शुक्रवार, 17 जनवरी 2020

संदर्भ-
अंडरवल्र्ड डाॅन करीम लाला-इंदिरा गांधी मुलाकात
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जार्ज फर्नांडिस को बंबई के एक क्षेत्र में 1971 का लोक सभा चुनाव हराने में कांग्रेस उम्मीदवार को तस्कर यूसुफ पटेल की मदद मिली थी।
संंयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार जार्ज ने 1967 में वहां कांग्रेस के एस.के.पाटील को हराया था।
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 ‘‘ब्लिट्ज -30 नवंबर, 1974 के अनुसार,
 कांग्रेस पार्टी मेरे खिलाफ इसलिए चुनाव जीत सकी क्योंकि यूसुफ पटेल और उसके दूसरे तस्कर साथियों ने कांग्रेस की दिल खोल कर मदद की थी।’’
    ---जार्ज फर्नांडिस
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--सुरेंद्र किशोर-17 जनवरी 2020

शिव खेड़ा की कुछ उक्तियां --2005
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1.-जिन्हें हम अपने बच्चों का गार्डियन बनाने को 
   तैयार नहीं  हैं,
  उन्हें हम अपने देश का र्गािर्डयन क्यों बना देते हैं ?
2.-हर देश में सिर्फ दो किस्म के नागरिक होते हैं-
   --देशभक्त और गद्दार।
   एक देशभक्त अपने देश के लिए कुछ भी कर सकता है।
    एक गद्दार अपने स्वार्थ के लिए कुछ भी कर सकता है।
3.-अगर हम समाधान का हिस्सा नहीं हैं तो 
   हम ही समस्या हैं।
4.-देश कभी चोर उचक्कों की करतूतों से बर्बाद नहीं होता ,बल्कि शरीफ लोगों की कायरता और निकम्मेपन से होता है।
5.-क्या हम अपने देशभक्तों की कुर्बानी यूं ही व्यर्थ जाने देंगेे? 
6.-हम देशभक्तों को सलाम करते हैं और जिम्मेदार नागरिकों से अपील करते हैं जिनकी आत्मा सो चुकी है लेकिन मरी नहीं है।
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सुरेंद्र किशोर-17 जनवरी 20

गुरुवार, 16 जनवरी 2020

  पक्ष और प्रतिपक्ष के बीच सार्थक 
संवाद की आज कितनी गुंजाइश ?
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 अच्छी मंशा वाले एक बुद्धिजीवी सह पूर्व अधिकारी ने इस बात पर चिंता जाहिर की है कि आज देश में सत्ता पक्ष और प्रतिपक्ष के बीच कोई सार्थक संवाद नहीं है।
  उनकी चिंता की पृष्ठभूमि समझ में आ रही है।
  पर, क्या आज की स्थिति में कोई सार्थक 
संवाद संभव भी है ?
गैर राजग दलों के अनेक शीर्ष व मझोले नेताओं के खिलाफ विभिन्न अदालतों में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के तहत मुकदमे चल रहे हैं।
कई बड़े नेता जेल आ -जा रहे हैं ।
या फिर जमानत पर हैं।
अपार संपत्ति जप्त हो रही है या फिर मामला उसके कगार पर है।
कुछ मामले 2014 से पहले के हैं तो कई बाद के।
कई नेताओं की कटु जुबान के पीछे का यह एक बड़ा कारण बताया जाता है।
इन दिनों कई नेताओं के ऐसे-ऐसे बोल निकलते हंै मानो यह राजनीतिक लड़ाई नहीं है, बल्कि निजी संपत्ति का झगड़ा हो।
   इस पृष्ठभूमि में सवाल यह है कि क्या उन मुकदमों की वापसी या उनमें सरकार की ओर से ढिलाई के बिना दोनों पक्षों के बीच कोई सार्थक संवाद संभव भी है ?
दूसरी ओर अपवादों को छोड़कर क्या भ्रष्टाचार के मामलों की वापसी या ढिलाई के बाद राजग खासकर भाजपा की अपने मतदाताओं के बीच भी साख रह पाएगी ? 
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सुरेंद्र किशोर
15 जनवरी 2020
   

मंगलवार, 14 जनवरी 2020

संकेत हैं कि बिहार में नागरिकता संशोधन कानून
लागू करने और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर तैयार करने में अंततः कोई दिक्कत नहीं आएगी।
  पर, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी एन.सी.आर. के लिए सुप्रीम कोर्ट की मदद लेनी पड़ेगी।
सुप्रीम कोर्ट जाने की जिम्मेदारी मुख्यतः उनकी है जो कुछ दशक पहले बंगलादेशी घुसपैठियों के खिलाफ पूर्वोत्तर बिहार
में आंदोलन चला रहे थे।
---सुरेंद्र किशोर--14 जनवरी 2020

विरोध के पीछे गुप्त एजेंडा ?!!
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1.-नागरिकता संशोधन कानून,
2.-राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर और
3.-राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर।
 इन तीनों के लागू हो जाने के बावजूद किसी धर्म-समुदाय के मौजूदा भारतीय नागरिकों की स्थिति में कोई परिवत्र्तन नहीं होने वाला है।
इसके बावजूद इन तीनों का इन दिनों एक खास पक्ष की ओर से जोरदार विरोध हो रहा है।
क्यों विरोध हो रहा है ?
इसका कोई तार्किक कारण कोई नहीं बता पा रहा है।
इसलिए नहीं बता रहा है क्योंकि इसके विरोध का असली कारण कुछ और है जिसकी चर्चा सार्वजनिक रूप से वे करना नहीं चाहते।
यानी, विरोध के पीछे एक गुप्त एजेंडा है।
एजेंडा बहुत बड़ा है।
  --सुरेंद्र किशोर--14 जनवरी 2020

14 जनवरी, 2020 के इकोनाॅमिक टाइम्स की खबर के 
अनुसार राॅबर्ट वाड्रा ने तथाकथित रूप से प्रवत्र्तन 
निदेशालय को बताया है कि बिकानेर के दो गांवों में 
जो जमीन मैंने खरीदी,उसके लिए मुझे पैसे कहां से मिले थे,वह मुझे याद नहीं।
    याद रहे कि वाड्रा पर आरोप है कि उन्होंने वहां 2010 में जो जमीन 72 लाख रुपए में खरीदी,उसे 2012 में 5 करोड़ 15 लाख रुपए में बेच दिया।
  इस मामले में गड़बडि़यां करने का राबर्ट वाड्रा पर आरोप है।
हालांकि वाड्रा ने खुद पर लगे आरोप को गलत बताया है।
--सुरेंद्र किशोर-14 जनवरी 2020

सोमवार, 13 जनवरी 2020

शास्त्री जी की मृत्यु के 
कारण पर रहस्य बरकरार
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जांच समिति के रिकाॅर्ड गायब
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लाल बहादुर शास्त्री के निधन के कारणों की जांच के लिए मोरारजी देसाई सरकार ने 1977 में एक समिति बनाई थी।
समिति के प्रधान राज नारायण थे।
  नवदीप गुप्त ने सूचना के अधिकार के तहत गत साल 
केंद्र सरकार से उस समिति के बारे में जानकारी
मांगी थी।
पता चला कि उस समिति के कागजात गायब पाए गए।
सूचना आयोग ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि ऐसा आखिर कैसे हुआ ?
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सुरेंद्र किशोर
11 जनवरी 2020