शनिवार, 11 मई 2019

गलत खबर से खिन्न डा.लोहिया 
ने किया था ‘टाइम’ पर मुकदमा 
  .....सुरेंद्र किशोर---
डा.राम मनोहर लोहिया ने साठ के दशक में अमरीकी 
साप्ताहिक पत्रिका ‘टाइम’ पर मानहानि का मुकदमा 
दायर किया था।
उन्होंने दस पैसे के हर्जाने की मांग की थी।
  याद रहे कि फूल पुर लोक सभा उप चुनाव के संबंध ‘टाइम’ ने निराधार खबर छापी थी।
‘टाइम’ ने अन्य बातों के अलावा यह भी लिख दिया था 
कि ‘ डा.लोहिया नेहरू परिवार के आजीवन शत्रु हैं।’
  भारत की राजनीति के बारे में ‘टाइम’ की छिछली जानकारी का ही यह नतीजा था।
दरअसल समाजवादी नेता डा.लोहिया जवाहर लाल नेहरू की नीतियों का विरोध करते थे न कि वे उनके आजीवन शत्रु थे।
एक बार डा.लोहिया ने अपने मित्रों से कहा था कि यदि मैं बीमार पड़ूंगा तो मेरी सबसे अच्छी सेवा- शुश्रूषा जवाहर लाल नेहरू के घर में ही होगी।
एक बार डा.लोहिया जब दिल्ली जेल में थे,प्रधान मंत्री  नेहरू ने उनके लिए आम भिजवाया था।इसको लेकर गृह मंत्री सरदार पटेल प्रधान मंत्री से नाराज हुए थे।
 1964 में नेहरू के निधन के बाद डा.लोहिया ने कहा था,‘ ‘1947 के नेहरू को मेरा सलाम !’
पर छिछली रिपोर्टिंग करने वाली पत्रिका को इन तथ्यों से क्या मतलब !  
  खैर ‘आजीवन शत्रु’ वाली बात लोहिया को अधिक बुरी लगी थी।
दरअसल नेहरू के निधन के बाद फूल पुर में उप चुनाव हुआ।डा.लोहिया कांग्रेस की उम्मीदवार विजयलक्ष्मी पंडित के खिलाफ चुनाव प्रचार में गए थे।
 टाइम के 4 दिसंबर 1964  के अंक में लिखा गया कि ‘डा.लोहिया नेहरू परिवार के आजीवन शत्रु हैं और इस कारण वे उप चुनाव में विजयलक्ष्मी पंडित के विरूद्व प्रचार करने गए थे।
इस बात को नजरअंदाज करते हुए कि 1962 में खुद लोहिया,नेहरू के खिलाफ वहां  चुनाव लड़ चुके थे, पत्रिका ने यह भी लिख दिया कि ‘लोहिया ने मतदाताओं से कहा कि विजयलक्ष्मी पंडित की सुन्दरता के जाल में न फंसें।उनके अंदर केवल विष है।’
‘टाइम’ के अनुसार डा.लोहिया ने मतदाताओं से  कहा कि श्रीमती पंडित की युवावस्था जैसी सुन्दरता इसलिए कायम है क्योंकि उन्होंने यूरोप में प्लास्टिक शल्य चिकित्सा करायी है।
 डा.लोहिया ने दिल्ली के सीनियर सब जज की अदालत में टाइम  के संपादक,मुद्रक,प्रकाशक और नई दिल्ली स्थित संवाददाताओं के विरूद्व मानहानि का मुकदमा किया।  
  अदालत में प्रस्तुत अपने आवेदन पत्र में डा.लोहिया ने कहा कि टाइम में प्रकाशित उक्त सारी बातेें बिलकुल मन गढंत हैं और मुझे बदनाम करने के इरादे से इस तरह की कुरूचिपूर्ण बातें मुझ पर आरोपित की गई हंै।
डा.लोहिया ने  कहा कि टाइम ऐसे दकियानूसी कट्टरपंथी तत्वों का मुखपत्र है,जिन्हें हमारी समतावादी और लोकतांत्रिक नीतियां पसंद नहीं हैं।
  नई दिल्ली स्थित संवाददाताओं ने, जो उक्त समाचार भेजने के लिए जिम्मेदार हैं,मुझसे कभी भंेट तक नहीं की।
 ये संवाददाता स्थानीय भाषा भी नहीं जानते।
इसलिए मेरे भाषण की उन्हें सीधी जानकारी भी  नहीं हो सकती थी।
शत्रुता का आरोप का खंडन करते हुए डा.लोहिया ने कहा कि
कांग्रेसी शासन अथवा दिवंगत प्रधान मंत्री की जब भी मैंने आलोचना की है तो नीति और सिद्धांत के प्रश्नों पर ही।
किसी निजी द्वेष पर नहीं।@11 मई 2019@
    
   

मां की यादें
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मां के साथ संतान के संबंध में कोई स्वार्थ नहीं होता।
यानी, निःस्वार्थ प्यार सिर्फ मां का प्यार ही होता है।
पिता का तो कम से कम यह स्वार्थ रहता ही है कि मेरी संतान मुझसे आगे बढ़ जाए।अधिक तरक्की करे।
  पर मां को इन सबसे भी कोई मतलब नहीं।
बाकी लोगों के साथ आपसी ‘लेन देन’ का रिश्ता होता है।
जरूरी नहीं कि उससे पैसे ही जुड़े हों।
लेन देन मतलब आप जितना स्नेह दीजिएगा,उतना पाइएगा।
जितना सम्मान दीजिएगा,उतना पाइएगा।
जितना दूसरे का ध्यान रखिएगा,उतना वह आपका ध्यान रखेगा।
अपवाद की बात और है।
ठीक ही कहा गया है,
‘कुछ हंस कर बोल दो,
कुछ हंस कर टाल दो।
परेशानियां बहुत हैं,
कुछ वक्त पर डाल दो।’ 
मां के अलावा बाकी लोगों से संबंध निभाते रहने  के लिए इस फार्मूले का इस्तेमाल किया जा सकता है।
संबंध तो कच्चा धागा है जिस पर निरंतर प्रेम का मांझा
लगाते रहना पड़ता है।
पर मां के मामले में इसकी भी जरूरत नहीं पड़ती।
और अंत में
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एक बार मेरी पत्नी मेरे नन्हे पुत्र को पीट रही थीं।शिक्षिका हैं,वैसे भी उनका अधिकार था।
तब तक सरकार ने शिक्षकों के हाथों से छडि़यां नहीं छीनी थीं।
खैर ,मेरी मां भी मेरे साथ ही रहती थीं।
उसे पोते  पर दया आ गई।
बोली, क्यों मार रही हो ?
उसने कहा कि ‘होम वर्क नहीं बनाया है।’
 मेरी मां ने कहा कि 
‘मैंने तो कभी एक चटकन भी नहीं मारा,
 फिर भी मेरे दोनों बबुआ कैसे पढ-लिख गए ?’ 

शुक्रवार, 10 मई 2019

मशहूर सी.पी.आई.नेता व पूर्व विधायक दिवंगत राज कुमार 
पूर्वे ने अपनी पुस्तक ‘स्मृति शेष’ में लिखा है,
‘हमारे एक साथी जिला मंत्री, जहानाबाद ने कहा कि ‘जनशक्ति’ की 50 प्रति वे 8 दिनों में बेच सके और भाजपा के एक व्यक्ति ने सरकारी घोटालों पर लिखी गयी पुस्तक की 200 प्रतियां 20 मिनट में बेच दिया।’@पेज-184@
  याद रहे कि यह तब की बात है जब बिहार में लालू प्रसाद की सरकार थी और सी.पी.आई.उस सरकार के समर्थन में थी।
पूर्वे की बात तब जितनी सही थी,उतनी ही आज भी प्रासंगिक है।
देश,प्रदेश और समाज के अधिकतर लोग भ्रष्टाचार को पसंद नहीं करते। 

