सोमवार, 30 जून 2025

 इसलिए विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण

-------------------

क्योंकि लाखों बांग्ला देशी-रोहिंग्या घुसपैठियों के 

बिहार में भी अवैध ढंग से मतदाता बन जाने की खबर

-------------

सुरेंद्र किशोर

-----------

 देशभक्त सरकार देश भर में फैले करोड़ों अवैध बांग्ला देशियों-रोंिहंग्याओं की पहचान करके उन्हें इस देश से निकाल बाहर करने का व्यापक अभियान चला रही है। 

 सुप्रीम कोर्ट के वरीय वकील अश्विनी उपाध्याय के अनुसार इस देश में करीब आठ करोड़ घुसपैठिए अवैध ढंग से रह रहे हैं।उनके लिए यहीं के भ्रष्ट सरकारी कर्मी जाली कागजात बनवा देते हैं।उन्हें घुसपैठ कराने के काम में देश-विदेश के जेहादी तत्व सक्रिय हैं।विदेशी फंड आ रहा है।

आरोप है कि उन्हें सर्वाधिक मदद पश्चिम बंगाल सरकार से मिलती है।

  ऐसा तो नहीं होगा कि घुसपैठिए अन्य राज्यों  में मौजूद हैं किंतु बिहार में नहीं हंै।यहां भी पैसे लेकर उनके लिए मतदाता पहचान पत्र तैयार कर देना कोई मुश्किल काम नहीं रहा है।खबर है कि यह बड़े पैमाने पर हुआ है यहां भी।

चूंकि बिहार में जल्द ही विधान सभा चुनाव होने वाला है,इसलिए चुनाव आयोग का यह कत्र्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करे कि घुसपैठ करके आए और गलत ढंग से मतदाता बने लोग चुनाव में किसी क्षेत्र में निर्णायक भूमिका न निभा पाएं।

 इसीलिए तो हो रहा है यह विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण।

 यदि इस पुनरीक्षण अभियान के तहत किसी वाजिब मतदाता का नाम सूची से हटाया जाता है तो पीड़ित व्यक्ति या उसका प्रतिनिधि कोर्ट में जा ही सकता है।

गलत ढंग से नाम काटने का जो दोषी हो उसे सख्त सजा मिले।

 ---------------

पुरानी है घुसपैठ की समस्या  

-----------------

14 जुलाई, 2004 को गृह राज्य मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने संसद को बताया था कि पश्चिम बंगाल में घुसपैठियों की संख्या 57 लाख है।

अब एक अनुमान लगाइए।हाल के दशकों में पश्चिम बंगाल के कई जिले हिन्दू बहुल से मुस्लिम बहुल बन चुके हैं।वहां से हिन्दुओं को भगाया जा रहा है।मुर्शिदाबाद जिले से पलायन का उदाहरण ताजा है।बंगाल में समस्या बहुत गंभीर है।पर मीडिया डर के मारे वैसी खबरें नहीं दे रहा है।बिहार में भी घुसपैठ पर लिखने वालों  को नब्बे के दशक में एक मंत्री ने सरेआम धमकाया था। 

.............................................

नब्बे के दशक की बात है।

लोक सभा का चुनाव हो रहा था।

मैं पूर्वोत्तर बिहार के एक लोक सभा चुनाव क्षेत्र में वहां के  प्रभावशाली उम्मीदवार के साथ क्षेत्र-भ्रमण कर रहा था।

मैं प्रेस संवादाता था।

   पैदल चलते-चलते हम एक ऐसी जगह हम पहुंचे जहां दूर -दूर तक खेतों में बड़ी संख्या में झोपड़ियां थीं।

वे ताजी फूस की हाल में ही बनी थीं।

(बाद में पता चला कि उन झोपड़ियों में सैकड़ों बांग्ला देशी घुसपैठिए अवैध तरीके से बसाए गये थे।)

उस उम्मीदवार ने ही उन्हें वहां बसाने में मदद की थी।

उन्हें नाजायज तरीके से मतदाता भी बनवा दिया गया था।

उम्मीदवार के दल की ही तब केंद्र में सरकार थी।

---------

वह उम्मीदवार बारी -बारी से हर झोपड़ी के सामने जाता।नये बने मतदाता गण झोपड़ी से बाहर निकलते।उम्मीदवार जी उनसे सिर्फ एक ही बात कहते--

