बुधवार, 2 अक्टूबर 2019

लाल बहादुर शा़स्त्री जैसे ‘वीर बहादुर’ की याद में 
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लाल बहादुर शास्त्री के प्रधान मंत्रित्व काल में  1965 में भारतीय सेना ने संभवतः पहली बार विदेशी भूभाग पर युद्ध लड़ा और जीता।
हमारी सेना ने पाक सेना के छक्के छुड़ा दिए थे।
 रेल मंत्री के पद से शास्त्री जी के इस्तीफे का प्रकरण लोगांे को याद रहता है।
  भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी शून्य सहनशीलता थी।
  इसीलिए शास्त्री जी के प्रधान मंत्री बनते ही प्रताप सिंह कैरो को मुख्य मंत्री पद छोड़ना पड़ा।
जस्टिस एस.आर.दास के नेतृत्व में गठित जांच आयोग ने कैरो को दोषी ठहराया था।
आयोग की रपट शास्त्री जी के प्रधान मंत्री बनने से पहले ही आ गई थी।पर उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
पर शास्त्री जी के प्रधानमंत्री बनते ही 21 जून 1964 को कैरो को पद छोड़ना पड़ गया।
   यदि शास्त्री जी अधिक दिनों तक हमारे बीच होते तो वे भ्रष्टाचारियों पर भी नकेल कस देते।
  पर, ताशकंद में रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मौत हो
गई।
कई लोगों ने तभी यह आरोप लगाया था कि यह राजनीतिक हत्या है।
उस समय कई लोग उस आरोप पर विश्वास करने को तैयार नहीं थे।
पर जब 1975 में रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र की समस्तीपुर में हत्या कर दी गई तो यह विश्वास होने लगा कि संभवतः शास्त्री जी की भी हत्या हुई होगी।
मिश्र हत्या कांड,उसकी जांच और संबंधित मुकदमे की मैंने शुरू से ही बारीकी से अध्ययन किया है।
 ललित नारायण मिश्र के परिजन के साथ -साथ  मेरा भी यह मानना है कि मिश्र के असली हत्यारे को पकड़ने के बाद भी छोड़ दिया गया और अभियोजन ने ऐसा झूठा केस बनाया कि निर्दोष लोगों को निचली अदालत से सजा दिलवा दी गई। 
2 अक्तूबर 2019

गांधी के संदर्भ में दो टिप्पणियां
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‘‘दिन -रात गांधी के नाम की माला जपने वाले नेताओं ने उनकी कन बातों का अनुसरण किया है ?
क्या वाकई वे गांधी की नीतियों पर चलते हैं ?
भारत के हुक्मरानों ने बीते 70 वर्षों में उनकी किस बात को माना ?
 सिर्फ प्रतिमाओं,तस्वीरों ,करेंसी नोटों और सड़कों के नामों में कैद होकर रह गए गांधी।’’
                              ----- अखिलेश शर्मा
बल्कि आजादी के बाद के सत्ताधारियों ने गांधी के विचारों के उलट काम किए।
कम से कम दो उदाहरण यहां पेश हैं जिनसे देश को सर्वाधिक नुकसान हो रहा है।
भ्रष्टाचार और वंशवाद-परिवारवाद।
1934 में बिहार के विनाशकारी भूकम्प के राहत कार्यों के लिए मिले चंदे के पैसों मंे गड़बड़ी हुई तो गांधी ने उस पर भारी क्षोभ प्रकट किया था।
एक अन्य घटना के तहत  बिहार सरकार के एक मंत्री के भ्रष्टाचार की खबर पर गांधी ने उसे मंत्री पद से हटा देने की सलाह दी थी।
पर वह सलाह नहीं मानी गई।
गांधी ने राजनीति में अपने वंश या परिवार के किसी सदस्य को आने नहीं दिया।
  इन दो मुद्दों पर आजादी के बाद से ही उनका क्या हाल रहा है जो गांधी का नाम लेते कभी थकते नहीं ? !!!!!
                            ---  सुरेंद्र किशोर 

