यह आंदोलन नहीं, आक्रमण है !
‘‘कसाब एनर्जी’’ के साथ ?!
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भारत में तख्ता पलट का सपना यानी
मैया, मोरे चांद खिलौना लैहों ?!
पर,याद रहे, भारत कोई ‘बनाना रिपब्लिक’
(यानी ढीला-ढाला व भ्रष्ट शासन वाला
देश)नहीं है।
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सुरेंद्र किशोर
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तख्ता पलट वहीं संभव है जहां का शासन तंत्र भ्रष्ट हो
और सुरक्षा-व्यवस्था ढीली हो।मोदी राज में वैसा नहीं।
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राहुल गांधी और प्रतिपक्ष को चाहिए कि वह अपना चाल,चरित्र और चिंतन में सुधार करके पहले बहुमत जनता का विश्वास जीते।
सड़कों पर हंगामा करने और महिला सिपाहियों के साथ अश्लील हड़कतें करने से कोई राजनीतिक लाभ नहीं होने वाला।
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बालक अपनी मां से कह रहा है--
‘‘मैया,मैं तो चांद खिलौना लैहों।’’
यानी, मइया मुझे बिना चुनाव जीते, बल्कि लगातार 99 चुनाव हारने के बावजूद ‘‘चांद खिलौना’’ यानी मोदी वाली कुर्सी चाहिए।
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चुनाव में जीत के बिना कुर्सी कैसे मिलेगी बालक बुद्धि !?
हां, मइया यही कर सकती है कि वह थाली में पानी रखकर
उसमें कुर्सी की छवि तुमको दिखा दे।
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जम्मू-कश्मीर में जनमत संग्रह की मांग करने वाले वकील प्रशांत भूषण देश में तख्तापलट की सिफारिश कर रहे हैं।
दशकों तक एक से एक आधुनिक हथियार चमका कर नक्सल-माओवादी परास्त हो चुके हैं।
आप किस खेत की मूली हैं ?
हाल में इस देश के एक पूर्व सेनाध्यक्ष कह चुके हैं--‘‘हम अब इतने ताकतवर हैं कि हम एक साथ ढाई मोरचे(पाक,बांग्लादेश और आंतरिक दुश्मन)पर लड़ सकते हैं।’’
नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले 12 वर्षों में सेना को काफी मजबूत और साधन संपन्न कर दिया है।मोदी ,नेहरू नहीं है जो शांति के कबूतर उड़ा रहे थे और चीन हमारी 38 हजार वर्ग मील जमीन पर कब्जा कर रहा था।
मोदी राज में 100 सरकारी पैसों में से 85 पैसे बिचैलिए नहीं खाते।सन 2014 में जहां भारत सरकार का कर राजस्व करीब 10 लाख करोड़ रुपए था,वहीं आज करीब 42 लाख करोड़ रुपए है।
इन पैसों के घोटाले में जाने की खबर नहीं है बल्कि ये पैसे देश के विकास,कल्याण और सबसे बढ़कर आंतरिक-बाह्य सुरक्षा प्रबंध पर खर्च हो रहे हैं।मोदी-शाह जानते हैं कि हमें एक दिन बाहरी-भीतरी दुश्मनों से एक साथ लड़कर उन्हें पराजित करना पड़ेगा।
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जनता द्वारा चुनी गई इंदिरा सरकार का जब अत्यंत दमनकारी इमरजेंसी में भी सेना ने विरोध नहीं किया तो आज तो भाजपा जनता में काफी लोकप्रिय है।और मोदी सरकार ने कोई इमरजेंसी भी नहीं लगाई है।सेना यहां एक अनुशासित जमात है और चुनी हुई सरकार का कहना मानती रही है।(सेना में विद्रोह के बिना भारत में कोई तख्ता पलट कैसे कर सकता है ?विद्रोह संभव नहीं।)भारत सरकार के पूर्व साॅलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने कहा है कि ‘‘भारत में हो रहे कुछ विरोध प्रदर्शनों के पीछे विदेशी फंडिंग और बाहरी दखल है।’’
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हाल में देश के कई राज्यों में हुए चुनावों में भाजपा व सहयोगी संगठनों की भारी जीत
हुई है।उसका विवरण पढ़ लीजिए।
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1.-हाल में भाजपा ने राजस्थान के शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में शानदार बहुमत हासिल किया।कई नगर निगमों व बोर्डों पर चुनाव के जरिए कब्जा जमाया।
2.-त्रिपुरा में भी स्थानीय निकाय चुनावोंमें बीजेपी-एनडीए गठबंधन को बड़ी जीत मिली।
3-हरियाणा के नगर निकाय चुनावों (जैसे अंबाला,सोनीपत और पंचकूला नगर निगमों)में मेयर के पदों पर बीजेपी ने जीत हासिल की।
4.-असम (नगांव लोक सभा सीट),पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में हुए उप चुनावों में भी एनडीए और बीजेपी उम्मीदवारों ने जीत हासिल की।
74 प्रतिशत मुस्लिम बहुल रेजी नगर (पश्चिम बंगाल)विधान सभा सीट पर भी भाजपा ने जीत हासिल की है।
अब बंगाल के कई इलाकों में मुस्लिम शांतिपूर्वक जीना चाहते थे।ममता राज में हिंसा ही हिंसा थी।
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5.-आश्चर्य है कि हाल में जब दिल्ली,पंजाब,मंगलोर और केरल में छात्र संघों के चुनावों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने जीत हासिल की तो कांग्रेस ने यह आरोप नहीं लगाया कि वहां चुनावी धांधली हुई है।
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वोट चोरी के आरोप की असलियत
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जहां कांग्रेस जीते,वहां वोट चोरी
नहीं।पर जहां राजग जीते,वहां वोट चोरी ?!!
