शुक्रवार, 31 दिसंबर 2021

 कानोंकान

सुरेंद्र किशोर

..............................

सरकार के अलावा सामाजिक संगठन भी चलाए दहेज विरोधी अभियान

.............................................

दहेज जनित बुराइयों की जितनी खबरें बाहर आती हैं,उससे बहुत अधिक खबरें घरों की दीवारों के भीतर ही रह जाती हैं।

दहेज प्रताड़ना की पीड़िताएं घुट -घुट कर उपेक्षित जीवन बिताती हैं।

  हर पीड़िता के पिता इतने प्रभावशाली व साहसी व साधनसंपन्न नहीं होते कि वे दहेज दानवों को सजा दिला सकें।

 यह कहना कठिन है कि शराब-पान से मरने वालों की संख्या अधिक है या दहेज दानवों से पीड़ित होकर घुट-घुट कर रोज मरने वाली कितनी नारियां ! 

  यदि इस देश-प्रदेश में सक्रिय सामाजिक व राजनीतिक संगठनों ने दहेज पीडि 

...........................................

  गंगा की अविरलता में बाधक 

  .....................................

बादशाह अकबर दूर से मंगा कर रोज गंगा जल पीता था।

वह उसकी निर्मलता व औषधीय गुणों से परिचित था।

ब्रिटिश शासकों ने भी गंगा को गंदा नहीं होने दिया या नहीं किया।

बचपन में मैं गंगा के किनारे घुटने भर पानी में खड़ा होता था तो मेरे पैरों की अंगुलियां भी दिखाई पड़ती थी।

   आजादी के बाद गंगा को बांध कर और इसके किनारे बड़ी संख्या में कारखाने लगाने की अनुमति देकर इसे गंदे नाले में परिणत कर दिया गया।

गंगा को गंदा करने में कारखाने से निकले गंदे जल की भमिका महत्वपूर्ण रही।

कुम्भ मेले के समय गंगा के ऊपरी प्रवाह के किनारे स्थित कारखानों को कुछ दिनों के लिए बंद करना पड़ता है।

  जानकार सूत्रों के अनुसार सन 1985 से 2014 तक गंगा की सफाई पर चार हजार करोड़ रुपए खर्च किए गए।

नरेंद्र मोदी सरकार ने सत्ता संभालने के बाद अगले 15 साल के लिए गंगा की सफाई पर 30 हजार करोड़ रुपए खर्च करने की योजना बनाई है।

उस में से अब तक 11 हजार करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं।

कई जगह गंगा जल में गुणात्मक सुधार हुआ भी है।

.पर,सवाल है कि पूरी गंगा साफ कब होगी ?

जानकार लोग बताते हैं कि उसके लिए न सिर्फ गंगा से मिलने वाली नदियों को साफ करना होगा बल्कि गंगा की अविरलता भंग करने व दूषित करने वाले बांधों -नहरों-कारखानों को लेकर कठोर कदम उठाने होंगे।

औषधीय गुणों के कारण गंगा को विशेष स्थान देना होगा।

प्रकृति किसी अन्य देश को ऐसी नदी दी होती तो वह देश इसे संजो कर रखता।

................................

देश के सर्वाधिक स्वच्छ नगर इन्दौर से हाल में एक चिकित्सक पटना आए थे।

पटना नगर की गंदगी देखकर उन्होंने कुछ टिप्पणी भी की।

स्वाभाविक ही है कि उन्होंने क्या कहा होगा !

बिहार की राजधानी पटना में गंदगी व मुख्य ड़कों पर भी अतिक्रमण की समस्या पुरानी है।इससे आगंतुकों में बिहार की छवि खराब होती है।

कानून -व्यवस्था के मामले में तो अब इस राज्य की स्थिति बेहतर है।क्योंकि पिछले डेढ़ दशक में इस दिशा मंें राज्य सरकार ने काम किया है।उसी तरह की गंभीरता नगर की सफाई व अतिक्रमण मुक्ति को लेकर दिखाने में बिहार सरकार के सामने कौन सी दिक्कतें हैं ?

