शनिवार, 10 दिसंबर 2022

     कारण तो बता दो 

    ............................

फेसबुक संस्थान किसी व्यक्ति या संस्था का एकाउंट बंद या निलंबित करने के साथ ही उसका कारण भी उसे बताए जिसका एकाउंट वह बंद या निलंबित कर रहा है।

बताए कि

1-क्या एकतरफा सामग्री पोस्ट हो रही है ?

2.-क्या झूठी सामग्री आ रही है ?

3.-क्या मानहानिकारक सामग्री पोस्ट की जा रही है ?

या 4-कोई अन्य कारण है ?

...........................

सुरेंद्र किशोर

10 दिसंबर 22


गुरुवार, 8 दिसंबर 2022

 देश-प्रदेश की 7 दिसंबर, 22 की खबरें

जो 8 दिसंबर यानी आज के अखबारों में छपीं।

...............................

सुरेंद्र किशोर

...........................

  कल्पना कीजिए कि यह विवरण 200 साल तक मौजूद रह जाए !

उस समय की पीढ़ी इसे पढ़ेगी तो उसे कैसा लगेगा ?

वह पीढ़ी आसानी से सौ साल पहले की खबरों की तुलना तब के समय की स्थिति से करने की स्थिति में होगी।

अल बरूनी ने लिखा था कि 700 साल पहले हिन्दुस्तान के लोग क्या खाते थे ! वह दिलचस्प विवरण अब भी उपलब्ध है।

.......................................

खबरें 

.............

राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग का सुप्रीम कोर्ट से रद होना संसदीय संप्रभुता से गंभीर समझौता

---उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़

.................................

जल्द ही भारत विश्व का ऐसा पहला देश बन जाएगा जहां  चलेगी ऐसी लू जो इंसान के लिए बर्दाश्त के बाहर होगी

.......................................

बिहार के गोपालगंज जिले के माझा में शिक्षक के घर चल रहा था (राज्य सरकार का)अंचल कार्यालय

............................

पश्चिम बंगाल के तृणमूल विधायक ही तय करते थे शिक्षक बनने के लिए कौन दे सकता है मोटी रकम

..................................

रिश्वत नहीं देने पर कोलकाता पुलिस ने जब्त की पद्मभूषण राशिद खान की कार

..................................... 

 हिमाचल प्रदेश के लाहुल स्पीति जिले के चंडीगढ़ गांव में रासायनिक कीटनाशक का प्रयोग नहीं होता।

प्रयोग होने पर जुर्माना लगता है।

.................................. 

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि संसद में अवरोध खासकर नए सदस्यों के लिए पीड़ादायक

.................................

पूर्व आई.ए.एस.व ‘लोकसत्ता’ के नेता जयप्रकाश नारायण ने लिखा है कि ‘‘हमें अगले दो दशकों तक आर्थिक विकास पर निरंतर ध्यान देने की जरूरत है।

कानून का शासन,

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं स्वास्थ्य ,

नियोजित शहरीकरण और ग्रामीण -शहरी क्षेत्रों के बीच बेहतर संपर्क देश की समृद्धि ,

स्थिरता एवं सामाजिक सद्भाव के लिए महत्वपूर्ण है।

...................................

ऊपर लिखी सारी खबरें आज के दैनिक जागरण,पटना में प्रकाशित।

................................. 

......................................

फरार आई.पी.एस.आदित्य ने 11 साल की नौकरी में आय से 131 प्रतिशत अधिक की संपत्ति बनाई

(अब तक तो अपराधी फरार होते थे।अब आई.पी.एस.अफसर भी फरार होने लगे।घोर कलयुग !!!)

......................................

पटना रिंग रोड: जनवरी के अंत तक एन एच ए आई को मिलेगी जमीन

................................

ईको पार्क को छोड़ पटना के सभी इलाकों में बढ़ा प्रदूषण

........................

अमेरिका में लोडेड हैंडगन रखने वाले दोगुने हुए

...........................

सभी खबरें दैनिक भास्कर, पटना से 

..................................

....................................

बनेगी विशेष टास्क फोर्स,जिला अस्पतालों से हटेगा अतिक्रमण

.................................