‘‘चिंता मत करना,यहां से तुम्हें कोई नहीं उजाड़ेगा।’’

--------------

अब आप कल्पना कर लीजिए कि पूर्वोत्तर बिहार में अब तक कितनी बड़ी संख्या में बांग्ला देशी और रोहिंग्या घुसपैठिए अपनी जड़ें जमा चुके होंगे।

----------

 ममता बनर्जी ने 4 अगस्त, 2005 को लोक सभा में यह आरोप लगाया कि वाम मोर्चा सरकार ने 40 लाख बांग्ला देशी मुस्लिम घुसपैठियों को अवैध ढंग से पश्चिम बंगाल में मतदाता बना दिया है।वे बांग्ला देश में भी मतदाता हैं।

  ममता ने सदन में इस पर चर्चा की मांग की।बांग्ला देश और पश्चिम बंगाल की मतदाता सूचियां स्पीकर को सौंप दी।उनमें समान नाम दोनों सूचियों में थे।

जब अधिक बोलने की इजाजत नहीं मिली तो ममता ने लोक सभा की सदस्यता से सदन में ही इस्तीफा दे देने की घोषणा कर दी।

उससे पहले इस समस्या पर ममता सदन में ही रो पड़ी थीं।

पर ममता जब उन्हीं घुसपैठियों के बल पर सत्ता में हैं तो वह कहती हैं कि यदि उन्हें निकाला जाएगा तो खून की नदी बहेगी।गत 2022 में ममता बनर्जी ने घुसपैठियों से कहा कि जल्द मतदाता सूची में नाम दर्ज करा लो अन्यथा डिटंेशन सेंटर में जाना पड़ेगा।

---------------------

घुसपैठ की समस्या पर विचार करने के लिए संबंधित राज्यों के मुख्य मंत्रियों की नई दिल्ली में 28 सितंबर 1992 को उच्चस्तरीय बैठक हुई थी।

गृह मंत्री एस.बी.चव्हाण ने बैठक बुलाई थी।

उसमें पश्चिम बंगाल के मुख्य मंत्री ज्योति बसु ,असम के मुख्य मंत्री हितेश्वर सैकिया,बिहार के मुख्य मंत्री लालू प्रसाद,शामिल थे।अन्य दो राज्यों के भी मुख्य मंत्री थे।यह बैठक घुसपैठ से पीड़ित राज्यों की थी।

उस बैठक में यह निर्णय हुआ कि सीमावर्ती जिलों के निवासियों को परिचय पत्र सरकार देगी।घुसपैठ को बैठक में गंभीर समस्या माना गया।उसके हल के लिए ठोस कदम उठाने का निर्णय हुआ।लालू प्रसाद ने मांग की कि अवैध घुसपैठ रोकने के लिए कारगर उपाय किये जायें और घुसपैठियों को भारत में संपत्ति खरीदने  से रोका जाये।

 जाहिर है कि वोट बैंक के दबाव में इस बैठक के फैसले पर बाद में अमल नहीं हुआ।समस्या बढ़ती गई।

----------------

और अंत में 

-----

अब आज की पीढ़ी को यह तय करना है कि घुसपैठ को जारी रखा जाए या बंद किया जाये ?

यदि घुसपैठ समर्थक राजनीतिक तत्व मजबूत होंगे तो भारत को भी मुस्लिम बहुल देश में बन जाने मंे अधिक समय अब नहीं लगेगा।आजादी के बाद दो सौ जिले मुस्लिम बहुल बन चुके हैं।मुस्लिम देश बन जाने पर उन लोगों को उनकी अगली पीढ़ियां माफ नहीं करेंगी जो आज वोट के लिए घुसपैठियों का बचाव कर रहे हैं।या जो वैसे राजनीतिक तत्वों को ताकत पहुंचा रहे हैं।

---------------

28 जून 20 25

 


रविवार, 29 जून 2025

 बिहार पुलिस की सराहनीय पहल

अपराध और अपराधियों के बारे में 

लोगों से जानकारी मांगी

--------------------

सुरेंद्र किशोर

----------------

बिहार पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे अपराध की रोकथाम एवं अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस को सहयोग दें।

