सोमवार, 11 फ़रवरी 2019

अंग्रेजी अखबारों ने इस खबर को नहीं छापा, पर 'दैनिक जागरण' ने आज मन खुश कर दिया....

अंग्रेजी अखबारों ने इस खबर को नहीं छापा, पर 'दैनिक जागरण' ने आज मन खुश कर दिया....: भारत के सर्वोच्च न्यायालय की इस खबर ने आज मुझे बहुत खुश...
विषैले रसायनों के बिना निर्मित शुद्ध,प्राकृतिक काला गुड़
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मैं काला गुड़ खोज ही रहा था कि किसी ने मुझे 
भागल पुर का काला गुड़ लाकर दिया।
तपोवर्धन प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र निर्मित इस विशेष गुड़
के डिब्बे पर लिखा हुआ है--
‘इस काले गुड़ का उत्पादन स्वास्थ्य लाभ के निमित
आदर्श परिस्थितियों में सभी नियमों का पालन सुनिश्चित करते हुए किया गया है।
सीमित मात्रा में उत्पादित यह काला गुड़ सिर्फ तपोवर्धन प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र, भागल पुर में स्वास्थ्य लाभ लेने वाले व्यक्तियों को विशेष तौर पर उपलब्ध है तथा इसका उद्देश्य व्यावसायिक लाभ नहीं है।
अतः कोई भी व्यक्ति इस काले गुड़ का व्यवसायिक लाभ लेने हेतु अधिकृत नहीं है।’
  ग्रामीण पृष्ठभूमि के एक व्यक्ति ने जब मेरे घर में इसे देखा तो मुझसे कहा कि ऐसा  गुड़ हमलोग जानवर को खिलाने के लिए खरीदते हैं।सस्ता पड़ता है।
 यानी जानवर के लिए सस्ता काला गुड़ और अपने परिवार के लिए विषैले रसायनों से साफ किया हुआ पीला गुड़ ! !
वाह ! क्या बात है ।
किसी ने बताया है कि पटना में भी काला गुड़ मिलता है।
कभी खरीद कर देखूंगा ।़   

रविवार, 10 फ़रवरी 2019

इन दिनों राजद के झारखंड से राज्य सभा सदस्य 
माननीय प्रेम गुप्त की राजनीतिक गतिविधियों के बारे में
कहीं कुछ न तो छप रहा है और न ही कोई कुछ बता
 रहा है।
आखिर  कहां हैं गुप्त जी ? !
--9 फरवरी 2019

गुरुवार, 7 फ़रवरी 2019

1.-सारधा-रोज वैली चिट फंड घोटाला
2.-घोटाले की रकम लगभग 80 हजार करोड़ रुपए
3.-अल्प आय वाले लाखों लोगों को अधिक मुनाफे
का लोभ देकर ये पैसे वसूले गए थे।
4.-पैसे वापस नहीं मिलने के कारण करीब 200 पीडि़तों ने आत्म हत्या कर ली
5.-घोटाले के पैसों की बंदरबाट नेताओं, अफसरों तथा अन्य प्रभावशाली लोगों के बीच हुई
6.-सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सी.बी.आई.जांच की आंच तेज होने पर देश के दर्जनों राजनीतिक दलों के प्रमुख नेताओं द्वारा  घोटालेबाजों के बचाव में शर्मनाक हरकतंे
7.-जब किसी देश की राजनीति में इतनी गिरावट व बेशर्मी आ जाती है तो किसी तानाशाह के पैदा हो जाने की आशंका बढ़ जाती है।
8.- पता नहीं लोकतांत्रिक मिजाज वाले इस देश की तकदीर में क्या लिखा हुआ है !
9.-पता नहीं हमारे तथाकथित नेतागण इस देश को कहां ले जाएंगे ! हालांकि नेताओं में अपवाद भी हैं।पर वे भ्रष्टों व देशद्रोहियों के सामने कमजोर पड़ते नजर आ रहे हैं।
10-ऐसे में उन लोगों पर देश को बचाने की अधिक जिम्मेदारी आन पड़ी है जो अपार निजी स्वार्थ, घनघोर जातिवाद व घृणित संप्रदायवाद से ऊपर होकर सोचते हैं।
अगला चुनाव एक अच्छा अवसर है।जिस किसी दल में भी भ्रष्ट,अपराधी, सांप्रदायिक व देशद्रोही तत्व पाया जाए उसके खिलाफ वोट के हथियार का इस्तेमाल होना चाहिए।
ध्यान रखिए ,जिस किसी दल यानी जिस किसी दल ! कोई अपवाद नहीं होना होना चाहिए।  
  

