‘‘जब सरकार बनने का कोई चांस न हो तो
टिकट के बदले भारी ‘‘चंदा’’ लेकर ही पार्टी व परिवार के लिए कुछ कमा लिया जाए,यही बेहतर रहेगा !
तालमेल करने के कारण यदि चंदा के बदले बांटने लायक सीटों की संख्या कम हो जाएगी तो फिर अगले पांच साल का खर्च कैसे निकलेगा ?’’
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