शुक्रवार, 16 मई 2025

 जिन्हें बनाने में ईश्वर ने अन्य की 

अपेक्षा थोड़ा अधिक समय लगाया।

मेरे लिए उनके पास समय कम था !!

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सुरेंद्र किशोर

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वे थे और हैं--

1.-डा.वशिष्ठ नारायण सिंह(1946-2019)

2.-डा.श्रीकांत जिचकर(1954-2004)

3.-डा.सुधांशु त्रिवेदी

4.-विकास दिव्यकीर्ति

5.-खान सर

आदि आदि ......

सूची अधूरी है।आप इसे थोड़ी लंबी कर दीजिए।

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15 मई 25



         शादी की साल गिरह

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आज से ठीक 52 साल पहले यानी आज ही के दिन वैदिक रीति से हमारा विवाह हुआ था।

इस अवसर पर आज हमने अत्यंत संक्षिप्त समारोह में पूजा-अर्चना की।

इस अवसर पर सिर्फ एक ही बात कह सकता हूं--

मुझे याद नहीं कि इस बीच हमने एक-दूसरे पर कभी चिल्लाया भी हो !

(साथ का चित्र हमारा ही है,पर पुराना है।)

   ---- सुरेंद्र किशोर

        15 मई 25


 


सोमवार, 12 मई 2025

 भूली-बिसरी यादें

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सोवियत संघ और इजरायल ने अपने दुश्मनों को 

दूसरे देशों में खोज-खोज कर मार डाला था

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सुरेंद्र किशोर

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   सेवियत संघ सरकार ने सन 1940 में मैक्सिको में छिपे अपने राजनीतिक दुश्मन ट्राटस्की को ढंूढ़ कर मरवा डाला था।

तब यह दुनिया का चर्चित हत्याकांड साबित हुआ था।

उसी तरह 1972 में हुए म्यूनिख ओलम्पिक में 11 इजरायली खिलाड़ियों के हत्यारे अरब आतंकियों को मोसाद ने एक -एक कर खोजकर मार डाला।

  स्टालिन के कट्टर विरोधी ट्राटस्की की हत्या करवाने के लिए सोवियत जासूसांे ने छल-प्रपंच का इस्तेमाल किया था।

  ट्राटस्की की 20 अगस्त 1940 को उसका विष्वासी बन कर जैक्सन ने तब हत्या कर दी जब वे मैक्सिकोे में निर्वासित जीवन बिता रहे थे।स्टालिन के भय से वे वहां छिपे थे।

  स्टालिन ने अपने जासूसों को यह सख्त आदेष दे दिया था कि ‘‘किसी भी नीति -रणनीति का पालन क्यों न करना पड़े,कोई कार्य पद्धति क्यों न अपनानी पड़े,पर ट्राटस्की को जल्द से जल्द खत्म कर दो।’’

 उधर ट्राटस्की ने पहले सोवियत संघ में स्टालिन की तानाषाही का विरोध किया ।

 जब स्टालिन ने एक- एक करके अपने राजनीतिक विरोधियों का सफाया करनाष्षुरू कर दिया तो ट्राटस्की विदेष भाग गये।

   ट्राटस्की ने मैक्सिको में शरण ली । वहां भी वह स्टालिन की सख्त आलोचना करते हुए यूं कहें कि उन्हें गालियां देते हुए स्थानीय अखबारों में लेख लिखते रहे।

  उन्होंने यह सोचा था कि षायद स्टालिन के लिए मैक्सिको दूर पड़ेगा।

पर, ट्राटस्की गलत सोच रहे थे। 

सोवियत जासूसों ने उनकी हत्या के लिए वहां भी एक छल के जरिए पक्का प्रबंध करा दिया।

  जासूसों ने पता लगाया कि मैक्सिको में ट्राटस्की का कौन ऐसा भक्त है जिसकी बात वह सुनते हंै।

