मंगलवार, 27 मई 2025

      जब राजनीति में वैसे नेता थे !

    -------------

,     सुरेंद्र किशोर

       -------------

प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि 

‘‘राजनीतिक मतभेद अपनी जगह है।

लेकिन अगर मुझसे कोई यह पूछे मैं अपना वोट किसे दूंगा,तो मैं निश्चित रूप से यही कहूंगा कि मैं अपना कीमती वोट राममनोहर लोहिया को दूंगा।’’

  यह बात सन 1962 के आम चुनाव के समय की है जब  नेहरू और लोहिया एक दूसरे के खिलाफ फुलपुर

(उत्तर प्रदेश ) में लोक सभा चुनाव लड़ रहे थे।

       -------------

       एक प्रसंग बिहार का भी  

       ---------------

सन 1957 में बिहार में कांगे्रस विधायक दल के नेता पद का चुनाव हो रहा था।

डा.श्रीकृष्ण सिंह और डा.अनुग्रह नारायण सिंह एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे थे।

कांटे का मुकाबला था।

फिर भी श्रीबाबू ने अपना वोट नहीं डाला।

किसी ने उनसे कारण पूछा तो 

उन्होंने कहा कि 

‘‘मैं वोट देता तो अनुग्रह बाबू को ही देता।’’

------------------

      27 मई 25


 

    



सोमवार, 26 मई 2025

 जेहाद या सिंधु जल ?!

दोनों की सुविधा एक साथ नहीं मिलेगी।

--------------

अच्छा अवसर है।

नये जमाने को देखते हुए पाकिस्तान को भी चाहिए कि वह 

सऊदी अरब की ही तरह खुद को बदले।

गैर मुस्लिमों के साथ मिल जुलकर रहिए।

हिन्दुओं का मन-मिजाज सर्व धर्म समभाव वाला है।उसका लाभ उठाइए।

आप अपने देश में भी भारत की तरह ही संपन्नता लाइए।इस 

काम में भारत से आपको मदद मिलेगी।

ऐसा युद्ध क्यों लड़ना जिसमें हार निश्चित है ?

इसलिए भारत में भी अशांति मत फैलाइए।

जेहाद का लक्ष्य छोड़िए।अब मध्य युग नहीं है।

पहले परमाणु बम की धमकी दे रहे थे।

कारगर नहीं हुआ।अब सांस रोकने की धमकी दे रहे हैं।

वह भी कामयाब नहीं होगा।

इस बार एक मोदी से आपको पाला पड़ा है।

वह तौल कर कीमत वसूलेगा।

यदि आप जेहाद पर अड़े रहेंगे तो आपको सिंधु जल कभी नहीं मिलेगा।

जो होना होगा, इस बार होकर रहेगा।

टुकड़ों में तो आप सांस रोकते ही रहे हैं।

26 की सांस पहलगाम में आपने हाल में ही रोका।

1947 से अब तक जेहादी हिंसा में करीब 20 हजार भारतीयों की जानें आप ले चुके हैं।

अब भारतीयों को भी टुकड़ों में मरना मंजूर नहीं।

भारत अब न तो 1947 वाला है,न 1965 वाला और न ही 2008 वाला।

मोदी सरकार ने सेना को भी काफी मजबूत कर रखा है।

भारत सरकार के फंड अब बड़े -बड़े घोटालों में नहीं जा रहे हैं।

विकास और सुरक्षा में लग रहे हैं।

भारत की अधिकतर जनता भी उसके साथ है।

आपरेशन सिन्दूर के बाद मोदी का समर्थन बढ़ा है।

कोई सर्वे करवा सकता है।

भारतीय सेना ढाई मोरचों पर

भी एक साथ लड़ सकती है।

यदि नहीं मानिएगा तो अंतिम फैसला इस बार हो ही जाएगा।

वैसे शांति सबके लिए सही मंत्र है।

------------------

24 मई 25


 फेसबुक वाॅल पर किसी मित्र के साथ बतकुचन करके संबंध खराब कर लेने से बेहतर है कि अनफं्रेड कर दिया जाये ताकि कहीं मुलाकात हो झेंपना न पड़े।

किसी ने ठीक ही कहा है--‘‘बहस हार जाना बेहतर है, मित्र हारने की अपेक्षा।’’ 


 याद है ‘शोले’ फिल्म वाले ठाकुर 

साहेब का राम गढ़ ?

---------------------- 

सुरेंद्र किशोर 

----------------

जिस काल्पनिक गांव राम गढ़ में शोले फिल्म की शूटिंग हुई थी,उसके बगल में है वास्तविक रामनगर।

 रामनगर पहले दक्षिण बंगलोर जिले में पड़ता था।

2007 की गैर कांग्रेसी कर्नाटका सरकार ने दक्षिण बंगलोर जिले का नाम बदल कर रामनगर रख दिया।

  अब की मौजूदा कांग्रेसी सिद्धारमैया सरकार ने केंद्र की मोदी सरकार के विरोध के बावजूद रामनगर जिले का नाम फिर से बंगलुरू दक्षिण कर दिया है।

कहते हैं कि यह काम कांग्रेस के ‘‘ताकतवर मुस्लिम वोट बैंक’’ के दबाव में आकर किया गया।

 उस वोट बेंक को राम का नाम बर्दास्त नहीं था ! याद रहे कि

पिछले कर्नाटका विधान सभा चुनाव में देवगौड़ा की पार्टी को भी पूरी तरह छोड़कर कर्नाटका के मुसलमानों ने अपना एकमुश्त वोट कांग्रेस को दे दिया था।स्वाभाविक है कि वे उसकी कीमत वसूल रहे हैं।

इससे पहले कर्नाटका सरकार के ठेके में 4 प्रतिशत मुसलमानों का हिस्सा रिजर्व कर दिया गया है।

  --------------

इधर जयपुर (राजस्थान) में जिन मिठाइयों के नाम के साथ ‘पाक’ शब्द जुड़ा हुआ था,उसे बदल कर यानी पाक की जगह ‘श्री’ शब्द जोड़ दिया गया।कहा गया कि पहलगाम में जेहादी हमले के बाद भारतीयों में बढ़े आक्रोश की मार मिठाई को झेलनी पड़ी है।

स्वामी रामदेव का भी एक लोकप्रिय प्रोडक्ट है--बादाम पाक-एक फूड सप्लीमेंट।

मैं उसका सेवन करता हूं।क्या राम देव जी भी बादाम से पाक को डिलिंक करेंगे ?

