गुरुवार, 23 जून 2022

    ‘राष्ट्रपति को रबर स्टांप बना देना 

   चाहते थे राजीव गांधी’

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ज्ञानी जैल सिंह ने कहा था कि प्रधान मंत्री राजीव गांधी को बरखास्त करने का मेरा कोई इरादा नहीं था

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सुरेंद्र किशोर

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‘‘प्रधान मंत्री राजीव गांधी सरकार ने राष्ट्रपति पद को रबर स्टांप की तरह इस्तेमाल करना चाहा था।’’

यह बात खुद पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने कही थी।

यह सब उस पुस्तक में दर्ज है जो जैल सिंह के जीवन पर

मनोहर सिंह बत्रा ने लिखी है।

ज्ञानी जैल सिंह के अनुसार ‘‘राजीव सरकार के कुछ मंत्री तो राष्ट्रपति (यानी जैल सिंह )को नीचा दिखाने के लिए षड्यंत्र रचने और व्यंग्य वाण छोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे।’’

    बत्रा की पुस्तक के अनुसार, पूर्व राष्ट्रपति जैल सिंह ने कहा कि ‘‘राजीव गांधी के प्रधान मंत्री बनने के तीन-चार दिनों के भीतर ही उनसे मतभेद पैदा होने लगे थे।

मैं राजीव गांधी से मिलना चाहता था।

लेकिन मुझे महसूस हुआ कि उन्होंने मेरी उपेक्षा करनी शुरू कर दी।

एक समारोह में मैंने राजीव गांधी से कहा कि मुझे आपसे कुछ जरूरी बातें करनी हैं।

इस पर श्री गांधी ने कहा कि मैं निश्चित रूप से अरुण सिंह या अरुण नेहरू को आपके पास भेजूंगा।’’

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 कोरोना तो अभी गया नहीं,ं

उधर से अगली लहर की आहट भी है !

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सुरेंद्र किशोर

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शादी हो या श्राद्ध,

जन्म दिन हो या कोई और समारोह।

कम से कम लोगों को अपने यहां बुलाइए। 

क्योंकि कोरोना अभी गया नहीं है।

उधर से अगली लहर की आहट भी आ रही है।

याद है न पहली और दूसरी लहर की की विभीषिका ?!!

बड़े -बड़े वी वी आई पी भी न आॅक्सीजन दिलवा पा रहे थे और न बेड !

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जो लोग कहीं जुटें, वे दो गज की दूरी बनाए रखें।

मुंह से मुंह सटाकर तो कभी बात न करें।

छोटी भीड़ में जाने पर भी मास्क लगाना न भूलें। 

यानी, जितने अतिथियों को बुलाना अति आवश्यक हो,सिर्फ उन्हें ही बुलाइए।

कोई न आ पाए तो उस पर नाराज पर होइए।

जान है तो जहान है !

जिन्दगी रहेगी तो एक-एक करके बाद में भी भेंट -मुलाकात होती रहेगी।

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23 जून 22



 वंशवादी-परिवारवादी दल का हश्र

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यदि किसी वंशवादी -परिवारवादी राजनीतिक दल का उत्तराधिकारी

अदूरदर्शी हो,अयोग्य हो और सत्तालोलुप हो,तो उस दल का वही हश्र होता है जो शिवसंेना का हो रहा है।

   ऐसे अन्य दलों का भी देर -सबेर यही हश्र होना है जिन दलों के उत्तराधिकारी योग्य नहीं हैं।

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   याद रहे कि उद्धव ठाकरे ने मुख्य मंत्री पद के लिए बाल ठाकरे की राजनीति की मूल स्थापनाओं को भी तिलांजलि दे दी है।

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सुरेंद्र किशोर

22 जून 22 


गुरुवार, 16 जून 2022

    भारत में तैयार शुद्ध जैविक सत्तू इन दिनों अमेरिका में एक हजार रुपए प्रति किलो बिक रहा है।

वहां उस सत्तू की जितनी डिमांड है,उतनी सप्लाई नहीं हो पा रही है।

  वही सत्तू भारत में 319 रुपए किलो बिक रहा है।

मैं उसे ही खरीदता हूं।

सामान्य सत्तू छपरा में सौ रुपए किलो और पटना में करीब 150 रुपए किलो बिक रहा है।

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मैंने गांव में बचपन में जो सत्तू खाया है ,वही स्वाद इस जैविक सत्तू में है।

जैविक सत्तू में पौष्टिता भरपूर है।

हमलोग गांव में देखते थे कि हमारे मजदूर रोज दोपहर में सत्तू ही खाते थे।

हमलोग उसे खेत में पहुंचाते थे।

 वही खाकर वह हट्ठा-कट्ठा रहता था।

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सुरेंद्र किशोर

16 जून 22


मंगलवार, 14 जून 2022

  कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है,

सतर्क रहने की जरूरत

--केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने ठीक ही कहा है कि महामारी अभी खत्म नहीं हुई है।

कोरोना से बचाव के नियमों का पालन करते रहिए।

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मंत्री तो हमें चेता ही सकते हैं।

हमें चाहिए कि हम भीड़भाड़ वाली जगह में, जरूरी हो तभी जाएं।

वह भी कोरोना नियमों का पालन करते हुए।

बच्चे और बुजुर्ग अधिक सावधानी बरतें।

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किसी अवसर पर कोई आपको बुला रहे हैं और यदि वहां भीड़ जुटने की आशंका है तो हो सके तो वहां जाना टाल दीजिए।

