शनिवार, 25 जून 2022

 वी.पी.सिंह के जन्म दिन के अवसर पर

...........................................

सभी जातियों की महिलाओं को भी विशेष 

अवसर देने के पक्षधर थे डा.लोहिया

....................................

काश ! ऐसा मान कर यदि वी.पी.सिंह सरकार ने 

आरक्षण लागू किया होता

...........................................  

आरक्षण का कर्पूरी फार्मला उदाहरण के 

रूप में पहले से मौजूद था

.....................................

सुरेंद्र किशोर

....................

‘‘भले मेरी टांग टूट गई,किंतु मैंने गोल कर दिया।’’

प्रधान मंत्री पद से हटने के बाद विश्वनाथ प्रताप सिंह ने यही बात कही थी।

उन्होंने पिछड़ों के लिए आरक्षण का फैसला किया और भाजपा ने उनकी सरकार से समर्थन वापस कर लिया।

एल.के.आडवाणी ने कहा था कि यदि मंडल नहीं होता तो मंदिर आंदोलन भी नहीं होता।

.........................

डा.राम मनोहर लोहिया की आरक्षण नीति का पालन किया होता तो शायद उनकी टांग नहीं टूटती।

मंडल आयोग लागू करने के कारण वी.पी.सिंह न अगड़ों के प्यारे रहे और न ही पिछड़ों के अपने बन सके।

याद रहे कि डा.लोहिया हर जाति व समुदाय की महिलाओं को

भी पिछड़ा ही मानते थे।

यदि आरक्षण होना था तो उसका लाभ महिलाओं को भी मिलना चाहिए था।पहले नहीं तो अब मिले।

....................................

संविधान के अनुच्छेद-340 में यह दर्ज है कि ‘‘सरकार  सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से पिछडे़ वर्गों की दशाओं के अन्वेषण और उनकी कठिनाइयों को दूर करने के उपाय करेगी।’’

  मंडल आयोग और उससे पहले काका कालेलकर आयोग उसी अनुच्छेद के तहत बना।

 इस अनुच्छेद के कार्यान्वयन पर विचार करते समय सरकार को एक काम करना चाहिए था ।

वह आयोग को यह जिम्मेदारी भी सौंपती कि वह समाज में हर जाति की महिलाओं की दशा पर अलग से विचार करता।

यदि मंडल आयोग ने यह काम नहीं किया तो आरक्षण लागू करने से पहले यह काम वी.पी.सिंह सरकार को कर देना चाहिए था।

उसमें तीन प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षण था।

......................................

वैसे वी.पी.सिंह को याद करने के कुछ अन्य कारण भी हैं।

वी.पी.सिंह ने एक ईमानदार नेता थे।

वे राजनीति में वंशवाद के खिलाफ थे।

उन्होंने व्यापक हित में आरक्षण लागू करते समय 

अपनी जाति के हितों का भी ध्यान नहीं रखा।

..............................

उनके बोफोर्स और मंडल आरक्षण के कारण कांग्रेस की ऐसी दुर्दशा हुई कि उसके बाद कभी उसे लोक सभा में बहुमत नहीं मिल सका।

  मैं इस आरोप से सहमत नहीं हूं कि वी.पी.सिंह ने अपनी गद्दी बचाने के लिए मंडल आरक्षण लागू कर दिया।

यह इतना बड़ा काम था जिसके हो जाने से हलचल मचने ही वाली थी।मची भी।

..................................


गुरुवार, 23 जून 2022

 कानोंकान

सुरेंद्र किशोर

.......................

रेलवे संपति और यात्रियों की सुरक्षा के लिए कोई भी खर्च 

सस्ता ही पड़ेगा

...............................................

