिया था।

क्योंकि वी.पी.ने भ्रष्टाचार के खिलाफ समझौता विहीन अभियान चला दिया था।

नरेंद्र मोदी जब मुख्य मंत्री थे तभी उनके अच्छे कामों के कारण देश के अनेक लोग उन्हें पी.एम.पद पर देखना चाहते थे।

राम जेठमलानी ने रजत शर्मा से बातचीत में तभी कहा था कि मैं देश में जहां भी जाता हूं लोग पूछते हैं--‘‘मोदी को प्रधान मंत्री कब बना रहे हो ?’’

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जनसत्ता के संवाददाता के रूप में मैंने इस बात को जानने के लिए बिहार में व्यापक सर्वे करवाया था कि अगला मुख्य मंत्री आप किसको बनाना चाहते हैं ?

तब के बिहार के मुख्य मंत्री भागवत झा आजाद के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान से लगभग  75 प्रतिशत जनता दोबारा आजाद जी को ही सी.एम.बनाना चाहती थी।

क्योंकि आजाद जी ने कांग्रेस के निहितस्वार्थियों के कड़े विरोध को ठुकरा कर अपना सुधार अभियान जारी रखा था।आजाद ने ताकतवर सहकारी माफियाओं के होश ठिकाने लगा दिए थे।

यदि कांग्रेस हाईकमान ने,जिसने कभी ईमानदार नेता को बरदाश्त नहीं किया ,आजाद जी को मुख्य मंत्री पद से हटाया नहीं होता तो बिहार के अगले मुख्य मंत्री भी दोबारा आजाद जी ही होते,ऐसा मुझे तब सर्वे से लग गया था।

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जैसा कि आम तौर से होता रहा है,मौजूदा बिहार राजग के कुछ नेता,कार्यकर्ता या कुछ निहितस्वार्थी लोग ईष्र्या 

वश या स्वार्थवश विजय-सम्राट की जोड़ी के इन अच्छे

कामों के विरोधी होंगे।

पर इस जोड़ी को भी जनहित में यह चाहिए

कि वे आंतरिक विरोध को दबा दें या नजरअंदाज कर दें।

उसके दबाव में नहीं आएं।

तभी सम्राट चैधरी और विजय कुमार सिन्हा राज्य का पूरा भला कर पाएंगे जैसा कि वे करना चाहते हैं।ध्यान रहे, कोई काम अधूरा न रहे।

सांप को घायल करके नहीं छोड़ा जाता।

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5 जनवरी 26 



सोमवार, 5 जनवरी 2026

 डा.राम मनोहर लोहिया की भविष्यवाणी

 सही साबित हो रही है

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सुरेंद्र किशोर

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डा.राम मनोहर लोहिया ने कहा था कि 

‘‘जो लोग राजनीति में हैं,उन्हें संपत्ति 

और संतति से दूर रहना चाहिए।’’

इसलिए कहा था क्योंकि डा.लोहिया जानते थे कि दूर नहीं रहने के

 कुपरिणाम भयानक होंगे।

शुरुआती पीढ़ी के समाजवादी नेतागण मधु लिमये,राजनारायण,

कर्पूरी ठाकुुर आदि  आदि

तो संपत्ति-संतति से दूर रहे।पर, बाद की पीढ़ियों के कई तथाकथित 

समाजवादी नेता इन मामलों में कांग्रेस से भी आगे निकल गये।

उसका कुपरिणाम कांग्रेस से लेकर अन्य दल आज भुगत रहे हैं।

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गांधी और लोहिया के नाम लेकर राजनीति करने वालों ने 

यदि लोहिया की चेतावनी पर ध्यान दिया होता,धन,जाति,संप्रदाय व 

परिवारवाद के मामलों में संयम रखा होता तो उन नेताओं 

और उनके दलों की आज जैसी दुर्दशा नहीं होती।

अयोग्य पारिवारिक उत्तराधिकारियों के कारण दल के दल बर्बाद हो रहे हैं।

जेहादी वोट बैंक के चक्कर में उनका जन समर्थन घट रहा है।संतति के 

लिए येन केन प्रकारेण देश-विदेश में अपार धन -संपत्ति एकत्र करने के लोभ में इस 

देश के अनेेक नेतागण गंभीर मुकदमे झेल रहे हैं।

उन मुकदमों के परिणामों से बचने का कोई उपाय भी नहीं है।

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यदि बांग्ला देश में हिन्दू संहार जारी रहा और भारत के लोग अपने टी.वी.सेटों 

