शनिवार, 9 मई 2020

 पद्मश्री मिला हो तो 
उसे अपने नाम के 
साथ मत जोड़िए
..........................
सुरेंद्र किशोर
......................
तेलुगु फिल्मी हस्तियों के प्रकरण सामने आने
के बावजूद देश में अनेक लोग अपने नाम के आगे या पीछे 
पद्मश्री शब्द जोड़ रहे हैं।
ऐसा करना नियम विरूद्ध है।
याद रहे कि 2013 में तेलुगु फिल्मों की हस्तियों मोहनबाबू और ब्रह्मानंदम का मामला आंध्र हाईकोर्ट में गया था।
उन पर आरोप था कि वे पद्मश्री शब्द अपने नामों के साथ जोड़ते हैं।
  23 दिसंबर, 2013 को हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय को निदेश दिया कि वह इनके पद्म पुरस्कार को वापस लेने के लिए राष्ट्रपति से सिफारिश करे।
 इन हस्तियों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
सुप्रीम कोर्ट से कहा कि नियम की जानाकारी के अभाव में हम
ऐसा कर रहे थे।
अब अपने नाम के साथ पद्मश्री नहीं जोड़ेंगे।
हमने हाईकोर्ट से भी कह दिया है कि हमें मालूम नहीं था।
  इस पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को स्थगित कर दिया।
   इस प्रकरण के बाद भी आज देश के अनेक महानुभाव अपने नाम के आगे या पीछे पद्मश्री जोड़ लेते हैं।
कुछ सज्जन तो अपने मकान के नेम प्लेट में भी ऐसा ही लिखवा लेते हैं।
अखबारों में उनके बयान और लेख भी कई बार पद्मश्री सहित उनके नाम के साथ छपते हैं।
  पद्म पुरस्कर से संबंधित नियम के अनुसार यह अवार्ड
कोई टाइटिल नहीं है।
इसलिए इसे अपने नाम के आगे या पीछे नहीं लगा सकते।
लेटरहेड, निमंत्रण पत्र, पोस्टर, किताब आदि में इसका इस्तेमाल नहीं कर सकते।
................................
पर सवाल है कि जब तक आप इस देश के दो -चार नियम भंग नहीं करेंगे ,तब तक आप बड़ा व प्रभावशाली व्यक्ति कैसे कहलाएंगे ?!!!!
.........................
8 मई 2020 

   
  

शुक्रवार, 8 मई 2020

‘‘रियाज नाइकू की नियति तो उसी दिन तय हो गई 
जब उसने बंदूक उठाकर हिंसा और आतंक की राह चुनी थी।
उसकी मौत और अधिक लोगों को हिंसा के रास्ते पर लाने और विरोध -प्रदर्शन का पड़ाव बिल्कुल भी नहीं बननी चाहिए।
         ----- पूर्व मुख्य मंत्री उमर अब्दुल्ला
.........................................
रियाज नायकू हिजबुल कमांडर था।
उस पर सरकार ने 12 लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा था।
हिजबुल मुजाहिदीन हथियारों के बल पर कश्मीर में इस्लामिक शासन कायम करने की कोशिश में लगा है।
उसे पाकिस्तान की मदद हासिल है।
............................
इसके बावजूद
एक हिन्दुस्तानी विश्लेषणकत्र्ता निशांत वर्मा ने कल रियाज नायकू पर ‘टाइम्स नाउ’ में आयोजित चर्चा के दौरान कह दिया कि यहां तो यह हो रहा है कि किसी को भी गोली मार दो और उसे आतंकवादी बोल दो।
   इस पर एंकर राहुल शिवशंकर ने निशांत से माफी मांगने के लिए कहा।
पर, जब वर्मा ने माफी नहीं मांगी तो वर्मा की माइक डाउन कर दी गई।
 .................................
इन दिनों कई निजी इलेक्ट्रानिक चैनलों पर आने वालों में निशांत वर्मा जैसे विचार वालों की संख्या कम नहीं है।
अब सवाल यह है कि वर्मा जैसे लोगों को चैनल वाले बुलाते ही क्यों हैं ?
  .................................
बड़े -बड़े चैनलों पर वर्मा जैसे लोगों की ऐसी ही और इससे भी कड़ी टिप्पणियों से देश-विदेश के वैसे लोगों का हौसला बढ़ता है जो इस देश को नुकसान पहुंचाने के काम में लगे हुए हैं।
  इस तरह के बयान प्रिंट मीडिया में आम तौर पर नहीं छपते।
इसके लिए हमें प्रिंट मीडिया का शुक्रगुजार होना चाहिए। 
पर, दूसरी ओर कई निजी इलेक्ट्रानिक चैनलों को इस बात का अंदाजा ही नहीं है कि वे ऐसे लोगों को मंच देकर देश का जाने-अनजाने कितना नुकसान कर रहे हैं !
......................................
--- सुरेंद्र किशोर - 7 मई 20


