स्फुट विचार
--------------
-------------------------
हित भुक्, मित भुक्, ऋत् भुक्
----------------------------
भूख से थोड़ा कम खाने वाला
शरीर के लिए हितकारी भोजन वाला
मौसम के अनुकूल भोजन वाला
-----------------
स्वस्थ रहता है
----------------
सुरेंद्र किशोर
-------------
भूख के कारण दुनिया में जितने लोग मरते हैं,उससे अधिक लोग
अति भोजन यानी शरीर की जरुरत से ज्यादा खाने के कारण
लोग मरते हैं।
--------------------
अब तो एक और तत्व लोगों के समय से पहले मरने का कारण बन रहा है--वह है मिलावटयुक्त भोजन।रासायनिक खाद व कीटनाशक की अधिकता वाले अनाज आदि का सेवन।
आॅनलाइन मंगाया गया डिब्बा-पैकेटबंद खाद्य-पेय पदार्थ।
------------
पंजाब के ड्रग्स की बड़ी चर्चा होती है,पर उतना ही खतरनाक हैं वहां के खेतों में डाले जा रहे अत्यधिक मात्रा में रासायनिक खाद व कीटनाशक दवाएं।
इसके लिए वहां के अढ़तिया और मंडी के दलाल कसूरवार है।वे
किसी सरकार से अधिक ताकतवर हैं।
किसान बिल के खिलाफ वे लोग ही आंदोलन कर रहे थे।केंद्र की मोदी सरकार उनके सामने झुक गई।
उसके कारण कैंसर बहुत बढ़ रहा है।
----------------
और अंत में
-------
राजनीतिक तथा अन्य तरह की महत्वाकांक्षाएं कई लोगों को असमय मार रही हैं।
पद छूटते ही कई लोग बीमार हो जाते हैं।अपेक्षाकृत छोटे पद से बड़े पद पर जाने की महत्वाकांक्षा पूरी नहीं होने पर कई लोग ‘‘असामान्य’’ हो जाते हैं।कई शारीरिक रूप से कई अन्य मानसिक रूप से।कुछ नेता पद पाने में अधिक देर होने के कारण भी मानसिक रूप से बीमार होते देखे जा रहे हैं--अनर्गल प्रलाप करते रहते हैं।
-------------------
जब मैं सक्रिय पत्रकारिता में था तो हर साल नव वर्ष के अवसर पर मुझे करीब सौ -सवा सौ शुभकामना के फोन आते थे।अब रिटायर होने पर उनमें से कोई फोन नहीं करता।तो क्या मैं उस कारण बीमार हो जाऊं ?उदास हो जाऊ ?
मेरे पास तो इतने अधिक दूसरे काम हैं कि न तो बीमार होने की फुर्सत मिल रही है न ही ‘मरने’ की।चिंता करने की तो बिलकुल नहीं।क्योंकि जो काम कर रहा हंू उसमें पहले के काम की अपेक्षा अधिक संतोष मिल रहा है--भले पैसे कम हैं।
------------------
रिटायर होने से पहले ही बाकी दिनों के लिए पहले सही प्लानिंग कर लेने से ठीक रहता है।पर हम जब पद पर होते हैं तो नकली सराहनाओं के काण सातवेें आसमान पर होते हैं।रिटायर होने के बाद अचानक आसमान से नीचे जमीन पर।
चिंता व तनाव में कुछ पत्रकारों को लकवाग्रस्त होते देखता रहा हूं।
----------------
जो पत्रकार समझते हैं कि सेवाकाल में सैकड़ों फोन उन्हें नहीं आते बल्कि उनके पद को आते हैं,वे बाद में टेंशन में कततई नहीं रहते हैं।
मैं तो कभी नहीं रहा।क्योंकि मैं तब भी जानता था कि यह मुझे नहीं मेरे पद को फोन आ रहे हैं।
हम पत्रकार लोग भी किसी नेता
को उसके सत्ता से हट जाने पर कितना याद करते हैं ?!
उस बेचारे पर भी कुछ गुजरता होगा !!
----------------------
29 अक्तूबर 26
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें