कमजोर पंखोें से ऊंची
उडान इसलिए !
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जिन दलों के सत्ता में आने की उम्मीद नहीं है,वे भी अधिक से अधिक सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़ा करना चाहते हैं।
ऐसा इसलिए कि कम से कम टिकट के बदले उम्मीदवारों से
भारी चंदा मिल सके।
वे पैसे ‘‘सूखे दिनों में’’ दल के या नेता के काम आएंगे।
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याद रहे कि बिहार के एक मजबूत दल ने सन 2020 के विधान सभा चुनाव का टिकट 50 लाख से 1 करोड़ रुपए तक चंदा लेकर दिया।
वत्र्तमान के लिए एक करोड़ और पूर्व के लिए 50 लाख रुपए।
तब एक पूर्व विधायक से मैंने पूछा था-- चुनाव लड़ रहे हैं ?
उसने कहा था कि मेरे पास 50 लाख होते तो मैं जरुर लड़ता।
अपुष्ट खबर है कि इस बार उस दल ने रेट बढ़ाकर दुगुना कर दिया है।अन्य कुछ दलों का भी यही हाल है।
महंगी का असर जो है !
सितंबर आते -आते शायद तीन गुना हो जाए !
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