 ताजा गैस रिसाव ने बताई देश की पाइपलाइनों की निगरानी की जरूरत-सुरेंद्र किशोर 
..............................
लगता है कि सन् 1984 की भोपाल गैस त्रासदी से भी हमने 
कम ही सबक सीखा है।
तब वहां उस कारण हजारों लोगों की जानें गई थीं।
 उसके असली गुनहगार को तौल कर सजा मिल गई होती तो 
बाद के वर्षों में कठोर सावधानी बरती जाती।
पर ऐसा नहीं हो सका।
नतीजतन बाद के वर्षों में भी ऐसी घटनाएं होती जा रही हैं।
ताजा दुःखद खबर विशाखापतनम से आई है।
  सतत निगरानी की कमी और कई अन्य तरह की असावधानियों के कारण ऐसी घटनाएं होती रही हैं।
  इससे मिलती -जुलती एक अन्य बात।
 हाल के वर्षों में बिहार सहित देश में गैस व तेल पाइपलाइनों का विस्तार हुआ है।
हो भी रहा है।
कई जगह पाइपलाइन घनी बस्तियों से गुजरती हैं।
 उन्हें किसी जानी-अनजानी  दुर्घटना से बचाने के लिए सतत निगरानी की जरूरत होगी। 
......................................
  बिहार के प्रवासी मजदूरों
  के लिए अच्छी खबर
   ........................
बिहार सरकार ने राज्य में लौटे प्रवासी मजदूरों को काम पर लगाने के लिए बड़ी संख्या में योजनाएं बनाई हैं।
 बहुत अच्छी बात है।
पर, इससे भी अच्छी  बात यह होगी कि जो भी योजनाएं बनें,उनका ठीकठाक ढंग से कार्यान्वयन भी हो।
तभी मजदूरों व अंततः राज्य का भला होगा।
  योजनाएं तो पहले भी बनती रही हैं।
 किंतु उनके कार्यान्वयन को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
सबसे बड़ी समस्या यह रहती है कि कार्यान्वयन की ईमानदार शासकीय निगरानी नहीं होती।
नतीजतन न तो उससे मजदूरों को पूरा लाभ मिल पाता और न ही लाभुक को।
वैसे थर्ड पार्टी निगरानी की जरूरत है।
  ऐसे में जरूरत इस बात की है कि नई योजनाओें को शुरू करने से  पहले पिछली योजनाओं के कार्यान्वयन को लेकर हुए कटु -मधु अनुभवों से भी दो-चार हुआ जाए।
उसके अनुभवों का लाभ नई योजनाओं के कार्यान्वयन में उठाया जाए। 
   कम से कम अब तो कार्यशैली में ठोस बदलाव आए !
..........................................
     कौशल को सम्मान
    मिलने का अवसर 
..............................................
 प्रवासी मजदूरों में से अनेक कुशल मजदूर भी हैं।
 वे अब बिहार में ही रहकर काम करना चाहते हैं।
उनके लिए यहीं और अनेक बेहतर अवसर उपलब्ध होने वाले हंै।
 इस राज्य के कई हिस्सों से यह सूचनाएं आती रहती हैं कि कुशल मजदूर उपलब्ध नहीं हैं। 
लोग अपेक्षाकृत कम कुशल मजदूरों से काम चला रहे हैं।
 मुख्य मंत्री नीतीश कुमार ने प्रवासी मजदूरों का कौशल सर्वेक्षण कराने निदेश दिया है। 
   ....................................................
     किसानों से मनरेगा को जोड़ने 
    से कम हांेगी अनियमितताएं 
   ........................................ 
क्या मनरेगा मजदूरों को किसानों की खेती-बाड़ी से कभी 