----------------

भूली बिसरी याद उस ‘राम गढ’़ की

----------------  

  आपातकाल में जार्ज फर्नांडिस के बुलावे पर देश भर के हम कुछ चुने हुए समाजवादी कार्यकर्ता और नेता बंगलोर (उस समय तक वह बंगलुरू नहीं हुआ था।)गये थे।

बंगलोर के होटल में कई दिनों तक रहे।

शाम के अंधेरे में जार्ज के साथ हम एक ‘‘खास तरह की टंे्रनिंग’’लेने के लिए उसी पहाड़ी पर जाते थे, जिस पर गब्बर सिंह यानी अमजद खान बैठा करता था।

--------------

वहां हमें बताया गया कि धर्मेंद्र -अमिताभ आदि कलाकार बंगलोर के होटल में रहते थे और शूटिंग के लिए हर सुबह आॅटो रिक्शे से 50 किलोमीटर दूर रामगढ़ जाते थे।(उस समय तक उनमें कार लायक संपन्नता नहीं आई थी।)

तब वहां यह जानना और देखना रोमांचक काम लगा था।वैसे हमलोग भी रोमांचक काम के लिए ही वहां रात मंे जाते थे।

-------------- 

जिले का नाम बदलने का अधिकार किसे हैं ?

केंद्र को या राज्य सरकार को।

इस बार के परिवर्तन के बाद शायद यह विवाद आगे बढ़ सकता है।

-------------------

25 मई 25

-----------------

और अंत मंे

-----

 क्या आपने ध्यान दिया ?

राजस्थान के किसी जिला मुख्यालय का नाम इलाहाबाद,मुजफ्फर पुर ,अली गढ़ ,आजम गढ,़ फतेहपुर या गाजीपुर जैसा नहीं है ?

शुक्र है कि कर्नाटका की सरकार ने दंक्षिण बंगलुरू की जगह टीपू सुल्तान नगर नहीं रखा।उसे इस बात के लिए तो धन्यवाद दे ही दीजिए। 



शुक्रवार, 23 मई 2025

 


1962 में चीन के हाथों पराजय के बाद 

नेहरू की कैनेडी के समक्ष निरीहता-दयनीयता

 सामने आ गई थी।

-------------------------

 ट्रम्प के समक्ष मोदी को भी निरीह-

दयनीय दिखाने की कहानी कांग्रेस गढ़ रही है 

ताकि तब की अपेक्षा आज की विदेश नीति को 

बेहतर न माना जाये।

-------------------

सुरेंद्र किशोर

-----------------

15 मई 25 को ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कह दिया था कि ‘‘मैंने पाकिस्तान और भारत के बीच मध्यस्थता नहीं कराई।बस मदद की है।’’

    विदेश मंत्री एस.जय शंकर ने 22 मई, 25 को कहा कि यद्यपि अमेकिन नेता दोनों देशों के संपर्क में थे।किंतु सैनिक कार्रवाई को रोकने के लिए नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच सीधी बातचीत हुई थी।

  ----------------------

    जवाहरलाल नेहरू की दयनीयता

   --------------------

 1962 में चीन ने भारत पर हमला किया तो सोवियत संघ ने यह कह कर अपना पल्ला झाड़ लिया कि एक मित्र और एक भाई के बीच के झगड़े में हम नहीं पड़ेंगे।

  (वैसे ए.जी.नूरानी के रिसर्च से बाद में यह पता चल गया था कि सोवियत संघ की पूर्व सहमति व उकसावे के बाद ही चीन ने भारत पर हमला किया था।)

 चीन के हाथों मिल रही पराजय की पृष्ठभूमि  में हतप्रभ  नेहरू ने मदद के लिए अमेरिका की ओर रुख किया था।

   उन दिनों बी.के.नेहरू अमेरिका में भारत के राजदूत थे।

  नेहरू ने अमरीकी राष्ट्रपति जाॅन एफ.कैनेडी को लगातार कई पत्र लिखे।

    नेहरू ने 19 नवंबर 1962 को कैनेडी को लिखा था कि ‘‘न सिर्फ हम लोकतंत्र की रक्षा के लिए बल्कि इस देश के ही अस्तित्व की रक्षा के लिए भी चीन से हारता हुआ युद्ध लड़ रहे हैं जिसमें आपकी तत्काल सैन्य मदद की हमें सख्त जरूरत है।’’ 

   इससे पहले जवाहर लाल नेहरू ने अपनी अदूरदर्शी व  अव्यावहारिक नीति के तहत चीन को भाई और सोवियत संघ को मित्र करार दे रखा  था।(जबकि नेहरू को यह समझना चाहिए था कि साम्यवादी विस्तारवादी देश और इस्लामिक जेहादी देश भारत का वास्तविक मित्र नहीं बन सकता था।भारत का मित्र बनने लायक तो तब भी इजरायल ही था।पर,मुस्लिम वोट बैंक के प्रभाव में  कांग्रेसी सरकारों ने दशकों तक इजरायल को राजनयिक मान्यता तक नहीं दी थी।)

