कितने लोगों को पसंद हैं राहुल गांधी
की देह -भाषा और मौखिक भाषा ??
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सुरेंद्र किशोर
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राहुल गांधी की जो मौखिक भाषा है और उनकी जो देह भाषा है,वह
देश देख रहा है।
संसद के भीतर या बाहर राहुल गांधी जिस तरह अपनी देह भाषा--मौखिक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं,यदि किसी शालीन व्यक्ति के ड्राइंग रूम में जाकर वे वही सब करने लगें तो क्या वह शालीन व्यक्ति चाहेगा कि राहुल जी अगले दिन भी उस व्यक्ति के घर जायें ?(यदि उस व्यक्ति को कांग्रेस का टिकट नहीं लेना हो तो।)
जो लोग चाहेंगे कि राहुल जी घर के बाहर और भीतर,संसद के बाहर और भीतर भी वही सब करते रहें,जो कुछ कर रहे हैं,
सिर्फ वैसे ही लोग राहुल को अगला प्रधान मंत्री देखना पसंद करंेेगे।
बाकी जनता ?
बाकी जनता कहेगी कि अपने आचरण से आप अपनी पार्टी को जिस तरह दिन प्रति दिन बर्बाद कर रहे हैं,वह करने का आपको पूरा अधिकार है,पर आपको इस देश के साथ छेड़छाड़ करने नहीं दिया जाएगा।
इस देश को ‘‘केरल शैली का शासन’’ नहीं चाहिए।
(केरल में आज जो कुछ हो रहा है,वह बहुत चिंताजनक है,सारी बातें बाहर नहीं आ रही हैं।वहां के हिन्दू संगठन उद्वेलित हैं।विश्वास न हो तो गुगल की मदद लीजिए।)दूसरी ओर यू.पी.में तो कुछ मुस्लिम महिलाएं भी टी.वी.चैनलों पर कहती हैं कि बाबा के राज में हम अंधेरा होने के बाद भी घर से
निकल कर सुरक्षित घर लौट सकती हैं।सन 2017 से पहले पहले ऐसा नहीं था।
बिहार में भी सन 2005 से पहले कोई व्यक्ति अंधेरा हो जाने के बाद सामान्य स्थिति में अपने घर से नहीं निकलता था।
पटना जंक्सन पर जब कोई व्यक्ति अंधेरा हो जाने के बाद कहीं बाहर से ट्रेन से पहुंचता था तो पटना स्थित अपने घर भयवश तत्काल नहीं चला जाता था।रात पटना स्टेशन पर ही गुजार देता था।अगली सुबह जाता था।
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16 अगस्त 26
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