कानोंकान
सुरेंद्र किशोर
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काले धन की तलाश में केंद्र और बिहार सरकार की सक्रियता से लोगबाग खुश
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शासन में शुचिता के आग्रही लोगों के लिए यह संतोष की बात है।
वह यह कि बिहार सरकार से लेकर केंद्र सरकार तक की जांच एजेंसियां उन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाइयां कर रही हंै जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं।
गत जुलाई में पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और उनकी महिला मित्र के यहां करीब 50 करोड़ रुपए बरामद किए गए।
बिहार सरकार के एक इंजीनियर के दलाल के पास हाल में तीन करोड़ रुपए पाए गए।
न्यायप्रिय लोगों के लिए यह खुशी की बात है कि बिहार में गठबंधन बदल जाने के बावजूद भ्रष्ट लोगों के खिलाफ जांच एजेंसी की कार्रवाई नहीं रुकी है।
मनी लाउंडरिंग एक्ट की दो धाराओं पर सुप्रीम कोर्ट विचार कर रहा है।एक आरोपित ने उन धाराओं की कठोरता कम करने की अदालत से गुहार की है।ध्यान रहे कि इन धाराओं की कठोरता के कारण ही जांच एजेंसी को अधिक सफलता मिल रही है।
यदि सुप्रीम कोर्ट ने उसकी कठोरता कम नहीं की तो भ्रष्टों के खिलाफ कारगर कार्रवाई जारी रहेगी।
बिहार सरकार भी यही संकेत दे रही है कि ‘‘भ्रष्टों और अपराधियों को न फंसाएंगे और न बचाएंगे।’’
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10 फीसद के पास 50 फीसद संपत्ति
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सन 2019 के नेशनल सेम्पल सर्वे के अनुसार इस देश के सिर्फ 10 प्रतिशत लोगों के पास देश की 50 प्रतिशत भौतिक और वित्तीय संपत्ति है।
संपत्ति के संकंेद्रण में भ्रष्टाचार का बड़ा योगदान है।
उधर भ्रष्टाचार कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है।
कालेधन के खिलाफ कार्रवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सन 2011 में एस.आई.टी.गठित करने का केंद्र सरकार को आदेश दिया था।
उस आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार की अपील सन 2014 के मार्च में अदालत ने खारिज कर दी।
उसके कई महीने बाद एस.आई.टी गठित हुई।
पर हाल में जब मनी लाउंडरिंग एक्ट को कारगर बनाया गया तो छिपे काले धन तेजी से बाहर आने लगे।
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लाउड स्पीकरों का शोर
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आखिर लाउड स्पीकरों के कानफाड़ू शोर से बच्चों और बूढ़ों को कौन बचाएगा ?
न सिर्फ बीमार,बल्कि परीक्षार्थी भी
अनेक जगहों में शोर से परेशान रहते हैं।
पर,प्रशासन कहता है कि यह नाजुक मामला है।इसमें हम हस्तक्षेप नहीं करेंगे।
दरअसल सभी समुदायों के धर्म स्थलों के लाउड स्पीकरों के खिलाफ समान रूप से कार्रवाई हो तो किसी को कोई शिकायत नहीं रहेगी।
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने पहले गोरखनाथ मंदिर से अनावश्यक लाउड स्पीकर हटवा दिए थे।उसके बाद ही अन्य धर्म स्थलों से हटवाए गए।
नतीतजन कोई नाराज नहीं हुआ।
लाउड स्पीकरों की आवाज यदि धर्म स्थल परिसर से बाहर न जाने दिया जाए तो अनेक लोग रोज -रोज पीडित होने से बचेंगे।
वैसे कितनी ऊंची आवाज में लाउड स्पीकर बजे,इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट का आदेश मौजूद है।
कम से कम उसे तो सरकार लागू करे।
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सदनों में अशांति की समस्या
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संसद के दोनों सदनों में कैसे शांतिपूर्वक कामकाज हो,इसको लेकर संबंधित पक्ष इन दिनों कुछ अधिक ही चिंतित हैं।
जाहिर है कि पीठासीन पदाधिकारी और नरेंद्र मोदी सरकार कोई राह तलाश रहे हैं।
संसद सदस्यों के लिए नई आचार संहिता बनाने के प्रस्ताव पर भी विचार हो रहा है।
किंतु सवाल है कि जिन राज्यों में भाजपा प्रतिपक्ष में है,वहां के सदनों में शांति बनाए रखने में भाजपा के विधायकों की कितनी रूचि रहती है ?
बेहतर हो कि पहले खुद भाजपा उन राज्यों की विधायिकाओं में आदर्श संसदीय आचरण का नमूना पेश करे।
फिर उसे संसद में शालीनता लाने में सुविधा होगी।
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पिछड़ी जातियों का उप वर्गीकरण
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उत्तर प्रदेश में ओ.बी.सी. की 79 जातियां हैं।राज्य में ओ. बी. सी. की आबादी 45 प्रतिशत है।
राज्य सरकार की नौकरियों में ओ.बी.सी.जातियों का अलग -अलग कितना प्रतिनिधित्व है ?
यह आंकड़ा जुटाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने सर्वे शुरू कर दिया है।जानकार सूत्र बताते हैं कि आंकड़े आ जाने के बाद राज्य सरकार ओ.बी.सी.जातियों का उप वर्गीकरण कर सकती है।उप-वर्गीकरण का उद्देश्य यह होगा कि जिन कमजोर पिछड़ी जातियों का राज्य सरकार की नौकरियों में प्रतिनिधित्व कम है या नहीं है,उन्हें वाजिब प्रतिनिधित्व दिया जाए।
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भूली-बिसरी याद
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बिटिश सीक्रेट डाॅक्यूमेंट्स के अनुसार,सन 1942 में जयप्रकाश नारायण ने अंग्रेजी सेना के भारतीय सैनिकों की सहायता से भारत में सशस्त्र संघर्ष करने की योजना बनाई थी।
सैनिक और खुफिया विभाग से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर डा.मदन भट्ट ने
सन 1988 में एक साप्ताहिक पत्रिका में लिखा कि जयप्रकाश नारायण ने भारत में छापामारों के एक संगठन का पूरी बारीकी से निर्माण किया था।
उसे सैनिक विद्रोह का सहायक अंग माना गया था।दस्तावेज के अनुसार सेना के भारतीय अफसरों से जयप्रकाश नारायण के संबंध थे।
इनमें से कई अफसर उनकी सहायता के लिए तैयार भी थे।
सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिन्द सेना ने भारत के सैनिकों में देश भक्ति की नई चेतना जगा दी थी।
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और अंत में
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प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने सन 2020 में कहा था कि ‘वन नेशन ,वन इलेक्शन’ पर सोच-विचार जरूरी है।
यानी, देश में लोक सभा और विधान सभाओं के चुनाव एक ही साथ हों।
ताजा जानकारी यह है कि केंद्र सरकार ‘‘वन नेशन ,वन इलेक्शन’’ को कार्य रूप देने के लिए गंभीरतापूर्वक विचार-विमर्श शुरू करने जा रही है।
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प्रभात खबर,पटना-29 अगस्त 22
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