जोड़ा जा सकेगा ?
क्या यह संभव हो पाएगा कि मजदूरगण खेती और खेती से 
जुड़े खादी जैसे उद्योग धंधों में काम करें ?
ऐसी मांग पहले से उठती रही  है।
उन्हें कुछ पैसे मनरेगा फंड से मिले और बाकी किसानों से मिले ?
  अभी यह शिकायत आ रही है कि मनरेगा के पैसों का कम ही सदुपयोग हो पा रहा है।
  कितना सदुपयोग हो रहा है ?
क्या इस बात की किसी प्रामाणिक एजेंसी से जांच कराई जाएगी ?
कोरोना विपत्ति के कारण देश-प्रदेश की अर्थ व्यवस्था को भारी चोट पहुंची है।
अब छोटे -बड़े घोटालेबाजों के खिलाफ सरकार को चाहिए कि वह ‘युद्ध’ छेड़ दे ताकि लूट में पहले की अपेक्षा अब तो कम पैसे जाया हों ! 
कोरोना के बाद के वर्षों में आर्थिक पुनर्जीवन व विकास के कामों के लिए भारी धनराशि की जरुरत पड़ेगी।
ऐसे में यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि सरकारी पैसों की अब पहले जैसी बंदरबांट न हो।
  ...........................................................
   सरकारी योजनाओं की निगरानी 
.............................................
मुख्य मंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि जदयू कार्यकत्र्ता सरकारी योजनाओं की निगरानी करेंगे।
यह भी एक सामयिक पहल है।
खास कर सरकारी योजनाओं को अधिक से अधिक भ्रष्टाचारमुक्त बनाया जाना ही चाहिए।
 निगरानी भी राजनीतिक कार्यकत्र्ता करें जो गांव-गांव में फैले होते हैं।
घूसखोरों को पकड़वाने वालों को इनाम देने की घोषणा मुख्य मंत्री पहले ही कर चुके हैं।
  कोई दल यदि वैसे  ही कार्यकत्र्ताओं को चुनावी टिकट
दे या कोई अन्य पद देने पर विचार करे जिसने कम से कम दो रिश्वतखोरों को पकड़वाया हो तो शासन व राजनीति में फर्क आ सकता है।
  आज की राजनीति की जो हालत है,उसमें यह कठिन काम जरुर है।पर  संभव है कि अपने कैरियर को आगे बढ़ाने के लिए कुछ कार्यकत्र्ता  सख्ती से निगरानी करें।
  पंचायतों के चुनाव यदि दलगत आधार पर हो,तो भी फर्क पड़ेगा।क्योंकि 
पंचायतों के लिए चुने गए प्रतिनिधियों पर दल का अंकुश रहेगा।
   ................................ 
     और अंत में 
   ................................ 
बिहार सरकार के ग्रामीण विकास विभाग ने टाॅल फ्री नंबर जारी किया है।
इस नंबर पर मजदूर शिकायत कर सकता है।
यह कि उसे सरकारी योजनाओं में काम मांगने के बावजूद नहीं मिल रहा है।
   शासन यदि कहता है कि अब तक ऐसी शिकायत नहीं आई तो उसे उसके कारण का पता लगाना चाहिए।आखिर क्यों नहीं आई ?
  क्या मजदूर दबंगों के डर से शिकायत नहीं करते ?
यदि ऐसा है तो शासन को  चाहिए कि वह उसका निदान करे।
 याद रहे कि ग्रामीण इलाकों में मजदूरों के लिए आवाज उठाने वाली राजनीतिक शक्तियों की धीरे -धीरे कमी होती जा रही है।
इससे भी शासन की जिम्मेदारी बढ़ गई है।
.........................
--कानोंकान,
प्रभात खबर,
पटना,8 मई 2020