 कैनेडी से नेहरू की एक पिछली मुलाकात के बारे में खुद कैनेडी ने एक बार कहा था कि ‘‘नेहरू का व्यवहार काफी ठंडा रहा।’’

  पर जब चीन ने 20 अक्तूबर 1962 को भारत पर हमला करके हमारी हजारों-हजार  वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्जा करना शुरू कर दिया तो नेहरू ने अमेरिका को त्राहिमाम संदेश दिया।

    19 नवंबर 1962 को जवाहर लाल नेहरू ने भारी तनाव,चिंता और डरावनी स्थिति के बीच  कैनेडी को कुछ ही घंटे के बीच  दो -दो चिट्ठियां लिख दीं।

इन चिट्ठियों को वर्षों तक गुप्त ही रखा गया था ताकि नेहरू की दयनीयता देश के सामने न आ पाये।

पर बाद में उनकी फोटोकाॅपी भारतीय अखबार में छप गई।

    पर, कल्पना कीजिए कि यदि अमेरिका ने 1962 में पाक को भारत के खिलाफ युद्ध शुरू करने से नहीं रोका होता तो क्या नतीजा होता ?(तब संभवतः अमेरिका को यह खबर मिल गई थी कि चीन के साथ-साथ पाक भी हमला करने वाला था।) 

संभवतः अमरीका के इसी कदम के बाद चीन ने तब एकतरफा युद्ध विराम कर दिया था।

----------------

23 मई 25


बुधवार, 21 मई 2025

 


पत्रकारिता के ‘स्वर्ण शब्द’

-------------

सुरेंद्र किशोर

-------------   

            1

-----------------

‘मेनचेस्टर गार्जियन’ के संपादक और ब्रिटिश 

सांसद सी.पी.स्काॅट ने करीब सौ साल पहले ही यह कह दिया था कि 

‘‘तथ्य पवित्र है, किंतु टिप्पणी के लिए आप स्वतंत्र हैं।’’

(नोट-यानी, कोई व्यक्ति किसी पत्रकार की तथ्यात्मक गलती पर तो सवाल उठा सकता है।किंतु उसके विश्लेषण या विचारों पर नहीं।अन्यथा,वह पत्रकारिता की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप माना जाएगा।) 

-------------------

               2

  --------------------

 नब्बे के दशक में मैंने पटना के दैनिक अखबार ‘‘द इंडियन नेशन’’ में सिंगापुर डेटलाइन से बी.बी.सी. के उप प्रधान की एक महत्वपूर्ण टिप्पणी पढ़ी थी।

उनसे पूछा गया था कि बी.बी.सी. की साख का राज 

क्या है ?

उन्होंने बताया कि 

  ‘‘यदि दुनिया के किसी देश में कम्युनिज्म आ रहा है तो हम यह सूचना लोगों को देते हैं कि आ रहा है।

उसे रोकने की कोशिश नहीं करते।

दूसरी ओर, यदि किसी देश से कम्युनिज्म जा रहा है तो हम रिपोर्ट करते हैं कि जा रहा है।

हम उसे बचाने की भी कोशिश नहीं करते।

यही हमारी साख का राज है।’’

.....................................

(नोट-आज का बी. बी. सी. नब्बे के दशक वाली अपनी नीति पर कायम है या नहीं, यह मुझे नहीं मालूम।)

....................................

        3

........................................

सन 1983 में एक मुलाकात में नवभारत टाइम्स के प्रधान संपादक राजेंद्र माथुर ने एक खास संदर्भ में मुझसे कहा था,

‘‘ आप प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ जितनी भी कड़ी खबर लाइए,मैं उसे जरूर छापूंगा।

किंतु इंदिरा गांधी में कई गुण भी हैं।मैं उन्हें भी छापूंगा।’’

..........................................

(नोट-दरअसल जनसत्ता ज्वाइन करने के बाद मैं शिष्टाचार मुलाकात के लिए माथुर साहब के आॅफिस में गया था।उन्होंने मुझसे पहला सवाल यही किया--आपने नवभारत टाइम्स ज्वाइन क्यों नहीं किया ?मैंने उनसे कहा कि आपका अखबार दब्बू है।इंदिरा गांधी के खिलाफ नहीं लिख सकता।

उसके जवाब में रज्जू बाबू ने कहा --

‘‘नो, सुरेंद्र जी,यू आर मिस्टेकन।मेरा अखबार दब्बू नहीं है।पर, अभियानी भी नहीं है।’’उसके बाद उन्होंने वह बात कही जो मैं ऊपर लिख चुका हूं।)

  ----------------------

             4

  -----------------

बात तब की है जब मैं ‘जनसत्ता’ का बिहार संवाददाता था।

चंद्र शेखर सिंह बिहार के मुख्य मंत्रंी थे।मेरे खिलाफ शिकायत करने जन संपर्क विभाग के निदेशक हमारे संपादक प्रभाष जोशी से मिलने दिल्ली गये।

उन्होंने कहा--आपके संवाददाता एकतरफा लिखते हैं।मुख्य मंत्री से नहीं मिलते।

प्रभाष जोशी--क्या गलत भी लिखते हैं ?