क्या अतिक्रमणकारी  व साफ-सफाई

में जानबूझ कर कोताही बरतने वाले लोग बिहार सरकार 

से अधिक ताकतवर हंै ? 

....................................

भूली-बिसरी याद

..................................

भारतीय संसद में दशकों से जारी हुड़दंग को लेकर लोक सभा के पूर्व स्पीकर बलिराम भगत की टिप्पणी भुलाए नहीं भूलती।

कई साल पहले उन्होंने कहा था कि हमारी संसद कैरिकेचर बन कर रह गई है। 

  दिवंगत भगत ने, जिनका सन 2011 में निधन हुआ,बिहार के ही मूल निवासी थे।वे केंद्र में मंत्री और लोक सभा के स्पीकर रह चुके थे।

सन 2003 में मीडिया

से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा था कि ‘‘हमारी संसद महज केरिकेचर बन कर रह गई है।

लोक सभा के काम काज में दिन ब दिन गिरावट आ रही है।’’

2003 में केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी।

कांग्रेस प्रतिपक्ष में थी।

उस गिरावट के लिए कौन कौन दल और कौन कौन तथा कौन कौन तत्व कसूरवार हैं ,यह बात उन्होंने नहीं बताई।

खैर,अपने पुराने अनुभवों के आधार पर भगत जी ने कहा कि 

‘‘अब हालात बहुत बदल गए हैं।पहले लोक सभा अध्यक्ष कुछ कहने के लिए अपने आसन से जब उठता था तब सभी सदस्य चुपचाप होकर उनकी बातों को सुनते थे।

पर अब सदस्यों की हुल्लड़बाजी से अध्यक्ष को ही पलायन करना पड़ रहा है।

यह परिपाटी संसदीय प्रणाली आधारित सरकारों के लिए घातक साबित होगी।

 शैक्षणिक योग्यता नहीं रहने के कारण अब ऊंचे दर्जे के महत्वपूर्ण विषयों पर बहस नहीं होती।’’

  अब तो संसद हुल्लड़बाजी से हंगामे की ओर बढ़ गई है।अब पीठासीन अधिकारी के साथ हाथापाई होती है।महिला मार्शलों के साथ दुव्र्यवहार होता है।आज भगत जी जीवित होते तो क्या कहते,कल्पना कर लीजिए।

.............................  

और अंत में

....................

शराब में अधिक नशा है या रिश्वत में ?

यह सवाल ही क्यों ?

क्योंकि बिहार में इन दिनों शराबखोरी और रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तारियां रुकने का नाम नहीं ले रही हैं।किंतु इसके बावजूद उतनी ही तेजी से ये दोनों अपराध घटित भी हो रहे हैं।दरअसल नशे के अभ्यस्त लोग अर्ध चेतन अवस्था में जो होते हैं !उन्हें न तो अपना ख्याल रहता है और न परिवार का। 

...........................

प्रभात खबर, पटना 

31 दिसंबर 21

  



   


बुधवार, 29 दिसंबर 2021

      देखते जाइए, सिद्धू और क्या-क्या करते हैं !!!

    .....................................

       --सुरेंद्र किशोर--

    ..........................................

‘‘जैसे सोनिया गांधी की बात पूर्व पी एम मनमोहन सिंह 

मानते थे, मैं भी अध्यक्ष होने के नाते मुख्य मंत्री चन्नी से यही उम्मीद रखता हूं।’’

      -- पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू

.................................................

  दैनिक भास्कर ( 29 दिसंबर, 21) से बातचीत में श्रीमान सिद्धू ने तो घुमा फिराकर यह कह दिया है कि मनमोहन जी अपनी सरकार की नीतियां सोनिया जी से पहले तय करवा लेते थे।सिद्धू बचाकर बोले।

   पर, प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार (2004-2008) रहे संजय बारू ने तो अपनी पुस्तक (द एक्सीडेंटल पी.एम.......) में साफ -साफ लिख दिया है कि ब्यूरोक्रेट पुलक चटर्जी के जरिए सोनिया गांधी पूरी सरकार चलाती थीं।

............................................

