सन -1931 की जातीय जन गणना के अनुसार बिहार
-ओडिशा की विभिन्न प्रमुख जातियों की कुल संख्या
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तब के आंकड़े देखकर मोटा-मोटी अनुमान लगा लीजिए।
आज के आंकड़े का अनुमान सटीक तो नहीं ही होगा।
पर,मोटा-मोटी अनुमान लगाने में इससे मदद मिलेगी।
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सुरेंद्र किशोर
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सन 1931 में आखिरी बार जातियों के आधार पर देश में जनगणना हुई थी।
दूसरे विश्व युद्ध के कारण भारत में सन 1941 में जनगणना
नहीं हो सकी।
1947 में देश आजाद हुआ तो स्वतंत्र भारत की सरकार ने जातियों के आधार पर गणना बंद कर दी।
कुछ लोगों को आरोप रहा है कि बंद करने के पीछे उस सरकार का निहितस्वार्थ रहा।
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मेरे पास पूरे देश का तो नहीं किंतु सन 1931 की जनगणना के अनुसार बिहार-ओडिशा की प्रमुख जातियों की संयुक्त जनसंख्या का विवरण उपलब्ध है।
1931 में ओड़िशा भी बिहार का ही अंग था।झारखंड तो था ही।
(स्रोत--मुंगेरी लाल नीत पिछड़ा वर्ग आयोग की रपट--
16 फरवरी, 1976)
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बिहार-ओड़िशा--1931 जनगणना
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ग्वाला - 34 55 141
(इसमें अहीर,गोप व यादव शामिल हैं।)
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ब्राह्मण - 21 01 287
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कुर्मी - 14 52 724
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राजपूत --14 12 440
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कोइरी --13 01 988
चमार-- 12 96 001
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दुसाध--12 90 936
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तेली --12 10 496
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(बाभन)भूमिहार-8 9 5 6 0 2
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कायस्थ --3 83 435
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धानुक--5 47 308
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धोबी- 4 14 221
हजाम - 4 56 779
मल्लाह - 4 59 560
कहार- 5 24 030
कान्दू- 5 06 384
केवट- 4 71 389
कुम्हार- 5 99 038
तांती - 6 89 791
बनिया- 2 20 071
बढई-3 63 794
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नोट--ऊपर दी गई सूची पूर्ण नहीं है।
मैंने कुछ ही जातियों की तब की संख्या यहां लिखी है।
मुंगेरी आयोग की रपट में विस्तृत सूची है।
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मंडल आयोग की सिफारिश लागू होने से ठीक पहले केंद्र के आखिरी कांग्रेसी मंत्रिमंडल के सदस्यों का जाति वार ब्योरा पढ़ लेना प्रासंगिक होगा।कांग्रेस ने चूंकि मंडल आयोग की रपट के आधार पर लागू आरक्षण का विरोध किया था,इसलिए उसे
बाद में कभी लोक सभा में पूर्ण बहुमत नहीं मिला।
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सन 1988 के केंद्रीय मंत्रिमंडल में जातिगत स्थिति।
इसे देख कर कोई भी न्यायप्रिय व्यक्ति कह सकता है कि आरक्षण कितना जरूरी है।हालांकि मंत्रिमंडल में आरक्षण नहीं होता है,पर मंत्रिमंडल को बनाने वालों की मानसिकता का इससे पता चल जाता है।अन्य क्षेत्रों में भी लगभग यही होता रहा था तब।
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जब कांगे्रस की पूर्ण बहुमत वाली सरकारें केंद्र या राज्य में बनती थीं तो
मंत्रिमंडल में विभिन्न जातियों को कितना -कितना प्रतिनिधित्व मिलता था,देखें ।
कम से कम एक सरकार का तो आंकड़ा मिला है।
राजीव गांधी मंत्रिमंडल का यह आंकड़ा 14 फरवरी, 1988 का है।
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उस राजीव गांधी मंत्रिमंडल की जातिगत स्थिति
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ब्राह्मण-15
पिछड़ा--5
ईसाई-3
अनुसूचित जाति-9
मुसलमान-4
सिख-1
वनवासी-3
ठाकुर-2
अन्य ऊंची जाति-11
अन्य-6
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1988 से अब तक राजनीतिक और सामाजिक स्थिति में देश में काफी परिवर्तन हुआ है।
काफी कुछ बदल गया है।
मौजूदा नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल के सदस्यों का जातीय विवरण इस प्रकार है।इससे कांग्रेस मंत्रिमंडल और मोदी मंत्रिमंडल के बीच का फर्क साफ नजर आएगा।
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नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल --जातीय संख्या
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अन्य पिछड़ा वर्ग--27 मंत्री
सामान्य वर्ग--यानी उच्च जाति --28 मंत्री
अनुसूचित जाति--10 मंत्री
अनुसूचित जनजाति--5 मंत्री
अल्पसंख्यक--5 मंत्री
(कोई मुस्लिम नहीं )
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20 अगस्त 26
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