पता चला कि वह एक लड़की है। सोवियत जासूसों ने ट्राटस्की की एक और कमजोरी का लाभ उठाया।ट्राटस्की किसी भोलेे भाले दिखने वाले अजनबी पर आसानी से विष्वास

कर लेते थे।

  जासूसों ने उनकी इस कमजोरी का भी लाभ उठाया।जैक्सन नामक भोला -भाला दिखने वाले एक व्यक्ति को  जासूसों ने ट्राटस्की की भक्त लड़की से पहले मित्रता करवा दी। 

उस लड़की को जैक्सन के खतरनाक मनसूबे का कोई संकेत तक नहीं मिला।

फिर जैक्सन का परिचय उसी लड़की ने ट्राटस्की से करवा दिया।

उस लड़की का ट्राटस्की के यहां अक्सर आना-जाना था।

ट्राटस्की ने उस पर विष्वास कर लिया।

  मैक्सिको के अखबारों में ट्राटस्की, सोवियत संघ में स्टालिन के अत्याचारों व ज्यादतियों की जो ‘झूठी -सच्ची कहानियां’ लिखते थे,उससे मैक्सिको में भी ट्राटस्की का एक प्रषंसक वर्ग तैयार हो गया था।

 जैक्सन का मैक्सिको के उस किलानुमा घर में आना -जाना षुरू हो गया जिसमें पूरी सुरक्षा के साथ ट्राटस्की रहते थे।

जैक्सन की रूचि भी लेख लिखने में थी।ट्राटस्की उससे अपने लेख के विषयों पर चिचार- विमर्ष करते थे।पर जैक्सन को एकांत में ट्राटस्की से मुलाकात का इंतजार था।ट्राटस्की ने 20 अगस्त 1940 को एक लेख पर विचार के लिए जैक्सन को एकांत में आमंत्रित किया।

उसी दिन का जैक्सन को इंतजार था।

वह रेन कोट पहन कर उस दिन गया।संतरी ने पूछा तो उसने बताया कि आज बारिस की आषंका है।पर अपनी कुटिल योजना के तहत उसने अपने रेन कोट में कटार,रिवाल्वर और कुदाल छिपा रखी थी।

  ट्राटस्की का जब पूरा ध्यान लेख पढ़ने में था तो जैक्सन ने निगाह बचाकर अपनी कुदाल निकाली और पीछे जाकर जोर से कुदाल से उनके सिर पर वार कर दिया।इस वार से  सिर पर तीन  इंच गहरा घाव बन गया।

ट्राटस्की बुरी तरह घायल होकर चिल्लाने लगे। 24 घंटे में ही ट्राटस्की के प्राण पखेरू उड़ गये।

  मैक्सिको की अदालत में जैक्सन पर मुकदमा चला।पुलिस ने यह साबित कर दिया कि वह रूसियों का खुफिया एजेंट था और ट्राटस्की की हत्या करने के लिए ही जाली पासपोर्ट पर मैक्सिको भेजा गया था।

   उसे  बीस साल की कैद की  सजा हुई।

सजा के दौरान उसने अपने अपराध और उसके पीछे के षड्यंत्र के बारे में किसी से कुछ भी नहीं कहा।

सजा की अवधि पूरी करने के बाद जैक्सन सोवियत संघ चला गया।

1972 में अरब आतंकवादियों ने म्यूनिख ओलम्पिक में 11 इजरायली खिलाड़ियों की हत्या कर दी थी।

 बाद के वर्षों में इजरायली खुफिया एजेंसी ‘मोसाद’ ने उन सारे षड्यंत्रकारी हमलावरों को खोज -खोज कर एक- एक कर मार डाला ।

वे इजरायल सरकार के डर से कई देशों में जा छिपे थे।

मोसाद ने करीब 20 वर्षों में यह टास्क पूरा किया था।हत्यारों को मोसाद ने बारी-बारी से इटली, फ्रांस, ब्रिटेन ,लेबनान,एथेंस और साइप्रस में अपने नाटकीय आपरेशन के जरिए मारा।

