पत्रकारिता के ‘स्वर्ण शब्द’
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सुरेंद्र किशोर
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‘मेनचेस्टर गार्जियन’ के संपादक और ब्रिटिश
सांसद सी.पी.स्काॅट ने करीब सौ साल पहले ही यह कह दिया था कि
‘‘तथ्य पवित्र है, किंतु टिप्पणी के लिए आप स्वतंत्र हैं।’’
(नोट-यानी, कोई व्यक्ति किसी पत्रकार की तथ्यात्मक गलती पर तो सवाल उठा सकता है।किंतु उसके विश्लेषण या विचारों पर नहीं।अन्यथा,वह पत्रकारिता की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप माना जाएगा।)
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2
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नब्बे के दशक में मैंने पटना के दैनिक अखबार ‘‘द इंडियन नेशन’’ में सिंगापुर डेटलाइन से बी.बी.सी. के उप प्रधान की एक महत्वपूर्ण टिप्पणी पढ़ी थी।
उनसे पूछा गया था कि बी.बी.सी. की साख का राज
क्या है ?
उन्होंने बताया कि
‘‘यदि दुनिया के किसी देश में कम्युनिज्म आ रहा है तो हम यह सूचना लोगों को देते हैं कि आ रहा है।
उसे रोकने की कोशिश नहीं करते।
दूसरी ओर, यदि किसी देश से कम्युनिज्म जा रहा है तो हम रिपोर्ट करते हैं कि जा रहा है।
हम उसे बचाने की भी कोशिश नहीं करते।
यही हमारी साख का राज है।’’
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(नोट-आज का बी. बी. सी. नब्बे के दशक वाली अपनी नीति पर कायम है या नहीं, यह मुझे नहीं मालूम।)
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3
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सन 1983 में एक मुलाकात में नवभारत टाइम्स के प्रधान संपादक राजेंद्र माथुर ने एक खास संदर्भ में मुझसे कहा था,
‘‘ आप प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ जितनी भी कड़ी खबर लाइए,मैं उसे जरूर छापूंगा।
किंतु इंदिरा गांधी में कई गुण भी हैं।मैं उन्हें भी छापूंगा।’’
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(नोट-दरअसल जनसत्ता ज्वाइन करने के बाद मैं शिष्टाचार मुलाकात के लिए माथुर साहब के आॅफिस में गया था।उन्होंने मुझसे पहला सवाल यही किया--आपने नवभारत टाइम्स ज्वाइन क्यों नहीं किया ?मैंने उनसे कहा कि आपका अखबार दब्बू है।इंदिरा गांधी के खिलाफ नहीं लिख सकता।
उसके जवाब में रज्जू बाबू ने कहा --
‘‘नो, सुरेंद्र जी,यू आर मिस्टेकन।मेरा अखबार दब्बू नहीं है।पर, अभियानी भी नहीं है।’’उसके बाद उन्होंने वह बात कही जो मैं ऊपर लिख चुका हूं।)
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4
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बात तब की है जब मैं ‘जनसत्ता’ का बिहार संवाददाता था।
चंद्र शेखर सिंह बिहार के मुख्य मंत्रंी थे।मेरे खिलाफ शिकायत करने जन संपर्क विभाग के निदेशक हमारे संपादक प्रभाष जोशी से मिलने दिल्ली गये।
उन्होंने कहा--आपके संवाददाता एकतरफा लिखते हैं।मुख्य मंत्री से नहीं मिलते।
प्रभाष जोशी--क्या गलत भी लिखते हैं ?
निदेशक -नहीं,गलत तो नहीं लिखते।किंतु पुरानी -पुरानी राजनीतिक कहानियां लिखते रहते हैं।
जोशी जी--आप ऐसे दल के मुख्य मंत्री की सिफारिश करने आये हैं,जिस दल की प्रधान मंत्री कहती हैं कि मैंने एन.टी.रामाराव सरकार की बर्खास्तगी की खबर टेलिप्रिंटर पर देखी।
उसके बाद दोनों के बीच का संवाद समाप्त हो गया।
(नोट-निदेशक महोदय पूरे पेज का सरकारी विज्ञापन लेकर गये थे।जोशी जी के आॅफिस से निकलते समय वह विज्ञापन भी उनके पास ही रहा जो पटना लौट आया।)
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20 मई 25
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