पर उन निर्मम दृश्यों को देख-देखकर मध्य युग की कल्पना करते रहे तो

 जातीय-सांप्रदायिक वोट बैंक के सौदागर राजनीतिक दलों की 

बची-खुची ताकत भी देर-सबेर अब समाप्त ही हो जाएगी।

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5 जनवरी 26

  



रविवार, 4 जनवरी 2026

 अपने बहाने देश के लाखों पी.एफ.पेंशनधारियों

 की पीड़ा का प्रकटीकरण

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सुरेंद्र किशोर

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मेरी पी.एफ.पेंशन राशि जो सन 2005 में तय हुई,

वह राशि आज भी उतनी ही (1231 रुपए)

मुझे अनवरत मिल रही है।उसमें एक रुपए 

की भी कटौती नहीं की भारत सरकार ने।

क्या उसकी यह कम कृपा है मुझ पर ?!!

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मेरी पक्की आय 1231 रुपए मासिक ही है।यह पी.एफ.एफ.पेंशन

 योजना के तहत मुझे उपलब्ध है।

इसके अलावा अखबारों में लेख लिखकर या यदाकदा पुस्तक लेखन से 

कमाता हूं।

मैं केंद्र सरकार, पी.एफ.के कंेद्रीय न्यासी बोर्ड, केंद्रीय श्रम 

व वित्त मंत्रालय का आभारी हूं जिसने

इस 1231 रुपए की राशि में कभी कोई कटौती नहीं की।हां,यदि 

अवमूल्यन के कारण 2005 में 1231 रुपए की जितनी क्रय शक्ति थी,वह घट गई 

है तो इसमें केंद्र सरकार का भला क्या कसूर ?!

मुझे पेंशन 2005 से मिलती है।इस पेंशन योजना में बढ़ोत्तरी का 

कोई प्रावधान ही नहीं है।जिसने महंगी को ध्यान में नहीं रखा,बढ़ोत्तरी का प्रावधान नहीं किया,

उसका दिमाग कितना क्रूर होगा,उसकी कल्पना कर लीजिए।

यह योजना प्रधान मंत्री पी.वी.नरसिंह राव के शासन काल में 

शुरू हुई।यह संयोग नहीं है कि राव साहब ने ही सांसद क्षेत्र 

विकास फंड शुरू किया।उस फंड के बारे में केंद्रीय मंत्री जीतनराम 

मांझी ने हाल ही में बयान दिया है कि सभी एम.पी.-विधायक इस फंड 

में कमीशन लेते हैं।नरसिंह राव कितने दूरदृष्टि वाले नेता थे !!

अपने पेशेवालों का भला कर गये।

दूसरी ओर नरसिंह राव सरकार,जिसके वित्त मंत्री मनमोहन सिंह थे,यह 

 सरकार मानती थी कि कुछ लाख रिटायर कर्मचारियों को 

दिव्य भारतीय अपरिग्रही परंपरा के अनुसार अपने पर खर्च 

समय बीतने के साथ घटाते जाना चाहिए।या प्राचीन संतों की तरह वन में 

जाकर कंद-मूल खाकर गुजारा करना चाहिए।

यदि राव साहब सेवानिवृतों पर ही खर्च कर देते तो एक से एक घोटालों के जरिए 

अपने लोगों को उपकृत करने के लिए पैसे बेचारे कहां से आते ?

उनका अपना भी परिवार बहुत बड़ा था।उसकी भी राक्षसी साॅरी ‘‘राजसी इच्छाएं’’ थीं।

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पी.एफ.पेंशन में वृद्धि के लिए सन 2011 में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य व 

बिहार सरकार के पूर्व मंत्री डा.शकील उज्जमा अंसारी ने तब के केंद्रीय श्रम एवं 

रोजगार मंत्री मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखा था।

खरगे साहब ने एक रूटीन टाइप का जवाब दे दिया।

राज्य सभा के उप सभापति पद पर आसीन होने से पहले सदस्य के रूप में 

हरिवंश जी ने मेरे नाम का जिक्र करते हुए राज्य सभा में इस पेंशन में बढ़ोत्तरी 

की जरूरत के लिए जोरदार आवाज उठाई थी।

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पी.एफ.पेंशनर्स संघ के लोग इस संबंध में तो वर्षों से बढ़ोत्तरी के लिए 