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पूर्व प्रकाशित

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यदि इजरायल ने 234 अरब छापामारों को रिहा कर दिया  होता तो सन् 1972 में 11 इजराइली ओलम्पिक खिलाड़ियों की जान बच जाती।

पर, व्यापक देशहित में इजरायल ने उन आतंकवादियों के सामने झुकना मंजूर नहीं किया जिन्होंने   म्यूनिख ओलम्पिक के दौरान 11 इजराइली खिलाड़ियों को बंधक बना रखा था।

 छापामारों को रिहा करने से इनकार कर देने पर 11 खिलाड़ियों को अरब आतंकवादियों ने मार डाला।उस दौरान  जर्मन पुलिस की कर्रवाई में चार छापामार 

भी मारे गये।तीन पकड़े गये।पर एक भागने में सफल हो गया।

  हां, बाद के वर्षों में इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने उन सारे षड्यंत्रकारी हमलावरों को खोज -खोज कर एक- एक कर मार डाला जो 11 इजराइली खिलाड़ियों की हत्या में शामिल  थे और तत्काल पकड़े जाने के बाद भी बाद में छोड़ दिए गए थे।

वे इजरायल के डर से कई देशों में जा छिपे थे।

मोसाद ने करीब 20 वर्षों में यह टास्क पूरा किया था।हत्यारों को मोसाद ने बारी-बारी से इटली, फ्रांस, ब्रिटेन ,लेबनान,एथेंस और साइप्रस में अपने नाटकीय आपरेशन के जरिए मारा।


 इंदिरा गांधी के लिए ‘दुर्गा’ षब्द ‘गोदी 

मीडिया’ ने अटल जी के मुंह में डाल कर

प्रचाारित कर दिया था

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सुरेंद्र किषोर

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1962 की हार के लिए के लिए रक्षा मंत्री दोषी,

पर, 1971 की जीत के लिए रक्षा मंत्री को श्रेय नहीं

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8 दिसंबर, 22 को कांग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि हिमाचल प्रदेश विधान सभा चुनाव में कांग्रेस की जीत का श्रेय प्रियंका गांधी को जाता है ।साथ ही, राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ को भी।

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पर,बाद में तीन राज्यों में जब कांग्रेस हार गयी तो कांग्रेस के शीर्ष  नेतृत्व ने इसके पीछे कांग्रेस कार्यकर्ताओं की कमजोरी बता दी।

साथ ही, टिकट बंटवारे में राज्य स्तर के कांग्रेसी नेताओं की गलतियों को भी जिम्मेदार ठहराया गया।

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कांग्रेस में यह पुरानी परंपरा है।

जीत के लिए ‘परिवार’ को शाबासी दो।

हार के कारणों को नीचे कहीं से ढंढ़ निकालो।

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सन 1962 में जब चीन के हाथों भारत की षर्मनाक पराजय हुई और हमारी हजारों वर्ग मील जमीन चीन ने छीन ली तो उसके लिए दोषी रक्षा मंत्री वी.के.कृष्ण मेनन करार दे दिए गए थे।

प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू नहीं।

मेनन को पद से हटा भी दिया गया।

1967 में मेनन को कांग्रेस का टिकट भी नहीं मिला जबकि वे लोक सभा के सिटिंग मेम्बर थे।

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दूसरी ओर, 1971 में जब बांग्ला देश विजय हुई तो उसका पूरा श्रेय प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी को दे दिया गया।

आंध्र के एक कांग्रेसी सासंद ने लोक सभा में इंदिरा को दुर्गा तक कह दिया।

पर,उस दुर्गा शब्द को तब के ‘गोदी मीडिया’ ने अटल बिहारी वाजपेयी के मुंह में डाल कर प्रचारित कर दिया।

आज भी कुछ अधपढ़ और राजनीतिक रूप से बेईमान नेता लोग दुर्गाष्षब्द अटल जी से जोड़ कर दोहरा रहे हैं।

