पहलगाम के परिणाम !?
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भारतीय कश्मीर के कुछ जेहादियों में तो
सुधार परिलक्षित,क्या पाक और उसके
भारतीय पिट्ठू भी सुधरेंगे ?
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सुरेंद्र किशोर
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35 साल में पहली बार-पहलगाम आतंकी हमले के विरोध में जम्मू -कश्मीर में ऐतिहासिक बंद
----दैनिक भास्कर--24 अप्रैल 25
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पाक के रक्षा मंत्री ने स्वीकारा--दशकों से
आतंकवाद को हम दे रहे हैं समर्थन
--दैनिक जागरण--26 अपैल 25
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पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने यह भी कहा कि आतंकी संगठनों के पोषण और प्रशिक्षण का ‘गंदा काम’ 30 सालों से अमेरिका और पश्चिमी देशों के इशारे पर हमने
किया है।
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पहलगाम के जेहादी कत्लेआम के बाद कुछ फर्क दिखाई
पड़ने लगे हंै।क्या ये स्थायी भी साबित होंगे ?
फर्क पर एक नजर
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1.-पाकिस्तान में पहले से उठने लगा था एक सवाल--
आटा या जेहाद ?
2.-पाक को मिल रहे विदेशी पैसों के स्त्रोत सूखने लगे थे।
3.-इधर जम्मू कश्मीर में मोदी सरकार के कारण राजनीतिक-प्रशासनिक स्थिति कुछ बदली है।
4.-कश्मीर में पत्थर चलाने वालों के लिए अब बाहरी पैसे
उपलब्ध नहीं रहे।
5.-जम्मू कश्मीर में अपेक्षाकृत शांति के कारण पर्यटकों की संख्या बढ़ी।पर्यटकों से इस राज्य को हर साल करीब 25 हजार करोड़ रुपए का राजस्व मिलने लगा।
लोगों की आय बढ़ी।
नतीजतन जम्मू कश्मीर के जेहादी तत्व कमजोर पड़ने लगे।
पर,बाहरी जेहादी फिर भी सक्रिय।कुछ भीतरी जेहादी भी।पर आम कामकाजी लोग बढ़ते पर्यटन उद्योग से खुश हैं।
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नतीजतन
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पहलगाम में हुए आतंकी हमले के विरोध में 35 साल में पहली बार जम्मू कश्मीर में ऐतिहासिक बंद रहा।यह एक सकारात्मक
विकास है।
अधिकतर कश्मीरियों के इसी बदले हुए रुख को देखते हुए भारत के प्रतिपक्षी राजनीतिक दलों ने भी पहलगाम जेहादी हिंसा की निन्दा की।अन्यथा कुछ उल्टी सीधी बातें करते।
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नरेंद्र मोदी सरकार अब पाकिस्तान नामक मरीज का स्थायी इलाज करना चाहती है।यदि भारत सरकार ने देर-सवेर सिंधु नदी पर बांध का निर्माण कर पाकिस्तान को पानी के लिए बूंद- बूंद तरसा दिया तब क्या होगा ?
पाक ने धमकी दी कि वैसी स्थिति में युद्ध होगा (और हमारे पास परमाणु बम हंै।)
यदि पाक ने भारत पर बम गिराया तो भारत के कुछ इलाकों को जरूर नुकसान पहुंच सकता है।पर उसके बाद ?
भारत पाक के साथ क्या करेगा ?
अपने परमाणु बमों के जरिए पाक को दुनिया के नक्शे से भारत गायब कर सकता है।क्योंकि नरेंद्र मोदी और मन
मोहन सिंह की सरकारों में काफी फर्क है।
26 नवंबर 2008 को मुम्बई में पाक आतंकियों ने हमला करके 174 लोगों को मार डाला था। करीब 300 लोगों को घायल कर दिया।उसके बावजूद तब की कांग्रेस सरकार ने पाक के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया। क्योंकि उसे डर था कि वैसा कुछ करने पर आगामी लोक सभा चुनाव (2009)में कांग्रेस को मुस्लिम वोट नहीं मिलेंगे।
याद रहे कि मोदी सरकार को वैसी कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है।पहलगाम में 27 निर्दोष लोगों की कायरतापूर्वक निर्मम हत्या के बाद मोदी के रौद्र रुप और उनकी सरकार के ठोस कदमों से देश की आम जनता काफी खुश नजर आ रही है।
याद कीजिए। 2008 में जब बंबई में 174 लोगों को कसाब व कसाइयों ने मार डाला था तो उस समय तब के प्रधान मंत्री के चेहरे के कैसे हाव-भाव थे ?
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26 अपैल 25
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