शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2020

मुंह में संविधान और हाथ में पिस्तौल !
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कुछ लोग मुंह में भारतीय संविधान और हाथ में पिस्तौल  लेकर घूम रहे हैं।
उनके लिए इसी संविधान की कुछ पंक्तियों पेश हैं।
ऐसी स्थिति के लिए संविधान में नागरिक कत्र्तव्य साफ-साफ शब्दों में दर्ज हैं-
‘‘भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कत्र्तव्य होगा कि वह
भारत की प्रभुता,एकता और अखंडता की रक्षा करे।
साथ ही, सार्वजनिक संपत्ति को सरुक्षित रखे और हिंसा से दूर रहे।’’--अनुच्छेद-51 ए 
--सुरेंद्र किशोर
28 फरवरी, 20


गुरुवार, 27 फ़रवरी 2020

  केजरीवाल जी, अतिवादियों की जगह आम
  मुसलमानों के हितों का ध्यान रखिए !
          सुरेंद्र किशोर 
जे.एन.यू.में 9 फरवरी, 2016 को अफजल गुरू की बरखी मनाई गई।
 वहां उस अवसर पर अफजल के प्रशंसकों ने जमकर राष्ट्र विरोधी नारे लगाए।
दिल्ली पुलिस ने उन नारेबाजों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया।
आरोप देशद्रोह का है। 
किंतु केजरीवाल सरकार अभियोजन पक्ष को मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं दे रही है।
मामला लटका हुआ है।
  अल्पसंख्यक मतदाताओं ने गत दिल्ली विधान सभा चुनाव में कांग्रेस को छोड़कर ‘आप’ को एकतरफा वोट दे दिया।
 फिर भी विधान सभा की सीटों की संख्या की दृष्टि से पहले से ‘आप’ की संख्या इस बार घटी और भाजपा की ंसंख्या बढ़ी।
  अल्पसंख्यकों के बीच के अतिवादियों के साथ हमदर्दी दिखाने का जल्दी ही एक और अवसर केजरीवाल सरकार को मिल गया।
मनीष सिसोदिया ने ‘शाहीन बाग’ का समर्थन कर दिया ।
नतीजतन वे विधान सभा चुनाव हारते -हारते बचे।
 अब ताजा दंगों को लेकर  ‘आप’ के जिन अल्संख्यक नेताओं के खिलाफ आरोप लग रहे हैं,उनको लेकर ‘आप’ के नेता मौन हैं।या बचाव की मुद्रा में हैं।उल्टे वे पुलिस पर आरोप लगा रहे हैं।
  केजरीवाल जी,
  हाल के वर्षों से  इस देश के कई प्रमुख राजनीतिक दल अल्पसंख्यकों के बीच के अतिवादियों का एकतरफा समर्थन करते रहे हैं।
सामान्य अल्पसंख्यकों के हितों की चिंता की होती तो उन दलों का नुकसान नहीं होता।
  इस रवैए से देश के कई तथाकथति सेक्युलर दल कमजोर होते जा रहेे हैं।उनकी कीमत पर भाजपा बढ़ गई।
 क्या  केजरीवाल की पार्टी भी उसी राह पर है ?
यह हकीकत है कि केजरीवाल सरकार जनहित में अच्छे -अच्छे काम करती जा रही है। 
 इसलिए उसके पास  पुण्य का खजाना बड़ा है।
पर,यदि केजरीवाल समूह इसी तरह अतिवादियों का समर्थन देता रहा तो ‘आप’
का राजनीतिक भविष्य भी अन्य दलों की तरह अनिश्चित हो सकता है।
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27 फरवरी 2020


बुधवार, 26 फ़रवरी 2020

2019 के लोक सभा चुनाव से ठीक पहले बिहार के कुछ स्वयम्भू नेता खूब हुंकार -फुफकार मार रहे थे।
चुनाव नतीजे के बाद वे धरातल पर आ गए।
कुछ महीनों के बाद बिहार विधान सभा का चुनाव होने वाला है।
  इस चुनाव के बाद कुछ राजनीतिक दलों को अपनी वास्तविक ताकत का पता चल जाएगा।
  --- सुरेंद्र किशोर
     26 फरवरी 2020

सन 2002 में गोधरा रेल डिब्बा कार सेवक दहन कांड की खबर जब तक तैरती रही,तब तक सारे ‘सेक्युलर’ मौन थे।
पर, जैसे ही गुजरात के दूसरे हिस्सों में प्रति हिंसा शुरू हुई,सारे ........वाचाल हो उठे थे ।
कुछ रोने लगे। 
कुछ चीत्कार करने लगे।
इतिहास कई बार खुद को दुहराता है।
इस बार भी इतिहास खुद को दुहरा रहा है।
26 फरवरी 2020

