शनिवार, 5 दिसंबर 2020

 आपातकाल की ताप !

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चंद्रशेखर की जेल डायरी से

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पटियाला जेल

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10 मई 1976 

‘‘..........आज बी.बी.सी.ने सूचना दी कि दिल्ली में 

पांच हजार से अधिक टेलीफोन टेप होते हैं

जिनमें केंद्रीय मंत्रियों और कांग्रेस के संसद सदस्यों के भी नंबर हैं।

  एक वरिष्ठ कांग्रेस सदस्य का हवाला देते हुए कहा गया कि दिल्ली में किसी को कुछ पता नहीं कि श्रीमती गांधी (प्रधान मंत्री) क्या करने वाली हैं।

उनके मंत्रिमंडल के सदस्य भी पूरी तरह अनभिज्ञ रहते हैं।

उन्हें भी निर्णय हो जाने के बाद सूचना 

मिलती है।.........।’’

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  पूर्व प्रधान मंत्री चंद्रशेखर की डायरी (दोनों भाग)

मुझे हाल में ही मिल सकी है।

पढ़ने लायक है।

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डायरी पढ़कर चंद्रशेखर के प्रति मेरी पुरानी धारणा में थोड़ा परिवत्र्तन हुआ है।

मैं उन्हें पहले कुछ दूसरे ही रूप में देखता था।

इस डायरी ने मुझ पर उनके संवदनशील व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है।

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डायरी को राजकमल प्रकाशन ने छापा है।

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24 नवंबर 20


   चीन के दो करोड़ उइगर मुसलमानों की 

  अभूतपूर्व प्रताड़ना पर इसलिए चुप हैं 

  पाक और भारत के जेहादी तत्व

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 अनेक लोग इस बात पर घोर आश्चर्य व्यक्त करते रहते हैं कि पाकिस्तान के हुक्मरान चीन के उइगर मुसलमानों पर चीन सरकार द्वारा अभूतपूर्व दमन पर तो कुछ नहीं बोलते।

किंतु वे फ्रांस के मुसलमानों के हल्के दमन के खिलाफ अधिक शोर मचाते हैं।

   जबकि फ्रांस में 1971 में मस्जिदों की संख्या जहां 71 थी,वही अब वहां 2500 मस्जिदें हैं।

 याद रहे कि फ्रांस व चीन के कुछ मुसलमान वहां जेहाद की कोशिश कर रहे हैं।

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हाल में जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्य मंत्री फारूख अब्दुल्ला ने कहा कि हम चीन की मदद से कश्मीर में फिर से धारा-370 लागू करेंगे।

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  अब्दुल्ला का लक्ष्य तो सीमित है।

 किंतु पाक व भारत के अधिकतर जेहादियों का लक्ष्य बहुत बड़ा है।

 जानकार लोग बताते हैं कि वे चीन की मदद से भारत को पहले इस्लामिक देश बना लेना चाहते हैं।

फिर वे ‘‘इस्लामिक भारत’’ की मदद में चीन में भी इस्लाम का झंडा बुलंद करेंगे।

इसके विपरीत यदि वे मात्र दो करोड़ उइगर मुसलमानों के लिए चीन सरकार से झगड़ा कर लेंगे तो गजवा ए हिन्द का उनका लक्ष्य कैसे पूरा होगा ?

भारत के कुछ राजनीतिक दलों व देश विरोधी बुद्धिजीवियों की मदद से सक्रिय एक खूंखार जेहादी संगठन ने यह लक्ष्य रखा है कि हम 2045 तक भारत को इस्लामिक देश बना देंगे।

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  अब आई बात समझ में ? !!!

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वास्तविक स्थिति क्या है ?