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वाजपेयी जी ने तब के लोक सभा स्पीकर से मिल कर उनसे यह आग्रह किया था कि आपका सचिवालय इसका खंडन करे।

पर इंदिरा भक्त स्पीकर ने सब कुछ जानते हुए भी उस गलत खबर का खंडन नहीं करवाया।

बाद में रजत षर्मा के ‘आपकी अदालत’ कार्यक्रम में अटल जी ने कहा था कि मैंने कभी इंदिरा गांधी को दुर्गा नहीं कहा।(उस आप की अदालत कार्यक्रम को आप आज भी यू ट्यूब पर देख सकते हैं।) 

इंदिरा गांधी की जीवनी लेखिका पुपुल जयकर ने रिसर्च के बाद यह पाया था कि अटल जी ने दुर्गा नहीं कहा।इसलिए जयकर ने अपनी किताब में दुर्गा वाली बात अटल जी के मुंह में नहीं डाली।जयकर ने 

अटल जी से मिलकर कहा था कि दुर्गा वाली बात गलत ढंग से आपके मुंह में डाल दी गयी थी।मैंने रिसर्च के बाद यह पाया। 

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12 मई 25

 


बुधवार, 7 मई 2025

 युद्ध की स्थिति का एक लाभ

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देश के भीतरी दुश्मनों की पहचान 

एक बार फिर स्पष्ट हो जाती है।


रविवार, 4 मई 2025

 35 साल बाद भी यासिन मलिक फांसी से दूर

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जरा उधर भी नजर फेरे सुप्रीम कोर्ट !

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सुप्रीम कोर्ट से लोग नाउम्मीद होंगे तो 

उस निराशा का फायदा उठा कर कोई 

तानाशाह देश का शासक बन बैठेगा !

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2015 में सजायाफ्ता याकूब मेमन के मामले की सुनवाई 

करने के लिए सुप्रीम कोर्ट आधी रात में खुल गया था।पर 

यासिन मलिक पर सुप्रीम कोर्ट का ध्यान नहीं जा रहा है।

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सुरेंद्र किशोर

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35 साल पहले आतंकवादी यासिन मलिक ने भारतीय वायु सेना के 5 अधिकारियों को कश्मीर मेें गोलियों से भून दिया था।‘इंडिया टूडे’ से बातचीत में मलिक ने बाद में उसने स्वीकार भी किया था, 

‘‘हां,मैंने मारा था।

क्योंकि वे निर्दोष नहीं थे।’’

इसके बावजूद आज तक यासिन मलिक को कोई सजा

नहीं हुई।

‘सर्व शक्तिमान’ सुप्रीम कोर्ट की मौजूदगी के बावजूद! 

इतना ही नहीं, यासिन ने सन 2006 में उनके बुलावे पर तत्कालीन प्रधान मंत्री मन मोहन सिंह से उनके आवास पर मुलाकात भी की थी।

 कल्पना कीजिए कि उस मुलाकात की खबर पढ़कर व हंस -हंस कर हाथ मिलाते दोनों के फोटो मीडिया में देखकर वायु सेना के दिवंगत अफसरों की विधवाओं पर क्या बीती होगी !

 दूसरी ओर, कल्पना कीजिए ,उस फोटो से कश्मीर के आतंकियों का हौसला कितना बढ़ गया होगा !

उन्हें यह भी लग गया होगा कि निर्दोष सैनिकों का कत्ल करने के बावजूद इस देश का प्रधान मंत्री अपने आवास में हमारा स्वागत भी कर सकता है।

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याद रहे कि यासिन मलिक ने कश्मीर में 25 जनवरी, 1990 को एक साथ 5 एयर फोर्स अधिकारियों की हत्या कर दी थी।

अधिकारी ने उससे तब सिर्फ रास्ता पूछा था-तब कोई मुंठभेड़ नहीं हो रही थी।

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    अभियोजन पक्ष के पास मलिक के खिलाफ पुख्ता सबूत उपलब्ध हैं।