सोमवार, 24 फ़रवरी 2020

विरल रोग की चपेट में बच्चे 
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इन दिनों इस देश के कुछ बच्चे एक विरल व जटिल रोग से पीडि़त हैं।
यह आनुवांशिक रोग है।
इस रोग का नाम है--एम.पी.एस.-2 हंटर सिन्ड्रोम ।
देश में ऐसे मरीजों की कुल संख्या करीब 400 है।
दो से चार साल के शिशु के शरीर को यह जानलेवा रोग अपनी गिरफ्त में ले लेता है।
इस रोग से संबंधित सर्वाधिक दुखदायी बात यह है कि इसका इलाज अत्यंत महंगा है।
यदि हर साल 50 लाख रुपए खर्च किए जाएं
तो कुछ समय में मरीज ठीक हो सकता है।
पीडि़त के परिजन पिछले दिनों इस सिलसिले में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मिले थे।
उन्होंने कुछ आश्वासन भी दिया है।
पर मुझे लगता है कि इसमें प्रधान मंत्री के हस्तक्षेप की जरुरत है ताकि सैकड़ों अबोध बालकों की प्राण रक्षा की जा सके।
  ----सुरेंद्र किशोर--24 फरवरी 2020 


यह पोस्ट मेरे मित्र शकीलुज्जमां अंसारी के लिए विशेष
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बंगला देशी घुसपैठियों की समस्या से पीडि़त राज्यों का  सम्मेलन सितंबर, 1992 में दिल्ली में हुआ था।
 पी.वी.नरसिंह राव सरकार के गृह मंत्री एस. बी. चव्हाण की अध्यक्षता में असम, बंगाल, बिहार, त्रिपुरा, अरुणाचल और मिजोरम के  मुख्यमंत्री और मणिपुर, नगालैंड एवं दिल्ली के प्रतिनिधि  उस सम्मेलन में शामिल थे।
  सम्मेलन में सर्वसम्मत प्रस्ताव पास  किया गया।
प्रस्ताव यह हुआ कि ‘‘देश के  सीमावर्ती जिलों के  निवासियों को परिचय पत्र दिए जाएं।’’
सम्मेलन की राय थी कि ‘‘बांग्ला देश से बड़ी संख्या में अवैध प्रवेश के कारण देश के विभिन्न भागों में जनसांख्यिकीय परिवत्र्तन सहित अनेक गंभीर समस्याएं उठ खड़ी हुई हैं।
  इस समस्या से निपटने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा मिलकर एक समन्वित कार्य योजना बनाने पर भी सहमति बनी।’’
 किंतु हुआ कुछ नहीं।नतीजतन 1992 और 2020 के बीच समस्या और भी गंभीर हो गई।
 इसके बावजूद इस अति गंभीर समस्या पर आज कांग्रेस व वाम दलों की राय देशहित से कितनी अलग है ?
आखिर क्यों ?
क्योंकि इसे ही आधुनिक राजनीति कहते हैं जिसमें देश कहीं नहीं है ।
ताजा खबर यह है कि पश्चिम बंगाल के जो जिले बंाग्ला देशी घुसपैठियों के कारण मुस्लिम बहुल हो चुके हैं,वहां हिन्दुओं को पूजा पाठ करने के लिए मस्जिदों से इजाजत लेनी पड़ रही है।यह बात हाल में लोक सभा में भी कही गई।
कोई मीडिया संगठन इस समस्या की रिपोर्ट नहीं कर रहा हैं।
कई साल पहले इंडियन एक्सप्रेस में यह खबर जरूर छपी थी कि पश्चिम बंगाल के एक मुस्लिम बहुल गांव में हिन्दू लड़कियों को हाफ पैंट पहन कर हाॅकी खेलने से मना कर दिया गया। 
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 सुरेंद्र किशोर--20 फरवरी 20 




लाॅर्ड मेकाले ने 2 फरवरी, 1835 को ब्रिटिश संसद में निम्नलिखित भाषण दिया था-- 
उस चर्चित भाषण की भारत में आए दिन चर्चा
होती रहती है।
वह भाषण यहां हिन्दी में प्रस्तुत है।
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   ‘‘मैंने भारत का चैतरफा दौरा किया और यह पाया कि 
न ही यहां एक भी भिखारी है, और न कोई चोर ही।
ऐसा समृद्ध है यह देश ।
इतने ऊंचे नैतिक मूल्यों पर चलने वाले सद्चरित्र लोग,मुझे नहीं लगता कि हम इसको कभी अपने अधीन कर पाएंगे।
जब तक कि हम इसके  मूल आधार को ही नष्ट कर न दें ,जो कि है इसकी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत।
  इसलिए मैं इसकी सनातन सांस्कृतिक शिक्षा व्यवस्था को बदलने की अनुशंसा करता हूं ।
क्योंकि अगर भारतीय यह समझेंगे कि जो भी कुछ विदेशी और अंग्रेजी है,वह अच्छा है और उनसे बेहतर है,तब वह अपने आत्म सम्मान और अपनी मूल संस्कृति को खो देंगे, 
 और तब वे वही बन जाएंगे जो हम उन्हें बनाना चाहते हैं,और तभी  होगा हमारा इस देश पर पूर्ण आधिपत्य।’’
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  बंबई प्रेसिडेंसी के शिक्षा विभाग की 1858 की  रपट के अनुसार,
 ‘‘शासन ने अंग्रेजी शिक्षा देने के लिए चार जातियों को चुनाव।
रपट के अनुसार उनमें से एक जाति अपने पूर्वजों की वीरगाथा में इतनी मगलन थी कि उसे अंग्रेजी  शिक्षा में कोई रुचि नहीं थी।’’
     ---आम्बेडकर संपूर्ण से।
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क्या एक बार फिर मेकाले-वाद की तरह का ही खतरा
भारत पर उपस्थित है ? !!
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प्रस्तुति--सुरेंद्र किशोर - 21 फरवरी 2020