ताजा घटनाओं से एक बार फिर एक गंभीर बात सामने आई  है।

वह यह कि उपद्रवियों से रेलवे संपत्ति और यात्रियों के जान-माल बचाने के मौजूदा उपाय पर्याप्त नहीं हैं।

रेलवे और यात्रियों की रक्षा के लिए जरूरत के अनुसार कितनी भी अधिक राशि सरकार खर्च कर दे,वह बेकार नहीं जाएगी।

 देश में जारी तनावपूर्ण राजनीतिक व गैर राजनीतिक स्थिति को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि रेलवे पर खतरा बढ़

सकता है।

  इस बीच यह अच्छी बात हुई है कि मौजूदा रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव ने स्थिति की गंभीरता को समझा है।

वे कह रहे है कि ट्रेनों की सुरक्षा के लिए वे कड़े कानून लाएंगे।

रेलवे अधिनियम को मजबूत बनाया जाएगा।

साथ ही, उन्हें आर.पी.एफ.को और कानूनी अधिकार देने होंगे।साथ ही, उनकी संख्या बढ़ानी होगी।

रेलवे की सुरक्षा में लगे सरकारी सेवकों के बीच जारी भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति अपनानी होगी।

   ........................................

  सामान्य बहाली के बाद ‘अग्निपथ’

   ......................................... 

गत दो साल से भारतीय सेना में बहाली नहीं हो सकी है।

इसके लिए सरकार जिम्मेदार नहीं है।

परिस्थितियां जिम्मेदार रहीं।

इस बीच अग्नि पथ योजना के तहत बहाली की प्रक्रिया शुरू होने वाली है।

यदि अग्नि पथ योजना से पहले ‘सामान्य सेना बहाली’ का एक छोटा दौर गुजर जाता तो अग्नि पथ के खिलाफ इतना हंगामा नहीं होता।

वैसे अग्नि पथ योजना देश की सुरक्षा-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बहुत जरूरी है।

चीन सहित दुनिया के कई प्रमुख देश सैनिकों की संख्या घटाकर उससे हो रही बचत के पैसों से आधुनिकत्तम हथियारों का संग्रहण कर रहे हैं।अब युद्ध सैनिकों से कम ताकतवर हथियारों से अधिक होंगे। 

       ..............................................

     राजमार्गों पर गलत पार्किंग

      .....................................

केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी अभिनव प्रयोग करते 

रहते हैं।

उनका ताजा प्रयोग न सिर्फ कारगर हो सकता है,बल्कि हजारों लोगों की आय का जरिया भी बन सकता है।

 उन्होंने कहा है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर गलत पार्किंग की फोटो भेजने वाले को 500 रुपए का इनाम मिलेगा।

  वाहन मालिक पर एक हजार रुपए का जुर्माना होगा।

इन दिनों असंख्य हाथों में स्मार्ट फोन हैं।

उनमें से अधिकतर लोग बेरोजगार हैं।

उनमें से भी अनेक लोग सड़कों पर गलत पार्किंग से रोज -रोज पीड़ित भी होते रहते हंै।

इसलिए लोग फोटो तो भेजेंगे।

पर, इनाम की राशि बढ़ा देनी चाहिए।

कम से कम तीन हजार रुपए इनाम रखिए।

वाहन चालक पर 5000 रुपए का जुर्माना कीजिए।

जब ड्राइविंग लाइसेंस नहीं रहने पर 5 हजार फाइन है और गति की निर्धारित सीमा का उलंघन करने पर 4 हजार फाइन है तो फोटो खींचने का खतरा उठाने पर इतना कम इनाम क्यों ?

फोटो लेने वाले को कम से कम अपने दो बलवान साथियों के साथ ही वाहन के पास जाना चाहिए।

 अन्यथा, उधर से हमले का खतरा है।प्रतिरक्षा में लगने वाले  उन साथियों को भी तो कुछ इनाम मिल सके,इतनी राशि तय कीजिए। 

................................

बहाली में धांधली के लिए मृत्युदंड ?

..........................................

  कर्नाटका की एक अदालत ने एक ऐसी टिप्पणी की है जिस ओर देश का ध्यान जाना चाहिए।जिस मुद्दे पर टिप्पणी की है,वह समस्या देशव्यापी है।

कलबुर्गी के सत्र न्यायाधीश ने कहा है कि पुलिस अफसर की बहाली में धांधली की गंभीरता उन अपराधों से भी अधिक गंभीर है जिन अपराधों में मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।

  याद रहे कि कर्नाटका में पुलिस उप निरीक्षक के पद के लिए जिन 545 लोगों का चयन हुआ ,उनमंे से 75 प्रतिशत उम्मीदवारों ने प्रतियोगी परीक्षा में धांधली की।

उस धांधली में एक भाजपा नेत्री की भी संलिप्तता पाई गई।

अदालत ने उस नेत्री की जमानत की अर्जी नामंजूर करते हुए उक्त टिप्पणी की।

कर्नाटका सरकार ने उस परीक्षा को रद कर दिया है।

बेहतर तो यह होता कि ऐसी धांधलियों को लेकर देश की अन्य अदालतें भी ऐसी ही गंभीरता दिखाती और विधायिकाएं इस अपराध के लिए मृत्यु दंड नहीं तो आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान करतीं।

..............................