पार्ट-1
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आईएनएस विराट के इस्तेमाल पर इंडिया टूडे
-31 जुलाई 1988-में अनीता प्रताप की रपट
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प्रधान मंत्री की छुट्टियां
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निर्जन टापू पर निश्चिंत पड़ाव
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आलोचनाओं के बावजूद राजीव परिवार 
और दोस्तों की पिकनिक मस्त रही
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लगता है कि 1987 की तनाव भरी घटनाओं ने दुनिया के बड़े -बड़े राजनेताओं के भी छक्के छुड़ा दिए।
शायद यही कारण था कि साल खत्म होने पर मिखाइल गोर्बाचेव ने काला सागर तट की सैरगाह का रुख किया,रोनाल्ड रेगन ने सांता बारबरा में अपने लंाच की शरण ली और भारत में राजीव गांधी ने बंगारम की ओर कूच कर दिया।
 छुट्टियां मनाने के इस फैसले के पीछे उनका इरादा चमचों की भीड़, फाइलों , समस्याओं और असंतुष्टों से पीछा छुड़ाने के लिए ऐसे दूर और एकांत स्थान पर जाकर बैठना था जहां किसी तरह की चीख-पुकार न पहुंच सके। 36 टापुओं और 44 हजार आबादी वाले लक्षद्वीप में बंगारम टापू मात्र आधे वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वाला ऐसा ही निर्जन स्थल है। 
सामरिक दृष्टि से नाजुक माने जाने वाले लक्ष्यद्वीप का यह इकलौता ऐसा टापू है जहां विदेशियों को जाने की छूट है और जहां नशाबंदी नहीं है।
 बाकी दुनिया से पूरी तरह कटा होने के कारण यह टापू पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है।
लक्ष्यद्वीप के पुलिस प्रधान पी.एन.अग्रवाल कहते हैं ,‘
‘यह प्राकृतिक कारणों से भी एक सुरक्षित स्थान है।’
  हालांकि सरकार की ओर से इस टापू तक किसी बाहरी आदमी को न पहुंचने देने के सभी संभव उपाय किए गए थे, पर इसके बावजूद यहां होने वाले कार्यकलापों के बारे में समाचार माध्यमों की रूचि को कम नहीं किया जा सका।
 यह टापू उत्सुकता का केंद्र 26 दिसंबर के दिन बना जब स्थानीय प्रशासन के नारंगी और सफेद रंग के हेलिकाॅप्टर से राजीव के बेटे राहुल और उनके चार दोस्त उतरे।
उनके बाद छुट्टी मनाने के लिए आने वालों का सिलसिला 
बंध गया।
पत्रकारों को यहां से दूर रखने के लिए सरकारी मशीनरी ने पूरा जोर लगा दिया।
   टापू पर आमंत्रित मेहमानों की सूची ही अपने आप में गरमागरम खबरों का स्त्रोत रही।
किस्मत वालों की इस सूची में राहुल और प्रियंका के चार दोस्त ,सोनिया गांधी की बहन ,जीजा और उनकी बेटी ,सोनिया की विधवा माता आर.मायनो तथा भाई और मामा भी थे।
इनके अलावा पूर्व सांसद अमिताभ बच्चन,जया बच्चन और उनके बच्चे भी थे।
बच्चन परिवार से आने वाले मेहमानों में फेरा के तहत कथित हेरा फेरी के लिए विवादास्पद अजिताभ बचन की बेटी भी थी।
बाकी मेहमानों में केवल दो हिन्दुस्तानी और थे-पूर्व केंद्रीय मंत्री अरूण सिंह और भाई बिजेंद्र सिंह और उनकी पत्नी।बाकी सभी विदेशी थे। 
@जारी@  
     