पांच साल में पटना में 5 प्रतिशत बढ़े मध्यवर्गीय परिवार

................................

पटना हाईकोर्ट ने बिना बेहोशी का इंजेक्शन दिये नसबंदी करने के मामले में केंद्र और राज्य से जवाब मांगा।

............................

26 नवंबर, 22 तक देश के 50 कस्बों में पहुंची 5 जी सेवा

 .................................. 

चीन द्वारा वास्तविक नियंत्रण सीमा रेखा को बदलने के प्रयासों को हम नहीं बर्दाश्त करेंगे--भारत के विदेश मंत्री

....................................

ये खबरें ‘प्रभात खबर’ में प्रकाशित

...................................

...........................

बिहार में खान विभाग की होगी अपनी पुलिस

................................

खाद -कीटनाशक के बेतहाशा प्रयोग ने मिट्टी की सेहत बिगाड़ी 

.................................................

कोरोना के बाद अस्पतालों में 30 प्रतिशत बढ़े मानसिक रोगी

.....................................

पटना में दिन भर जाम

.........................................

टै्रफिक पुलिस के लिए चलंत शौचालयों की व्यवस्था होगी पटना में 

...............................

दैनिक हिन्दुस्तान,पटना से 

........................

8 दिसंबर 22

 ............................


     हमारे ग्रामीण इलाके की नामी-गिरामी

    दिवंगत हस्तियां जिन्होंने अपनी छाप छोड़ी

     ..................................

      सुरेंद्र किशोर

      ...................................

मैं बिहार के सारण जिले के जिस गांव का मूल निवासी हूं,

उस गांव के आसपास कई नामी-गिरामी लोग हुए हैं।

हमें उन लोगों से पे्ररणा मिलती रही।

उनके नाम हैंे-

पृथ्वीनाथ त्रिपाठी-बी.बी.काॅलेजिएट स्कूल,

मुजफ्फरपुर के प्राचार्य

विश्वमोहन कुमार सिन्हा-वाइस चांसलर

राजदेव सिंह-सी.बी.आई.े निदेशक

युगेश्वर पांडेय-बिहार वाणिज्य मंडल के अध्यक्ष

राजेंद्र सिंह,छपरा से 1957 में लोक सभा सदस्य

 और फिरंगी सिंह-स्वतंत्रता सेनानी।

ऐसे अन्य भी होंगे,किंतु मुझे तुरंत उनके नाम याद नहीं।

..................................

ये हस्तियां अब इस दुनिया में नहीं हैं।

मेरी रूचि इस बात में है कि जीवन,संघर्ष और इनकी उपलब्धियों के बारे में संक्षेप में कुछ लिख दूं ताकि नई पीढ़ी जान सके कि ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकल कर भी किस तरह ये लोग शीर्ष पर पहुंचे।

............................

 इन्हें करीब से जानने वाले और इनके वंशज इनके बारे में इनके चित्र सहित एक -दो हजार शब्दों में लिखकर मुझे भेजें तो मैं पुस्तक नहीं तो कम से कम सोशल मीडिया के जरिए नई पीढी को इनके बारे में बता सकूंगा।

इससे आज की पीढ़ी को प्रेरणा मिल सकती है। 

........................

मेरा पता है--

सुरेंद्र किशोर

ग्राम-कोरजी

पोस्ट-मोहम्मद पुर

भाया-खगौल

जिला-पटना

पिन-801105

...........................

 


 भीषण ठंड के मौसम में बुजुर्गों के 

लिए पुस्तक मेले में जाना कठिन

................................

सुरेंद्र किशोर

...........................

पटना में दिसंबर में पुस्तक मेला आयोजित करने पर प्रबंधकों को पुनर्विचार करना चााहिए।

 क्योंकि भीषण ठंड के कारण बुजुर्गों व छोटी उम्र के लोगों के लिए पुस्तक मेले में जाना कठिन हो जाता है।

.......................

अक्तूबर या फरवरी में पटना में पुस्तक मेला लगाने के बारे में विचार करना चाहिए।

............................

8 दिसंबर 22

.....................


सोमवार, 5 दिसंबर 2022

 कानोंकान

सुरेंद्र किशोर

...........................