भूली -बिसरी याद

..............................

देश के पूर्व उप प्रधान मंत्री दिवंगत यशवंतराव चव्हाण से अस्सी के दशक में  किसी ने पूछा था,

‘‘राजनीति में नहीं आए होते तो क्या बनते ?’’

उन्होंने कहा कि ‘‘तब मैं मराठी साहित्यकार होता।

अच्छा साहित्यकार होता।

लिखने-पढ़ने में मेरी दिलचस्पी शुरू से रही है।

मराठी में अपनी जीवनी लिख रहा हूं।’’

जब उनसे पूछा गया कि मराठी ही क्यों ?

उन्होंने कहा कि ‘‘इसलिए कि मैं मराठी में अच्छी तरह अपने को व्यक्त कर सकता हूं।’’

पूर्व राष्ट्रपति डा.राजेंद्र प्रसाद का उदाहरण देते हुए चव्हाण साहब ने कहा कि 

‘‘राजेन्द्र  बाबू भी अंग्रेजी बहुत अच्छी लिखते थे।

लेकिन उन्होंने मुझसे कहा था कि मैं हिन्दी में ज्यादा अच्छी तरह लिख सकता हूं।

राजेंद्र बाबू ने अपनी जीवनी हिन्दी में ही लिखी।’’ 

............................ 

और अंत मंे

..................

नूपुर शर्मा प्रकरण में मुख्य मंत्री नीतीश कुमार की टिप्पणी संतुलित रही।

उन्होंने कहा कि ‘‘ भाजपा ने जब एक्शन ले ही लिया तो विरोध-प्रदर्शन का कोई मतलब नहीं।’’

तथाकथित सेक्युलर दल ,नेता और बुद्धिजीवी भी ऐसे मामलों में इसी तरह का रुख अपनाया करते तो समस्या के समाधान में सुविधा होती।

याद रहे कि किसी भी समस्या के समाधान के लिए अपने देश के संविधान-कानून वगैरह पर्याप्त रूप से सक्षम हैं।

उसका इस्तेमाल संतुलित रूप से और किसी भेदभाव के बिना होना चाहिए।

..............................................

प्रभात खबर

पटना

20 जून 22


    ‘राष्ट्रपति को रबर स्टांप बना देना 

   चाहते थे राजीव गांधी’

    .....................................

ज्ञानी जैल सिंह ने कहा था कि प्रधान मंत्री राजीव गांधी को बरखास्त करने का मेरा कोई इरादा नहीं था

..............................................

सुरेंद्र किशोर

....................................

‘‘प्रधान मंत्री राजीव गांधी सरकार ने राष्ट्रपति पद को रबर स्टांप की तरह इस्तेमाल करना चाहा था।’’

यह बात खुद पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने कही थी।

यह सब उस पुस्तक में दर्ज है जो जैल सिंह के जीवन पर

मनोहर सिंह बत्रा ने लिखी है।

ज्ञानी जैल सिंह के अनुसार ‘‘राजीव सरकार के कुछ मंत्री तो राष्ट्रपति (यानी जैल सिंह )को नीचा दिखाने के लिए षड्यंत्र रचने और व्यंग्य वाण छोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे।’’

    बत्रा की पुस्तक के अनुसार, पूर्व राष्ट्रपति जैल सिंह ने कहा कि ‘‘राजीव गांधी के प्रधान मंत्री बनने के तीन-चार दिनों के भीतर ही उनसे मतभेद पैदा होने लगे थे।

मैं राजीव गांधी से मिलना चाहता था।

लेकिन मुझे महसूस हुआ कि उन्होंने मेरी उपेक्षा करनी शुरू कर दी।

एक समारोह में मैंने राजीव गांधी से कहा कि मुझे आपसे कुछ जरूरी बातें करनी हैं।

इस पर श्री गांधी ने कहा कि मैं निश्चित रूप से अरुण सिंह या अरुण नेहरू को आपके पास भेजूंगा।’’

......................................