पार्ट-2
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निर्जन टापू पर निश्चिंत पड़ाव
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हालांकि राजीव और सोनिया ने अपनी छुट्टियों की शुरूआत 30 दिसंबर की दोपहर के बाद की, पर अमिताभ को लेकर विशेष कोचीन -कवाराती उड़ान पर आया हेलिकाॅप्टर इससे अगले दिन वहां पहुंचा।
उनकी पत्नी जया अपने बच्चों और प्रियंका को लेकर चार दिन पहले ही वहां पहुंच गई थीं।
इस रणनीति का लक्ष्य बंगारम में अमिताभ की मौजूदगी पर परदा डाले रखना था।
लेकिन 31 दिसंबर के दिन यह भेद छिपाए छिप न सका क्यांेकि हेलिकाॅप्टर को बंगारम पहंुचने से पहले कवाराती टापू पर ईंधन लेेेने के लिए 50 मिनट के लिए रुकना पड़ा।
बाद में जब वे वापसी के समय कोचीन हवाई अड्डे पर उतरे तो इंडियन एक्सप्रेस के एक फोटो ग्रफर ने उन्हें देख लिया और उसने अमिताभ की गुस्से भरी चेतावनी के बावजूद उनके चार फोटो खींच लिए।
 राजीव के इतालवी ससुराली रिश्तेदारों के अलावा बच्चन परिवार की मौजूदगी ने राजीव के आलोचकों को सबसे अधिक राजनीतिक बारूद उपलब्ध कराया।
विरोधियों का एक सवाल यह था कि अजिताभ के परिवार के लोगों और उनके भाई के साथ रंगरेलियां मना कर आखिर राजीव उन सरकारी अधिकारियों को क्या संकेत भेजने की कोशिश कर रहे हैं जो आजकल स्विट्जरलैंड में अजिताभ की संपत्ति की जांच कर रहे हैं।
कवाराती में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के महा सचिव कुंजी कोया का कहना है कि हेलिकाॅप्टर का इस्तेमाल केवल एक आदमी के लिए किया जाए और वह भी एक ऐसे शख्स के लिए जिसका नाम देश के बड़े स्कैंडल में उलझा हुआ है।
@जारी@ 



पार्ट-3
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निर्जन टापू पर निश्ंिचत पड़ाव
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लेकिन छुट्टी मनाने वाले हफ्ता भर मस्त रहे।
एक खूबसूरत और गैर आबाद टापू पर उनका पूरा कब्जा था।
लिहाजा पूरा वक्त उन्होंने निश्चिंतता के साथ तैरने, धूप सेंकने मछली पकड़ने और नौका चलाने में बिताया। 
इस मौज मस्ती के दौरान यह दल पास ही के दो निर्जन टापुओं तिन्नाकारा और पराली पर पिकनिक मनाने भी गया।
इसके अलावा बीच-पार्टियों ,संगीत और मछली मार अभियानों की भी भरमार रही।
जहां राजीव, राहुल और प्रियंका ने  अपना काफी समय पानी में बिताया,वहां सोनिया ने दमे के कारण अपनी मां और जया के साथ शीशे की तली वाली नौका में समद्र तट में फैली मूंगे की चट्टानों को निहारने का आनंद लूटा।
 इस दौरान राजीव कई बार टापू पर टहलने के लिए निकले मानो वे इस जगह से पूरी तरह वाकिफ हों ।
एक बार तो वे छिछले पानी में आ फंसी एक डाल्फिन को बचाने के लिए पानी में कूद पड़े ।इससे पहले नवंबर 1985 में भी राजीव ने बंगारम में एक दिन बिताया था।
  लेकिन इस बात का अनुमान लगा पाना बहुत कठिन है कि साल के अंत में हुए इस तमाशे पर कुल कितना खर्च आया।कारण यह है कि कई एजेंसियों ने अपनी -अपनी तरह से इस पर खर्च उठाया।
उदाहरण के लिए खाने की व्यवस्था, मनोरंजन, पर्यटन और जल संबंधी खेलों  के विकास संगठन स्पोर्टस की ओर से की गई थी।
यह लक्ष्यद्वीप प्रशासन का एक विभाग है।
छुट्टियों के दौरान इस संगठन के दो बावर्चियों समेत पांच कर्मचारी वहां मौजूद रहे।
लेकिन भोजन के निर्धारण और पकाने का निरीक्षण दिल्ली से आए प्रधान मंत्री के निजी रसोइए ने किया।
   दिल्ली से ही तरह -तरह की शराब मंगाई गई थी।
इस मौके के लिए अगाट्टी में खास तौर पर 100 मुर्गे-मुर्गियों का फार्म लगाया गया।चीनी और ताजा मछली के अलावा पपीते,सपोटा,केले और अमरूद की व्यवस्था की गई थी।कवाराती से  मक्खन और 100 डबल रोटियों की व्यवस्था की गई और कोचीन से चाॅकलेट ,कोल्ड ड्रिंक के 40 क्रेट, 300 बोतल मिनरल वाटर,अमूल मक्खन,काजू ,खाने की दूसरी चीजें ,20 किलो आटा,105 किलो बासमती चावल और ताजा सब्जियां कोचीन से लाई गईं।
@जारी@ 