इसके लिए आज के अखबारों में विज्ञापन छपा है।

 सूचना देने के लिए टाॅल फ्री नंबर (14432) दिया गया है।

बिहार पुलिस ने यह भी वादा किया है कि सूचना दाता का नाम गोपनीय रखा जाएगा।

---------------------

   हाल के महीनों मेें अपराधियों ने बिहार पुलिस पर हमले तेज कर दिए हैं।

क्योंकि उन्हें न तो शासन से कोई डर है, न ही कोर्ट कचहरियों से।

क्योंकि गवाहों की सुरक्षा का कोई प्रबंध सरकार की ओर से नहीं है।

लगातार हमलों में बुरी तरह मार खा रही बिहार पुलिस की साख व धमक लगभग शून्य है।

 इस देश के सुप्रीम कोर्ट ने कई बार सरकार को निदेश दिया है कि वह गवाहों की सुरक्षा का पक्का इंतजाम करे।अमेरिका में अपराध कम है क्योंकि वहां सरकार की ओर से गवाहों की सुरक्षा का भारी प्रबंध किया गया है।वहां सजा दर 93 प्रतिशत है।जापान में 98 प्रतिशत।

ंबिहार में सजा की दर करीब 60 प्रतिशत है।इस राज्य मेें पहले सजा दर बहुत ही कम थी।

  यदि सुप्रीम कोर्ट डी.एन.ए.,ब्रेन मैपिंग, पाॅलिग्राफिक आदि टेस्ट की खुली छूट  जांच एजेंसियों को दे दे तो देश में अपराध कम होगा।भारत को टुकड़े टुकड़े करने की कोशिश में लगे देश तोड़कों के देसी-विदेशी संरक्षकों -जेहादियों का शीघ्र पता चल जाएगा।

 पर पता नहीं सुप्रीम कोर्ट क्यों यह अधिकार अपने पास दबा रखा है !

मानवीय आधार पर ?

ब्रिटेन में वहां की सरकार ने मानवीय आधार पर ही शरणार्थी बनकर आए घुसपैठियों को शरण दे दी थी।अब वही घुसपैठिए आबादी बढ़ाकर ब्रिटेन

में इस्लामिक शासन कायम करने की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।मुहल्ला दर मुहल्ला उनका कब्जा होता जा रहा है।वहां से गैर मुस्लिमों को भगाया जा रहा है।

भारत के कुछ नेता और बुद्धिजीवी जाने-अनजाने ब्रिटेन की पुनरावृति कर रहे हैं।

   भारत में सबसे शर्मनाक स्थिति यह है कि पक्ष-विपक्ष के अधिकतर नेता आए दिन जाति,धर्म, वोट या पैसे के आधार पर कानून तोड़कों को कानून की गिरफ्त से बचा लेने के लिए जी-जान लगा देते हैं। यदि जेहादी घुसपैठियों को भारतीय पुलिस पकड़ती भी है तो उसके पक्ष में ऐसे -ऐसे नामी-गिरामी वकील सुप्रीम कोर्ट में खड़े हो जाते हैं जिनकी प्रतिदिन की फीस 20 या 30 लाख रुपए है।इन्हें फीस कौन देता है ?कहते हंै कि विदेशी फंडिंग से इस देश में चलने वाली कुछ संस्थाएं देती हैं। 

ऐसी राष्ट्र विरोधी गतिविधि दुनिया के शायद ही किसी अन्य देश में संभव है !

 -----------------------

पहले जो भी हुआ हो,यदि अब बिहार पुलिस सूचना मांग रही है तो शांतिप्रिय लोग अपराधियों के बारे में सूचना देकर बिहार पुलिस की मंशा की अंतिम बार जांच कर लें कि वास्तव में सूचना देने पर इस बार कार्रवाई होती है या नहीं।हो सकता है इस बार पुलिस अपने काम में सचमुच गंभीर हो।

---------------------- 

29 जून 25

-------------------

पुनश्चः -बिहार पुलिस की डायल --112 सेवा सराहनीय काम कर रही है।पर उसमें बेहतरी की जरूरत है।उस सेवा में पुलिस बल बढ़ाने की जरूरत है ताकि वह कहीं से  पिट कर न लौटे।