इसके बावजूद यासिन मलिक अब तक सजा से मुक्त है।

इस देश में कानून-व्यवस्था और न्याय -व्यवस्था के अत्यंत लचर होने के कारण ही जेहादी तत्वों का मनोबल भारत में दिन प्रति दिन बढता जा रहा है।साथ ही ,मुस्लिम वोट लोलुप नेताओं ने उनका मनोबल अपने कर्मों व बयानों के जरिए और भी बढ़ा रखा है।

इस देश के विभिन्न हिस्सों में जेहादी लोग तरह तरह के उपायों से मुस्लिमों की आबादी बढ़ाते जा रहे हैं। खास-खास इलाके में बहुमत में आ जाने पर एक -एक इलाके से गैर मुस्लिमों को जेहादी भगाते जा रहे हैं।यह रफ्तार जारी रही तो वह दिन देर नहीं, जब जेहादी तत्व पूरे भारत पर कब्जा कर लेंगे।क्योंकि वोट लोलुप राजनीतिक दल उनके प्रत्यक्ष-परोक्ष मददगार बने हुए है।

ऐसे ही विशेष अवसरों के लिए संविधान निर्माताओं ने संविधान में अनुच्छेद -142 का प्रावधान किया है।यानी, सुप्रीम कोर्ट के हाथों में इसके जरिए तगड़ा ब्रह्मास्त्र पकड़ा दिया।

 भारत में एक विशेष स्थिति पैदा हो चुकी है।संविधान निर्माताओं ने इस स्थिति की पूर्व कल्पना ही नहीं की थी।

इस देश के कुछ राजनीतिक दल वोट के लिए अपने कारनामों से देश का इलाका दर इलाका जेहादियों को सांैपते जा रहे हैं।मुर्शिदाबाद से हिन्दू पलायन की ताजा घटनाएं उसका उदाहरण है।

सुप्रीम कोर्ट से लोगों को बड़ी उम्मीद रही हेैं।

इसलिए वह इस बात का ध्यान रखे कि मानवाधिकार सिर्फ जेहादियों का ही नहीं होता,बल्कि शांतिप्रिय करोड़ों भारत वासियों का भी होता है।यदि इस देश का सामान्य कानून इस देश के इस्लामिक देश में परिणत होने से रोकने में सहायक नहीं हो पा रहा है तो सुप्रीम कोर्ट को चाहिए कि वह संविधान के अनुच्छेद -142 का यथाशीघ्र इस्तेमाल करना शुरू कर दे।

सुप्रीम कोर्ट के लिए आज कठिन परीक्षा की घड़ी है।वह भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की आशंका को झूठा साबित करने का तत्काल ठोस प्रयास करे।

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4 मई 25


गुरुवार, 1 मई 2025

 इजरायल समझ गया है कि हमास का 

यदि खात्मा नहीं होगा तो एक दिन 

इजरायल का ही खात्मा हो जाएगा !

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समय आ गया है कि भारत भी समय रहते 

अपने लिए यही सबक ग्रहण कर ले 

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सुरेंद्र किशोर

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7 अक्तूबर, 2023 को हमास ने इजरायल के भीतर घुसकर हमला किया और करीब 12 सौ निर्दोष इजरायली और विदेशी नागरिकांे को मार डाला। 250 लोगों को बंधक बना लिया।

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यह हमला उसी तरह का था जिस तरह 26 नवंबर, 2008 को 

पाकिस्तानी जेहादी संगठन ने मुम्बई पर हमला करके 20 सुरक्षाकर्मियों सहित 174 भारतीयों और 26 विदेशियों को मार डाला। करीब 300 लोगों को घायल कर दिया।

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7 अक्तूबर, 23 की घटना पर इजरायल की प्रतिक्रिया--

इजरायल ने कठोर प्रति -प्रहार शुरू कर दिया जो अब भी जारी है।साथ ही, 

प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आॅफिस ने अक्तूबर, 2023 में ही यह कह दिया कि हमास के पूरी तरह खात्मे के साथ ही 