ऐसे तर्क से भला कौन सहमत होगा ?
लोग असहमत हैं,तभी हाल के चुनावों में
भी कांग्रेस बुरी तरह पराजित हुई है।
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30 सितंबर 26 के दैनिक जागरण में राजीव सचान ने लिखा है--‘‘बिहार में एस.आई.आर.के खिलाफ छेड़े गए अभियान की हवा कांग्रेस नेता शकील अहमद के इस बयान ने भी निकाली थी कि यदि 65 लाख वोटरों के नाम गलत तरीके से काटे गए तो 65 लोग भी सड़कों पर यह कहने क्यों नहीं आए कि वे जीवित हैं, वैध मतदाता हैं और फिर भी उनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए ?’’
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प्रतिपक्ष आरोप लगा रहा है कि 13 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए।
अधिकृत प्रवक्ता के अनुसार,
इनमें से साढ़े नौ करोड़ मतदाता गैर हाजिर,कहीं दूसरी जगह गए या एस.आई.आर.के दौरान किसी अन्य कारण से अपने मूल स्थान पर नहीं मिले।
2 करोड़ 70 लाख मतदाताओं के नाम इसलिए सूची से हटा दिए गए क्योंकि उनके निधन की पक्की जानकारी मिली।एक करोड़ मतदातओं के नाम एक से अधिक जगह दर्ज पाए गए।
पिछला एस.आई.आर 2002 और 2004 के बीच हुआ था।
इतने वर्षों में ऊपर का आंकड़ा कोई असामान्य बात नहीं है।
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राहुल गांधी आरोप लगा रहे हैं कि 13 करोड़ वास्तविक मतदाताओं के नाम जानबूझ कर हटा दिए गए।
इस तर्क पर कौन विश्वास करेगा ?
एक कहावत है कि झूठ के पांव नहीं होते।इसलिए ऐसे झूठ के आधार पर कोई वास्तविक जनांदोलन नहीं चल सकता।
हां,अराजकता की बात और है।पर अराजकता पर तो कई पक्षों को कीमत चुकानी पड़ेगी।
ऐसी अराजकता को रोकना मोदी सरकार और सुरक्षाकर्मियों का संवैधानिक दायित्व है जिसका वे पालन करेंगे।
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राहुल गांधी के नेतृत्व में तेलचट्टों ,वामपंथियों और जेहादियों तथा विदेशी शक्तियों का यह अभियान कोई जन आन्दोलन नहीं है ,बल्कि इंडियन स्टेट के खिलाफ युद्ध है।राहुल गांधी 2025 में ही कह चुके हैं--‘‘हम भारतीय राज्य से भी लड़ रहे हैं।’’
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बांग्ला देश के तख्ता पलट के तत्काल बाद कांग्रेस के दो प्रमुख नेता सलमान खुर्शीद और मणिशंकर अय्यर ने कहा था कि जो कुछ बांग्ला देश में हुआ,वैसा ही भारत में भी होगा।’’
लगता है कि राहुल गांधी ने देशी-विदेशी शक्तियों की मदद से वह दिन ला दिया है।पर सबको उसके परिणाम भुगतने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट को नये राजनीतिक विकास को ध्यान में रखते हुए
अलग ढंग से सोचना चाहिए न कि लकीर का फकीर बनना चाहिए।
संविधान निर्माताओं ने ऐसी ही विशेष परिस्थितियों से मुकाबले के लिए संविधान में अनुच्छेद-142 के जरिए सुप्रीम कोर्ट को विशेषाधिकार दे रखा है।उम्मीद है कि इस संकट की घड़ी में सुप्रीम कोर्ट भी अपनी तद्नुसार अपनी भूमिका निभाएगा।
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12 अक्तूबर 26
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