अधिकतर जानकार लोग यही जानते रहे हैं कि सोनिया गांधी ही सरकार थीं और मनमोहन सिंह मात्र रबर स्टाम्प थे।

सिद्धू ने इस धारणा की लगभग पुष्टि कर दी है।

........................................

पर, अपरिपक्व सिद्धू को यह नहीं पता कि ऐसी सुविधा सिर्फ फस्र्ट फेमिली को हासिल रही है।

1946-47 के कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.बी.कृपलानी को ऐसी ही गलतफहमी थी।

पर तत्कालीन प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें उनकी हैसियत बता दी।

गांधी जी भी कृपलानी की कोई मदद नहीं कर सके थे। 

.........................................

जब आप किसी अपरिपक्व नेता को अघोषित कारणों से ऊंचे पद पर बैठा देंगे तो वह आपकी पार्टी व सरकार का फायदा कम और नुकसान अधिक कर देगा।

.................................

एक बार राहुल गांधी ने कह दिया था कि हमारे परिवार ने 1971 में पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए।

जबकि कांग्रेस यह कहती रही है कि बांग्ला देश मुक्ति वाहिनी ने नया देश बनाया।हमने उसकी सिर्फ मदद की।

.................................

राहुल गांधी ने 2008 में अमृतसर जाकर कहा कि सिखों के खिलाफ 1984 में हुए दंगे पूरी तरह गलत थे।

राहुल ने सही कहा।

  पर ऐसा कहना राजनीतिक रूप से यह कांग्रेस के लिए सही ंनहीं था।

क्योंकि उस दंगे के बारे में तत्कालीन प्रधान मंत्री राजीव गांधी कह चुके थे कि ‘‘जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है।’’   

 वैसे उसे दंगा कहना भी गलत है।

वह तो एक तरफा नरसंहार था।

  .................................

अब सवाल है कि सिद्धू पंजाब सरकार से क्या चाहते हैं ?

पहले ही वे दबाव डालकर डी.जी.पी.और महा अधिवक्ता को हटवा चुके हैं।

  अब लगता है कि वे सिर्फ उतने ही से संतुष्ट नहीं है।

बेचारा चन्नी !!!

.................................... 

29 सिबंर 21 


मंगलवार, 28 दिसंबर 2021

आजादी के तत्काल बाद के शासकों ने 

ऐसे लागू किया अपना ‘‘आइडिया आॅफ इंडिया’’

....................................

--सुरेंद्र किशोर--

...................................

आजादी के तत्काल बाद के हमारे सेक्युलर (उनका सेक्युलरिज्म एकतरफा था) शासकों ने चार ‘‘महत्वपूर्ण काम’’ किए।

1.-देसी गाय को हाइब्रिड बनवाया।या, बनाने दिया।

याद रहे कि देसी गाय के दूध में जो विशेष गुण हैं, वे हाइब्रिड गायों में नहीं।

2.-शासकों ने पीपल के पौधों को सरकारी खर्चे पर लगवाने पर रोक लगा दी।

विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि कुछ खास दूरी पर पीपल के वृक्ष हों तो पर्यावरण चैबीसों घंटे स्वच्छ रहेगा।

.........................................

3.-शासक ने हमारी मिट्टी में बड़ी मात्रा में रासायनिक खाद व कीटनाशक दवाओं को डलवाना शुरू किया।

इससे हमारी मिट्टी जहरीली हो रही है और जमीन अनुर्वर।

इन मामलों में पंजाब में सबसे खराब हालत है।

4.-विशेष औषधीय गुणों वाली गंगा नदी

को जानबूझ कर गंदे नाले में परिणत कर दिया।यानी उसे पहले जैसी अविरल नहीं रहने दिया।

अविरल नहीं तो निर्मल भी नहीं। 

जबकि, मुगल और ब्रिटिश शासकों के काल में भी गंगा निर्मल थी।

.............................