निदेशक -नहीं,गलत तो नहीं लिखते।किंतु पुरानी -पुरानी राजनीतिक कहानियां लिखते रहते हैं।

जोशी जी--आप ऐसे दल के मुख्य मंत्री की सिफारिश करने आये हैं,जिस दल की प्रधान मंत्री कहती हैं कि मैंने एन.टी.रामाराव सरकार की बर्खास्तगी की खबर टेलिप्रिंटर पर देखी।

उसके बाद दोनों के बीच का संवाद समाप्त हो गया।

(नोट-निदेशक महोदय पूरे पेज का सरकारी विज्ञापन लेकर गये थे।जोशी जी के आॅफिस से निकलते समय वह विज्ञापन भी उनके पास ही रहा जो पटना लौट आया।) 

---------------- 

20 मई 25  

     


शुक्रवार, 16 मई 2025

 जिन्हें बनाने में ईश्वर ने अन्य की 

अपेक्षा थोड़ा अधिक समय लगाया।

मेरे लिए उनके पास समय कम था !!

-----------------------

सुरेंद्र किशोर

-------------

वे थे और हैं--

1.-डा.वशिष्ठ नारायण सिंह(1946-2019)

2.-डा.श्रीकांत जिचकर(1954-2004)

3.-डा.सुधांशु त्रिवेदी

4.-विकास दिव्यकीर्ति

5.-खान सर

आदि आदि ......

सूची अधूरी है।आप इसे थोड़ी लंबी कर दीजिए।

------------

15 मई 25



         शादी की साल गिरह

-------------------------

आज से ठीक 52 साल पहले यानी आज ही के दिन वैदिक रीति से हमारा विवाह हुआ था।

इस अवसर पर आज हमने अत्यंत संक्षिप्त समारोह में पूजा-अर्चना की।

इस अवसर पर सिर्फ एक ही बात कह सकता हूं--

मुझे याद नहीं कि इस बीच हमने एक-दूसरे पर कभी चिल्लाया भी हो !

(साथ का चित्र हमारा ही है,पर पुराना है।)

   ---- सुरेंद्र किशोर

        15 मई 25


 


सोमवार, 12 मई 2025

 भूली-बिसरी यादें

-----------

सोवियत संघ और इजरायल ने अपने दुश्मनों को 

दूसरे देशों में खोज-खोज कर मार डाला था

........................................

सुरेंद्र किशोर

............................... 

   सेवियत संघ सरकार ने सन 1940 में मैक्सिको में छिपे अपने राजनीतिक दुश्मन ट्राटस्की को ढंूढ़ कर मरवा डाला था।

तब यह दुनिया का चर्चित हत्याकांड साबित हुआ था।

उसी तरह 1972 में हुए म्यूनिख ओलम्पिक में 11 इजरायली खिलाड़ियों के हत्यारे अरब आतंकियों को मोसाद ने एक -एक कर खोजकर मार डाला।

  स्टालिन के कट्टर विरोधी ट्राटस्की की हत्या करवाने के लिए सोवियत जासूसांे ने छल-प्रपंच का इस्तेमाल किया था।

  ट्राटस्की की 20 अगस्त 1940 को उसका विष्वासी बन कर जैक्सन ने तब हत्या कर दी जब वे मैक्सिकोे में निर्वासित जीवन बिता रहे थे।स्टालिन के भय से वे वहां छिपे थे।

  स्टालिन ने अपने जासूसों को यह सख्त आदेष दे दिया था कि ‘‘किसी भी नीति -रणनीति का पालन क्यों न करना पड़े,कोई कार्य पद्धति क्यों न अपनानी पड़े,पर ट्राटस्की को जल्द से जल्द खत्म कर दो।’’

 उधर ट्राटस्की ने पहले सोवियत संघ में स्टालिन की तानाषाही का विरोध किया ।

 जब स्टालिन ने एक- एक करके अपने राजनीतिक विरोधियों का सफाया करनाष्षुरू कर दिया तो ट्राटस्की विदेष भाग गये।

   ट्राटस्की ने मैक्सिको में शरण ली । वहां भी वह स्टालिन की सख्त आलोचना करते हुए यूं कहें कि उन्हें गालियां देते हुए स्थानीय अखबारों में लेख लिखते रहे।

  उन्होंने यह सोचा था कि षायद स्टालिन के लिए मैक्सिको दूर पड़ेगा।

पर, ट्राटस्की गलत सोच रहे थे। 

सोवियत जासूसों ने उनकी हत्या के लिए वहां भी एक छल के जरिए पक्का प्रबंध करा दिया।

  जासूसों ने पता लगाया कि मैक्सिको में ट्राटस्की का कौन ऐसा भक्त है जिसकी बात वह सुनते हंै।

पता चला कि वह एक लड़की है। सोवियत जासूसों ने ट्राटस्की की एक और कमजोरी का लाभ उठाया।ट्राटस्की किसी भोलेे भाले दिखने वाले अजनबी पर आसानी से विष्वास

कर लेते थे।

  जासूसों ने उनकी इस कमजोरी का भी लाभ उठाया।जैक्सन नामक भोला -भाला दिखने वाले एक व्यक्ति को  जासूसों ने ट्राटस्की की भक्त लड़की से पहले मित्रता करवा दी। 

उस लड़की को जैक्सन के खतरनाक मनसूबे का कोई संकेत तक नहीं मिला।

फिर जैक्सन का परिचय उसी लड़की ने ट्राटस्की से करवा दिया।

उस लड़की का ट्राटस्की के यहां अक्सर आना-जाना था।

ट्राटस्की ने उस पर विष्वास कर लिया।

  मैक्सिको के अखबारों में ट्राटस्की, सोवियत संघ में स्टालिन के अत्याचारों व ज्यादतियों की जो ‘झूठी -सच्ची कहानियां’ लिखते थे,उससे मैक्सिको में भी ट्राटस्की का एक प्रषंसक वर्ग तैयार हो गया था।