बुधवार, 6 मई 2020

   
  लाॅकडाउन शब्द अब गांव-गांव में प्रचलित हो गया है।
यह शब्द अब अधपढ़ से लेकर अनपढ़ तक की जुबान पर है।
  ठीक इसी तरह अस्सी के दशक में बोफोर्स शब्द प्रचलित हुआ था।
उन दिनों तो सुदूर इलाकों में सड़कों के किनारे ‘बोफोर्स चाय’ भी मिलने लगी थी।
   अभी क्वारंटाइन और कंटेनमेंट शब्द प्रचलित नहीं हुए हैं।
  पर, ग्रीन जोन, आॅरेंज जोन और रेड जोन जरुर चर्चा में हैं।
याद रहे कि लाॅकडाउन से तो सब पीड़ित हैं,पर क्वारंटाइन और कंटेनमेंट 
का असर सब पर नहीं है। 
........................................
--सुरेंद्र किशोर-5 मई 20

मंगलवार, 5 मई 2020

‘‘इतिहास हमेशा याद रखें।
हंदवाड़ा के आतंकी हमले में पांच भारतीय 
सैनिकों ने जान गंवाई।
वह हमला अनगिनत हमलों 
में से एक है।
उन हमलों की शुरुआत वर्ष 1015 में महमूद 
गजनी ने की थी।
गजनी ने कश्मीर हासिल करने के लिए ऐसा 
किया था।
  गजनी को कश्मीर की रानी दिद्दा के भतीजे 
ने पराजित किया था।’’
..........................................
   --पत्रकार आरती टिकू सिंह,
   दैनिक जागरण, 4 मई 2020

सोमवार, 4 मई 2020

मजदूर यदि सिर्फ एक पैर के 
जूते का ही निर्माण
शुरू कर दे तो कारखाना 
प्रबंधन क्या करेगा !
..................................  
सत्तर के दशक की बात है।
कर्पूरी ठाकुर मंत्रिमंडल के उद्योग मंत्री ठाकुर प्रसाद 
जापान के दौरे से लौटे थे।
वह वहां के अपने अनुभव यहां सुना रहे थे।
मैं संवाददाता के रूप में मौजूद था।
उन्होंने बताया था कि जापान के मजदूर अपनी 
मांग मनवाने के लिए 
किस तरह की ‘हड़ताल’ करते हैं।
वहां किसी जूते के कारखाने के मजदूरों को 
प्रबंधन से अपनी मांग मनवानी होती है तो वे 
अपना काम बंद नहीं करते।
बल्कि उसके बदले प्रबंधन को परेशानी में डालने वाला 
कदम उठाते हैं।
वे दोनों पैरों के जूते बनाने के बदले सिर्फ एक ही पैर 
के जूते का उत्पादन शुरू कर देते हैं।
प्रबंधन परेशान हो जाता है।एक पैर 
के जूते तो बिकेंगे नहीं !
नतीजतन प्रबंधन मजदूर नेताओं से बातचीत करके 
उनकी वाजिब मांगें मान कर उनसे समझौता करने के 
लिए बाध्य हो जाता है।
................................
    ---सुरेंद्र किशोर--4 मई 20

रविवार, 3 मई 2020

  मधु लिमये की याद में
  ............................................
एक खास राजनीतिक स्थिति में मधु लिमये ने संसोपा संसदीय पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे दिया था।
  उनकी जगह रामसेवक यादव नेता बने।
बाराबंकी से लोक सभा सदस्य रहे रामसेवक यादव शालीन और योग्य नेता थे।
 1972 में सोशलिस्ट पार्टी ने रामसेवक जी को दरभंगा लोस उप चुनाव में उम्मीदवार बनाया था।
उस उप चुनाव में केंद्रीय मंत्री ललित नारायण मिश्र की जीत हुई थी।पूर्व मुख्य मंत्री विनोदानंद झा के निधन से दरभंगा लोस सीट खाली हुई थी।
.................
सुरेंद्र किशोर--2 मई 20