इजरायल समझ गया है कि हमास का
यदि खात्मा नहीं होगा तो एक दिन
इजरायल का ही खात्मा हो जाएगा !
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समय आ गया है कि भारत भी समय रहते
अपने लिए यही सबक ग्रहण कर ले
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सुरेंद्र किशोर
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7 अक्तूबर, 2023 को हमास ने इजरायल के भीतर घुसकर हमला किया और करीब 12 सौ निर्दोष इजरायली और विदेशी नागरिकांे को मार डाला। 250 लोगों को बंधक बना लिया।
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यह हमला उसी तरह का था जिस तरह 26 नवंबर, 2008 को
पाकिस्तानी जेहादी संगठन ने मुम्बई पर हमला करके 20 सुरक्षाकर्मियों सहित 174 भारतीयों और 26 विदेशियों को मार डाला। करीब 300 लोगों को घायल कर दिया।
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7 अक्तूबर, 23 की घटना पर इजरायल की प्रतिक्रिया--
इजरायल ने कठोर प्रति -प्रहार शुरू कर दिया जो अब भी जारी है।साथ ही,
प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आॅफिस ने अक्तूबर, 2023 में ही यह कह दिया कि हमास के पूरी तरह खात्मे के साथ ही
हमारा हमला रुकेगा।रोकने के लिए इजरायल किसी देश की सलाह नहीं मान रहा है।
इजरायल यह जानता है कि
यदि उसने हमास तथा अन्य जेहादी तत्वों को माफ कर दिया तो एक दिन खुद इजरायल बर्बाद हो जाएगा।
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भारत की प्रतिक्रिया-
2008 में मनमोहन सिंह सरकार ने कोई प्रति-प्रहार नहीं किया।क्योंकि वैसा करने पर कांग्रेस को यह भय था कि 2009 के लोक सभा चुनाव में मुस्लिम वोट उसे नहीं मिलेंगे।
इतना नहीं ,कुछ कांग्रेस नेताओं ने उन हमलावर जेहादियों
का बचाव भी किया।
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गत साल जब जेहादी तत्वों ने बांग्ला देश में तख्ता पलट किया तो कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद और मणी शंकर अय्यर ने कहा कि जो कुछ बांगला देश में हुआ है,वैसा भारत में भी हो सकता है।
देर से ही सही,पर पहलगाम में वैसी घटना हो ही गई।
इसी 22 अप्रैल को पहलगाम में जेहादियों ने हमला कर धर्म पूछ-पूछ कर 26 निरपराध हिन्दुओं को मार डाला।
इसी तरह की हिंसा के बल पर जेहादी लोेग पूरी दुनिया में इस्लामिक शासन कायम करना चाहते हैं।इसके लिए वे भारत सहित अनेक देशों में पूरी दुनिया में सक्रिय हैं।पर,भारत के तथाकथित सेक्युलरों के लिए यह कोई समस्या ही नहीं है।
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पर,इस बार भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और कड़ा रुख अपनाया है।कदम भी उठाए हैं।
मोदी ने कहा है कि ‘‘आतंकियों की बची-खुची जमीन को भी मिट्टी में मिलाने का समय आ गया है।’’
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आर.एस.एस.प्रमुख मोहन भागवत ने भी 26 अप्रैल, 25 को कहा कि ‘‘राजा का कत्र्तव्य है प्रजा की रक्षा करना।’’
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पर,यह काम आसान नहीं है और न ही जल्द संपन्न हो जाने वाला काम है।
क्योंकि पाकिस्तान तथा दुनिया के जेहादियों के ,जिसमें भारत भी हैं,जीवन का एकमात्र लक्ष्य है दुनिया भर में इस्लाम का शासन कायम करना चाहे उसका जो भी नतीजा हो।
मध्य युग में भी मुगल आक्रांता भारत पहुंचकर अपने सैनिकों से कहते थे कि काफिरों से युद्ध करके शहीद होगे तो जन्नत में जाओगे।विजयी होगे तो राज करोगे।
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अब वैसे कुछ लोगों के बयान पढ़िए--
प्रतिबंधित जेहादी संगठन सिमी के अहमदाबाद जोनल सेके्रट्री साजिद मंसूरी ने कहा था कि भारत में जब भी हम सत्ता में आएंगे,मंदिरों को ध्वस्त कर देंगे और वहां मस्जिद बनाएंगे।
