समर शेष है,नहीं पाप का भागी केवल व्याध,
जो तटस्थ हंै,समय लिखेगा उनके भी अपराध।
---राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर
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आज भारत की जो स्थिति है,उसमें दिनकर की
उपर्युक्त रचना सर्वाधिक मौजूं है।
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मुहम्मद गोरी और पृथ्वीराज चैहान के बीच जयचंद तटस्थ रह गया था।मानसिंह तो अकबर का एक सेनापति बन कर महाराणा प्रताप से लड़ रहा था।
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पर,एक खास अर्थ में जयचंद का नाम आज भी अधिक ही लिया जाता है,मानसिंह का यदाकदा ही।जयचंद संज्ञा नहीं बल्कि विशेषण बन गया है।
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आज भी सनातन को समाप्त करने के लिए बाहर-भीतर की शक्तियां पूरी ताकत से लड़ रही हैं।दूसरी ओर, सनातन की रक्षा करने वाली शक्तियां बचाव के सारे उपाय कर रही हैं।
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पर,इस बीच भारत के अनेक लोग तटस्थ हैं।उन तटस्थों को पहचानने में आपको कोई दिक्कत नहीं होगी।
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आने वाली पीढ़ियां आज के तटस्थों को किस श्रेणी में रखेगी ??
पूर्व अनुमान लगा लेना कठिन नहीं है।
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सुरेंद्र किशोर--23 सितंबर 26
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