 अपराधीकरण पर आयोग की सिफारिश पर गौर 

करे सुप्रीम कोर्ट 

..............................

चुनाव आयोग ने गंभीर अपराधों के आरोप के तहत मुकदमे का सामना कर रहे लोगों को चुनाव नहीं लड़ने देने की सिफारिश की है।

 सन 2013 के नवंबर में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष  इस संबंध में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा था।

वह प्रस्ताव अपराधियों को चुनावी राजनीति से दूर रखने के लिए था।

 चुनाव आयोग की राय रही है कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ ऐसे मामले में कोर्ट ने आरोप गठित कर दिया है जिसके तहत उसे पांच साल की सजा हो सकती हो,तो उस व्यक्ति को चुनाव लड़ने से वंचित कर दिया जाना चाहिए।

 सुप्रीम कोर्ट यदि इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाता है तो वह देश के लोकतंत्र और शांतिप्रिय लोगों के लिए बड़ी राहत की बात होगी।़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़  

पिछले ही महीने सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता की चिंता की है।

उसकी चिंता जायज है।

सबसे बड़ी अदालत की मंशा यह है कि  मुख्य चुनाव आयुक्त और आयोग के अन्य सदस्यों के पदों पर निष्पक्ष लोगों की तैनाती हो।

पर,इस मामले में कोई राह तैयार होने से पहले देश की सबसे बड़ी अदालत चुनाव आयोग की पिछली सिफारिशों को लागू कराने का प्रयास कर सकती है।उससे देश के लोकतंत्र का  भला होता।

.....................................

गैर जरूरी उप चुनाव 

...............................

सन 2017 और उसके बाद से अब तक उत्तर प्रदेश के रामपुर में लोक सभा और विधान सभा के कुल पांच चुनाव हो चुके है।

इस महीने छठे चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे।

वैसे तो वहां इस अवधि में लोक सभा व विधान संभा के सिर्फ तीन चुनाव ही होने चाहिए थे।

पर, तीन उप चुनाव भी कराने पड़े।

 ऐसा सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही नहीं हुआ है।

देश भर में आए दिन ऐसा होता रहता है।

क्यों न उप चुनावों का प्रावधान ही समाप्त कर दिया जाए ?

 यदि कोई सीट खाली होती है तो उसे सदन की अवधि समाप्त होने तक खाली ही रहने दिया जाए।

या, ऐसी संवैधानिक व्यवस्था हो कि संबंधित दल वैकल्पिक व्यक्ति का नाम दे दे।

उसे सदन का सदस्य मनानीत कर दिया जाए।

इसलिए जरूरी है कि निचले सदन में मनोनयन के लिए कुछ सीटें निर्धारित कर दी जाएं।

हां,इसमें एक अपवाद हो सकता है।यदि कोई सरकार मात्र एक या दो विधायक या सांसद के बहुमत से चल रही हो तो वहां का कोई उप चुनाव टाला नहीं जाना चाहिए।  

.................................

 ़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़हत्या के मामलों की केस डायरी

................................

दंड प्रक्रिया संहिता ,1973 की धारा -172 के तहत प्रत्येक पुलिस अधिकारी अन्वेषण में की गई अपनी कार्यवाही को दिन -प्रतिदिन एक डायरी में लिखेगा।उसमें उस समय का जिक्र होगा,जब उसे घटना की जानकारी मिली।

वह समय लिखेगा जब उसने जांच शुरू की।वह समय जिन स्थानांे पर अन्वेषण अधिकारी गया।

वह समय भी डायरी में लिखेगा जब उसने जांच का काम पूरा किया।

   याद रहे कि किसी मामले में केस डायरी का बड़ा महत्व होता है।

यदि किसी डायरी में जानबूझ कर हेर-फेर कर दी जाए तो अभियुक्त के बच निकलने की आशंका रहती है।

  क्या बिहार राज्य पुलिस मुख्यालय कम से कम हत्याओं के मामलों में पुलिस थानों में लिखी जा रही डायरियों की माॅनिटरिंग नहीं कर सकती ?

याद रहे कि राज्य में हत्या और हत्या के प्रयासों के मामलों बिहार में अदालती सजा का प्रतिशत असंतोषजनक है।

आधुनिक तकनीकी के इस युग में हत्या के अनुसंधान के कम मंें लिखी जा रही डायरियों का विवरण समय -समय पर राज्य पुलिस मुख्यालय चाहंेे तो अपने पास मंगवा सकता है।या मुख्यालय थानों को यह निदेश दे दे कि वे डायरी भेज दिया करे।

इससे यह होगा कि किसी प्रभाव में आकर केस डायरी में परिवर्तन कर देने की आशंका समाप्त हो जाएगी।   

  .................................................

     भूली-बिसरी याद

   ..............................

देशरत्न डा.राजेंद्र प्रसाद ने लिखा है कि ‘‘महात्मा गांधी मनुष्य का चरित्र सुधारने के लिए यह जरूरी समझते थे कि नशा छोड़ दी जाये।

  क्योंकि कोई भी जब नशे में होता है तो उसका विवेक नष्ट हो जाता है।

वह भला-बुरा ,पाप-पुण्य और सत्य-असत्य का भेद समझने में असमर्थ हो जाता है।

उसकी शक्ति इतनी क्षीण हो जाती है कि वह अपने को संभाल भी नहीं सकता।

राजेन बाबू लिखते हैं कि ‘‘इसीलिए गांधी जी नशाबंदी को एक आवश्यक और महत्वपूर्ण बात मानते थे।

वे चाहते थे कि जनता में प्रचार करके नशा छुड़वाया जाए और सरकार भी इसे कानून द्वारा बंद कर दे।

इसीलिए सन 1921 में ही उनके आदेश से शराब,गांजा आदि की दुकानों पर धरना देने का कार्यक्रम प्रारंभ किया गया था।’’ 

.............................

और अंत में

...........................

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के.एम.जोसेफ और जस्टिस हृषिकेश राय के खंड पीठ ने गत 9 नवंबर को एक केस की सुनवाई करते हुए कहा कि ‘‘भ्रष्ट लोग देश को तबाह कर रहे हैं और पैसे की मदद से बच निकलते है।’’

  उससे पहले इसी माह की 3 तारीख को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘‘हमें ऐसा प्रशासनिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है जो भ्रष्टाचार के खिलाफ शून्य सहिष्णुता रखता हो।’’

  इन दो शीर्ष हस्तियों की ऐसी टिप्पणियों में भ्रष्टाचार पीड़ित लोगों को उम्मीद की नयी किरण दिखाई पड़ती है।

.............................

प्रभात खबर

पटना

5 दिसंबर 22


   


शनिवार, 3 दिसंबर 2022

 सन 1969 में ‘दिनमान’ में पत्र लिखकर मैंने भी आह्वान किया   था कि सक्रिय राजनीति में ‘‘लौट आओ जयप्रकाश’’

   ................................

   सुरेंद्र किशोर

   ..............................

  वैसे तो जयप्रकाश नारायण ने सन 1974 में ही आंदोलन 

का नेतृत्व करना शुरू किया था।

किंतु उससे पहले मुझ सहित अनेक छोटे-बड़े नेता,कार्यकर्ता,बुद्धिजीवी तथा युवजन उनसे सार्वजनिक रूप से और मिल कर यह अपील करते रहे थे कि आप सक्रिय राजनीति में आ जाइए।

  सबसे गंभीर अपील डा.राम मनोहर लोहिया ने उनसे मिलकर की थी।

जेपी से कहा था कि ‘‘तुम ही इस देश को गरमा सकते हो।’’

वह सच साबित हुआ भी।

...............................

दरअसल जेपी की धर्म पत्नी प्रभावती जी के निधन और उनके मित्र और आजादी की लड़ाई के सहयोगी क्रांतिकारी सूरज नारायण सिंह की निर्मम हत्या के बाद जेपी आंदोलन में कूद पड़ने के लिए उनकी मानसिक पृष्ठभूमि तैयार हो गई।स्वास्थ्य कारणों से प्रभावती जी उन्हें सक्रिय होने नहीं देती थंीं।

सूरज बाबू की हत्या से जेपी के मन में शासन के प्रति क्षोभ  

भर उठा।

...........................

