जब राजनीति में वैसे नेता थे !
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, सुरेंद्र किशोर
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प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि
‘‘राजनीतिक मतभेद अपनी जगह है।
लेकिन अगर मुझसे कोई यह पूछे मैं अपना वोट किसे दूंगा,तो मैं निश्चित रूप से यही कहूंगा कि मैं अपना कीमती वोट राममनोहर लोहिया को दूंगा।’’
यह बात सन 1962 के आम चुनाव के समय की है जब नेहरू और लोहिया एक दूसरे के खिलाफ फुलपुर
(उत्तर प्रदेश ) में लोक सभा चुनाव लड़ रहे थे।
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एक प्रसंग बिहार का भी
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सन 1957 में बिहार में कांगे्रस विधायक दल के नेता पद का चुनाव हो रहा था।
डा.श्रीकृष्ण सिंह और डा.अनुग्रह नारायण सिंह एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे थे।
कांटे का मुकाबला था।
फिर भी श्रीबाबू ने अपना वोट नहीं डाला।
किसी ने उनसे कारण पूछा तो
उन्होंने कहा कि
‘‘मैं वोट देता तो अनुग्रह बाबू को ही देता।’’
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27 मई 25
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