---टाइम्स आॅफ इंडिया--30 सितंबर 2001
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9 अप्रैल 2008 के हिन्दुस्तान टाइम्स के अनुसार सिमी के संस्थापक सदस्य सफदर नागौरी ने
कहा था कि हमारा लक्ष्य जेहाद के जरिए भारत में इस्लामिक शासन कायम करने का है।
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सिमी ,इंडियन मुजाहिद्दीन तथा इसी तरह के कुछ अन्य जेहादी संगठनों ने मिलकर पाॅपुलर फंट्र आॅफ इंडिया बना लिया है।उसका राजनीतिक संगठन है--एस.डी.पी.आई.।
प्रतिबंधित पी.एफ.आई.कातिलों के अनेक हथियारबंद दस्ते तैयार कर रहा है।उसका लक्ष्य है--2047 तक भारत को इस्लामिक देश बना देने का।पी.एफ.आई.कहता है कि जिस दिन मुसलमानों में से दस प्रतिशत लोग भी हमारे साथ जुड़ जाएंगे,उस दिन हम अपना लक्ष्य पूरा कर लेंगे।(भारत के जो राजनीतिक दल,पत्रकार और बुद्धिजीवी पी.एफ.आई.के हिंसक कारनामों की आलोचना तक नहीं करते,वे आशंकित गृह युद्ध के समय किधर रहेंगे,उनके बारे में अनुमान अभी से लगा लीजिए।)
खबर है कि ऐसे ही संगठनों के बल पर राहुल-प्रियंका नायनाड (केरल)से चुनाव जीतते रहे हैं।क्या पी.एफ.आई.-एस.डी.पी.आई. के खिलाफ कभी किसी कांग्रेसी नेता का कोई बयान आपने कहीं पढ़ा या सुना है ?)
क्या हामिद अंसारी(पूर्व उप राष्ट्रपति व कांग्रेस नेता ) और कांग्रेस का सेक्युलरिज्म,पी.एफ.आई.के सेक्युलरिज्म से मेल खाता है ?
यदि ऐसा नहीं है तो हामिद अंसारी पी.एफ.आई.की महिला शाखा के समारोह में शामिल होने के लिए 23 सितंबर, 2017 में कोझीकोड क्यों गए थे ?
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25 अप्रैल, 2025 को पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने यह स्वीकार किया कि पश्चिमी देशों के लिए हम अपने यहां आतंकवादी संगठनों को समर्थन,प्रशिक्षण और वित्त पोषण करने का गंदा काम करते रहे हैं।
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17 जनवरी, 2023 को पाकिस्तान के प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ ने कहा था कि भारत के साथ हम तीन युद्ध लड़े ।इससे हमें कंगाली मिली है।
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पहलगाम की घटना पर पाक प्रधान मंत्री शरीफ ने 26 अप्रैल 25 को कहा कि पहलगाम हमले की किसी भी तटस्थ और पारदर्शी जांच के लिए हम तैयार हैं।
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और अंत में
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दरअसल किसी एक घटना की जांच व दोषियों की सजा दे देने से इस व्यापक समस्या का हल नहीं होगा।
पहले समस्या की जड़ तक पहुंचिए और उस समस्या का समाधान कीजिए,यदि हल चाहते हैं तो।
समस्या है--पाकिस्तान के मदरसों का पाठ्यक्रम।अनेक लोग बताते रहते हैं कि आपके मदरसे आतंक के कारखाने बन चुके हैं।
नतीजा यह है कि पाक की अधिकांश जनता आटा और जेहाद के बीच आटा नहीं बल्कि जेहाद का चयन करती है।
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यदि पाकिस्तान सचमुच शांति और सह अस्तित्व चाहता है तो अपने मदरसों के पाठ्यक्रमों के औचित्य और वास्तविकता की जांच दुनिया के कुछ तटस्थ शिक्षा विदों की टीम से कराए।यदि तटस्थ जांचकर्ता आपके मदरसों को आतंक की फैक्ट्री नहीं मानेंगे तो कोई बात नहीं।यदि मानेंगे तो उसमें परिवर्तन कीजिए।
अन्यथा आपकी बाकी बातों का कोई मतलब नहीं है।
पता नहीं आने वाले दिनों में न जाने कितने लोग मिट्टी में मिलेंगे !!
क्योंकि संकेत बताते रहे हैं कि बांग्लादेश व भारत की हाल की कुछ वीभत्स घटनाओं के कारण भारत के जन मानस में पविर्तन आ रहा है।
एक तरफा धर्मनिरपेक्षता और नकली समाजवाद की अफीम के नशे की आदत से भारत के अधिकतर लोग अब तेजी से बाहर निकलने लगे हैं।
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1 मई 25