बुधवार, 6 फ़रवरी 2019

 भारत सरकार जब आॅगस्ता वेस्टलैंड मामले के सह आरोपी राजीव सक्सेना को इजराइली स्टाइल में दुबई से खींच कर भारत लाती है तो कुछ लोग कहते हैं कि मोदी हिटलरशाही की ओर बढ़ रहा है।
पर जब ‘बैंक लुटेरा’ विजय माल्या भारत सरकार को कानूनी पेचदगियों में उलझा कर महीनों से लंदन में जमा हुआ है तो वही लोग कहते हैं कि उससे अरूण जेटली मिला हुआ है।
  आखिर अरबांे रुपए के लुटेरों को कानून के सामने खड़ा करने के लिए तीसरा कौन सा  उपाय किया जाना  चाहिए ?

एक आग्रह ,आखिरी बार
ब्लाक करने पर मजबूर न करें !
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मेरे व्हाॅट्सेप पर अनेक लोग बहुत सारी बिनमांगी सामग्री भेजते रहते हैं।
यही हाल मेरे फेसबुक वाॅल का भी है।
जो मेरे फेसबुक फ्रेंड नहीं हैं,वे भी तरह -तरह की टिप्पणियां करते रहते हैं--कुछ वांछित और कुछ अवांछित।
कई बार टिप्पणियां मानहानिकारक होती हैं।
मेरी द्विविधा  यह होती है कि मैं उसका जवाब दूं या उसे हटा  दूं।
डिलीट करने से लिखने वाले को गुस्सा आता है।
जवाब देने में समय लगता है जो मेरे पास इस काम के लिए काफी कम है।
मुझे इस बात से कोई मतलब नहीं है कि आप किसके खिलाफ क्या लिखते हैं।मतलब सिर्फ इसी से है कि हम कहीं किसी कानूनी पचड़े में न पड ़जाएं।
मैंने इससे पहले भी आग्रह किया था कि मेरी सहमति के बिना कोई सामग्री व्हाॅट्सेप  पर न डालें।या फिर टैग न करें।
साथ ही जो मेरे ‘फेसबुक फें्रड’ नहीं हैं,वे कोई टिप्पणी मेरे वाॅल पर न लिखें।
मैं सारी टिपप्णियां यदि  पढ़ने लगूं तो अधिक दिनों तक मेरी आंखें मेरा साथ नहीं देंगी।
इसलिए आखिरी बार आग्रह कर रहा हूं।
व्हाट्सेप पर कुछ भेजने से पहले मुझसे पूछ लें।
जो ‘मित्र’ नहीं हैं,वे मेरे फेसबुक वाॅल पर कुछ
न लिखें।
अन्यथा मैं अब ब्लाॅक करना शुरू कर दूंगा।
एक बात और
फेसबुक एक बहुत अच्छा साधन है।इसने आम लोगों को भी पत्रकार बना दिया है।या जिनमें पत्रकार या विचारक की  प्रतिभा है,उन्हें चमकने का मौका दिया है।
अतः इस साधन का सावधानी से इस्तेमाल कीजिएगा तो यह आपके पास बना रहेगा।
अन्यथा नाहक मुकदमेबाजी में फंस जाइएगा तो बाद में आपको ही इसका इस्तेमाल करने का जी नहीं करेगा।
अभी मैं एक खास  प्रवृति देख रहा हूं।कुछ लोग समझते हैं कि फेसबुक पर कुछ भी लिखकर बचा जा सकता है। 
ऐसा है नहीं।आप तभी तक बचे रहेंगे,जब तक आपके पीछे कोई नहीं पड़ा है।
अभी तो इस साधनों का और विस्तार होने वाला है।
नतीजतन इसका प्रभाव भी बढ़ेगा।
फिर तो जिसकी मानहानि होगी, वह निष्क्रिय नहीं रहेगा।

मंगलवार, 5 फ़रवरी 2019

 मोदी सरकार भगोड़े आर्थिक अपराधियों को तरह -तरह के उपायों से एक- एक करके विदेशों से खींच कर यहां ला रही है।
यदि उसी तरह का सलूक कांग्रेस सरकार ने बोफर्स दलाल क्वात्रोचि तथा अन्य भगोड़ों के साथ किया होता तो कांग्रेस को आज का दिन नहीं देखना पड़ता।