 जैक्सन का मैक्सिको के उस किलानुमा घर में आना -जाना षुरू हो गया जिसमें पूरी सुरक्षा के साथ ट्राटस्की रहते थे।

जैक्सन की रूचि भी लेख लिखने में थी।ट्राटस्की उससे अपने लेख के विषयों पर चिचार- विमर्ष करते थे।पर जैक्सन को एकांत में ट्राटस्की से मुलाकात का इंतजार था।ट्राटस्की ने 20 अगस्त 1940 को एक लेख पर विचार के लिए जैक्सन को एकांत में आमंत्रित किया।

उसी दिन का जैक्सन को इंतजार था।

वह रेन कोट पहन कर उस दिन गया।संतरी ने पूछा तो उसने बताया कि आज बारिस की आषंका है।पर अपनी कुटिल योजना के तहत उसने अपने रेन कोट में कटार,रिवाल्वर और कुदाल छिपा रखी थी।

  ट्राटस्की का जब पूरा ध्यान लेख पढ़ने में था तो जैक्सन ने निगाह बचाकर अपनी कुदाल निकाली और पीछे जाकर जोर से कुदाल से उनके सिर पर वार कर दिया।इस वार से  सिर पर तीन  इंच गहरा घाव बन गया।

ट्राटस्की बुरी तरह घायल होकर चिल्लाने लगे। 24 घंटे में ही ट्राटस्की के प्राण पखेरू उड़ गये।

  मैक्सिको की अदालत में जैक्सन पर मुकदमा चला।पुलिस ने यह साबित कर दिया कि वह रूसियों का खुफिया एजेंट था और ट्राटस्की की हत्या करने के लिए ही जाली पासपोर्ट पर मैक्सिको भेजा गया था।

   उसे  बीस साल की कैद की  सजा हुई।

सजा के दौरान उसने अपने अपराध और उसके पीछे के षड्यंत्र के बारे में किसी से कुछ भी नहीं कहा।

सजा की अवधि पूरी करने के बाद जैक्सन सोवियत संघ चला गया।

1972 में अरब आतंकवादियों ने म्यूनिख ओलम्पिक में 11 इजरायली खिलाड़ियों की हत्या कर दी थी।

 बाद के वर्षों में इजरायली खुफिया एजेंसी ‘मोसाद’ ने उन सारे षड्यंत्रकारी हमलावरों को खोज -खोज कर एक- एक कर मार डाला ।

वे इजरायल सरकार के डर से कई देशों में जा छिपे थे।

मोसाद ने करीब 20 वर्षों में यह टास्क पूरा किया था।हत्यारों को मोसाद ने बारी-बारी से इटली, फ्रांस, ब्रिटेन ,लेबनान,एथेंस और साइप्रस में अपने नाटकीय आपरेशन के जरिए मारा।

......................................................

पूर्व प्रकाशित

------


         

यदि इजरायल ने 234 अरब छापामारों को रिहा कर दिया  होता तो सन् 1972 में 11 इजराइली ओलम्पिक खिलाड़ियों की जान बच जाती।

पर, व्यापक देशहित में इजरायल ने उन आतंकवादियों के सामने झुकना मंजूर नहीं किया जिन्होंने   म्यूनिख ओलम्पिक के दौरान 11 इजराइली खिलाड़ियों को बंधक बना रखा था।

 छापामारों को रिहा करने से इनकार कर देने पर 11 खिलाड़ियों को अरब आतंकवादियों ने मार डाला।उस दौरान  जर्मन पुलिस की कर्रवाई में चार छापामार 

भी मारे गये।तीन पकड़े गये।पर एक भागने में सफल हो गया।

  हां, बाद के वर्षों में इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने उन सारे षड्यंत्रकारी हमलावरों को खोज -खोज कर एक- एक कर मार डाला जो 11 इजराइली खिलाड़ियों की हत्या में शामिल  थे और तत्काल पकड़े जाने के बाद भी बाद में छोड़ दिए गए थे।

वे इजरायल के डर से कई देशों में जा छिपे थे।

मोसाद ने करीब 20 वर्षों में यह टास्क पूरा किया था।हत्यारों को मोसाद ने बारी-बारी से इटली, फ्रांस, ब्रिटेन ,लेबनान,एथेंस और साइप्रस में अपने नाटकीय आपरेशन के जरिए मारा।


 इंदिरा गांधी के लिए ‘दुर्गा’ षब्द ‘गोदी 

मीडिया’ ने अटल जी के मुंह में डाल कर

प्रचाारित कर दिया था

----------------------

सुरेंद्र किषोर

----------------- 

1962 की हार के लिए के लिए रक्षा मंत्री दोषी,

पर, 1971 की जीत के लिए रक्षा मंत्री को श्रेय नहीं

-----------

8 दिसंबर, 22 को कांग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि हिमाचल प्रदेश विधान सभा चुनाव में कांग्रेस की जीत का श्रेय प्रियंका गांधी को जाता है ।साथ ही, राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ को भी।

--------------

पर,बाद में तीन राज्यों में जब कांग्रेस हार गयी तो कांग्रेस के शीर्ष  नेतृत्व ने इसके पीछे कांग्रेस कार्यकर्ताओं की कमजोरी बता दी।

साथ ही, टिकट बंटवारे में राज्य स्तर के कांग्रेसी नेताओं की गलतियों को भी जिम्मेदार ठहराया गया।

--------------

कांग्रेस में यह पुरानी परंपरा है।

जीत के लिए ‘परिवार’ को शाबासी दो।

हार के कारणों को नीचे कहीं से ढंढ़ निकालो।

-------------

सन 1962 में जब चीन के हाथों भारत की षर्मनाक पराजय हुई और हमारी हजारों वर्ग मील जमीन चीन ने छीन ली तो उसके लिए दोषी रक्षा मंत्री वी.के.कृष्ण मेनन करार दे दिए गए थे।

