शनिवार, 11 अक्टूबर 2025

 जेपी जन्म दिन-11 अक्तूबर

लोहिया पुण्य तिथि-12 अक्तूबर

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जेपी-लोहिया इसलिए सफल हुए क्योंकि

उन दोनों ने देश-काल-पात्र की जरूरतों 

के अनुसार अपनी नीति-रणनीति तय की

पुरानी बातों की बंदरमूठ नहीं पकडी 

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सुरेंद्र किशोर

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डा.राम मनोहर लोहिया ने सन 1967 में देश की सत्ता पर से कांग्रेस का एकाधिकार तोड दिय़ा।

प्रतिपक्षी दलों को एकजुट कर लेने में उनकी सफलता के कारण ही सन 1967 में 9 राज्यों में पहली बार गैर कांग्रेसी सरकारें बनीं।उससे पहले लोहिया के कुछ प्रमुख साथी कम्युनिस्टों और भारतीय जनसंघ के साथ समाजवादियों की एकजुटता के खिलाफ थे।पर लोहिया नहीं माने।

लोक नायक जयप्रकाश नारायण ने सन 1977 में केंद्र की सत्ता से कांग्रेस का एकाधिकार तोड़ा।

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जेपी -लोहिया इस मामले में सफल इसलिए हो सके क्योंकि उन महान व दूरदर्शी नेताओं ने देश के व्यापक हित के बारे में सोचा और जो दल साथ आ सकते थे ,उन्हें साथ लिया।दोनों नेताओं में से किसी ने यह नहीं कहा कि भारतीय जनसंघ अछूत है।

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डा.लोहिया ने कहा था कि कांग्रेस को हटाने के लिए हम शैतान से भी हाथ मिलाने को तैयार हैं।क्योंकि वे कांग्रेस को बड़ा शैतान मानते थे।

इमर्जेंसी तो बाद में लगी,सन 1971 में लोक सभा के चुनाव के तत्काल बाद से ही जब प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी एकाधिकारवादी प्रवृति के तहत शासन  शुरू किया तो जेपी ने इंडियन एक्सपे्रस में लेख लिख कर उनका विरोध प्रारंभ कर दिया।तभी से इंदिरा जेपी पर खफा थी।

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ध्यान रहे कि लोहिया और जेपी अपने लिए सत्ता नहीं चाहते थे।इसीलिए लोगों ने उन पर भरोसा किया।

ये दोनों चाहते तो जवाहरलाल नेहरू, जेपी और लोहिया को अपनी सत्ता में शामिल कर सकते थे।

डा.लोहिया सन 1936 में कांग्रेस के विदेश विभाग के प्रधान बनाये गये थे जब जवाहरलाल नेहरू कांग्रेस अध्यक्ष थे।

आजादी के बाद जेपी को नेहरू ने सरकार चलाने में मदद देने के लिए आमंत्रित किया था।पर,जेपी ने उन्हें 

समाजवादी कार्यक्रम की एक लंबी सूची थमा दी।नेहरू ने जब उसे लागू करने में असमर्थता दिखाई तो जेपी कांग्रेस से अलग ही रहे।

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आज देश की समस्याएं

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मेरी समझ से आज देश के सामने दो 

सबसे बड़ी समस्याएं हैं।

1.-भारत में सर्व व्यापी भ्रष्टाचार

2.-भारत सहित दुनिया भर में चल रही जेहादी आंधी

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इन दोनों समस्याओं के खिलाफ बेलाग-लपेट संघर्ष करके जो दल इन्हें पराजित करेगा,वे ही राजनीतिक दल या दल समूह इस देश की अधिकतर जनता के प्रिय बनेंगे,बाकी राजनीतिक दल समय के साथ कमजोर होते जाएंगे।

जेपी और लोहिया के जीवन से फिलहाल यही सबक मिलते हैं।

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पुनश्चः

जेपी पर जब भी कुछ आप लिखेंगे तो कुछ अर्ध ज्ञानी लोग कहेंगे कि उनके आंदोलन के कारण जेपी के जो चेले सत्ता में आए, वे बेईमान निकले।

 अरे भाई, जेपी के आंदोलन और इमर्जेंसी के तत्काल बाद सन 1977 में जो सरकारें बनीं थीं,उसके मुखिया कंेद्र में मोरारजी देसाई थे और बिहार में कर्पूरी ठाकुर।क्या ये दोनों बेईमान थे ?

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जिनकी ओर अज्ञानियों का इशारा होता है,वे ‘‘बोफोर्स आंदोलन’’और मंडल मंडल आंदोलन के कारण सत्ता में आए और जमे।केंद्र में सन 1989 में और बिहार में सन 1990 में।

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11 अक्तूबर 25


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