शुक्रवार, 20 जून 2025

‘भारत बचाओ’ बनाम 

‘अल्पसंख्यक वोट बैंक बचाआ’े

------------------

इस देश के राजनीतिक हलकों में 

यही द्वंद्व इन दिनों चल रहा है।

----------


सोमवार, 16 जून 2025

 मेरे बाबू जी

-------

सुरेंद्र किशोर

---------

जब कभी मैं लंबे अंतराल के बाद अपने माता-पिता के मिलने 

गांव जाता था तो 

बाबू जी मुझसे (भोजपुरी में )कहा करते थे--

‘‘मुझे देखने के लिए नहीं तो तुम खुद को मुझे एक झलक दिखाने 

के लिए तो आ जाया करो।’’

--------------

मैंने और मेरी पत्नी ने एकाधिक बार उनसे कहा कि चलिए,हमारे साथ पटना में रहिए।

पर,वे तैयार नहीं होते थे।

-----------------

खैर,एक पिता के शब्दों पर एक बार फिर गौर कीजिए--

 ‘‘मुझे खुद को एक झलक दिखाने के लिए तो आ जाओ करो।’’

 संभवतः हर पिता अपने पुत्र के बारे में ऐसा ही सोचता है यदि उसका पुत्र कहीं दूर रहता है।

 हां,एक बात और ।

परिवार में पिता ही एक ऐसा व्यक्ति होता है जो दिल से यह चाहता है कि मेरा बेटा मुझसे भी अधिक तरक्की करे।

बाकियों में से तो अधिकतर दूसरों की तरक्की देखकर ईष्यालु हो जाते हैं।

-------------------

छात्र-जीवन में मिली सीख 

----------

 छात्र जीवन में मेरे पिता अक्सर मुझसे यह कहा करते थे कि 

‘‘छोटी-छोटी बातों पर, खास कर किसी तरह के विवाद या झगड़ा-झंझट से खुद को दूर ही रखना।

  उकसावे वाली बातों को नजरअंदाज करते जाना।

पता नहीं, कौन बात पर किसके अहंकार को ठेस पहुंच जाये और वह हिंसा पर उतारू हो जाये !

हां,इस कोशिश में जरूर रहो कि एक लकीर के बगल में अपनी बड़ी लकीर खींच देना,वह लकीर अपने-आप छोटी हो जाएगी।

किसी लकीर को काट-कूट कर छोटा करने की कभी

कोशिश मत करना।

 ..................................... 

एक पिता का सबसे अच्छा वर्णन पंडित ओम व्यास 

ओम ने प्रस्तुत किया है-- 

  -------

पिता  जीवन है, संबल है, शक्ति है।

पिता सृष्टि के निर्माण की अभिव्यक्ति है।

पिता अंगुली पकड़े बच्चे का सहारा है।

पिता कभी खारा तो कभी मीठा है।

पिता पालन पोषण है,परिवार का अनुशासन है।

पिता भय से चलने वाला प्रेम का प्रशासन है।

पिता रोटी है, कपड़ा है,मकान है।

पिता छोटे से परिंदे का बड़ा आसमान है।

पिता अप्रदर्शित अनंत प्यार है।

पिता है तो बच्चों को इंतजार है।

पिता से ही बच्चों के ढेर सारे सपने हैं।

पिता है तो बाजार के सब खिलौने अपने हैं।

पिता से प्रतिपल राग है।

पिता से ही मां की बिंदी और सुहाग है।

पिता परमात्मा की जगत के प्रति आसक्ति है।

पिता गृहस्थाश्रम में उच्च स्थिति की भक्ति है।

पिता अपनी इच्छाओं का हनन परिवार की पूत्र्ति है।

पिता रक्त में दिए हुए संस्कारों की मूत्र्ति है।

पिता एक जीवन को जीवन का दान है।

पिता दुनिया दिखाने का अहसास है।

पिता सुरक्षा है, अगर सिर पर हाथ है।

पिता नहीं तो बचपन अनाथ है।

पिता  से बड़ा अपना नाम करो।

पिता  का अपमान नहीं, अभिमान करो।

क्योंकि मां-बाप की कमी कोई पूरी नहीं कर सकता।

ईश्वर भी इनके आशीषों को काट नहीं सकता।

दुनिया में किसी भी देवता का स्थान दूजा है।

मां-बाप की सबसे बड़ी पूजा है।

वो खुशनसीब होते हैं, मां ं- बाप जिनके साथ होते हैं।

   .....................................