प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू नहीं।

मेनन को पद से हटा भी दिया गया।

1967 में मेनन को कांग्रेस का टिकट भी नहीं मिला जबकि वे लोक सभा के सिटिंग मेम्बर थे।

----------------

दूसरी ओर, 1971 में जब बांग्ला देश विजय हुई तो उसका पूरा श्रेय प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी को दे दिया गया।

आंध्र के एक कांग्रेसी सासंद ने लोक सभा में इंदिरा को दुर्गा तक कह दिया।

पर,उस दुर्गा शब्द को तब के ‘गोदी मीडिया’ ने अटल बिहारी वाजपेयी के मुंह में डाल कर प्रचारित कर दिया।

आज भी कुछ अधपढ़ और राजनीतिक रूप से बेईमान नेता लोग दुर्गाष्षब्द अटल जी से जोड़ कर दोहरा रहे हैं।

--------------

वाजपेयी जी ने तब के लोक सभा स्पीकर से मिल कर उनसे यह आग्रह किया था कि आपका सचिवालय इसका खंडन करे।

पर इंदिरा भक्त स्पीकर ने सब कुछ जानते हुए भी उस गलत खबर का खंडन नहीं करवाया।

बाद में रजत षर्मा के ‘आपकी अदालत’ कार्यक्रम में अटल जी ने कहा था कि मैंने कभी इंदिरा गांधी को दुर्गा नहीं कहा।(उस आप की अदालत कार्यक्रम को आप आज भी यू ट्यूब पर देख सकते हैं।) 

इंदिरा गांधी की जीवनी लेखिका पुपुल जयकर ने रिसर्च के बाद यह पाया था कि अटल जी ने दुर्गा नहीं कहा।इसलिए जयकर ने अपनी किताब में दुर्गा वाली बात अटल जी के मुंह में नहीं डाली।जयकर ने 

अटल जी से मिलकर कहा था कि दुर्गा वाली बात गलत ढंग से आपके मुंह में डाल दी गयी थी।मैंने रिसर्च के बाद यह पाया। 

---------------

12 मई 25

 


बुधवार, 7 मई 2025

 युद्ध की स्थिति का एक लाभ

------------

देश के भीतरी दुश्मनों की पहचान 

एक बार फिर स्पष्ट हो जाती है।


रविवार, 4 मई 2025

 35 साल बाद भी यासिन मलिक फांसी से दूर

---------------------

जरा उधर भी नजर फेरे सुप्रीम कोर्ट !

-------------------

सुप्रीम कोर्ट से लोग नाउम्मीद होंगे तो 

उस निराशा का फायदा उठा कर कोई 

तानाशाह देश का शासक बन बैठेगा !

----------------------

2015 में सजायाफ्ता याकूब मेमन के मामले की सुनवाई 

करने के लिए सुप्रीम कोर्ट आधी रात में खुल गया था।पर 

यासिन मलिक पर सुप्रीम कोर्ट का ध्यान नहीं जा रहा है।

------------------

सुरेंद्र किशोर

--------------   

35 साल पहले आतंकवादी यासिन मलिक ने भारतीय वायु सेना के 5 अधिकारियों को कश्मीर मेें गोलियों से भून दिया था।‘इंडिया टूडे’ से बातचीत में मलिक ने बाद में उसने स्वीकार भी किया था, 

‘‘हां,मैंने मारा था।

क्योंकि वे निर्दोष नहीं थे।’’

इसके बावजूद आज तक यासिन मलिक को कोई सजा

नहीं हुई।

‘सर्व शक्तिमान’ सुप्रीम कोर्ट की मौजूदगी के बावजूद! 

इतना ही नहीं, यासिन ने सन 2006 में उनके बुलावे पर तत्कालीन प्रधान मंत्री मन मोहन सिंह से उनके आवास पर मुलाकात भी की थी।

 कल्पना कीजिए कि उस मुलाकात की खबर पढ़कर व हंस -हंस कर हाथ मिलाते दोनों के फोटो मीडिया में देखकर वायु सेना के दिवंगत अफसरों की विधवाओं पर क्या बीती होगी !

 दूसरी ओर, कल्पना कीजिए ,उस फोटो से कश्मीर के आतंकियों का हौसला कितना बढ़ गया होगा !

उन्हें यह भी लग गया होगा कि निर्दोष सैनिकों का कत्ल करने के बावजूद इस देश का प्रधान मंत्री अपने आवास में हमारा स्वागत भी कर सकता है।

 ................................................................     

याद रहे कि यासिन मलिक ने कश्मीर में 25 जनवरी, 1990 को एक साथ 5 एयर फोर्स अधिकारियों की हत्या कर दी थी।

अधिकारी ने उससे तब सिर्फ रास्ता पूछा था-तब कोई मुंठभेड़ नहीं हो रही थी।

.........................................................

    अभियोजन पक्ष के पास मलिक के खिलाफ पुख्ता सबूत उपलब्ध हैं।

इसके बावजूद यासिन मलिक अब तक सजा से मुक्त है।

इस देश में कानून-व्यवस्था और न्याय -व्यवस्था के अत्यंत लचर होने के कारण ही जेहादी तत्वों का मनोबल भारत में दिन प्रति दिन बढता जा रहा है।साथ ही ,मुस्लिम वोट लोलुप नेताओं ने उनका मनोबल अपने कर्मों व बयानों के जरिए और भी बढ़ा रखा है।

इस देश के विभिन्न हिस्सों में जेहादी लोग तरह तरह के उपायों से मुस्लिमों की आबादी बढ़ाते जा रहे हैं। खास-खास इलाके में बहुमत में आ जाने पर एक -एक इलाके से गैर मुस्लिमों को जेहादी भगाते जा रहे हैं।यह रफ्तार जारी रही तो वह दिन देर नहीं, जब जेहादी तत्व पूरे भारत पर कब्जा कर लेंगे।क्योंकि वोट लोलुप राजनीतिक दल उनके प्रत्यक्ष-परोक्ष मददगार बने हुए है।

ऐसे ही विशेष अवसरों के लिए संविधान निर्माताओं ने संविधान में अनुच्छेद -142 का प्रावधान किया है।यानी, सुप्रीम कोर्ट के हाथों में इसके जरिए तगड़ा ब्रह्मास्त्र पकड़ा दिया।

 भारत में एक विशेष स्थिति पैदा हो चुकी है।संविधान निर्माताओं ने इस स्थिति की पूर्व कल्पना ही नहीं की थी।

इस देश के कुछ राजनीतिक दल वोट के लिए अपने कारनामों से देश का इलाका दर इलाका जेहादियों को सांैपते जा रहे हैं।मुर्शिदाबाद से हिन्दू पलायन की ताजा घटनाएं उसका उदाहरण है।

सुप्रीम कोर्ट से लोगों को बड़ी उम्मीद रही हेैं।

इसलिए वह इस बात का ध्यान रखे कि मानवाधिकार सिर्फ जेहादियों का ही नहीं होता,बल्कि शांतिप्रिय करोड़ों भारत वासियों का भी होता है।यदि इस देश का सामान्य कानून इस देश के इस्लामिक देश में परिणत होने से रोकने में सहायक नहीं हो पा रहा है तो सुप्रीम कोर्ट को चाहिए कि वह संविधान के अनुच्छेद -142 का यथाशीघ्र इस्तेमाल करना शुरू कर दे।

सुप्रीम कोर्ट के लिए आज कठिन परीक्षा की घड़ी है।वह भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की आशंका को झूठा साबित करने का तत्काल ठोस प्रयास करे।

----------------

4 मई 25


गुरुवार, 1 मई 2025

 इजरायल समझ गया है कि हमास का 

यदि खात्मा नहीं होगा तो एक दिन 

इजरायल का ही खात्मा हो जाएगा !

-----------------

समय आ गया है कि भारत भी समय रहते 

अपने लिए यही सबक ग्रहण कर ले 

------------- 

सुरेंद्र किशोर

--------

7 अक्तूबर, 2023 को हमास ने इजरायल के भीतर घुसकर हमला किया और करीब 12 सौ निर्दोष इजरायली और विदेशी नागरिकांे को मार डाला। 250 लोगों को बंधक बना लिया।

------------------

यह हमला उसी तरह का था जिस तरह 26 नवंबर, 2008 को 

पाकिस्तानी जेहादी संगठन ने मुम्बई पर हमला करके 20 सुरक्षाकर्मियों सहित 174 भारतीयों और 26 विदेशियों को मार डाला। करीब 300 लोगों को घायल कर दिया।

----------------

7 अक्तूबर, 23 की घटना पर इजरायल की प्रतिक्रिया--

इजरायल ने कठोर प्रति -प्रहार शुरू कर दिया जो अब भी जारी है।साथ ही, 

प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आॅफिस ने अक्तूबर, 2023 में ही यह कह दिया कि हमास के पूरी तरह खात्मे के साथ ही 

हमारा हमला रुकेगा।रोकने के लिए इजरायल किसी देश की सलाह नहीं मान रहा है।

 इजरायल यह जानता है कि 

यदि उसने हमास तथा अन्य जेहादी तत्वों को माफ कर दिया तो एक दिन खुद इजरायल बर्बाद हो जाएगा।

--------------

भारत की प्रतिक्रिया-

2008 में मनमोहन सिंह सरकार ने कोई प्रति-प्रहार नहीं किया।क्योंकि वैसा करने पर कांग्रेस को यह भय था कि 2009 के लोक सभा चुनाव में मुस्लिम वोट उसे नहीं मिलेंगे।

इतना नहीं ,कुछ कांग्रेस नेताओं ने उन हमलावर जेहादियों 

का बचाव भी किया।

----------------

गत साल जब जेहादी तत्वों ने बांग्ला देश में तख्ता पलट किया तो कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद और मणी शंकर अय्यर ने कहा कि जो कुछ बांगला देश में हुआ है,वैसा भारत में भी हो सकता है।

देर से ही सही,पर पहलगाम में वैसी घटना हो ही गई।

इसी 22 अप्रैल को पहलगाम में जेहादियों ने हमला कर धर्म पूछ-पूछ कर 26 निरपराध हिन्दुओं को मार डाला।

इसी तरह की हिंसा के बल पर जेहादी लोेग पूरी दुनिया में इस्लामिक शासन कायम करना चाहते हैं।इसके लिए वे भारत सहित अनेक देशों में पूरी दुनिया में सक्रिय हैं।पर,भारत के तथाकथित सेक्युलरों के लिए यह कोई समस्या ही नहीं है।

------------

पर,इस बार भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और कड़ा रुख अपनाया है।कदम भी उठाए हैं।

मोदी ने कहा है कि ‘‘आतंकियों की बची-खुची जमीन को भी मिट्टी में मिलाने का समय आ गया है।’’

--------------

आर.एस.एस.प्रमुख मोहन भागवत ने भी 26 अप्रैल, 25 को कहा कि ‘‘राजा का कत्र्तव्य है प्रजा की रक्षा करना।’’

