मक्खियां 118 पुलिसकर्मियों को घायल
नहीं कर सकती !!!!
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कल की आशंकित हिंसा का मुकाबला करने के लिए
दिल्ली पुलिस को सुप्रीम कोर्ट की ओर से
खुली छूट मिलनी चाहिए थी।
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सुरेंद्र किशोर
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क्योंकि आशंका है कि राष्ट्रद्रोही तत्व आंदोलन की आड़ में कल ऐसी हिंसा कर सकते हैं जिसका चेन रिएक्शन पूरे देश में हो सकता है जैसा इन दिनों फ्रांस में हो रहा है।
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केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट को इस बात पर ध्यान देना
चाहिए कि प्रतिपक्ष की ओर से कल नई दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन के दौरान वैसी विषम स्थिति पैदा न हो जाए जो कुछ आज फ्रांस के विभिन्न नगरों में जारी है।कल भी सुप्रीम कोर्ट उस पर नजर रखे।जरूरत के अनुसार निदेश दे।
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बेहतर तो यह होता कि सुप्रीम कोर्ट कल की स्थिति को संभालने का पूरा भार दिल्ली पुलिस और आम प्रशासन को सौंप देता।
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किंतु ऐसा नहीं हुआ।यह दुर्भाग्यपूण है और इससे कई तरह के अपशकुन हो रहे हैं।
कोक्रोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा है कि ‘‘मक्खी मारने के लिए हथौड़ा न चलायें।’’
सुप्रीम कोर्ट भूल गया कि इन्हीं तेलचट्टों की ओर से
गत जुलाई में हुई हिंसा में दिल्ली पुलिस के छोटे -बड़े 118 पुलिसकर्मी घायल हो गये थे।वह अभूतपूर्व घटना थी।वे मक्खी नहीं हैं। जो शक्तियां कल दिल्ली में आंदोलनरत होने वाली हैं,उनकी मंशा के बारे में आई.बी. जानकारी सुप्रीम कोर्ट को
लेनी चाहिए।
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अब मंशा की झलक देखिए।
राहुल गांधी 15 जनवरी 2025 को यह कह चुके हैं कि मैं इंडियन स्टेट से लड़ रहा हंू।(इंडियन स्टेट से लड़ने का मतलब है भारत की इस देश की संवैधानिक व्यवस्था से लड़ना।)
कल ‘‘भाई-बहन’’ ने दिल्ली की महिला पुलिस कर्मियों के साथ जैसी अश्लील हड़कतें कीं,वह किसी जिम्मेदार नेता को शोभा नहीं देता।वे जिम्मेदार नेता हैं भी नहीं,यह बार -बार साबित हो चुका है।
उनके दल के सलमान खुर्शीद और मणिशंकर अय्यर कह चुके हैं कि जो कुछ बांग्ला देश में (तख्ता पलट)हुआ,वैसा भारत में भी हो सकता है।
कल जो लोग दिल्ली में आंदोलनरत होने वाले हैं उनकी, भारत विरोधी विदेशी शक्तियों से साठगांठ की खबरें आती रहती हैं।
ऐसी स्थिति में देश में कई तरह के अपशकुन हो रहे हैं।
-----सुरेंद्र किशोर
9 अक्तूबर 26
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