 कोरोना तो अभी गया नहीं,ं

उधर से अगली लहर की आहट भी है !

..........................................

सुरेंद्र किशोर

............................

शादी हो या श्राद्ध,

जन्म दिन हो या कोई और समारोह।

कम से कम लोगों को अपने यहां बुलाइए। 

क्योंकि कोरोना अभी गया नहीं है।

उधर से अगली लहर की आहट भी आ रही है।

याद है न पहली और दूसरी लहर की की विभीषिका ?!!

बड़े -बड़े वी वी आई पी भी न आॅक्सीजन दिलवा पा रहे थे और न बेड !

.................................

जो लोग कहीं जुटें, वे दो गज की दूरी बनाए रखें।

मुंह से मुंह सटाकर तो कभी बात न करें।

छोटी भीड़ में जाने पर भी मास्क लगाना न भूलें। 

यानी, जितने अतिथियों को बुलाना अति आवश्यक हो,सिर्फ उन्हें ही बुलाइए।

कोई न आ पाए तो उस पर नाराज पर होइए।

जान है तो जहान है !

जिन्दगी रहेगी तो एक-एक करके बाद में भी भेंट -मुलाकात होती रहेगी।

...................................

23 जून 22



 वंशवादी-परिवारवादी दल का हश्र

.................................... 

यदि किसी वंशवादी -परिवारवादी राजनीतिक दल का उत्तराधिकारी

अदूरदर्शी हो,अयोग्य हो और सत्तालोलुप हो,तो उस दल का वही हश्र होता है जो शिवसंेना का हो रहा है।

   ऐसे अन्य दलों का भी देर -सबेर यही हश्र होना है जिन दलों के उत्तराधिकारी योग्य नहीं हैं।

....................................

   याद रहे कि उद्धव ठाकरे ने मुख्य मंत्री पद के लिए बाल ठाकरे की राजनीति की मूल स्थापनाओं को भी तिलांजलि दे दी है।

.....................................

सुरेंद्र किशोर

22 जून 22 


गुरुवार, 16 जून 2022

    भारत में तैयार शुद्ध जैविक सत्तू इन दिनों अमेरिका में एक हजार रुपए प्रति किलो बिक रहा है।

वहां उस सत्तू की जितनी डिमांड है,उतनी सप्लाई नहीं हो पा रही है।

  वही सत्तू भारत में 319 रुपए किलो बिक रहा है।

मैं उसे ही खरीदता हूं।

सामान्य सत्तू छपरा में सौ रुपए किलो और पटना में करीब 150 रुपए किलो बिक रहा है।

........................................

मैंने गांव में बचपन में जो सत्तू खाया है ,वही स्वाद इस जैविक सत्तू में है।

जैविक सत्तू में पौष्टिता भरपूर है।

हमलोग गांव में देखते थे कि हमारे मजदूर रोज दोपहर में सत्तू ही खाते थे।

हमलोग उसे खेत में पहुंचाते थे।

 वही खाकर वह हट्ठा-कट्ठा रहता था।

.................................

सुरेंद्र किशोर

16 जून 22


मंगलवार, 14 जून 2022

  कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है,

सतर्क रहने की जरूरत

--केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया

.................................................. 

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने ठीक ही कहा है कि महामारी अभी खत्म नहीं हुई है।

कोरोना से बचाव के नियमों का पालन करते रहिए।

...............................

मंत्री तो हमें चेता ही सकते हैं।

हमें चाहिए कि हम भीड़भाड़ वाली जगह में, जरूरी हो तभी जाएं।

वह भी कोरोना नियमों का पालन करते हुए।

बच्चे और बुजुर्ग अधिक सावधानी बरतें।

................................

किसी अवसर पर कोई आपको बुला रहे हैं और यदि वहां भीड़ जुटने की आशंका है तो हो सके तो वहां जाना टाल दीजिए।

...............................

जान है तो जहान है।

जान बचेगी तो जिन्होंने आज बुलाया है,उनके यहां आप बाद में भी जाकर उनसे माफी मांग सकते हैं।

.....................................

14 जून 22