दरअसल पाक और भारत के जेहादी तत्व यह भूल गए हंै कि वे अब मध्य युग में नहीं जी रहे हैं।

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इसीलिए वे मन की मिठाई खा रहे हैं।

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इस देश में आधुनिक ‘जयचंदो’ं की संख्या व ताकत धीरे -धीरे घटती जा रही है।

साथ ही,

इस देश में अब्दुल रशीद नामक व्यक्ति भी मौजूद है जो अपनी ही बेटी शेहला रशीद की राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का भंडाफोड़ कर रहा है।

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वैसे इस देश में इतनी मजबूत व राष्ट्रभक्त सेना है जो एक साथ चीन-पाकिस्तान और स्थानीय जेहादियों का सफलतापूर्वक मुकाबला कर सकती है।

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मोदी सरकार अगले बड़े -बड़े खतरों को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना को रोज -रोज मजबूत करती जा रही है।

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--सुरेंद्र किशोर--1 दिसंबर,  20   


 एक देश एक चुनाव की जरूरत--नरेंद्र मोदी

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इंदिरा गांधी की गलती को नरेंद्र मोदी 

सुधारने की कोशिश कर रहे हैं।

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किंतु निहितस्वार्थी या अनजान लोग इस जरूरत के खिलाफ तर्क गढ़ रहे हैं।

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विरोध का सबसे बड़ा तर्क--

‘‘मतदाता लोग स्थानीय मुद्दों 

की बजाय राष्ट्रीय मुद्दों पर वोट देंगे।

इससे एक दल को लाभ होगा।’’

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अरे अनजान लोगो !

1967 तक लोक सभा के साथ ही विधान सभाओं के भी चुनाव हुए थे।

1967 के मतदाताओं ने केंद्र में तो कांग्रेस को सत्तासीन किया किंतु सात राज्यों में गैरकांग्रेसी दलों को।

जबकि, चुनाव एक ही साथ हुए थे।

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2019 के लोक सभा चुनाव में बिहार में राजग को कुल 40 में से 39 सीटें मिलीं।

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किंतु हाल के बिहार विधान सभा चुनाव में कैसा रिजल्ट रहा ?

राजग को मुश्किल से बहुमत मिला।

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दरअसल अलग-अलग चुनावों के हिमायती लोगों का चिंतन  देशहित में नहीं है।

उनके निहितस्वार्थ हंै।

या वे तथ्यों से नावाकिफ हैं।

यहां तक कि वे संविधान निर्माताआंे के विवेक पर भी सवाल उठा रहे हैं।

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संविधान निर्मातागण भी जानते थे कि यह देश विविधताओं का है।

फिर भी उनका भरोसा मतदाताओं के विवेक पर था।

संविधान निर्माताओं ने चुनाव एक साथ ही कराने का प्रावधान किया था।चार बार वैसा ही हुआ भी।

मतदाताओं ने 1967 में अपने विवेक का परिचय दे दिया।

क्या आज के मतदातागण 1967 के मतदाताओं की अपेक्षा देशहित-प्रदेश हित-जनहित में कम सोचते हैं ?

1971 में लोक सभा का मध्यावधि चुनाव कराकर दोनों चुनावों को तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी ने अलग -अलग कर दिया।

ऐसा उन्होंने अपने राजनीतिक फायदे के लिए किया।

क्योंकि इंदिरा गांधी लोक सभा में अपने दल के अल्पमत को जल्द से जल्द बहुमत में बदलना चाहती थीं।

वह कम्युनिस्टों पर से अपनी निर्भरता समाप्त करना चाहती थीं।

 नरेंद्र मोदी को चाहिए कि वह 1971 की गलती को जल्द से जल्द सुधार दें।

मोदी है तो मुमकिन है।

एक साथ चुनाव के फायदे ही फायदे हैं। 

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--सुरेंद्र किशोर-29 नवंबर 20

 

 


    पंजाब का ‘‘कैंसर मेल’’ ट्रेन

  पंजाब के गांवों में कैंसर की महामारी

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   --सुरेंद्र किशोर--

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  देश के बुजुर्ग, ईमानदार और अनुभवी पत्रकार मनमोहन शर्मा

ने गत 21 नवंबर, 2020 को मेरे फेसबुक वाॅल पर अपना यह अनुभव साझा किया, 

‘‘पंजाब में कृषि में केमिकल खाद एवं कीटनाशकों

का अंधाधुंध उपयोग हो रहा है।

   उससे भूजल में आर्सेनिक की मात्रा में भारी वृद्धि हो गई है।

परिणामस्वरूप पंजाब के गांवों में कैंसर महामारी का रूप ले चुका है।  

  आम कृषि उत्पादनों में भी इसकी मात्रा बहुत बढ़ गई है।

  राजस्थान के श्रीगंगानगर ,हनुमान गढ़ और भटिंडा-पटियाला के बीच चलने वाली रेलगाड़ी का नाम 