------------

पर,यह काम आसान नहीं है और न ही जल्द संपन्न हो जाने वाला काम है।

क्योंकि पाकिस्तान तथा दुनिया के जेहादियों के ,जिसमें भारत भी हैं,जीवन का एकमात्र लक्ष्य है दुनिया भर में इस्लाम का शासन कायम करना चाहे उसका जो भी नतीजा हो।

मध्य युग में भी मुगल आक्रांता भारत पहुंचकर अपने सैनिकों से कहते थे कि काफिरों से युद्ध करके शहीद होगे तो जन्नत में जाओगे।विजयी होगे तो राज करोगे।

--------------

अब वैसे कुछ लोगों के बयान पढ़िए--

प्रतिबंधित जेहादी संगठन सिमी के अहमदाबाद जोनल सेके्रट्री साजिद मंसूरी ने कहा था कि भारत में जब भी हम सत्ता में आएंगे,मंदिरों को ध्वस्त कर देंगे और वहां मस्जिद बनाएंगे।

---टाइम्स आॅफ इंडिया--30 सितंबर 2001

---------------

9 अप्रैल 2008 के हिन्दुस्तान टाइम्स के अनुसार सिमी के संस्थापक सदस्य सफदर नागौरी ने

कहा था कि हमारा लक्ष्य जेहाद के जरिए भारत में इस्लामिक शासन कायम करने का है।

--------------

सिमी ,इंडियन मुजाहिद्दीन तथा इसी तरह के कुछ अन्य जेहादी संगठनों ने मिलकर पाॅपुलर फंट्र आॅफ इंडिया बना लिया है।उसका राजनीतिक संगठन है--एस.डी.पी.आई.।

प्रतिबंधित पी.एफ.आई.कातिलों के अनेक हथियारबंद दस्ते तैयार कर रहा है।उसका लक्ष्य है--2047 तक भारत को इस्लामिक देश बना देने का।पी.एफ.आई.कहता है कि जिस दिन मुसलमानों में से दस प्रतिशत लोग भी हमारे साथ जुड़ जाएंगे,उस दिन हम अपना लक्ष्य पूरा कर लेंगे।(भारत के जो राजनीतिक दल,पत्रकार और बुद्धिजीवी पी.एफ.आई.के हिंसक कारनामों की आलोचना तक नहीं करते,वे आशंकित गृह युद्ध के समय किधर रहेंगे,उनके बारे में अनुमान अभी से लगा लीजिए।)

खबर है कि ऐसे ही संगठनों के बल पर राहुल-प्रियंका नायनाड (केरल)से चुनाव जीतते रहे हैं।क्या पी.एफ.आई.-एस.डी.पी.आई. के खिलाफ कभी किसी कांग्रेसी नेता का कोई बयान आपने कहीं पढ़ा या सुना है ?) 

  क्या हामिद अंसारी(पूर्व उप राष्ट्रपति व कांग्रेस नेता ) और कांग्रेस का सेक्युलरिज्म,पी.एफ.आई.के सेक्युलरिज्म से मेल खाता है ?

  यदि ऐसा नहीं है तो हामिद अंसारी पी.एफ.आई.की महिला शाखा के समारोह में शामिल होने के लिए 23 सितंबर, 2017 में कोझीकोड क्यों गए थे ?

-------------

25 अप्रैल, 2025 को पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने यह स्वीकार किया कि पश्चिमी देशों के लिए हम अपने यहां आतंकवादी संगठनों को समर्थन,प्रशिक्षण और वित्त पोषण करने का गंदा काम करते रहे हैं।

---------------------

17 जनवरी, 2023 को पाकिस्तान के प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ ने कहा था कि भारत के साथ हम तीन युद्ध लड़े ।इससे हमें कंगाली मिली है।

----------------

पहलगाम की घटना पर पाक प्रधान मंत्री शरीफ ने 26 अप्रैल 25 को कहा कि पहलगाम हमले की किसी भी तटस्थ और पारदर्शी जांच के लिए हम तैयार हैं।

-------------

और अंत में 

-----------

दरअसल किसी एक घटना की जांच व दोषियों की सजा दे देने से इस व्यापक समस्या का हल नहीं होगा।

पहले समस्या की जड़ तक पहुंचिए और उस समस्या का समाधान कीजिए,यदि हल चाहते हैं तो।

समस्या है--पाकिस्तान के मदरसों का पाठ्यक्रम।अनेक लोग बताते रहते हैं कि आपके मदरसे आतंक के कारखाने बन चुके हैं।

नतीजा यह है कि पाक की अधिकांश जनता आटा और जेहाद के बीच आटा नहीं बल्कि जेहाद का चयन करती है।

--------------

यदि पाकिस्तान सचमुच शांति और सह अस्तित्व चाहता है तो अपने मदरसों के पाठ्यक्रमों के औचित्य और वास्तविकता की जांच दुनिया के कुछ तटस्थ शिक्षा विदों की टीम से कराए।यदि तटस्थ जांचकर्ता आपके मदरसों को आतंक की फैक्ट्री नहीं मानेंगे तो कोई बात नहीं।यदि मानेंगे तो उसमें परिवर्तन कीजिए।

अन्यथा आपकी बाकी बातों का कोई मतलब नहीं है।

पता नहीं आने वाले दिनों में न जाने कितने लोग मिट्टी में मिलेंगे !!

क्योंकि संकेत बताते रहे हैं कि बांग्लादेश व भारत की हाल की कुछ वीभत्स घटनाओं के कारण भारत के जन मानस में पविर्तन आ रहा है।

एक तरफा धर्मनिरपेक्षता और नकली समाजवाद की अफीम के नशे की आदत से भारत के अधिकतर लोग अब तेजी से बाहर निकलने लगे हैं।

-------------------

1 मई 25