जेपी के ‘‘लौट आने’’ के लिए उससे पहले मैंने दिनमान(18 मई,1969)में एक चिट्ठी लिखी थी।

मैं उन दिनों सुरेंद्र अकेला के नाम से लिखा करता था।

‘दिनमान’ तब की सर्वाधिक लोकप्रिय व प्रतिष्ठित पत्रिका थी।मत-सम्मत यानी संपादक के नाम पत्र भी पढ़े जाते थे।

जिस पत्रिका के संपादक सच्चिदानंद (हीरानंद) वात्स्यायन

(अज्ञेय) हों।

जिस पत्रिका के बिहार संवाददाता फणीश्वरनाथ रेणु हों,उस पत्रिका का भला क्या कहना !

संभवतः खुद जेपी भी उसे पढा कऱते थे।

......................................

रेणु जी बिहार विधान सभा की प्रेस दीर्घा में बैठकर भी रिपोर्टिंग करते थे।

नियम को शिथिल करके पहली बार किसी साप्ताहिक पत्रिका के संवाददाता को विधान सभा की प्रेस दीर्घा का प्रवेश पत्र मिला था।रेणु जी जब संवाददाता बन जाएं तब तो नियम शिथिल होना ही था।

प्रस पास उन्हें मिले भी क्यों नहीं !

स्पीकर के पद उन दिनों लक्ष्मी नारायण सुधांशु विराजमान थे जो खुद साहित्यकार भी थे।

..............................

अब मैं अपनी वह चिट्ठी यहां प्रस्तुत करता हूं।

उस चिट्ठी का शीर्षक था-

   ‘‘लौट आओ जयप्रकाश’’

 पूरा पत्र इस प्रकार है--

 श्री जयप्रकाश नारायण के समय-समय पर व्यक्त विचारों से लगता है कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं में आज भी उनकी गहरी रुचि है।

  विनोबा के आदर्शों और कार्य पद्धतियों के औचित्य-अनौचित्य तथा उसमें जयप्रकाश के बहुमूल्य जीवन के सदुपयोग-दुरुपयोग की चर्चा छोड़ भी दी जाए तो भी एक सवाल तो बच ही जाता है कि क्या जयप्रकाश जी ने अपने विचारों के मौलिक पविर्तन के कारण राजनीति को छोड़ देश-सेवा का व्रत लिया है ,या देश की गंदी राजनीति से ऊबकर पलायनवादिता का सहारा लेकर राजनीति से विरत हुए हैं ?

  इसका जवाब उन्हें ही देना है।

 देश जब इस भयंकर आर्थिक संकट ,क्षेत्रीय बिखराव और भावनात्मक विभेद के दौर से गुजर रहा हो,तो जयप्रकाश नारायण तट पर सर्वोदय की छाया में खडे़ हों और ऐसे आदर्शों की बातें करते रहें जिनकी पूर्ति मर कर भूत बन जाने के बाद भी होने की आशा दूर -दूर नहीं दिखाई पड़े तो आनेवाली पीढ़ी कभी उन्हें माफ नहीं करेगी।

   यदि उनके दिल में थोड़ी भी द्विविधा हो तो उन्हें निर्भयतापूर्वक पुनर्विचार करना चाहिए।

  सक्रिय राजनीति में उनके लौटते कदम का स्वागत वे सारे लोग करेंगे जिन्हें देश का समाजवादी -जनतांत्रिक भविष्य धूमिल होता नजर आ रहा है।

  ---सुरेंद्र अकेला,  

   भरतपुर(सारण)

साप्ताहिक दिनमान,18 मई 1969

.........................................

(तब का सुरेंद्र अकेला अब का सुरेंद्र किशोर)

................................

दशकों बाद अपने इस पत्र को दुबारा मैंने पढ़ा है।

मुझे सुखद आश्चर्य हुआ कि मैं उस कम उम्र में भी ऐसी चिट्ठी लिख सका।

हालांकि एक कमी जरूर रही ।वाक्य लंबे थे।

लंबे वाक्य पाठकों के दिमाग पर बोझिल होते हैं

...........................

3 दिसंबर 22





  


गुरुवार, 1 दिसंबर 2022

 भगवान भी उसी की मदद करता है 

जो अपनी मदद खुद करे !

 ...................................

 महा कालेश्वर के समक्ष राहुल गांधी का साष्टांग दंडवत

..................................... 