ही आम बोलचाल में कैंसर मेल हो गया है।

   हाल में मैं पंजाब के गांवों में गया था।

  साठ प्रतिशत घरों में कैंसर के रोगी हैं।

  इसका प्रकोप दिन-प्रति दिन बढ़ता जा रहा है।’’

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मेरी टिप्पणी-

   पंजाब से बड़ी मात्रा में अनाज दूसरे स्थानों में भेजा जाता है।

  एक ताजा खबर के अनुसार चावल,आटा और आलू में भी आर्सेनिक पाया जा रहा है।

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आर्सेनिक से भी कैंसर होता है।

क्या पंजाब के किसान नेता इस मारक समस्या के समाधान के लिए भी कभी सरकारों पर दबाव बनाएंगे और 

इसको लेकर आम किसान दिल्ली का घेराव करेंगे ?

पता नहीं !

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--5 दिसंबर, 20





शुक्रवार, 4 दिसंबर 2020

   ‘मेरा क्या,’ ‘मुझे क्या,’ कहने वालों को 

  नानी याद दिला देने की जरूरत 

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इसके लिए जरूरत पड़े तो संविधान में 

संशोधन हो 

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--सुरेंद्र किशोर--

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2014 में ही प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि

‘मेरा क्या,’ ‘मुझे क्या’ ने देश को तबाह कर दिया है।

   करीब छह साल के शानकाल में इस मामले में 

प्रधान मंत्री का कैसा अनुभव रहा ? 

उन्हें देश को बताना चाहिए।

 वैसे ऊपर-ऊपर देखने से अधिकतर लोगों को लगता है कि पहले जैसे बड़े -बडे़ घोटाले और महा घोटाले तो अब नहीं हो रहे हैं।

  किंतु मेरा क्या और मुझे क्या, कह कर सरकारी निर्णयों को बेचने वाले खुदरा व्यापारीनुमा अफसरों तथा अन्य लोगों में इस बीच कितना परिवत्र्तन में आया है ?

  यह बात तो प्रधान मंत्री ही बता सकते हैं।

19 अगस्त 2014 को कैथल (हरियाणा) की सभा में प्रधान मंत्री ने कहा था कि मेरा क्या और मुझे क्या की प्रवृति को खत्म करने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है।

इसके लिए मोदी जी ने लोगों से आशीर्वाद मांगा।

2019 के लोस चुनाव में मतदाताओं ने मोदी जी को ऐसा आशीर्वाद दिया जैसा किसी अन्य प्रधान मंत्री को अब तक 

नहीं दिया था।

  मोदी के अलावा कोई दूसरा प्रधान मंत्री सिर्फ अपनी लोकप्रियता के बल पर लगातार दूसरी बार बहुमत में नहीं अए थे।

  आगे भी मोदी की बराबरी में उनका  कोई प्रतिद्वंद्वी दूर दूर तक नजर नहीं आ रहा है।

  इसलिए अनेक लोग यह चाहते हैं कि राज्य सभा में राजग का बहुमत आ जाने के बाद केंद्र सरकार संविधान में ऐसा संशोधन करें कि देश को तबाह करने वालों को उनकी नानी याद आ जाए। 

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याद रहे कि 15 अगस्त, 2014 को लाल किले से और बाद में कैथल की सभा में प्रधान मंत्री ने कहा था कि

 ‘‘कुछ लोगों की एक आदत हो गई है कि जब कोई काम की बात करो तो कहते हैं कि ‘‘इसमें मेरा क्या ?’’

जब उनका हित नहीं सधता तो कहते हैं कि ‘‘मुझे क्या ?’’

मोदी जी के अनुसार भ्रष्टाचार कैंसर से भी ज्यादा खतरनाक

है।

  प्रधान मंत्री का इशारा उन लोगों की ओर रहा है जो केंद्र सरकार में बैठकर सरकारी निर्णयों का सौदा करते रहे हैं।

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2 अक्तूबर 20


 सीधी-सादी समस्याओं का भी ‘जलेबीकरण’ जारी ?!!