मैं बचपन में अपनी फुुआ के साथ अपने गांव से चलकर दिघवारा (सारण,बिहार)के पास गंगा स्नान करने जाया करता था।

एक बार मैंने दतवन का चीरा गंगा में फेंक दिया था।

फुआ ने मुझे बहुत डांटा।

  तब वहां गंगा में घुटने भर पानी में उतरने के बाद भी मैं अपने पैरों की अंगुलियां तक देख सकता था।गंगा इतनी निर्मल थी।

.....................................    

 27 दिसंबर 21  



   




सोमवार, 27 दिसंबर 2021

      अकबरूद्दीन बनाम यति नरसिंहानंद

    .........................................

         सुरेंद्र किशोर

    ...........................................

  अकबरूद्दीन ओवैसी यानी जूनियर ओवैसी ने कुछ साल पहले एक अभूतपूर्व भाषण दिया था।

उनके उस भाषण का विडियो पूरी दुनिया में इलेक्ट्राॅनिक चैनलों पर देखा-सुना गया था।

 सन 2012 में आदिलाबाद की सभा में उन्होंने हिन्दुओं को संबोधित करते हुए कहा था कि 

‘‘तुम सौ करोड़ हो न,हम 25 करोड़ हैं।

15 मिनट के लिए पुलिस हटा लो तो पता चल जाएगा कि तुम कितने हो और हम कितने हैं।’’

......................................................

    इस पर अकबरूद्दीन के खिलाफ केस हुआ।

हाल में उनके दल के नेता वारिस पठान ने जानकारी दी कि 

अकबरूद्दीन को अदालत ने इस मामले में दोषमुक्त कर दिया है।

  जाहिर है कि हैदराबाद की पुलिस ने अभियोजन चलाया था।यानी, ओवैसी के ‘‘अनुकूल न्याय’’ दिलवा दिया गया।

  ....................................

हाल में हरिद्वार में  

 आयोजित धर्म संसद में तो हिन्दू संत यति नरसिंहानंद ने अति कर दी।

उन्होंने मुसलमानों से हिन्दू धर्म पर भारी खतरा बताया।

साथ ही, हिन्दू युवकों का आह्वान करते हुए कहा कि ‘‘तुम प्रभाकरण और भिंडरवाला बनो।’’

....................................

उत्तराखंड की भाजपा सरकार की पुलिस ने नरसिंहानंद पर आदि मुकदमा किया है।

पर सिनियर ओवैसी को उससे संतोष नहीं है।

.........................

सिनियर ओवैसी ने अपने दल की उत्तराखंड शाखा को निदेश दिया है कि वह इस संबंध में केस दायर करे।

.................................

ओवैसी का दोहरा मापदंड

................................

अकबरूद्दीन के आदिलाबाद स्पीच के बारे में इस बीच जब भी संवाददाताओं ने सिनियर ओवैसी से पूछा तो उन्होंने बस इतना ही कहा कि कोर्ट में मामला है।

  यति आदि के खिलाफ भी केस दर्ज हो चुका है तो उन्हें अदालत पर विश्वास करना चाहिए।

 पर, अकबरूद्दीन जैसा न्याय यति आदि को कहीं मिल न जाए, यह ओवैसी को मंजूर नहीं। 

.................................

वैसे मेरी राय है कि अकबरूद्दीन को दोषमुक्त किया जाना गलत है।

पता नहीं ऊपरी अदालत में दोषमुक्ति के खिलाफ अपील हुई भी है या नहीं।

  उसी तरह यदि यति को सजा नहीं मिलेगी तो वह भी गलत होगा।

...................................

पर,सवाल है कि इस देश में कितने लोग चाहते हैं कि देश में कानून का शासन हो।अनेक लोग कुछ और ही चाहते हैं।

वैसे जो समझते हैं कि कानून हाथ में लेना उनके लिए जरूरी है तो वे उसके तहत मिलने वाली सजा के लिए भी खुद को उन्हें प्रस्तुत करना चाहिए।

.........................................