संगठित रूप से आवाज उठाते रहे हैं।

पर नरेंद्र मोदी सरकार भी शायद यह चाहती है कि इस अनोखी पेंशन योजना 

का नाम गिन्नी बुक आॅफ वल्र्ड रिकाॅर्ड में शामिल हो जाये।शायद दुनिया की 

यह एक मात्र पेंशन योजना है जिसमें महंगी का ध्यान रखते हुए बढ़ोत्तरी का कोई 

प्रावधान ही नहीं है।ऐसा सिर्फ ऋषियों के देश भारत में ही

संभव है।

किसी ने मुझे बताया कि यदि आप ओड़िशा या तीन अन्य राज्यों में से किसी राज्य के मूल निवासी 

होते तो आपको पद्मश्री अवार्डी होने के नाते हर माह 30 हजार रुपए (ओड़िशा)का मानदेय मिल जाता।

  पर, यह भी पता चला कि बिहार के किसी पद्मश्री अवार्डी ने ऐसे ही मानदेय के लिए उप मुख्य मंत्री विजय कुमार सिन्हा से आग्रह किया था।उस पर सिन्हा साहब ने कहा कि पद्मश्री अवार्डी लोगों की निजी आय बहुत है।

जहां तक मेरी जानकारी है,कुछ लोगों के बारे में यह बात सच है।

पर जिस तरह के अभावग्रस्त लोगों को भी मोदी सरकार ने पद्म अवार्ड देना शुरू किया है,वैसे में विजय बाबू की बात अनेक अवार्डी पर लागू नहीं होती।

सन 2025 में बिहार के समाज सेवी सह पत्रकार भीम सिंह भवेश को पद्म सम्मान मिला।

भवेश जी की पक्की आय सिर्फ 3 हजार रुपए मासिक है।

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खैर,इन सब मामलों को मैं ज्यादा तुल नहीं देता।मैंने अपने लिए सन 1965 से ही निजी लाइब्रेरी खड़ी करनी शुरू कर दी थी।मैं जानता था कि पत्रकारिता का जीवन आर्थिक रूप से कोई संतोष देने वाला नहीं होगा।इसलिए रिटायर होने पर स्वतंत्र पत्रकार के रूप में लेखन करना होगा जो मैं कर रहा हूं।

उससे मेरी आय अच्छी-खासी हैं।क्योंकि मेरे पास जो लाइब्रेरी सह सदंर्भालाय है,उसमें 30 आलमारियों में सामग्री भरी पड़ी है।विषयवार कटिंग्स के सैकड़ों लिफाफे चार आलमारियों में भरे हुए हंै।संदर्भालय-पुस्तकालय-पत्रिका -लय के कारण 

लिखने में तथ्यों की भूल होने की गुंजाइश बहुत ही कम रहती है।इसलिए अखबार अब भी मुझे छापते हंै।

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पर, यह सब तभी तक,जब तक हाथ-पैर-आंखें सक्रिय हैं।यदि अंग काम देना बंद कर देंगे तो क्या होगा ??

तब तो ईश्वर ही सहारा होगा--सरकारें तो अपने दूसरे जरूरी-गैर जरूरी कामों मगन रही हैं और रहेंगी भी। 

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2 जनवरी 2025

    


शनिवार, 3 जनवरी 2026

 कैसे -कैसे नोबल विजेता ?

ऐसे -ऐसे नोबल विजेता !

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सुरेंद्र किशोर

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बांग्ला देश के नोबल विजेता मुहम्मद यूनुस (2006 के नोबल विजेता)के कारनामों से आप अच्छी तरह परिचित हो ही चुके हैं।

अब नोबल विजेता द्वय अमत्र्य सेन और अभिजीत बनर्जी से भी परिचित हो जाइए।

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अभिजीत बनर्जी (2019 का नोबल विजेता)

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 ‘‘चाहे यह भ्रष्टाचार का विरोध हो या भ्रष्ट के रूप में देखे जाने का भय,शायद भ्रष्टाचार अर्थ -व्यवस्था के पहियों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण था, इसे काट दिया गया है।

मेरे कई व्यापारिक मित्र मुझे बताते हैं निर्णय लेेने की गति धीमी हो गई है।.............’

--नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी,

हिन्दुस्तान और हिन्दुस्तान टाइम्स

23 अक्तूबर 2019

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यह कोई संयोग नहीं है कि बनर्जी राहुल गांधी के

करीबी रहे हैं।

अभिजीत बनर्जी ने ही राहुल गांधी को ‘‘न्याय योजना’’ शुरू करने की सलाह दी थी। 

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अमत्र्य सेन(1998 के नोबल विजेता)

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नोबल विजेता अमत्र्य सेन ने जनवरी, 2023 में कहा था कि ममता बनर्जी प्रधान मंत्री पद के लिए योग्य उम्मीदवार हैं।यह सुनकर ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी इच्छा मेरे लिए आदेश है।

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नोबल विजेता के ऐसा कहने का कारण

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 मुख्य मंत्री ममता बनर्जी यह भी कह चुकी हैं कि ‘‘विश्व भारती भूमि नाजायज कब्जा प्रकरण’’ मामले में मैं अमत्र्य सेन के साथ हूं।

याद रहे कि विश्व विद्यालय की 13 डिसमिल जमीन पर अवैध कब्जा का आरोप लगाते हुए गत 20 अप्रैल, 23 को विश्व भारती विवि ने जमीन खाली करने के लिए अमत्र्य सेन से कहा था।   

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याद रहे कि डायनामाइट के आविष्कारक अल्फ्रेंड नोबल ने नोबल पुरस्कार की स्थापना की थी।वे स्वीडेन के निवासी थे।

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1.-मुहम्मद यूनुस ने शेख हसीना के धर्म निरपेक्ष बांग्ला देश में डायनामाइट लगाया।

2.-अभिजीत बनर्जी ने नरेंद्र मोदी के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान में डायनामाइट लगाने की कोशिश की।

3.-अमत्र्य सेन ने जमीन पर अवैध कब्जा कर विश्व विद्यालय जैसे पवित्र स्थान की पवित्रता में डायनामाइट लगा दिया। 

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26 दिसंबर 25

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पुनश्चः

ध्यान रहे कि अमत्र्य सेन ने सी.ए.ए.का भी विरोध किया था।यानी इस मामले में वे भारत के जेहादियों के साथ थे।पी.एफ.आई.ने सी.ए.ए.के विरोध में दंगे किये थे। 

इससे पहले दुनिया की कई ऐसी राजनीतिक हस्तियों को भी शांति का नोबल पुरस्कार मिल गया था जिन पर आरोप लगा कि वे तो शंति को डायनामाइट लगाने का काम भी कर रहे थे। 

             

  

 


 अपने बहाने देश के लाखों पी.एफ.पेंशनधारियों

 की पीड़ा का प्रकटीकरण

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सुरेंद्र किशोर

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मेरी पी.एफ.पेंशन राशि जो सन 2005 में तय हुई,

वह राशि आज भी उतनी ही (1231 रुपए)

मुझे अनवरत मिल रही है।उसमें एक रुपए 

की भी कटौती नहीं की भारत सरकार ने।

क्या उसकी यह कम कृपा है मुझ पर ?!!

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मेरी पक्की आय 1231 रुपए मासिक ही है।यह पी.एफ.एफ.पेंशन

 योजना के तहत मुझे उपलब्ध है।

इसके अलावा अखबारों में लेख लिखकर या यदाकदा पुस्तक लेखन से 

कमाता हूं।

मैं केंद्र सरकार, पी.एफ.के कंेद्रीय न्यासी बोर्ड, केंद्रीय श्रम 

व वित्त मंत्रालय का आभारी हूं जिसने

इस 1231 रुपए की राशि में कभी कोई कटौती नहीं की।हां,यदि 

अवमूल्यन के कारण 2005 में 1231 रुपए की जितनी क्रय शक्ति थी,वह घट गई 

है तो इसमें केंद्र सरकार का भला क्या कसूर ?!

मुझे पेंशन 2005 से मिलती है।इस पेंशन योजना में बढ़ोत्तरी का 

कोई प्रावधान ही नहीं है।जिसने महंगी को ध्यान में नहीं रखा,बढ़ोत्तरी का प्रावधान नहीं किया,

उसका दिमाग कितना क्रूर होगा,उसकी कल्पना कर लीजिए।

यह योजना प्रधान मंत्री पी.वी.नरसिंह राव के शासन काल में 

शुरू हुई।यह संयोग नहीं है कि राव साहब ने ही सांसद क्षेत्र 

विकास फंड शुरू किया।उस फंड के बारे में केंद्रीय मंत्री जीतनराम 

मांझी ने हाल ही में बयान दिया है कि सभी एम.पी.-विधायक इस फंड 

में कमीशन लेते हैं।नरसिंह राव कितने दूरदृष्टि वाले नेता थे !!

अपने पेशेवालों का भला कर गये।

दूसरी ओर नरसिंह राव सरकार,जिसके वित्त मंत्री मनमोहन सिंह थे,यह 

 सरकार मानती थी कि कुछ लाख रिटायर कर्मचारियों को 

दिव्य भारतीय अपरिग्रही परंपरा के अनुसार अपने पर खर्च 

समय बीतने के साथ घटाते जाना चाहिए।या प्राचीन संतों की तरह वन में 

जाकर कंद-मूल खाकर गुजारा करना चाहिए।

यदि राव साहब सेवानिवृतों पर ही खर्च कर देते तो एक से एक घोटालों के जरिए 

अपने लोगों को उपकृत करने के लिए पैसे बेचारे कहां से आते ?