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जान है तो जहान है।

जान बचेगी तो जिन्होंने आज बुलाया है,उनके यहां आप बाद में भी जाकर उनसे माफी मांग सकते हैं।

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14 जून 22

 


 संसद की कार्यवाही का सीधा प्रसारण बंद हो

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नूपुर-नवीन प्रकरण के बाद अब टी.वी.चैनलों पर 

लाइव डिबेट के बदले संपादित डिबेट प्रसारित हो 

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सुरेंद्र किशोर

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संसद की कार्यवाही का सीधा प्रसारण न करके कार्यवाही को पहले संपादित करके ही उसे प्रसारित किया जाना चाहिए।

क्योंकि पीठासीन पदाधिकारियों का यह आदेश अब बेमतलब हो गया है कि

 ‘‘यह अंश सदन की कार्यवाही से निकाल दिया जाएगा।’’

अरे भई ,इसे तो देश-दुनिया ने पहले ही देख-सुन लिया।

इसे बाद में निकाल कर आप क्या हासिल करेंगे ?

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नूपुर -नवीन प्रकरण के बाद सरकार को चाहिए कि वह हस्तक्षेप करे।

क्योंकि नूपुर -नवीन विवाद के बाद जो दंगे हुए,उसे सरकार को ही तो झेलना पड़ा।आम जन को भी।

अनेक अफसर व कर्मी घायल हुए।संपत्ति नष्ट हुई। 

सरकार टी.वी.चैनलों को अब यह कड़ा निदेश दे कि आप डिबेट को संपादित करके ही प्रसारित करें।

यदि चैनल न मानें तो ऐसे मामलों में चैनलों के मालिकों और संपादकों पर भी उन्हीं दफाओं में मुकदमा चलाया जाए। 

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एक तो अधिकतर टी.वी.चैनल वाले एक साथ बहुत सारे ‘अतिथियों’ को बुलाकर डिबेट में बैठा देते हैं।

(उनमें से कई कुख्यात हैं।अपने घर के किसी

सदस्य से कह कर देखिए कि उस कुख्यात में से एक को आज यहां बुला रहे हैं।

तो सदस्य यह कह सकता है कि उसे ड्राइंग रूम में नहीं बल्कि बरामदे में ही बैठाइएगा।

उस बेचारे कुख्यात की भी गलती कम ही है।

वह तो अपने खुद,दल के और सुप्रीमो के चाल,चरित्र और चिंतन के अनुसार ही तो टी.वी.पर बोलेगा !!)

 उनमें से कई ऐसे हैं जो पूरे डिबेट में कुत्ते की तरह झांव- झांव करते रहते हैं।

या फिर वे दूसरे को बोलने ही नहीं देते।

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क्या कोई विवेकशील व्यक्ति अपने ड्राइंग रूम में ऐसे अशिष्ट अतिथियों को बैठाकर कोई चर्चा कराना चाहेगा ?

कत्तई नहीं।

फिर आपके ड्राइंग रूम में रखे टी.वी.सेट पर ऐसे लोगों का अवतरण क्यों होना चाहिए ?

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14 जून 22

 



      सावधानी हटी,दुर्घटना घटी !

   सोशल मीडिया के इस्तेमाल में सावधानी बरतें

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सुरेंद्र किशोर

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कुछ लोग मेरे फेसबुक वाॅल पर ऐसी-ऐसी बातें लिख मारते है,ं किसी के खिलाफ ऐसे -ऐसे आरोप लगा देते हैं,जिन आरोपों की पुष्टि के लिए उनके पास कोई सबूत नहीं हेाता।

    भले आपके आरोप सही हों,किंतु जब पीड़ित व्यक्ति आप पर ,साथ -साथ मुझ पर भी मानहानि का मुकदमा करेगा तो कोर्ट में उन आरोपों को आप साबित नहीं कर पाएंगे।

फिर क्या होगा ?

आप भी फसेंगे और मैं भी फंसंूगा,वह भी नाहक।

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इसलिए कुछ भी आरोप लगा देने से पहले यह मान लें कि आप पर केस भी हो सकता है।

99 प्रतिशत पीड़ित लोग केस नहीं करते।

किंतु एक व्यक्ति ने भी केस कर दिया,तो उसका नतीजा भुगतना पड़ेगा।

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जिन लोगों ने कोई केस नहीं भुगता है,वैसे ही लोग बिना सबूत के आरोप लिखते रहते हैं।

 याद रखिए।

कोर्ट और अस्पताल के चकर में पैसे भी खर्च होते हैं और थकावट भी बहुत होती है।

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सोशल मीडिया मुफ्त का मंच है तो उसका सदुपयोग कीजिए।

अन्यथा, फेर में पड़िएगा तो बाद में आपको सोशल मीडिया की ओर झांकने की इच्छा भी नहीं रह जाएगी।़

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कुछ लोग व्यक्तिगत बातचीत को भी सोशल मीडिया पर डाल देते हैं।

जरूर डालिए।

किंतु जिन्हें आप उधृत कर रहे हैं,उससे पहले अनुमति ले लीजिए ।

अन्यथा, अगली बार से आपसे वह व्यक्ति कोई बातचीत करना नहीं चाहेगा।

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10 जून 22