अकबरूद्दीन को सजा नहीं हुई तो किसी ने उनकी दोषमुक्ति के खिलाफ कोई आंदोलन नहीं किया।

पर असदुद्दीन ओवैसी कह रहे हैं कि यदि नरसिंहानंद आदि को सजा नहीं हुई तो वे आंदोलन करेंगे।

यह बात मैं दोनों यानी सभी पक्षों के वैसे लोगों के लिए कह रहा हूं जो ‘‘हेट स्पीच’’ देना अपना धर्म समझते हैं।

......................................... 

26 दिसंबर 21


शनिवार, 25 दिसंबर 2021

 अटल बिहारी वाजपेयी

.................................

( 25 दिसंबर 1924--16 अगस्त 2018)

..........................................

अटलजी के साथ मीडिया का एक और अन्याय !

......................................

 बांग्ला देश युद्ध के समय इस देश के प्रेस ने अटल बिहारी वाजपेयी के मुंह में इंदिरा गांधी के लिए ‘दुर्गा’ शब्द डाल दिया था।

   जबकि, दुर्गा शब्द का उच्चारण आंध्र के एक कांग्रेसी एम.पी.ने लोक सभा में किया था।

सन 2002 में अमरीकी मैगजिन ‘टाइम’ ने लिख दिया कि बैठकों में प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सो जाते हैं।

.............................

  पहले आम तौर पर यह माना जाता था,मै भी मानता था कि ‘टाइम’ एक बहुत ही जिम्मेदार पत्रिका है।

  कोई भी बात वह पत्रिका ठोक- बजा कर लिखती है।

उसका यह दावा भी था कि कोई भी स्टोरी करने के लिए पहले पत्रिका अपने संवाददाता-छायाकार की टीम भेजती है।

  उस टीम के लौटने के बाद वह दूसरी टीम उसकी पुष्टि के  लिए भेजती है।

  पर, उसका दावा बार -बार गलत निकला।

इसके कई अन्य उदाहरण सामने आए।

................................

साठ के दशक में गलत खबर से खिन्न डा.राम मनोहर लोहिया 

ने ‘टाइम’ पर मानहानि का मुकदमा कर दिया था। 

  उन्होंने दस पैसे के हर्जाने की कोर्ट से मांग की थी।

  याद रहे कि फूल पुर लोक सभा उप चुनाव के संबंध ‘टाइम’ ने निराधार खबर छापी थी।

‘टाइम’( 4 दिसंबर 1964) ने अन्य बातों के अलावा यह भी लिख दिया था 

कि ‘ डा.लोहिया नेहरू परिवार के आजीवन शत्रु हैं।’

  भारत की राजनीति के बारे में ‘टाइम’ की छिछली जानकारी का ही यह नतीजा था।

दरअसल समाजवादी नेता डा.लोहिया जवाहर लाल नेहरू की नीतियों का विरोध करते थे न कि वे उनके आजीवन शत्रु थे।

एक बार डा.लोहिया ने अपने मित्रों से कहा था कि ‘‘यदि मैं बीमार पड़ूंगा तो मेरी सबसे अच्छी सेवा- शुश्रूषा जवाहर लाल नेहरू के घर में ही होगी।’’

..........................................

सन 2019 के लोक सभा चुनाव के ठीक पहले टाइम मैगजिन ने प्रधान मंत्री मोदी के बारे में जो लेख लिखा, उसका शीर्षक था--‘‘इंडिया ’ज डिवाइडर इन चीफ’’

पर,जब लोस चुनाव में 303 सीटें मिल गईं तो टाइम ने अगले अंक में मनोज लदवा का एक लेख छापा जिसका आशय था--मोदी ने भारत को जिस तरह यूनाइट किया,वैसा पिछले कुछ दशकों में किसी अन्य प्रधान मंत्री ने नहीं किया।

याद रहे कि मोदी के शासनकाल में सांप्रदायिक दंगे पहले की  अपेक्षा बहुत ही कम हुए।

..........................................