उनका अपना भी परिवार बहुत बड़ा था।उसकी भी राक्षसी साॅरी ‘‘राजसी इच्छाएं’’ थीं।

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पी.एफ.पेंशन में वृद्धि के लिए सन 2011 में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य व 

बिहार सरकार के पूर्व मंत्री डा.शकील उज्जमा अंसारी ने तब के केंद्रीय श्रम एवं 

रोजगार मंत्री मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखा था।

खरगे साहब ने एक रूटीन टाइप का जवाब दे दिया।

राज्य सभा के उप सभापति पद पर आसीन होने से पहले सदस्य के रूप में 

हरिवंश जी ने मेरे नाम का जिक्र करते हुए राज्य सभा में इस पेंशन में बढ़ोत्तरी 

की जरूरत के लिए जोरदार आवाज उठाई थी।

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पी.एफ.पेंशनर्स संघ के लोग इस संबंध में तो वर्षों से बढ़ोत्तरी के लिए 

संगठित रूप से आवाज उठाते रहे हैं।

पर नरेंद्र मोदी सरकार भी शायद यह चाहती है कि इस अनोखी पेंशन योजना 

का नाम गिन्नी बुक आॅफ वल्र्ड रिकाॅर्ड में शामिल हो जाये।शायद दुनिया की 

यह एक मात्र पेंशन योजना है जिसमें महंगी का ध्यान रखते हुए बढ़ोत्तरी का कोई 

प्रावधान ही नहीं है।ऐसा सिर्फ ऋषियों के देश भारत में ही

संभव है।

किसी ने मुझे बताया कि यदि आप ओड़िशा या तीन अन्य राज्यों में से किसी राज्य के मूल निवासी 

होते तो आपको पद्मश्री अवार्डी होने के नाते हर माह 30 हजार रुपए (ओड़िशा)का मानदेय मिल जाता।

  पर, यह भी पता चला कि बिहार के किसी पद्मश्री अवार्डी ने ऐसे ही मानदेय के लिए उप मुख्य मंत्री विजय कुमार सिन्हा से आग्रह किया था।उस पर सिन्हा साहब ने कहा कि पद्मश्री अवार्डी लोगों की निजी आय बहुत है।

जहां तक मेरी जानकारी है,कुछ लोगों के बारे में यह बात सच है।

पर जिस तरह के अभावग्रस्त लोगों को भी मोदी सरकार ने पद्म अवार्ड देना शुरू किया है,वैसे में विजय बाबू की बात अनेक अवार्डी पर लागू नहीं होती।

सन 2025 में बिहार के समाज सेवी सह पत्रकार भीम सिंह भवेश को पद्म सम्मान मिला।

भवेश जी की पक्की आय सिर्फ 3 हजार रुपए मासिक है।

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खैर,इन सब मामलों को मैं ज्यादा तुल नहीं देता।मैंने अपने लिए सन 1965 से ही निजी लाइब्रेरी खड़ी करनी शुरू कर दी थी।मैं जानता था कि पत्रकारिता का जीवन आर्थिक रूप से कोई संतोष देने वाला नहीं होगा।इसलिए रिटायर होने पर स्वतंत्र पत्रकार के रूप में लेखन करना होगा जो मैं कर रहा हूं।

उससे मेरी आय अच्छी-खासी हैं।क्योंकि मेरे पास जो लाइब्रेरी सह सदंर्भालाय है,उसमें 30 आलमारियों में सामग्री भरी पड़ी है।विषयवार कटिंग्स के सैकड़ों लिफाफे चार आलमारियों में भरे हुए हंै।संदर्भालय-पुस्तकालय-पत्रिका -लय के कारण 

लिखने में तथ्यों की भूल होने की गुंजाइश बहुत ही कम रहती है।इसलिए अखबार अब भी मुझे छापते हंै।

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पर, यह सब तभी तक,जब तक हाथ-पैर-आंखें सक्रिय हैं।यदि अंग काम देना बंद कर देंगे तो क्या होगा ??

तब तो ईश्वर ही सहारा होगा--सरकारें तो अपने दूसरे जरूरी-गैर जरूरी कामों मगन रही हैं और रहेंगी भी। 

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2 जनवरी 2025