  सुरेंद्र किशोर

  ................................

इस पोस्ट के साथ नीचे ‘इंडियन एक्सप्र्रेस’ की कटिंग है।

उसमें एक चित्र है।

चित्र में यह नजर आ रहा है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर के गर्भ गृह के सामने दंडवत प्रणाम कर रहे हैं।

यानी, पेट के बल लेट कर प्रणाम !

....................................

एक कहावत है कि भगवान भी उसी की मदद करता है जो अपनी मदद खुद करता है।

..............................

कांग्रेस ने सन 1984 के बाद ‘खुद की मदद करना’ बंद कर दिया है।

कल्पना रहित नेतृत्व इसका सबसे बड़ा कारण है।

उसके कुछ अन्य कारण भी हैं।

उन कारणों को दूर किए बिना महाकालेश्वर भी उनकी मदद नहीं कर सकते।

पर, कांग्रेस नेतृत्व उन कारणों को दूर करने को क्या अब भी तैयार है ?

क्या उसे उन कारणों की पहचान भी है ?

शायद नहीं है।

या, है भी तो लगता है कि कांग्रेस अपने-आप को सुधारने की क्षमता भी अब खो बैठी है।

एक लोकतांत्रिक मिजाज का व्यक्ति होने के कारण मेरी यह व्यक्तिगत राय रही है कि कांग्रेस कम से कम एक मजबूत व जिम्मेवार प्रतिपक्ष की भूमिका निभाना सीख जाए।

....................................

अवसान के कारण 

........................

सन 2014 लोस चुनाव में करारी हार के बाद गठित ए.के. एंटोनी समिति ने कहा था कि ‘‘हम इसलिए हारे क्योंकि मतदाताओं को यह लगा कि कांग्रेस अल्पसंख्यकों की तरफ जरूरत से अधिक झुकी हुई है।’’

एंटोनी ने अन्य बातें भी कहीं।

किंतु कांग्रेस नेतृत्व ने उस रपट पर ध्यान भी नहीं दिया।यानी खुद में सुधार नहीं किया।

........................................

 पराभव के कुछ अन्य ठोस कारण भी हैं।

उन कारणों को समझने,स्वीकारने और उन्हें दूर करने की जरूरत है।

 भ्रष्टाचार,घोटाले-महा घोटाले कांग्रेस के पतन के दूसरे कारण रहे।

टुकड़े -टुकड़े गिरोह तथा अन्य देश तोड़क ताकतों के खिलाफ कांग्रेस डटकर खड़ी नहीं हो पा रही है।

उसकी वोट बैंक की राजनीति उसमें बाधक है।

इस रुख ने कांग्रेस को जनता में काफी कमजोर बनाया।

................................

 भ्रष्टाचार के प्रति कांग्रेस की क्या राय है ?

क्या वही राय है जो नोबेल विजेता व राहुल गांधी के अघोषित आर्थिक सलाहकार अभिजीत बनर्जी की है जिन्होंने कांग्रेस को ‘‘न्याय योजना’’ का मंत्र दिया है ?

अभिजीत बनर्जी ने 2019 में कहा था कि ‘‘नरेंद्र मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार को देश की अर्थ व्यवस्था से काट कर अलग कर दिया जो अच्छा नहीं हुआ।’’(हिन्दुस्तान टाइम्स)

....................................

एक ही परिवार के तीन अकुशल मांझी डगमगाती नाव को तीन दिशाओं की ओर अनंत काल तक खींचते नहीं रह सकते।

..............................

इस देश के बड़े -बड़े नेता विदेशों में जाकर अपना इलाज तो करवाते ही हैं।

उसी तरह जिन दलों की लोकप्रियता में गिरावट जारी है,वे भी विदेशी विशेषज्ञों को बुलाकर गिरावट के कारणों की जांच करवा लें।

उन कारणों को दूर करने का उपाय करें।

तभी दलों का पुनरुद्धार संभव है।

मेरा मानना है कि कारणों का जो विवरण मैंने यहां दिया है,वैसा ही विवरण किसी विदेशी विशेषज्ञ से भी उन्हें प्राप्त होगा।

.............................

30 नवंबर 22