याद रहे कि ‘डिवाइडर इन चीफ’ वाले लेख के  लेखक थे -आतिश तासिर।

वे पाकिस्तानी पिता और हिन्दुस्तानी महिला पत्रकार तवलीन सिंह के पुत्र हैं।

संभवतः वे लंदन में रहते हैं।

.....................................

   ऐसा नहीं कि सिर्फ भारतीय मीडिया गलतियां करता है।

  कई बार तो साधन की कमी के कारण भारतीय मीडिया को एक ही स्टोरी पर अधिक समय लगाना महंगा पड़ता है।

पर टाइम जैसी पत्रिका को साधनों की क्या कमी है ?

हर सप्ताह उसेे निकालने के लिए कंट्रीब्यूटर्स तथा करीब दो सौ स्टाफ जर्नलिस्ट होते हैं।

हां,कभी- कभी पत्रिका कीं मंशा गड़बड़ हो जाती है।

अन्यथा,लोहिया के बारे में वह पत्रिका यह बात नहीं लिखती--

 ‘‘लोहिया ने मतदाताओं से कहा कि विजयलक्ष्मी पंडित की सुन्दरता के जाल में न फंसें।

उनके अंदर केवल विष है।’

‘टाइम’ के अनुसार डा.लोहिया ने फुलपुर के मतदाताओं से  कहा कि श्रीमती पंडित की युवावस्था जैसी सुन्दरता इसलिए कायम है क्योंकि उन्होंने यूरोप में प्लास्टिक शल्य चिकित्सा करायी है।’’ याद रहे कि नेहरू के निधन से खाली हुई सीट से श्रीमती पंडित चुनाव लड़ रही थीं।

  ‘टाइम’ संवाददाता न तो फूलपुर गया था न ही कभी लोहिया से मिला था।

किसी अन्य व्यक्ति को भी उधृत नहीं किया था।

बैठकों में प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सो जाने की खबर को ‘टाइम’ ने किसी के हवाले से नहीं छापा ।

  ................................

पत्रकारिता का मूल मंत्र है कि जिस पर आरोप है,उस पर उस व्यक्ति का पक्ष भी भरसक साथ -साथ ही आ जाना चाहिए।

...............................

25 दिसंबर 21 

 


     

   

 

 


मंगलवार, 21 दिसंबर 2021

 ‘‘मेरी जरूरतें बहुत कम हैं,

इसीलिए मेरे जमीर में बहुत दम है’’


        अब समय है, चेत जाइए

       इस लोकतंत्र को बचाए रखिए

     ..................................

       सुरेंद्र किशोर

    ......................................

इस देश में लोकतंत्र को यदि बनाए-बचाए रखना है तो सिर्फ वैसे ही नेताओं को वोट दीजिए,वैसे ही सुप्रीमो को आगे बढ़ाइए , जिनका उद्देश्य राजनीति व सत्ता की ताकत से खुद के लिए पैसे कमाना नहीं है।

साथ ही,जिनका लक्ष्य अपने वंश या परिवार को राजनीति व सत्ता में जगह दिलाना नहीं है।

.............................

कुछ अनुभवी लोग इन दिनों बता रहे हैं कि इस देश की कम-से कम दो समस्याओं का हल इस ढीले -ढाले लोकतंत्र में नहीं है।

 उसके लिए देश को एक ‘‘परोपकारी तानाशाह’’ चाहिए ।

चीन की सरकार भी कहती है कि वह जिस आतंकवाद से इन दिनों अपने देश में जूझ रही है,उस आतंकवाद का इलाज लोकतांत्रिक व्यवस्था में संभव ही नहीं है।

.............................................

इन अनुभवी लोगों के विचार को अधिक बल न मिले,इसके लिए यह जरूरी है कि इस देश के लोकतांत्रिक सिस्टम से भ्रष्टों और वंशवादियों-परिवारवादियों को जल्द से जल्द निकाल बाहर कर दिया जाए।

  अन्यथा,देर-सवेर  तानाशाही आएगी ही।

यदि वैसा हुआ तो पहले तो तानाशाही परोपकारी दिखाई पड़ेगी,पर बाद में अत्याचारी बन सकती है।

....................................

20 सिबंर 21