  




रविवार, 15 जून 2025

  आर्थिक संकट से जूझ रहे पद्मश्री अवार्डी 

मोगलैया और सिमोन का ताजा हाल क्या है ?

---------------------

सुरेंद्र किशोर

--------------

इसी साल रांची से यह खबर आई थी कि ‘‘90 साल के पद्मश्री

अवार्डी सिमोन पैरालिसिस अटैक के बाद 2 साल से बिस्तर पर हैं।’’

 उनका ताजा हाल क्या है ?

उन्हें इस बीच कहां -कहां से कैसी -कैसी मदद मिली ?

----------------------

गत साल मई में हैदराबाद से यह खबर आई थी कि गरीबी

की मार झेल रहे पद्मश्री अवार्डी मजदूर अब भी मजदूरी ही कर रहा है।

--------------------

हैदराबाद में बैठी राज्य सरकार ने उस मजदूर मोगलैया के लिए कुछ आर्थिक बंदोबस्त किया था।

पर, रांची वाले पद्म अवार्डी का क्या हुआ ?

----------------

यह अच्छी बात है कि मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में उन लोगों को सम्मानित करना शुरू किया है,जो आम तौर पर लीक से हट कर सिर झुका कर किसी प्रचार के बिना अपना काम कर रहे हैं।इस चयन मेें किसी अन्य ‘‘गुणों’’ का ध्यान नहीं रखा जा रहा है।

  पर, मोदी सरकार को उन का  ध्यान तो रखना ही चाहिए जिस किसी पद्म अवार्डी के समक्ष ‘‘रोज कमाओ रोज खाओ’’ वाली समस्या है।(याद रहे कि इन पंक्तियों के लेखक के सामने वैसी समस्या नहीं है।) तो सवाल है कि जब किसी गरीब पद्म अवार्डी का शरीर थक जाएगा तो उसका पद्म अवार्ड कौन सा काम आएगा ?

वह समाज में मजाक का वस्तु नहीं बन जाएगा ?

उसकी हालत हैदराबाद के दैनिक मजदूर दर्शनम् मोगलैया

या रांची के सिमोन की तरह नहीं हो जाएगी ?

कुछ लोग सवाल कर सकते हैं कि जिसे आप सम्मान पूर्ण ढंग से दो जून की रोटी नहीं दे सकते,भुखमरी के हालात में उसके लिए सर्वोच्च नागरिक सम्मान का कितना महत्व है ?(जबकि हमारे देश के पक्ष -विपक्ष के अनेक बड़े -बड़े और मझोले नेता तथा समाज के प्रभु वर्ग तक करोड़ों-अरबों में खेल रहे हैं।)

---------------

वैसे जो हो,पर मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद वैसी बड़ी हस्तियों को भी याद किया जिन्हें उन दलों ने ऐसा सम्मान नहीं दिया या फिर देने-दिलाने की कोई गंभीर कोशिश भी नहीं की, जिन दलों में उन हस्तियों ने अपना जीवन खपा दिया था।

कर्पूरी ठाकुर ,पी.वी.नरसिंह राव और चैधरी चैधरी सिंह इसके

ताजा उदाहरण हैं।इन्हें मोदी सरकार ने भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

सन 2019 में प्रणव मुखर्जी को भारत रत्न सम्मान मिल चुका है।

पद्म सम्मानों में भी ढूंढ़ने पर ऐसे उदाहरण आपको मिल जाएंगे जब मोदी काल में वैसे लोगों को भी ये सम्मान मिले हंै जो मोदी की पार्टी की नीतियों को मानने वाले नहीं थे।न ही किसी भाजपा नेता के लगुआ-भगुआ थे।

-------------

14 जून 25



 


शनिवार, 14 जून 2025

 किसी ने ठीक ही कहा है--

‘‘दुश्मन बनाने के लिए जरूरी नहीं है कि किसी से लड़ाई 

या गाली-गलौज ही की जाए।

बस तरक्की करते जाओ, ईष्र्या,द्वेष ,दुश्मनी का उपहार 

मिलना शुरू हो जाएगा।’’ 


गुरुवार, 12 जून 2025

 अपनी दो पुस्तकों की पाण्डुलिपियां मैंने अलग -अलग प्रकाशकों को भेज दी हैं।एक- दो दिनों में तीसरी पुस्तक पर काम शुरू करूंगा।