हमारा हमला रुकेगा।रोकने के लिए इजरायल किसी देश की सलाह नहीं मान रहा है।

 इजरायल यह जानता है कि 

यदि उसने हमास तथा अन्य जेहादी तत्वों को माफ कर दिया तो एक दिन खुद इजरायल बर्बाद हो जाएगा।

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भारत की प्रतिक्रिया-

2008 में मनमोहन सिंह सरकार ने कोई प्रति-प्रहार नहीं किया।क्योंकि वैसा करने पर कांग्रेस को यह भय था कि 2009 के लोक सभा चुनाव में मुस्लिम वोट उसे नहीं मिलेंगे।

इतना नहीं ,कुछ कांग्रेस नेताओं ने उन हमलावर जेहादियों 

का बचाव भी किया।

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गत साल जब जेहादी तत्वों ने बांग्ला देश में तख्ता पलट किया तो कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद और मणी शंकर अय्यर ने कहा कि जो कुछ बांगला देश में हुआ है,वैसा भारत में भी हो सकता है।

देर से ही सही,पर पहलगाम में वैसी घटना हो ही गई।

इसी 22 अप्रैल को पहलगाम में जेहादियों ने हमला कर धर्म पूछ-पूछ कर 26 निरपराध हिन्दुओं को मार डाला।

इसी तरह की हिंसा के बल पर जेहादी लोेग पूरी दुनिया में इस्लामिक शासन कायम करना चाहते हैं।इसके लिए वे भारत सहित अनेक देशों में पूरी दुनिया में सक्रिय हैं।पर,भारत के तथाकथित सेक्युलरों के लिए यह कोई समस्या ही नहीं है।

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पर,इस बार भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और कड़ा रुख अपनाया है।कदम भी उठाए हैं।

मोदी ने कहा है कि ‘‘आतंकियों की बची-खुची जमीन को भी मिट्टी में मिलाने का समय आ गया है।’’

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आर.एस.एस.प्रमुख मोहन भागवत ने भी 26 अप्रैल, 25 को कहा कि ‘‘राजा का कत्र्तव्य है प्रजा की रक्षा करना।’’

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पर,यह काम आसान नहीं है और न ही जल्द संपन्न हो जाने वाला काम है।

क्योंकि पाकिस्तान तथा दुनिया के जेहादियों के ,जिसमें भारत भी हैं,जीवन का एकमात्र लक्ष्य है दुनिया भर में इस्लाम का शासन कायम करना चाहे उसका जो भी नतीजा हो।

मध्य युग में भी मुगल आक्रांता भारत पहुंचकर अपने सैनिकों से कहते थे कि काफिरों से युद्ध करके शहीद होगे तो जन्नत में जाओगे।विजयी होगे तो राज करोगे।

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अब वैसे कुछ लोगों के बयान पढ़िए--

प्रतिबंधित जेहादी संगठन सिमी के अहमदाबाद जोनल सेके्रट्री साजिद मंसूरी ने कहा था कि भारत में जब भी हम सत्ता में आएंगे,मंदिरों को ध्वस्त कर देंगे और वहां मस्जिद बनाएंगे।

---टाइम्स आॅफ इंडिया--30 सितंबर 2001

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9 अप्रैल 2008 के हिन्दुस्तान टाइम्स के अनुसार सिमी के संस्थापक सदस्य सफदर नागौरी ने

कहा था कि हमारा लक्ष्य जेहाद के जरिए भारत में इस्लामिक शासन कायम करने का है।

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सिमी ,इंडियन मुजाहिद्दीन तथा इसी तरह के कुछ अन्य जेहादी संगठनों ने मिलकर पाॅपुलर फंट्र आॅफ इंडिया बना लिया है।उसका राजनीतिक संगठन है--एस.डी.पी.आई.।

