सोमवार, 26 अक्टूबर 2026

 


मिलावटखोरों से लोगों को बचाने के लिए कड़े उपाय जरूरी

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सुरेंद्र किशोर

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बिहार सहित पूरे देश में मिलावटखोरी की विकराल समस्या के समक्ष सरकारी उपाय बौने साबित हो रहे हैं।

अनेक लोग इस समस्या पर चिंता प्रकट करते रहे हंै।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का ध्यान अभी नशीले पदार्थों के सौदागरों के खिलाफ अधिक है।वह भी एक बहुत जरूरी काम है।पर,उसके बाद खाद्य,भोज्य पदार्थों तथा दवाओं में मिलावट की समस्या की ओर गृह मंत्री का ध्यान जाना चाहिए।

 महात्मा गांधी खाद्य पदार्थों में मिलावट को समाज के विरुद्ध एक खतरनाक कृत्य मानते थे।दोषियों के खिलाफ वे कड़ी कार्रवाई के पक्षधर थे।

पर,अब तो समय के साथ मिलावट की समस्या बहुत अधिक बढ ़गई  है।लोक स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है।

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अपराध घातक ,सजा काफी कम

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संसद में पेश की गई रपट के अनुसार, सन 2025-26 में बिहार में खाद्य मिलावट खोरी के मामले में किसी को सजा नहीं हुई।

राष्ट्रीय स्तर पर भी पिछले तीन वर्षों में सिर्फ 3614 मामलों में मिलावटखारों के दोष साबित हो सके और उन्हें सजा दी गई।

पर,सजा भी सबक सिखाने लायक नहीं।क्योंकि कानून में कम ही सजा का प्रावधान किया गया है।अधिकतर मामलों में आर्थिक दंड का प्रावधान है। 

  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सन 2011 में कहा था कि मिलावटखोरों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का इस्तेमाल किया जा सकता है।

यह अच्छी बात है कि हाल के महीनों में बिहार सरकार ने मिलावटखारों के खिलाफ कार्रवाइयां तेज की हैं।नमूने एकत्र किये जा रहे हैं।

उम्मीद की जाती है कि नमूने प्रयोग शाला जाने के रास्ते में बदल न जाएं।यह भी देखना होगा कि दोषियों को सबक सिखाने लायक सजा दिलवाई जाती है या नहीं।अन्यथा, आगे भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा।   

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उम्मीदवारों की संपत्ति का व्योरा

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यदि कोई चुनाव उम्मीदवार अपने शपथ पत्र के साथ गलत जानकारी दे तो उस पर कोई आम नागरिक भी अब मुकदमा दायर कर सकता है।पहले यह प्रावधान नहीं था।

यह महत्वपूर्ण फैसला सुप्रीम कोर्ट का है जो हाल ही में आया है।

हां,फैसले में यह भी कहा गया है कि किसी चुने हुए उम्मीदवार के खिलाफ यदि व्यक्ति कोई झूठा केस करता है,तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।

  ध्यान रहे कि संसद या विधान मंडल की सदस्यता के लिए चुनाव के सिलसिले में उम्मीदवारों को नामांकन पत्र के साथ तीन तरह के विवरण भी देने होते हैं।संपत्ति का व्योरा,शैक्षणिक योग्यता और  मुकदमे हांे तो उनका विवरण।

  कई बार यह शिकायत आती है कि कुछ उम्मीदवार जानबूझ कर गलत जानकारियां देते हैं।या अपूर्ण जानकारियां देते हैं।

 सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्णय के बाद शायद अब फर्क आए।

पर,एक खास तरह की मांग पर भी संबंधित पक्षों का गौर करना चाहिए।उम्मीदवार संपत्ति का व्योरा तो दे देते हैं ।पर अपनी आय का स्त्रोत नहीं बताते। अभी वह बताने की कोई कानूनी मजबूरी भी नहीं है।

क्या सुप्रीम कोर्ट खुद इस संबंध में अपनी ओर से पहल करके संपत्ति का स्त्रोत भी बताने के लिए उम्मीदवारों को 

मजबूर करेगा ?यदि करे तो राजनीति में स्वच्छता लाने में सुविधा होगी। 

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भूली-बिसरी यादें

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राजेंद्र माथुर अंग्रेजी के प्राध्यापक थे।किंतु वे हिन्दी पत्रकारिता में आए।प्रभाष जोशी पहले इंडियन एक्सप्रेस के स्थानीय संपादक थे।उन्हें हिन्दी पत्रकारिता में आने के लिए राजेंद्र माथुर ने ही प्रेरित किया।एक मशहूर अंग्रेजी पत्रिका ‘वीकली ’के चर्चित संपादक रहे प्रीतिश नंदी ने सन 1986 में लिखा--‘‘काश ! मुझे हिन्दी आती।’’

 उन्होंने लिखा कि हर बार मैंने हिंदी की शक्ति को महसूस किया।हिंदी पट्टी के नेताओं में हर कोई एक अद्भुत व्यक्तित्व है

और सबकी प्रतिभाएं अनूठी है।यह अलग बात है कि मेरी पीढ़ी के 

दंभी पत्रकारों ने इन प्रतिभाओं को या तो अनदेखा छोड़ दिया

या सिर्फ  उनका मजाक ही उड़ाया।जब भी मैं अपना टेप रिकार्डर लेकर हिंदी क्षेत्र की राजनीति के रहस्यों को समझने के लिए निकला हूं,हर बार मैंने हिंदी की शक्ति को महसूस किया है।

इन राजनेताओं की बारीकियों को समझने का जितना अधिक मुझे मौका मिला, उतना ही मैंेने अपने भगवान को कोसा है कि क्यों न उसने अड़तीस साल पहले मेरा जन्म स्थान कुछ मील पश्चिम,उत्तर या दक्षिण की ओर तय किया ! 

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और अंत मेें

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सोनपुर-छपरा नेशनल हाईवे पर बीच-बीच में गांवों और बाजारों के नामों के साइनबोर्ड लगे हुए हैं।साइन बोर्ड तो अच्छे हैं,किंतु उनमें से कुछ स्थानों के नाम गलत लिखे गये हैं।उन गलतियों से राज्य की छवि अच्छी नहीं बनती।

एक जगह डुमरी बुजुर्ग अंग्रेजी में तो ठीक लिखा गया है,पर हिन्दी में है--‘‘डुमारी बुजुर्ग।’’

 उसी तरह अंग्रेजी में शीतलपुर तो सही है,किंतु हिन्दी में लिखा गया है--सीतलपुर जो गलत है।

स्थान के नाम के साइन बोर्ड लिखे जाने से पहले स्थानीय लोगों से उनके सही -सही नाम पूछ लिये जाने चाहिए। 

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(23 अक्तूबर 2026 के दैनिक प्रभात खबर,पटना में प्रकाशित मेरे अनियतकालीन काॅलम यदाकदा से)  




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