      भूख से कम खाइए
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अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर जो एक महत्वपूर्ण बात फिर से कही जानी चाहिए,वह यह है कि ‘भूख से कम खाइए।’
 वैसे तो यह सीख सबके लिए है।
पर, वृद्धजन के लिए अधिक जरुरी है।
  अक्सर एक  बात कही जाती है ।वह यह कि  इस देश में जितने लोग भूख से मरते हैं,उससे अधिक लोग अति भोजन के कारण उत्पन्न बीमारियों से मरते हैं।
दरअसल व्यक्ति की उम्र तो बढ़ती जाती है,पर उसके अनुपात में अनेक लोग अपने भोजन की मात्रा नहीं घटाते।
इसका कुपरिणाम देर -सवेर सामने आना ही है।
 यह दौर अति धनलिप्सा का भी है। उसे पूरा करने के लिए बड़े -बड़े घोटाले होते रहते हैं। 
परिणामस्वरुप  इस देश में बड़ी संख्या में लोग मुकदमे झेल रहे हैं।
जेल आ-जा रहे हैं।
जेल काट रहे हैं।
  शायद उनमें से कुछ आरोपित भले तीन-तिकड़म करके अंततः अदालती सजा से बच जाएं।
  पर, अति भोजनलिप्सा के कारण उत्पन्न बीमारियों के जरिए प्रकृति आपको सजा जरुर देगी।
उससे आप नहीं बच सकते। 
1 अक्तूबर 2019


    भंग हो पटना नगर निगम 
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अब पटना नगर निगम को अवक्रमित करके उसके प्रशासक
 के पद किसी टाइम टेस्टेड ईमानदार आई.ए.एस.अफसर को  नियुक्त कर देना चाहिए।
अन्यथा, राहत और पुनर्निर्माण योजनाओं का भी वही हाल होगा जो हाल अब तक की अन्य योजनाओं को होता रहा है।
1 अक्तूबर 2019

मंगलवार, 1 अक्टूबर 2019

जो लोग पटना और आसपास के इलाके में जमीन खरीद कर बसना चाहते हैं,मौजूदा जल -जमाव ने उन्हें एक अच्छा अवसर दे दिया है।
वे अभी ही घूम -घूम कर देख लें कि कहां बसना सही होगा और कहां राजेंद्र नगर व लोहिया नगर यानी कंकड़बाग वाली स्थिति आ सकती है !
   

हम तो चाहते हैं कि हमारी बेटी को उसकी सास  रानी बनाकर रखे।
पर, हम अपनी पतोहू को नौकरानी से अधिक का दर्जा कभी नहीं देंगे।
  अपवादों की बात अलग है।
किसी ताजा घटना से मेरी इस टिप्पणी का कोई संबंध नहीं है।
यह तो एक व्यापक समस्या है।
इसके लिए तो एक बड़े समाज सुधारक के अवतरण की जरुरत है।
सितंबर 2019

    बिहार में भी एक ‘नोयडा’ अब और जरुरी
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अति वर्षा के कारण इस बार पटना की दुर्दशा हो गई।
लगता है कि पटना की जल निकासी व्यवस्था को सुधारा
ही नहीं जा सकता है।
 इसके कई कारण हैं।
कुछ कारण दैवी हैं तो अधिकतर मानव निर्मित।
अब पटना के पास एक बड़ा नगर बसाने के बारे में सरकार को गंभीर सोच -विचार करना ही होगा।
नए नगर के लिए सबसे उपयुक्त जगह सोनपुर से दिघवारा 
के बीच प्रस्तावित रिंग रोड के किनारे होगी।
अभी पटना के पास गंगा नदी पर दो पुल हैं।
तीन पुल और बनने ही वाले हैं।
इससे पटना को उस इलाके से जोड़ना आसान हो जाएगा। 
30 सितंबर 2019