प्रतिबंधित पी.एफ.आई.कातिलों के अनेक हथियारबंद दस्ते तैयार कर रहा है।उसका लक्ष्य है--2047 तक भारत को इस्लामिक देश बना देने का।पी.एफ.आई.कहता है कि जिस दिन मुसलमानों में से दस प्रतिशत लोग भी हमारे साथ जुड़ जाएंगे,उस दिन हम अपना लक्ष्य पूरा कर लेंगे।(भारत के जो राजनीतिक दल,पत्रकार और बुद्धिजीवी पी.एफ.आई.के हिंसक कारनामों की आलोचना तक नहीं करते,वे आशंकित गृह युद्ध के समय किधर रहेंगे,उनके बारे में अनुमान अभी से लगा लीजिए।)

खबर है कि ऐसे ही संगठनों के बल पर राहुल-प्रियंका नायनाड (केरल)से चुनाव जीतते रहे हैं।क्या पी.एफ.आई.-एस.डी.पी.आई. के खिलाफ कभी किसी कांग्रेसी नेता का कोई बयान आपने कहीं पढ़ा या सुना है ?) 

  क्या हामिद अंसारी(पूर्व उप राष्ट्रपति व कांग्रेस नेता ) और कांग्रेस का सेक्युलरिज्म,पी.एफ.आई.के सेक्युलरिज्म से मेल खाता है ?

  यदि ऐसा नहीं है तो हामिद अंसारी पी.एफ.आई.की महिला शाखा के समारोह में शामिल होने के लिए 23 सितंबर, 2017 में कोझीकोड क्यों गए थे ?

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25 अप्रैल, 2025 को पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने यह स्वीकार किया कि पश्चिमी देशों के लिए हम अपने यहां आतंकवादी संगठनों को समर्थन,प्रशिक्षण और वित्त पोषण करने का गंदा काम करते रहे हैं।

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17 जनवरी, 2023 को पाकिस्तान के प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ ने कहा था कि भारत के साथ हम तीन युद्ध लड़े ।इससे हमें कंगाली मिली है।

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पहलगाम की घटना पर पाक प्रधान मंत्री शरीफ ने 26 अप्रैल 25 को कहा कि पहलगाम हमले की किसी भी तटस्थ और पारदर्शी जांच के लिए हम तैयार हैं।

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और अंत में 

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दरअसल किसी एक घटना की जांच व दोषियों की सजा दे देने से इस व्यापक समस्या का हल नहीं होगा।

पहले समस्या की जड़ तक पहुंचिए और उस समस्या का समाधान कीजिए,यदि हल चाहते हैं तो।

समस्या है--पाकिस्तान के मदरसों का पाठ्यक्रम।अनेक लोग बताते रहते हैं कि आपके मदरसे आतंक के कारखाने बन चुके हैं।

नतीजा यह है कि पाक की अधिकांश जनता आटा और जेहाद के बीच आटा नहीं बल्कि जेहाद का चयन करती है।

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यदि पाकिस्तान सचमुच शांति और सह अस्तित्व चाहता है तो अपने मदरसों के पाठ्यक्रमों के औचित्य और वास्तविकता की जांच दुनिया के कुछ तटस्थ शिक्षा विदों की टीम से कराए।यदि तटस्थ जांचकर्ता आपके मदरसों को आतंक की फैक्ट्री नहीं मानेंगे तो कोई बात नहीं।यदि मानेंगे तो उसमें परिवर्तन कीजिए।

अन्यथा आपकी बाकी बातों का कोई मतलब नहीं है।

पता नहीं आने वाले दिनों में न जाने कितने लोग मिट्टी में मिलेंगे !!

क्योंकि संकेत बताते रहे हैं कि बांग्लादेश व भारत की हाल की कुछ वीभत्स घटनाओं के कारण भारत के जन मानस में पविर्तन आ रहा है।

एक तरफा धर्मनिरपेक्षता और नकली समाजवाद की अफीम के नशे की आदत से भारत के अधिकतर लोग अब तेजी से बाहर निकलने लगे हैं।

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1 मई 25