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‘लव मैरेज’ और ‘लव जेहाद’ का फर्क आम लोग अच्छी तरह  समझ रहे हैं।

पर, निहित स्वार्थी तत्व देश को गुमराह करने की कोशिश में लगे हैं। 

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--सुरेंद्र किशोर--

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उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश विधि विरूद्ध धर्म संपरिवत्र्तन प्रतिषेध अध्यादेश, 2020 जारी किया।

कुछ लोग उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चले गए।

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वे कह रहे हैं कि यह कानून संविधान के बुनियादी ढांचे के खिलाफ है।

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अरे भई, यह कानून ‘लव मैरेज’ के खिलाफ नहीं है।

चाहे लव मैरेज दो धर्मां के बीच ही क्यों न हो !

यह कानून नाम बदल कर लव करने व फिर धर्म परिवत्र्तन के लिए बाध्य करने के खिलाफ है।

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शाहरूख खान और आमिर खान की जिस तरह हिन्दू लड़कियों से शादियां हुईं,उस तरह की शादियों पर यह कानून लागू नहीं होता ।

शाहरूख और आमिर ने अपना सही नाम बता कर ही उनसे प्रेम और विवाह किया था।

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यह कानून तारा शाहदेव-रकीबुल हसन (रांची-2014) और

निकिता तोमर-तौशिफ (फरीदाबाद-2020) जैसे मामलों पर लागू होगा।

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क्या भारत के संविधान का बुनियादी ढांचा यह कहता है कि कोई तौशिफ किसी निकिता से लव करे और उससे कहे कि तुम अपना धर्म बदल लो और मुझसे शादी कर लो ?

यदि लड़की धर्म नहीं बदले तो उसे तौशिफ सरेआम गोली मार दे ????

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जेपी आंदोलन के दौरान एक अल्पसंख्यक आंदोलनकारी ने 

एक बहुसंख्यक समुदाय की आंदोलनकारी लड़की से प्रेम किया।

बाद में दोनों की शादी हुई।

अल्पसंख्यक समुदाय का वह आंदोलनकारी बाद में बिहार में मंत्री बना।

पर उसके राजनीतिक विरोधियों ने भी यह आरोप

नहीं लगाया कि उसने ‘लव जेहाद’ किया।

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--सुरेंद्र किशोर-4 दिसंबर 20


 डा.राजेंद्र प्रसाद जयंती

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गांधीवादी किसी पद का उम्मीदवार नहीं होता

--डा.राजेंद्र प्रसाद

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प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू ने डा.राजेंद्र प्रसाद से पूछा कि 

‘‘क्या आप राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हैं ?’’

राजेंद्र बाबू ने कहा कि 

‘‘मैं तो किसी पद का उम्मीदवार 

नहीं हूं।

गांधीवादी किसी पद का उम्मीदवार नहीं होता।’’

उस पर नेहरू जी ने कहा कि 

‘‘तो फिर वही बात लिख कर मुझे दे दीजिए।’’

राजेन बाबू ने लिख कर दे दिया।

  उसके बाद राजेन बाबू के समर्थकों-प्रशंसकों में निराशा फैल गई।

 बाद में सरदार पटेल, महावीर त्यागी तथा कुछ अन्य महारथियों ने स्थिति संभाली।

अंततः राजेन बाबू राष्ट्रपति बने।

याद रहे कि नेहरू जी सी.राजगोपालाचारी को राष्ट्रपति बनाना चाहते थे।

 दूसरी ओर अनेक कांग्रेसी राजाजी को नहीं चाहते थे।

क्योंकि राजगोपालाचारी ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया था।

 समस्या यह भी थी कि तीनों शीर्ष महत्वपूर्ण पदों पर एक ही जाति के नेताओं को क्यों बैठाया जाना चाहिए ?

याद रहे कि डा.एस.राधाकृष्णन उप राष्ट्रपति बनने वाले थे। 

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--सुरेंद्र किशोर-3 दिसंबर 20