पार्ट-4 और अंतिम
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निर्जन टापू पर निश्ंिचत पड़ाव
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स्पोर्टस के अधिकारियों का कहना है कि प्रशासन ने सभी बिल मंगवाए हैं ताकि राजीव इनका भुगतान कर सकें।
लक्ष्यद्वीप के कलेक्टर के.के.शर्मा का कहना था,‘हमने वीआईपी लोगों की छुट्टियों के लिए किसी तरह की विशेष व्यवस्था नहीं की है।और हबीबुल्ला की सफाई थी,‘मेरा काम तो प्रधान मंत्री को बस बंगारम पहुंचाना भर था।’
लेकिन इन सब दावों के बावजूद  वहां की गई 
फिजूल खर्ची साफ दिखाई दे रही थी।देश के सबसे प्रमुख युद्धपोत आईएनएस विराट का इस्तेमाल राजीव गांधी के परिवार की सवारी के तौर पर किया गया।
  इस दौरान 10 दिनों तक @विराट@अरब सागर में ही घूमता रहा।इस युद्धपोत पर होने वाला दैनिक खर्च बेहिसाब है।क्योंकि यह जहां भी जाता है, इसके साथ सुरक्षा पोतों का पूरा काफिला चलता है।
  बताया जाता है कि इस काम के लिए वहां एक पनडुब्बी भी तैनात की गई थी।इसके अलावा अगाट्टी में विशेष उपग्रह संचार संपर्क की व्यवस्था भी की गई।
  बहरहाल ,लक्ष्यद्वीप को जमकर प्रचार मिला है।स्थानीय प्रशासन को उम्मीद है कि इस कारण अब यहां पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि होगी।
यह असर दिखने भी लगा है।
उदाहरण के लिए कोचीन में लक्ष्यद्वीप के पर्यटन कार्यालय का कहना था कि 8 जनवरी के दिन सामान्य से पांच गुना लोगों ने जानकारी मांगी।
   6 जनवरी के दिन जब यह पिकनिक खत्म हुई  तब 
वहां से सबसे पहले प्रियंका और उसके साथी गोवा के लिए निकले।
उनके बाद बुजुर्ग विदेशी लोग रवाना हुए।और फिर अमिताभ और उनका परिवार।
उसी दिन दोपहर 1.20 बजे राजीव ने राहुल के साथ हेलिकाॅप्टर में प्रस्थान किया।
आखिर में सोनिया अपने रिश्तेदारों के साथ मुस्कराते हुए रवाना हुई।
लेकिन यह मुस्कराहट कोचीन पहुंचते ही गायब हो गई।
लेकिन इसके ठीक विपरीत नौसैनिक हेलिकाॅप्टर से उतरते समय राजीव प्रसन्न चित्त दिखाई दे रहे थे।
  6 जनवरी के दिन अमीनी द्वीप में अपनी जन सभा में उन्होंने कहा कि ‘बहुत शानदार छुट्टियां थीं।’
बाद में उन्होंने  विकास कार्यक्रमों का मुआयना किया।इस दौरान उनके साथ छुट्टियांें का जो एक स्मृति चिन्ह था, वह एक वाटर प्रूफ घड़ी थी जिसे वे नौका चलाने और गोताखोरी के दौरान पहनते आ रहे थे।
@समाप्त @   
@इंडिया टूडे के 31 जनवरी, 1988 के अंक में प्रकाशित अनीता प्रताप की रपट @